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जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य | Class 10 Hindi Notes

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 में वाराणसी में हुआ था। वे काशी के प्रसिद्ध क्वींस कॉलेज में पढ़ने गए, लेकिन परिस्थितियाँ अनुकूल न होने के कारण वे आठवीं कक्षा से आगे पढ़ नहीं पाए। इसके बाद उन्होंने घर पर ही संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी भाषाओं का अध्ययन किया। जयशंकर प्रसाद छायावादी काव्य प्रवृत्ति के प्रमुख कवियों में से एक थे। उनकी मृत्यु सन् 1937 में हुई। उनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ चित्राधार, कानन-कुसुम, झरना, आँसू, लहर और कामायनी हैं। कामायनी को आधुनिक हिंदी की श्रेष्ठतम काव्य-कृति माना जाता है, जिसके लिए उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक भी मिला।

प्रसाद केवल कवि ही नहीं, बल्कि सफल गद्यकार भी थे। उनके नाटकों में अजातशत्रु, चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त और ध्रुवस्वामिनी प्रमुख हैं। उपन्यासों में कंकाल, तितली और इरावती शामिल हैं। उनकी कहानी संग्रहों में आकाशदीप, आँधी और इंद्रजाल हैं।

जयशंकर प्रसाद का साहित्य जीवन की कोमलता, माधुर्य, शक्ति और ओज का प्रतिनिधित्व करता है। उनकी छायावादी कविता में अतिशय काल्पनिकता, सौंदर्य का सूक्ष्म चित्रण, प्रकृति-प्रेम, देश-प्रेम और शैली की लाक्षणिकता प्रमुख विशेषताएँ हैं। इतिहास और दर्शन में उनकी गहरी रुचि थी, जो उनके साहित्य में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

📊 Diagram: Figure on page 1

🔗 Connection: यह परिचय जयशंकर प्रसाद के जीवन और काव्य-शैली की समझ देता है, जो अगली कड़ी में उनकी कविता 'आत्मकथ्य' के विश्लेषण से जुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों? 2. कविता का शीर्षक **उत्साह** क्यों रखा गया है? 3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है? 4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। **उत्साह** कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।

1. कवि बादल से 'गरजने' के लिए कहता है क्योंकि गरजना बादल की शक्ति, ऊर्जा और क्रांति की चेतना को दर्शाता है। फुहार या रिमझिम से कम प्रभाव पड़ता है, जबकि गरजना एक प्रकार की आवाज़ है जो आकाश में गूंजती है और बदलाव का संकेत देती है। यह बादल की प्रचंडता और जीवन में नयी ऊर्जा के संचार का प्रतीक है।

2. कविता का शीर्षक 'उत्साह' इसलिए रखा गया है क्योंकि कविता में जीवन के प्रति एक नई ऊर्जा, उमंग और क्रांति की भावना प्रकट होती है। बादल के गरजने से जीवन में नयी चेतना और उत्साह का संचार होता है। यह शीर्षक क

5. जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।

यह प्रश्न एक रचनात्मक अभिव्यक्ति का है। विद्यार्थी को प्राकृतिक सौंदर्य जैसे बादल, फागुन, होली आदि के दृश्य देखकर अपने भावों को कविता के रूप में अभिव्यक्त करना है। उदाहरण स्वरूप:

"नीले आकाश में बादल घुमड़ते, मन में उमंगों के सागर बहते। फागुन की मादकता छाई है चारों ओर, प्रकृति के रंगों में खोया मेरा मन।"

इस प्रकार विद्यार्थी अपनी अनुभूतियों के आधार पर कविता लिख सकते हैं।

- बादलों पर अनेक कविताएँ हैं। कुछ कविताओं का संकलन करें और उनका चित्रांकन भी कीजिए।

यह पाठेतर सक्रियता है जिसमें विद्यार्थी बादलों पर लिखी गई विभिन्न कविताओं का संग्रह करें और उनके भावानुसार चित्र बनाएं। इससे उनकी साहित्यिक और चित्रात्मक समझ विकसित होगी।

1. छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए। 2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है? 3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है? 4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है? 5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।

1. छायावाद की विशेषता अंतर्मन के भावों का बाहरी संसार से सामंजस्य है। यह धारणा निम्न पंक्तियों से पुष्ट होती है: "कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो।" यहाँ कवि के अंतर्मन के भाव प्रकृति के सौंदर्य से जुड़ते हैं।

2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए नहीं हट रही क्योंकि फागुन की आभा और सौंदर्य उनके मन में गहराई से समा गया है, जो हर जगह दिखाई देता है।

3. कविता में प्रकृति की व्यापकता पत्तों की हरियाली, लालिमा, मंद-गंध, पुष्प-माल आदि रूपों में वर्णित है।

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