NCERTCh 8निःशुल्क

Chapter 8

🎓 Class 11📖 Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 7अध्याय 8 / 14Chapter 9

Chapter 8अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

सौर विकिरण

व्याख्या

सौर विकिरण

सौर विकिरण वह ऊर्जा है जो सूर्य से पृथ्वी तक विकिरण के रूप में पहुँचती है। पृथ्वी पर प्राप्त होने वाली ऊर्जा का अधिकतम अंश लघु तरंगदैर्घ्य के रूप में होता है, जिसे सूर्यातप (Insolation) कहा जाता है। पृथ्वी एक भू-आभ (Geoid) है, और सूर्य की किरणें वायुमंडल के ऊपरी भाग पर तिरछी पड़ती हैं, जिससे पृथ्वी को सौर ऊर्जा का केवल एक छोटा अंश ही प्राप्त होता है। पृथ्वी औसतन वायुमंडल की ऊपरी सतह पर 1.94 कैलोरी/प्रति वर्ग सेंटीमीटर प्रतिमिनट ऊर्जा प्राप्त करती है। सूर्य से पृथ्वी तक की दूरी में वर्ष भर परिवर्तन होता है, जिसके कारण प्राप्त सूर्यातप में भी थोड़ा परिवर्तन होता है। 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट (उपसौर) होती है, जबकि 4 जुलाई को सबसे दूर (अपसौर) होती है। उपसौर के समय सूर्यातप अधिक होता है, परंतु स्थल और समुद्र के वितरण तथा वायुमंडलीय परिसंचरण के कारण इसका प्रभाव मौसम पर कम होता है। सूर्यातप की मात्रा में प्रतिदिन, मौसम और वर्ष भर परिवर्तन होता है। इसके मुख्य कारण हैं पृथ्वी का अक्ष पर घूमना, सूर्य की किरणों का नति कोण, दिन की अवधि, वायुमंडल की पारदर्शिता और स्थल विन्यास। अक्षांश के अनुसार सूर्य की किरणों का नति कोण बदलता है, जिससे अक्षांश के उच्च होने पर किरणें अधिक तिरछी पड़ती हैं और ऊर्जा का वितरण कम होता है। वायुमंडल में जलवाष्प, ओजोन आदि अवरक्त विकिरण को अवशोषित करते हैं, जिससे पृथ्वी की सतह पर पहुँचने वाली ऊर्जा में कमी होती है।

  • सौर विकिरण मुख्यतः लघु तरंगदैर्घ्य में पृथ्वी तक पहुँचती है।
  • पृथ्वी पर प्राप्त ऊर्जा को सूर्यातप (Insolation) कहा जाता है।
  • पृथ्वी की कक्षा में दूरी परिवर्तन के कारण सूर्यातप में वार्षिक भिन्नता होती है।
  • सूर्य की किरणों का नति कोण अक्षांश के अनुसार बदलता है, जिससे ऊर्जा वितरण प्रभावित होता है।
  • वायुमंडल में जलवाष्प, ओजोन आदि सौर विकिरण को अवशोषित करते हैं।
  • सूर्यातप की मात्रा में प्रतिदिन, मौसम और वर्ष भर परिवर्तन होता है।
  • 📌 सौर विकिरण: सूर्य से पृथ्वी तक ऊर्जा का विकिरण।
  • 📌 सूर्यातप (Insolation): पृथ्वी पर प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा।
  • 📌 अपसौर (Aphelion): पृथ्वी का सूर्य से सबसे दूर होना।

पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप में भिन्नता

व्याख्या

पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप में भिन्नता

पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप की मात्रा में स्थान और समय के अनुसार भिन्नता होती है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में सूर्यातप लगभग 320 वाट/प्रति वर्गमीटर होता है, जबकि ध्रुवीय क्षेत्रों में यह मात्र 70 वाट/प्रति वर्गमीटर तक गिर जाता है। उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों में मेघाच्छादन कम होने के कारण सूर्यातप अधिक होता है। विषुवत् वृत्त पर अपेक्षाकृत कम सूर्यातप प्राप्त होता है क्योंकि यहाँ बादलों की उपस्थिति अधिक होती है। सूर्यातप की तीव्रता पर प्रभाव डालने वाले कारकों में पृथ्वी का अक्ष पर घूमना, सूर्य की किरणों का नति कोण, दिन की अवधि, वायुमंडल की पारदर्शिता और स्थल विन्यास शामिल हैं। अक्षांश जितना अधिक होगा, सूर्य की किरणें उतनी ही तिरछी पड़ेंगी, जिससे ऊर्जा का वितरण कम होगा। वायुमंडल की पारदर्शिता कम होने पर सूर्यातप में कमी आती है। स्थल और समुद्र के वितरण से भी सूर्यातप प्रभावित होता है; महाद्वीपीय क्षेत्रों में अधिक सूर्यातप प्राप्त होता है जबकि महासागरीय क्षेत्रों में कम। सूर्यातप की यह भिन्नता पृथ्वी के विभिन्न भागों में तापमान के असमान वितरण का मुख्य कारण है।

  • उष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों में सूर्यातप अधिक होता है।
  • ध्रुवीय क्षेत्रों में सूर्यातप कम होता है।
  • महाद्वीपीय क्षेत्रों में महासागरीय क्षेत्रों की तुलना में अधिक सूर्यातप प्राप्त होता है।
  • सूर्य की किरणों का नति कोण अक्षांश के अनुसार बदलता है।
  • वायुमंडल की पारदर्शिता सूर्यातप की मात्रा को प्रभावित करती है।
  • दिन की अवधि भी सूर्यातप की तीव्रता को प्रभावित करती है।
  • 📌 सूर्यातप की तीव्रता: किसी स्थान पर प्राप्त सौर ऊर्जा की मात्रा।
  • 📌 नति कोण: सूर्य की किरणों का किसी स्थान पर पड़ने का कोण।
  • 📌 वायुमंडल की पारदर्शिता: वायुमंडल द्वारा सौर विकिरण के गुजरने की क्षमता।

वायुमंडल का तापन एवं शीतलन

व्याख्या

वायुमंडल का तापन एवं शीतलन

वायुमंडल के गर्म और ठंडा होने की प्रक्रियाएँ विभिन्न प्रकार की ऊष्मा संचरण क्रियाओं पर आधारित हैं। जब सूर्य की लघु तरंगदैर्घ्य वाली विकिरण पृथ्वी की सतह को गर्म करती है, तब पृथ्वी से दीर्घ तरंगों के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित होती है, जिसे पार्थिव विकिर

अभ्यास प्रश्नChapter 8

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.वायुमंडल की ऊपरी सतह पर जो सूर्यातप प्राप्त होता है उसकी कितनी मात्रा पृथ्वी के धरातल तक पहुँच पाती है?
A.23%
B.33%
C.45%
D.51%

उत्तर:

51%

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Q2.ऊँचाई बढ़ने के साथ जो तापमान में ह्नास होता है, उसे क्या कहा जाता है?
A.वायु अपवाह
B.सामान्य ह्नास दर
C.पार्थिव विकिरण
D.तापमान का व्युत्क्रमण

उत्तर:

सामान्य ह्नास दर

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Q3.जनवरी को पृथ्वी सूर्य से सबसे निकट होती है उसकी दूरी कितनी होती है?
A.14 करोड़ 40 लाख किलोमीटर
B.14 करोड़ 50 लाख किलोमीटर
C.14 करोड़ 70 लाख किलोमीटर
D.14 करोड़ 80 लाख किलोमीटर

उत्तर:

14 करोड़ 70 लाख किलोमीटर

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Q4.क्षैतिज संचलन से ऊष्मा का स्थानान्तरण को क्या कहते है?
A.अपवाहन
B.अभिवहन
C.संवहन
D.ऊष्मा संचलन

उत्तर:

अभिवहन

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Q5.पृथ्वी के संपर्क में आने वाली वायु धीरे-धीरे गर्म होती है। निचली परतों के संपर्क में आने वाली वायुपंडल की ऊपरी परतें गर्म हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को ...................कहते हैं|
A.अभिवहन
B.संवहन
C.एल्बिडो
D.चालन

उत्तर:

चालन

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Q6.विश्व में सर्वाधिक तापांतर किस महाद्वीप में है?
A.एशिया
B.अफ्रीका
C.आस्ट्रेलिया
D.यूरेशिया

उत्तर:

यूरेशिया

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Q7.निम्नलिखित में से कहाँ पर दिन अथवा रात सबसे बड़े होते हैं?
A.कर्क रेखा
B.विषुवत रेखा
C.ध्रुव
D.मकर रेखा

उत्तर:

ध्रुव

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Q8.पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में किस कारण से व्युत्क्रमण की उत्पत्ति होती है?
A.वायु अपवाह के कारण
B.घूलकण के कारण
C.गुरुत्वाकर्षण बल के कारण
D.जलवाष्प के कारण

उत्तर:

वायु अपवाह के कारण

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