Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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गुरुत्वाकर्षण
व्याख्यागुरुत्वाकर्षण
अध्याय 9 की शुरुआत में हम गुरुत्वाकर्षण की मूल अवधारणा से परिचित होते हैं। वस्तुओं की गति और बल के अध्ययन के बाद, हमने जाना कि किसी वस्तु की गति की दिशा बदलने के लिए बल आवश्यक होता है। जब कोई वस्तु ऊँचाई से गिरती है, तो वह पृथ्वी की ओर गिरती है। इसी प्रकार, ग्रह सूर्य के चारों ओर और चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। इन सभी गतियों के पीछे एक बल कार्य करता है, जिसे गुरुत्वाकर्षण बल कहा जाता है। आइजक न्यूटन ने यह समझा कि पृथ्वी सेब को आकर्षित करती है, तो वह चंद्रमा को भी आकर्षित करती है। चंद्रमा पृथ्वी की ओर गिरता रहता है, परन्तु उसकी गति के कारण वह पृथ्वी से टकराता नहीं है। इस बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं जो सभी वस्तुओं के बीच कार्य करता है।
- गुरुत्वाकर्षण बल सभी वस्तुओं के बीच आकर्षण बल है।
- चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है क्योंकि पृथ्वी उसे आकर्षित करती है।
- गुरुत्वाकर्षण बल से वस्तुएँ पृथ्वी की ओर गिरती हैं।
- न्यूटन ने यह सिद्ध किया कि यह बल सार्वत्रिक है।
- 📌 गुरुत्वाकर्षण बल: सभी वस्तुओं के बीच आकर्षण बल।
- 📌 अभिकेंद्र बल: वह बल जो वस्तु को वृत्ताकार पथ में गतिशील रखता है।
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम
व्याख्यागुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम
न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम कहता है कि विश्व के प्रत्येक दो पिंड एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। यह आकर्षण बल दोनों पिंडों के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में कार्य करता है। इसे गणितीय रूप में व्यक्त किया जाता है: F = G × (M × m) / d², जहाँ G सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक है जिसका मान 6.673 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² है। इस नियम के अनुसार, यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को दोगुना कर दिया जाए तो बल चार गुना कम हो जाएगा। इस नियम ने ग्रहों की गति, चंद्रमा की परिक्रमा और ज्वार-भाटा जैसी परिघटनाओं की व्याख्या संभव की।
- गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है।
- बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
- सार्वत्रिक नियम सभी पिंडों पर लागू होता है।
- गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक G का मान 6.673 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² है।
- 📌 सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम: सभी पिंडों के बीच लगने वाला आकर्षण बल।
- 📌 गुरुत्वीय स्थिरांक (G): गुरुत्वाकर्षण बल के लिए स्थिरांक।
मुक्त पतन
व्याख्यामुक्त पतन
मुक्त पतन वह अवस्था है जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गिरती है। इस दौरान वस्तु पर वायु प्रतिरोध या अन्य बलों का प्रभाव नहीं होता। वस्तु के वेग में निरंतर वृद्धि होती है, अर्थात् वस्तु त्वरण के साथ गिरती है। इस त्वरण को गुर
अभ्यास प्रश्न — Chapter 9
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.अवधारणा - गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम जब वस्तु को ऊपर फेंका जाता है, तो गुरुत्व बल -
उत्तर:
की दिशा, गति की दिशा के विपरीत होती है।
Q2.अवधारणा - गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम तीन ग्रहों- पृथ्वी, बृहस्पति तथा प्लूटो में से किस में गुरूत्वीय नियतांक अधिकतम है?
उत्तर:
सब ग्रहों में गुरूत्वीय नियतांक समान है।
Q3.अवधारणा - आपेक्षिक घनत्व घनत्व का मात्रक निम्न में से क्या है?
उत्तर:
किलोग्राम प्रति घन मीटर
Q4.अवधारणा - आपेक्षिक घनत्व किसी वस्तु के प्रति एकांक आयतन के द्रवमान को निम्न में से क्या कहते हैं?
उत्तर:
घनत्व
Q5.अवधारणा - गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम पृथ्वी का द्रव्यमान निम्न में से क्या होता है ?
उत्तर:
6 x 10 24 Kg
Q6.अवधारणा - भार किसी वस्तु का भार चंद्रमा पर -
उत्तर:
पृथ्वी पर वस्तु के भार का 1/6 गुना होता है।
Q7.अवधारणा - गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम सूर्य के चारों ओर ग्रहों की कक्षा की आकृति निम्न में से क्या होती है?
उत्तर:
दीर्घवृत होती है।
Q8.अवधारणा - गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम गुरूत्वीय त्वरण का गणितीय रूप है -
उत्तर:
g = GM/R 2