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मंगलेश डबराल – संगतकार | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

मंगलेश डबराल – संगतकार | Class 10 Hindi Notes

मंगलेश डबराल – संगतकार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मंगलेश डबराल – संगतकार from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

मंगलेश डबराल

मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) के काफलपानी गाँव में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई। बाद में वे दिल्ली आए और हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास जैसे पत्र-पत्रिकाओं में कार्य किया। इसके बाद भोपाल में भारत भवन से प्रकाशित होने वाले 'पूर्वग्रह' में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत रहे। इलाहाबाद और लखनऊ से प्रकाशित 'अमृत प्रभात' में भी उन्होंने कुछ समय नौकरी की। सन् 1983 में जनसत्ता अखबार में साहित्य संपादक का पद संभाला। कुछ समय सहारा समय में संपादन कार्य करने के बाद वे नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े। उनका निधन 2020 में हुआ।

मंगलेश डबराल के चार कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं—पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं और आवाज़ भी एक जगह है। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार और पहल सम्मान से सम्मानित किया गया। वे अनुवादक के रूप में भी ख्यातिप्राप्त हैं। उनकी कविताओं के अनुवाद भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेजी, रूसी, जर्मन, स्पानी, पोल्स्की और बल्गारी भाषाओं में भी प्रकाशित हो चुके हैं।

मंगलेश डबराल की कविताओं में सामंती बोध और पूँजीवादी छल-छद्म दोनों का प्रतिकार होता है। यह प्रतिकार वे शोर-शराबे के साथ नहीं बल्कि प्रतिपक्ष में एक सुंदर सपना रचकर करते हैं। उनका सौंदर्यबोध सूक्ष्म है और भाषा पारदर्शी। वे साहित्य, सिनेमा, संचार माध्यम और संस्कृति के सवालों पर नियमित लेखन भी करते रहे।

📊 Diagram: Figure on page 1

🔗 Connection: अगले खंड में मंगलेश डबराल की कविता 'संगतकार' का विश्लेषण शुरू होता है, जो उनकी रचनात्मक शैली और विषयों को समझने में मदद करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गायक स्थायी-स्वर छोड़कर किस जंगल में जाता है ?

जटिल तानों के जंगल में

“वह आवाज सुन्दर, कमजोर, कांपती हुई थी ।“ पंक्ति में 'सुन्दर, कमजोर, कांपती हुई' पदबंध क्या है ?

विशेषण पदबंध

तारसप्तक से क्या तात्पर्य है ?

मध्य सप्तक से ऊपर की ध्वनि

'संगतकार' कविता किस युग की है ?

आधुनिक युग की

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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