सूरदास – पद | Class 10 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

सूरदास – पद – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सूरदास – पद from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
सूरदास के पदों में प्रयुक्त शब्दावली
सूरदास के पदों में प्रयुक्त शब्दावली अत्यंत विशिष्ट, भावपूर्ण और सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़ी हुई है। वे ब्रजभाषा की लोकभाषा और संस्कृत के शब्दों का मिश्रण करते हैं, जिससे उनकी कविता में एक अनूठा सौंदर्य उत्पन्न होता है। इस अध्याय में दी गई शब्द-संपदा तालिका में सूरदास के पदों में प्रयुक्त अनेक शब्दों के अर्थ स्पष्ट किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, 'बड़भागी' का अर्थ है भाग्यवान, 'अपरस' का अर्थ है नीरस या अछूता, 'तगा' का अर्थ है धागा या बंधन, और 'गुर चाँटी ज्यौं पागी' का अर्थ है जिस प्रकार चाँटी गुड़ में लिपटती है, उसी प्रकार प्रेम में अनुरक्त होना। इसी प्रकार अन्य शब्द जैसे 'बिरहिनि' (वियोग में जीने वाली), 'धार' (योग की प्रबल धारा), 'मरजादा' (मर्यादा) आदि का अर्थ और भावार्थ समझाया गया है।
यह शब्दावली सूरदास की भाषा की गहराई और उनकी कविताओं के भावों को समझने में अत्यंत सहायक है। इससे पाठक को पदों के अर्थ और भावों की स्पष्ट समझ प्राप्त होती है।
📊 Diagram: Table on page 8 (30×2)
🧪 Activity: छात्रों को सूरदास के पदों से शब्द चुनकर उनकी अर्थ-व्याख्या करने के लिए प्रोत्साहित करें।
🔗 Connection: यह अनुभाग सूरदास के पदों के भावार्थ और व्याख्या की ओर ले जाता है।
Table on page 8 (30×2)
| बड़भागी | - भाग्यवान |
|---|---|
| अपरस | - अलिप्त, नीरस, अछूता |
| तगा | - धागा, बंधन |
| पुरड़िनि पात | - कमल का पत्ता |
| दागी | - दाग, धब्बा |
| माहँ | - में |
| प्रीति-नदी | - प्रेम की नदी |
| पाउँ | - पैर |
| बोरघौ | - डुबोया |
| परागी | - मुग्ध होना |
| गुर चाँटी ज्यौं पागी | - जिस प्रकार चाँटी गुड़ में लिपटती है, उसी प्रकार हम भी कृष्ण के प्रेम में अनुरक्त हैं |
| अधार | - आधार |
| आवन | - आगमन |
| बिथा | - व्यथा |
| बिरहिनि | - वियोग में जीने वाली |
| बिरह दही | - विरह की आग में जल रही हैं |
| हुतीं | - थीं |
| गुहारि | - रक्षा के लिए पुकारना |
| जितहिं तैं | - जहाँ से |
| उत | - उधर, वहाँ |
| धार | - योग की प्रबल धारा |
| धीर | - धैर्य |
| मरजादा | - मर्यादा, प्रतिष्ठा |
| न लही | - नहीं रही, नहीं रखी |
| हारिल | - हारिल एक पक्षी है जो अपने पैरों में सदैव एक लकड़ी लिए रहता है, उसे छोड़ता नहीं है |
| नंद-नंदन उर..पकरी | - नंद के नंदन कृष्ण को हमने भी अपने हृदय में बसाकर कसकर पकड़ा हुआ है |
| जक री | - रटती रहती हैं |
| सु | - वह |
| व्याधि | - रोग, पीड़ा पहुँचाने वाली वस्तु |
| करी | - भोगा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोपियों ने ‘करुई ककरी’ किसे कहा है ?
योग को
भारत-चीन युद्ध कब हुआ था ?
1962
सैनिकों ने नवयुवकों को कैसे प्रेरित किया है ?
देश के लिए मर मिटने को तैयार रह कर
कवि के अनुसार छोटे बच्चों की मुस्कान होती है-
कोमल एवं पावन
इस अध्याय में महारत हासिल करें
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