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साखी | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

साखी | Class 10 Hindi Notes

साखी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of साखी from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

कबीर

कबीर दास जी का जन्म 1398 में काशी (वाराणसी) में हुआ माना जाता है। वे गुरु रामानंद के शिष्य थे और लगभग 120 वर्ष की आयु तक जीवित रहे। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने मगहर में निवास किया और वहीं चिरनिद्रा में लीन हो गए। कबीर का जीवन सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक परिवर्तन के दौर में बीता। वे एक क्रांतिकारी कवि थे, जिनकी कविताओं में गहरी सामाजिक चेतना और आध्यात्मिकता का समावेश था।

कबीर ने धर्म के बाहरी आडंबरों और पाखंडों की तीखी आलोचना की। वे शास्त्रीय ज्ञान से अधिक अनुभव ज्ञान को महत्व देते थे। उनका मानना था कि ईश्वर एक है, जो निर्विकार और अरूप है। उनकी भाषा पूर्वी भारत की जनभाषा थी, जिसमें अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी के शब्दों का मिश्रण था। इस भाषा को 'पचमेल खिचड़ी' या 'सधुक्कड़ी' कहा जाता है। कबीर की कविताएँ जन-जन तक पहुँचने वाली सरल और प्रभावशाली भाषा में हैं, जो आम जनता के दिलों को छू जाती हैं। उनकी रचनाएँ सामाजिक समानता, भेदभाव के विरुद्ध आवाज़ और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश देती हैं।

📊 Diagram: See figure_1: 1057CH01; See figure_2: कबीर का जन्म 1398 में काशी में हुआ माना जाता है। गुरु रामानंद के शिष्य कबीर ने 120 वर्ष की आयु पाई। जीवन के अंतिम कुछ वर्ष मगहर में बिताए और वहाँ चिरनिद्रा में लीन हो गए।

🔗 Connection: यह अनुभाग कबीर की जीवन-परिस्थितियों और भाषा की विशेषताओं को समझाने के बाद अगली कड़ी में साखी के अर्थ और विशेषताओं की व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है? 2. दीपक दिखाई देने पर ओँधियारा कैसे मिट जाता है? साखी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए। 3. ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते? 4. संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ ‘सोना’ और ‘जागना’ किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए। 5. अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है? 6. ‘ऐके अषिर पीव का, पढ़े सु पॉडित होइ’—इस पॉक्त द्वारा कवि क्या कहना चाहता है? 7. कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।

1. मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख मिलता है क्योंकि मीठे शब्द सुनने वाले के मन को शांति और आनंद मिलता है। इससे बोलने वाले के मन में भी शीतलता और सुकून आता है, क्योंकि मीठी वाणी से सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।

2. दीपक दिखाई देने पर ओँधियारा मिट जाता है क्योंकि दीपक प्रकाश का स्रोत है जो अंधकार को दूर करता है। साखी में इसका अर्थ है कि ज्ञान या सच्चाई के प्रकाश से अज्ञानता (अंधकार) समाप्त हो जाती है।

3. ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे इसलिए नहीं देख पाते क्योंकि हमारी इंद्रियाँ और मन उसकी व्याप

1. विरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। 2. कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माँहि। 3. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि। 4. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पॉडित भया न कोइ।

1. 'विरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।' का भाव है कि जब मन विरह (वियोग) की स्थिति में होता है, तब शरीर में बेचैनी होती है और कोई भी मंत्र या ध्यान प्रभावी नहीं होता।

2. 'कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माँहि।' का अर्थ है कि कस्तूरी (खुशबू) मृग के नाभि में रहती है, पर मृग उसे जंगल में खोजता रहता है। यह बताता है कि ईश्वर या सत्य हमारे भीतर है, पर हम बाहर खोजते हैं।

3. 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।' का भाव है कि जब अहंकार (मैं) था तब ईश्वर का अनुभव नहीं था, अब अहंकार मिट गया

1. पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप उदाहरण के अनुसार लिखिए— उदाहरण— जिवै — जीना औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेडा, आँगनिण, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।

प्रचलित रूप:

  • औरन — औरों
  • माँहि — में
  • देख्या — देखा
  • भुवंगम — भुजंग
  • नेडा — नज़दीक
  • आँगनिण — आँगन
  • साबण — साबुन
  • मुवा — मरा
  • पीव — पीव (प्रिय)
  • जालौं — जलाऊँ
  • तास — ताश
1. ‘साधु में निंदा सहन करने से विनयशीलता आती है’ तथा ‘व्यक्ति को मीठी व कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए’—इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।

इस विषय पर परिचर्चा में कहा जा सकता है कि साधु व्यक्ति में निंदा सहन करने की क्षमता विनम्रता और सहिष्णुता का परिचायक है। इससे व्यक्ति का चरित्र निखरता है। मीठी और कल्याणकारी वाणी बोलने से समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ता है, जिससे सभी का कल्याण होता है।

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