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देव – सवैया और कवित्त | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

देव – सवैया और कवित्त | Class 10 Hindi Notes

देव – सवैया और कवित्त – this guide gives you a concise, exam-ready overview of देव – सवैया और कवित्त from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

सवैया: परिभाषा और विशेषताएँ

सवैया हिंदी और राजस्थानी साहित्य में प्रचलित एक विशेष छंदबद्ध काव्य रूप है। इसका प्रत्येक पद चार पंक्तियों का होता है, जिसमें छंदबद्धता और लयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। सवैया की भाषा सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली होती है। इसमें अलंकारों का समृद्ध प्रयोग होता है, जो काव्य की सुंदरता को बढ़ाता है। सवैया में भावों की गहराई और सूक्ष्मता होती है, जिससे पाठक के मन में गहरा प्रभाव पड़ता है। इस छंद का प्रयोग मुख्यतः भक्ति, वीर रस, और सामाजिक व्यंग्य के लिए किया जाता है। सवैया की संरचना में प्रत्येक पंक्ति की मात्रा और मात्राओं का समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। देव की रचनाओं में सवैया का प्रयोग उनकी भावनाओं की तीव्रता और सामाजिक चेतना को प्रकट करता है।

🧪 Activity: छात्रों से कहा जाए कि वे सवैया के चार पंक्तियों वाले पद की रचना करें जिसमें किसी सामाजिक विषय पर व्यंग्य हो।

🔗 Connection: सवैया के बाद कवित्त की परिभाषा और उसकी विशेषताओं की चर्चा होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1- dfo vkRedFkk fy[kus ls D;ksa cpuk pkgrk gS\ 2- vkRedFkk lqukus osQ lanHkZ esa ^vHkh le; Hkh ugha* dfo ,slk D;ksa dgrk gS\ 3- Le`fr dks ^ikFks;* cukus ls dfo dk D;k vk'k; gS\ 4- Hkko Li"V dhft,µ (d) feyk dgk¡ og lq[k ftldk eSa LoIu ns[kdj tkx x;kA vk¯yxu esa vkrs&vkrs eqlD;k dj tks Hkkx x;kA ([k) ftlosQ v#.k diksyksa dh erokyh lqanj Nk;k esaA vuqjkfxuh m"kk ysrh Fkh fut lqgkx eèkqek;k esaA 5- ^mTToy xkFkk oSQls xkm¡Q] eèkqj pk¡nuh jkrksa dh*µdFku osQ ekè;e ls dfo D;k dguk pkgrk gS\ 6- ^vkRedF;* dfork dh dkO;Hkk"kk dh fo'ks"krk,¡ mnkgj.k lfgr fyf[k,A 7- dfo us tks lq[k dk LoIu ns[kk Fkk] mls dfork esa fdl :i esa vfHkO;Dr fd;k gS\njpuk vkSj vfHkO;fDr 8- bl dfork osQ ekè;e ls izlkn th osQ O;fDrRo dh tks >yd feyrh gS] mls vius 'kCnksa esa fyf[k,A 9- vki fdu O;fDr;ksa dh vkRedFkk i<+uk pkgsaxs vkSj D;ksa\n10- dksbZ Hkh viuh vkRedFkk fy[k ldrk gSA mlosQ fy, fof'k"V ;k cM+k gksuk ”k:jh ughaA

1- दफो (देव) वक्रेन्द्र के लिए पढ़ना कठिन था क्योंकि वे पढ़ाई में कमजोर थे और जल्दी समझ नहीं पाते थे।

2- वक्रेन्द्र पढ़ाई करते समय अक्सर सोचते थे कि वह कभी भी अच्छा नहीं बन पाएंगे।

3- लेखन में सुधार करने के लिए दफो को अभ्यास करना पड़ता था और उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी।

4- हृदय से पढ़ना मतलब पूरी लगन और मन से पढ़ाई करना होता है।

5- मठोय जैसे ओस्लस, एक्कज पकिनुह जिक्रों का मतलब है कि दफो को अपने लेखन में सुधार के लिए कई बार अभ्यास करना पड़ता था।

6- 'वक्रेन्द्र' शब्द का अर्थ है वक्र और इन्द्

देव कौन थे और उनकी काव्य यात्रा का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

देव हरदत्त थे, जो 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी के प्रारंभ में सक्रिय हिंदी के महान कवि थे। उनकी कविताओं में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाएँ और जीवन के विविध पहलुओं का प्रतिबिंब मिलता है। वे सरल भाषा में व्यंग्य और सामाजिक आलोचना करते थे।

सवैया छंद की परिभाषा क्या है और इसकी मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

सवैया एक छंदबद्ध काव्य रूप है जिसमें प्रत्येक पद चार पंक्तियों का होता है। इसकी भाषा सरल और प्रभावशाली होती है। इसमें अलंकारों का समृद्ध प्रयोग होता है और यह भक्ति, वीर रस, तथा सामाजिक व्यंग्य के लिए उपयुक्त है।

कवित्त छंद की परिभाषा और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?

कवित्त एक छंदबद्ध काव्य रूप है जो सवैया से अधिक लचीला होता है। इसमें पद की लंबाई भिन्न होती है और अलंकारों का समृद्ध प्रयोग होता है। कवित्त में भावों की तीव्रता और सौंदर्य होता है, जो पाठक के मन को छू जाता है।

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