Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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सीताराम सेकसरिया
व्याख्यासीताराम सेकसरिया
सीताराम सेकसरिया का जन्म 1892 में राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ था। उनका अधिकांश जीवन कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में बीता। वे व्यापार-व्यवसाय से जुड़े हुए थे, लेकिन साहित्य, संस्कृति और नारी शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी की। वे गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के निकट सहयोगी रहे। सत्याग्रह आंदोलन के दौरान जेल भी गए। कुछ समय के लिए वे आजाद हिंद फ़ौज के मंत्री भी रहे। भारत सरकार ने 1962 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका अनुभव अनौपचारिक था क्योंकि वे विद्यालयी शिक्षा से वंचित थे, पर स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंने पढ़ना-लिखना सीखा। उनकी प्रमुख कृतियों में स्मृतिकण, मन की बात, बीता युग, नयी याद और एक कार्यकर्ता की डायरी (दो भागों में) शामिल हैं। ये कृतियाँ उनके अनुभवों और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान की घटनाओं का सजीव चित्रण करती हैं।
- सीताराम सेकसरिया का जन्म 1892 में राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ।
- उनका अधिकांश जीवन कोलकाता में बीता।
- वे स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के आह्वान पर सक्रिय हुए।
- सत्याग्रह आंदोलन के दौरान जेल यात्रा की।
- आजाद हिंद फ़ौज के मंत्री भी रहे।
- 1962 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
- 📌 स्वतंत्रता संग्राम: भारत को अंग्रेजों से आजाद कराने का आंदोलन।
- 📌 सत्याग्रह आंदोलन: महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया अहिंसात्मक विरोध आंदोलन।
- 📌 पद्मश्री: भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
स्वतंत्रता संग्राम और 26 जनवरी 1931 का स्वतंत्रता दिवस
व्याख्यास्वतंत्रता संग्राम और 26 जनवरी 1931 का स्वतंत्रता दिवस
अंग्रेजों से देश को मुक्ति दिलाने के लिए महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन छेड़ा था, जिसने जनता में आजादी की अलख जगाई। इस आंदोलन में देश भर से लाखों लोग शामिल हुए जो अपने सर्वस्व को न्योछावर करने को तैयार थे। 26 जनवरी 1930 को पहली बार गुलाम भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। यह परंपरा आगे भी जारी रही। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1950 में इसी दिन गणतंत्र दिवस के रूप में इसे मनाया गया। लेखक सीताराम सेकसरिया भी स्वतंत्रता की कामना करने वाले उन लोगों में से थे जिन्होंने अपनी निजी डायरी में उस दिन की घटनाओं को दर्ज किया। इस पाठ में 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में स्वतंत्रता दिवस के उत्सव, पुलिस की दमनकारी कार्रवाई, महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका और जनता के उत्साह का विस्तृत वर्णन है। यह पाठ क्रांतिकारियों की कुर्बानियों और संगठित समाज की शक्ति को उजागर करता है।
- महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन ने आजादी की अलख जगाई।
- 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
- 1950 में इसी दिन गणतंत्र दिवस के रूप में इसे मनाया जाने लगा।
- कलकत्ता में 26 जनवरी 1931 को बड़े उत्साह से स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
- पुलिस ने इस आयोजन को दबाने के लिए कड़ी कार्रवाई की।
- महिला कार्यकर्ताओं ने भी सक्रिय भाग लिया और कई गिरफ्तार हुए।
- 📌 सत्याग्रह: अहिंसात्मक विरोध की नीति।
- 📌 स्वतंत्रता दिवस: देश की आजादी के लिए मनाया जाने वाला दिवस।
- 📌 गणतंत्र दिवस: संविधान लागू होने का दिन।
डायरी का एक पन्ना (26 जनवरी 1931)
व्याख्याडायरी का एक पन्ना (26 जनवरी 1931)
26 जनवरी 1931 का दिन कलकत्ता के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और अमर दिन था। इस दिन पूरे हिंदुस्तान में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इस वर्ष की तैयारी पिछले वर्ष से अधिक व्यापक और संगठित थी। प्रचार-प्रसार पर दो हजार रुपये खर्च किए गए। बड़े बाजार के मक
अभ्यास प्रश्न — Chapter 9
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.नत शिर होने से कवि का भाव है –
उत्तर:
भक्तिपूर्वक
Q2.संसार में हानि उठाने का क्या आशय है ?
उत्तर:
उपर्युक्त सभी
Q3.‘दुख – रात्रि’ किस समास का उदाहरण है ?
उत्तर:
द्वंद्व
Q4.कवि संकट में क्या कामना करता है ?
उत्तर:
दुख सहने की शक्ति
Q5.कवि दुख और हानि में प्रभु से क्या चाहता है ?
उत्तर:
क्षय से बचाव
Q6.‘सांत्वना’ का अर्थ है –
उत्तर:
तसल्ली देना
Q7.कवि विपदा में क्या नहीं चाहता है ?
उत्तर:
भय
Q8.‘बाट जोहना’ मुहावरे का सही अर्थ है –
उत्तर:
इंतजार करना