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जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य | Class 10 Hindi Notes

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

आत्मकथ्य कविता का परिचय

प्रसिद्ध साहित्यकार प्रेमचंद के संपादन में प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'हंस' का एक आत्मकथा विशेषांक निकलना था। जयशंकर प्रसाद के मित्रों ने उनसे भी आत्मकथा लिखने का आग्रह किया, लेकिन वे इससे सहमत नहीं थे। इसी असहमति के तर्क से उनकी कविता 'आत्मकथ्य' की रचना हुई। यह कविता पहली बार 1932 में 'हंस' के आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई।

यह कविता छायावादी शैली में लिखी गई है, जिसमें जयशंकर प्रसाद ने अपने जीवन के यथार्थ और अभाव पक्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। छायावादी कविता की सूक्ष्मता के अनुरूप उन्होंने अपने मनोभावों को अभिव्यक्त करने के लिए ललित, सुंदर और नवीन शब्दों तथा बिंबों का प्रयोग किया है। इस कविता के माध्यम से उन्होंने बताया है कि उनका जीवन एक सामान्य व्यक्ति के जीवन जैसा है, जिसमें कोई महानता या रोचकता नहीं है। इस कविता में कवि की यथार्थ की स्वीकृति और एक महान कवि की विनम्रता दोनों झलकती हैं।

🔗 Connection: यह कविता की पृष्ठभूमि और शैली की समझ अगली कड़ी में कविता के पाठ और उसके भावार्थ के अध्ययन से जुड़ती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों? 2. कविता का शीर्षक **उत्साह** क्यों रखा गया है? 3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है? 4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। **उत्साह** कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।

1. कवि बादल से 'गरजने' के लिए कहता है क्योंकि गरजना बादल की शक्ति, ऊर्जा और क्रांति की चेतना को दर्शाता है। फुहार या रिमझिम से कम प्रभाव पड़ता है, जबकि गरजना एक प्रकार की आवाज़ है जो आकाश में गूंजती है और बदलाव का संकेत देती है। यह बादल की प्रचंडता और जीवन में नयी ऊर्जा के संचार का प्रतीक है।

2. कविता का शीर्षक 'उत्साह' इसलिए रखा गया है क्योंकि कविता में जीवन के प्रति एक नई ऊर्जा, उमंग और क्रांति की भावना प्रकट होती है। बादल के गरजने से जीवन में नयी चेतना और उत्साह का संचार होता है। यह शीर्षक क

5. जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।

यह प्रश्न एक रचनात्मक अभिव्यक्ति का है। विद्यार्थी को प्राकृतिक सौंदर्य जैसे बादल, फागुन, होली आदि के दृश्य देखकर अपने भावों को कविता के रूप में अभिव्यक्त करना है। उदाहरण स्वरूप:

"नीले आकाश में बादल घुमड़ते, मन में उमंगों के सागर बहते। फागुन की मादकता छाई है चारों ओर, प्रकृति के रंगों में खोया मेरा मन।"

इस प्रकार विद्यार्थी अपनी अनुभूतियों के आधार पर कविता लिख सकते हैं।

- बादलों पर अनेक कविताएँ हैं। कुछ कविताओं का संकलन करें और उनका चित्रांकन भी कीजिए।

यह पाठेतर सक्रियता है जिसमें विद्यार्थी बादलों पर लिखी गई विभिन्न कविताओं का संग्रह करें और उनके भावानुसार चित्र बनाएं। इससे उनकी साहित्यिक और चित्रात्मक समझ विकसित होगी।

1. छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए। 2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है? 3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है? 4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है? 5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।

1. छायावाद की विशेषता अंतर्मन के भावों का बाहरी संसार से सामंजस्य है। यह धारणा निम्न पंक्तियों से पुष्ट होती है: "कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो।" यहाँ कवि के अंतर्मन के भाव प्रकृति के सौंदर्य से जुड़ते हैं।

2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए नहीं हट रही क्योंकि फागुन की आभा और सौंदर्य उनके मन में गहराई से समा गया है, जो हर जगह दिखाई देता है।

3. कविता में प्रकृति की व्यापकता पत्तों की हरियाली, लालिमा, मंद-गंध, पुष्प-माल आदि रूपों में वर्णित है।

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