कर चले हम फ़िदा
कर चले हम फ़िदा — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
परिचय
व्याख्यापरिचय
अध्याय 'बड़े भाई साहब' प्रेमचंद द्वारा लिखा गया एक मार्मिक और व्यंग्यपूर्ण गद्यांश है, जो दो भाइयों के बीच के संबंधों और उनके जीवन के संघर्षों को दर्शाता है। इस पाठ में लेखक ने बड़े भाई की जिम्मेदारी, अनुशासन, और छोटे भाई की स्वाभाविक मनोदशा को बड़े ही सजीव और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई की भलाई चाहते हैं, इसलिए वे उसे कठोरता से समझाते हैं, परंतु उनके भीतर भी एक संवेदनशील और स्नेही मन छुपा हुआ है। यह कहानी शिक्षा, अनुशासन, परिश्रम, और जीवन के अनुभवों के महत्व को उजागर करती है। कहानी में बड़े भाई की भूमिका एक मार्गदर्शक की है, जो छोटे भाई को जीवन के कठिनाइयों से लड़ने के लिए तैयार करता है। छोटे भाई की पढ़ाई में मन न लगना, खेल-कूद में रुचि, और बड़े भाई की डांट-फटकार के बीच की द्वंद्वात्मक स्थिति पाठ को रोचक बनाती है। लेखक ने शिक्षा के पारंपरिक तरीकों पर भी व्यंग्य किया है, जैसे कि रटंत शिक्षा, परीक्षा प्रणाली की कठोरता, और समय की पाबंदी पर निबंध लिखने का विरोध। यह पाठ विद्यार्थियों को अनुशासन, मेहनत, और जीवन के अनुभवों के महत्व को समझने में मदद करता है। साथ ही, यह बताता है कि ज्ञान केवल किताबी नहीं होता, बल्कि जीवन के अनुभवों से भी प्राप्त होता है। बड़े भाई की डांट-फटकार का उद्देश्य छोटे भाई को बेहतर इंसान बनाना है, जो अंततः सफल होता है। इस प्रकार, यह कहानी न केवल पारिवारिक संबंधों की गहराई को दर्शाती है, बल्कि शिक्षा और जीवन के प्रति एक व्यावहारिक दृष्टिकोण भी प्रदान करती है।
- कहानी दो भाइयों के बीच के संबंधों और संघर्षों को दर्शाती है।
- बड़े भाई की भूमिका मार्गदर्शक और अनुशासनकारी की है।
- छोटे भाई की पढ़ाई में मन न लगना और खेल-कूद की रुचि प्रमुख विषय हैं।
- लेखक ने शिक्षा के पारंपरिक तरीकों पर व्यंग्य किया है।
- कहानी में जीवन के अनुभवों और किताबी ज्ञान के महत्व को समझाया गया है।
- बड़े भाई की डांट-फटकार का उद्देश्य छोटे भाई की भलाई है।
- 📌 अनुशासन - नियमों और कर्तव्यों का पालन।
- 📌 व्यंग्य - कटुता से भरा हास्य।
- 📌 रटंत शिक्षा - केवल याद करने वाली शिक्षा।
कथा का प्रारंभ और बड़े भाई साहब का चरित्र
व्याख्याकथा का प्रारंभ और बड़े भाई साहब का चरित्र
कहानी की शुरुआत छोटे भाई के दृष्टिकोण से होती है, जो बड़े भाई साहब के प्रति सम्मान और भय दोनों महसूस करता है। बड़े भाई साहब पढ़ाई में गंभीर, अनुशासित और मेहनती हैं। वे पढ़ाई को जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज मानते हैं और छोटे भाई को भी उसी राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। बड़े भाई साहब का स्वभाव कठोर है, वे छोटे भाई की हरकतों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, जिससे छोटे भाई को डर लगता है। बड़े भाई साहब की पढ़ाई में गहरी रुचि और मेहनत का वर्णन विस्तार से किया गया है। वे अपनी पढ़ाई के लिए समय-समय पर खुद को अनुशासित करते हैं और पढ़ाई के लिए एक सख्त टाइम-टेबल बनाते हैं। वे छोटे भाई को भी यही अनुशासन अपनाने की सलाह देते हैं। लेकिन बड़े भाई साहब की यह कठोरता केवल छोटे भाई के भले के लिए है। वे चाहते हैं कि छोटा भाई जीवन में सफल हो और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करे। छोटे भाई की मनोदशा इसके विपरीत है। उसे पढ़ाई में मन नहीं लगता और वह खेल-कूद में अधिक रुचि रखता है। बड़े भाई की डांट-फटकार से वह डरता है, परन्तु खेल-कूद की ओर आकर्षित भी रहता है। इस द्वंद्व को लेखक ने बड़े ही सजीव और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
- बड़े भाई साहब पढ़ाई में गंभीर और मेहनती हैं।
- वे छोटे भाई को अनुशासन और मेहनत की सीख देते हैं।
- बड़े भाई साहब का स्वभाव कठोर लेकिन स्नेहपूर्ण है।
- छोटा भाई पढ़ाई में रुचि कम और खेल-कूद में अधिक रुचि रखता है।
- दोनों भाइयों के बीच उम्र और अनुभव का अंतर स्पष्ट है।
- 📌 टाइम-टेबल - पढ़ाई और अन्य कार्यों का समय निर्धारण।
- 📌 डांट-फटकार - अनुशासन के लिए दी गई कड़ी नसीहत।
- 📌 मनोदशा - मानसिक स्थिति।
छोटे भाई की पढ़ाई और खेल-कूद के प्रति मनोदशा
व्याख्याछोटे भाई की पढ़ाई और खेल-कूद के प्रति मनोदशा
छोटा भाई पढ़ाई में मन न लगने की समस्या से जूझता है। उसे किताबें पढ़ना पहाड़ जैसा भारी लगता है। वह पढ़ाई के बजाय मैदान में खेल-कूद में अधिक समय बिताना चाहता है। उसकी यह स्थिति बड़े भाई साहब के लिए चिंता का विषय है। बड़े भाई साहब उसे बार-बार समझाते हैं
अभ्यास प्रश्न — कर चले हम फ़िदा
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए— 1. कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी? 2. बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे? 3. दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया? 4. बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे? 5. बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?
उत्तर:
1. कथा नायक की रुचि खेल-कूद और मस्ती में थी। 2. बड़े भाई साहब हर समय पहला सवाल पूछते थे कि पढ़ाई कैसी चल रही है? 3. दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई का व्यवहार अधिक गंभीर और अनुशासित हो गया। 4. बड़े भाई साहब छोटे भाई से लगभग दो वर्ष बड़े थे और वे दसवीं कक्षा में पढ़ते थे। 5. बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए खेल-कूद करते थे।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार संक्षेप में दिया गया है। कथा नायक की रुचि खेल-कूद में थी, बड़े भाई साहब पढ़ाई के बारे में पूछते थे, दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई ने गंभीरता दिखाई, बड़े भाई साहब उम्र में बड़े थे और दसवीं कक्षा में पढ़ते थे, तथा दिमाग को आराम देने के लिए खेलते थे।
Q2.(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए— 1. छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया? 2. एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई? 3. बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं? 4. बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों? 5. छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?
उत्तर:
1. छोटे भाई ने सोचा कि वह पढ़ाई के लिए समय निश्चित करेगा, लेकिन खेल-कूद की आदत के कारण वह पालन नहीं कर पाया। 2. बड़े भाई साहब ने उसे डाँटा और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। 3. बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं क्योंकि उन्हें पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करना था। 4. बड़े भाई साहब सलाह देते थे कि पढ़ाई में मन लगाओ ताकि जीवन में सफलता मिले। 5. छोटे भाई ने बड़े भाई के नरम व्यवहार का फायदा उठाकर कभी-कभी पढ़ाई से बच निकलने की कोशिश की।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार संक्षेप में दिया गया है। छोटे भाई ने टाइम-टेबल बनाया पर पालन नहीं किया, बड़े भाई ने डाँटा, मन की इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं, सलाह पढ़ाई पर ध्यान देने की थी, और नरम व्यवहार का फायदा उठाया।
Q3.(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए— 1. बड़े भाई की डॉट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए। 2. इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं? 3. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है? 4. छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई? 5. बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए? 6. बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्वपूर्ण कहा है? 7. बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि— (क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है। (ख) भाई साहब को ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है। (ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है। (घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।
उत्तर:
1. यदि डॉट-फटकार न मिलती तो छोटा भाई कक्षा में अव्वल नहीं आता क्योंकि डाँट से उसे सुधार का मौका मिला। 2. लेखक ने शिक्षा के रटंत, केवल किताबी ज्ञान और खेल-कूद की उपेक्षा पर व्यंग्य किया है। मैं उनके विचार से सहमत हूँ क्योंकि शिक्षा में अनुभव भी जरूरी है। 3. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ अनुभव से आती है, जो किताबी ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है। 4. छोटे भाई के मन में श्रद्धा इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि बड़े भाई ने उसे सही मार्ग दिखाया और उसकी भलाई चाही। 5. बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ हैं—सख्ती, अनुशासनप्रियता, अनुभवशीलता और प्रेमपूर्ण व्यवहार। 6. बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव को अधिक महत्वपूर्ण कहा क्योंकि वह व्यवहारिक ज्ञान देता है। 7. (क) छोटा भाई बड़े भाई का आदर करता है क्योंकि वह उनकी बात मानता है। (ख) भाई साहब के अनुभव से पता चलता है कि वे जीवन की कठिनाइयाँ समझते हैं। (ग) भाई साहब के भीतर भी बच्चा है क्योंकि वे कभी-कभी नरम और खेल-कूद में रुचि दिखाते हैं। (घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं क्योंकि वे उसकी पढ़ाई और भविष्य की चिंता करते हैं।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर विस्तार से पाठ के आधार पर दिया गया है। डाँट से सुधार, शिक्षा पर व्यंग्य, अनुभव की महत्ता, श्रद्धा का कारण, स्वभावगत गुण, अनुभव की प्राथमिकता और पाठ के अंशों से भाव स्पष्ट किए गए हैं।
Q4.(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए— 1. इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं, असल चीज है बुद्धि का विकास। 2. फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था। 3. बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने? 4. आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।
उत्तर:
1. परीक्षा पास करना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि असली महत्व बुद्धि और समझ के विकास का है। 2. व्यक्ति विपत्तियों के बीच भी मोह-माया से नहीं छूट पाता, इसलिए फटकार के बावजूद खेल-कूद को छोड़ना मुश्किल होता है। 3. यदि आधार मजबूत न हो तो कोई भी निर्माण टिकाऊ नहीं रह सकता, जैसे मकान की बुनियाद। 4. आँखें ऊँचे लक्ष्य की ओर थीं और मन उस आत्मा की तरह था जो स्वर्ग से आकर नए संस्कार सीख रही हो, अर्थात् उच्च विचार और परिवर्तन की इच्छा।
व्याख्या:
प्रत्येक वाक्य का अर्थ विस्तार से समझाया गया है। पहला वाक्य बुद्धि के विकास पर जोर देता है, दूसरा मोह-माया की जकड़न बताता है, तीसरा मजबूत आधार की आवश्यकता दर्शाता है, और चौथा उच्च विचारों और परिवर्तन की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।
Q5.1. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए— नसीहत, रोष, आजादी, राजा, ताज्जुब
उत्तर:
नसीहत: सलाह, उपदेश रोष: क्रोध, गुस्सा आजादी: स्वतंत्रता, मुक्ति राजा: सम्राट, बादशाह ताज्जुब: आश्चर्य, विस्मय
व्याख्या:
प्रत्येक शब्द के समानार्थी शब्द दिए गए हैं जो अर्थ में समान हैं।
Q6.निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए— सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दौंतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू खैरा।
उत्तर:
1. सिर पर नंगी तलवार लटकना: परीक्षा के दिन मेरी सिर पर नंगी तलवार लटक रही थी। 2. आड़े हाथों लेना: शिक्षक ने मेरी गलती को आड़े हाथों लिया। 3. अंधे के हाथ बटेर लगना: उसे अचानक बड़ी सफलता मिली, जैसे अंधे के हाथ बटेर लगना। 4. लोहे के चने चबाना: कठिन परिश्रम करना पड़ता है, जैसे लोहे के चने चबाना। 5. दौंतों पसीना आना: परीक्षा में पास होने के लिए दौंतों पसीना आ गया। 6. ऐरा-गैरा नत्थू खैरा: वह लड़का ऐरा-गैरा नत्थू खैरा है, जो हर बात में उलझता रहता है।
व्याख्या:
प्रत्येक मुहावरे का वाक्य में सही और सटीक प्रयोग किया गया है जिससे अर्थ स्पष्ट होता है।
Q7.3. निम्नलिखित तत्सम, तद्भव, देशी, आगत शब्दों को दिए गए उदाहरणों के आधार पर छाँटकर लिखिए। तत्सम तद्भव देशज आगत (अंग्रेजी एवं उर्दू / अरबी-फ़ारसी) जन्मसिद्ध आँख दाल-भात पोजीशन, फ़्रजीहत तालीम, जल्दबाजी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्तिबाण, जानलेवा, आँखफोड़, चुड़कियाँ, आधिपत्य, पन्ना, मेला-तमाशा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, प्रात:काल, विद्वान, निपुण, भाई साहब, अवहेलना, टाइम-टेबिल
उत्तर:
तत्सम: जन्मसिद्ध, तालीम, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्तिबाण, जानलेवा, आधिपत्य, पन्ना, मसलन, फटकार, प्रात:काल, विद्वान, निपुण, अवहेलना तद्भव: आँख, जल्दबाजी, आँखफोड़, चुड़कियाँ, मेला-तमाशा, भाई साहब देशज: दाल-भात आगत (अंग्रेजी एवं उर्दू / अरबी-फ़ारसी): पोजीशन, फ़्रजीहत, स्पेशल, स्कीम, टाइम-टेबिल
व्याख्या:
शब्दों को उनके मूल और उत्पत्ति के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। तत्सम संस्कृत से, तद्भव प्राचीन हिंदी से, देशज स्थानीय भाषा से, और आगत विदेशी भाषाओं से लिए गए हैं।
Q8.4. नीचे दिए वाक्यों में कौन-सी क्रिया है—सकर्मक या अकर्मक? लिखिए— (क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया। (ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा। (ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा। (घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता। (ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो। (च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।
उत्तर:
(क) सकर्मक क्रिया (हाथ पकड़ लिया - कर्म है) (ख) अकर्मक क्रिया (जीवन कटना - कर्म नहीं) (ग) सकर्मक क्रिया (हाल पढ़ना - कर्म है) (घ) अकर्मक क्रिया (आँसू बहाना - कर्म नहीं) (ङ) सकर्मक क्रिया (निबंध लिखना - कर्म है) (च) अकर्मक क्रिया (दौड़ना - कर्म नहीं)
व्याख्या:
सकर्मक क्रिया वह होती है जिसमें कर्म की अपेक्षा होती है, जबकि अकर्मक क्रिया में कर्म की अपेक्षा नहीं होती। प्रत्येक वाक्य में क्रिया की प्रकृति के अनुसार वर्गीकरण किया गया है।