Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
1. प्रस्तावना
व्याख्या1. प्रस्तावना
इस खंड में सूचकांक के महत्व और आवश्यकता की प्रस्तावना दी गई है। आँकड़ों के समूह से संक्षिप्त माप प्राप्त करने की प्रक्रिया को समझाने के बाद यह बताया गया है कि वस्तुओं की कीमतों, उत्पादन की मात्रा आदि में समय के साथ हुए परिवर्तनों को समझने के लिए एकल संख्या की आवश्यकता होती है। उदाहरण स्वरूप, यदि किसी औद्योगिक श्रमिक की आय 1982 से 12000 रु हो गई है, तो क्या यह कहा जा सकता है कि उसका जीवन स्तर 12 गुना बेहतर हुआ है? इसके अलावा, सेंसेक्स के उतार-चढ़ाव से निवेशकों की संपत्ति में भारी बदलाव होते हैं, जो सूचकांक की भूमिका को दर्शाता है। मुद्रास्फीति की माप के लिए भी सूचकांक आवश्यक है। इस प्रकार, सूचकांक हमें विभिन्न आर्थिक परिवर्तनों को सरल और संक्षिप्त रूप में समझने में सहायता करता है।
- आँकड़ों के समूह से संक्षिप्त माप प्राप्त करना आवश्यक होता है।
- विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में समय के साथ परिवर्तन होता है।
- एकल संख्या के माध्यम से इन परिवर्तनों को समझना आसान होता है।
- सेंसेक्स जैसे सूचकांक निवेशकों की संपत्ति पर प्रभाव डालते हैं।
- मुद्रास्फीति की माप के लिए सूचकांक का उपयोग किया जाता है।
- 📌 सूचकांक: संबंधित चरों के समूह में हुए परिवर्तनों को मापने का सांख्यिकीय साधन।
- 📌 मुद्रास्फीति: कीमतों में सामान्य और निरंतर वृद्धि।
2. सूचकांक क्या है?
परिभाषा2. सूचकांक क्या है?
सूचकांक एक सांख्यिकीय उपकरण है जो संबंधित चरों के समूह के परिमाण में समय के साथ हुए परिवर्तनों को मापता है। यह विभिन्न वस्तुओं की कीमतों, उत्पादन की मात्रा, निर्वाह खर्च आदि के औसत परिवर्तन को एकल संख्या के रूप में प्रस्तुत करता है। सूचकांक की गणना दो अवधियों के बीच की तुलना से होती है, जिसमें एक अवधि को आधार अवधि कहा जाता है और उसका मान 100 निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि 1990 को आधार अवधि माना जाए और 2005 में सूचकांक 250 हो, तो इसका अर्थ है कि कीमतें 1990 की तुलना में 2.5 गुना बढ़ गई हैं। सूचकांक मुख्यतः प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है और यह आर्थिक गतिविधियों की दिशा और गति को समझने में सहायक होता है।
- सूचकांक संबंधित चरों के समूह में परिवर्तनों को मापता है।
- यह दो अवधियों के बीच औसत परिवर्तन का माप होता है।
- आधार अवधि का सूचकांक मान 100 होता है।
- सूचकांक प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।
- यह आर्थिक गतिविधियों की दिशा और गति को समझने में मदद करता है।
- 📌 आधार अवधि: वह अवधि जिसके साथ तुलना की जाती है और जिसका सूचकांक मान 100 होता है।
- 📌 परिमाणात्मक सूचकांक: उत्पादन की मात्रा आदि के परिवर्तन को मापने वाला सूचकांक।
- 📌 कीमत-सूचकांक: वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन को मापने वाला सूचकांक।
3. सूचकांक की रचना
व्याख्या3. सूचकांक की रचना
इस खंड में सूचकांक की रचना के सिद्धांतों को कीमत-सूचकांक के माध्यम से विस्तार से समझाया गया है। सबसे पहले सरल समूहित कीमत सूचकांक की विधि बताई गई है, जिसमें सभी वस्तुओं की कीमतों का योग लेकर आधार अवधि के कीमतों के योग से भाग दिया जाता है और 100 से गु
अभ्यास प्रश्न — Chapter 7
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. मदों के सापेक्षिक महत्व को बताने वाले सूचकांक को, (क) भारित सूचकांक कहते हैं (ख) सरल समूहित सूचकांक कहते हैं (ग) सरल मूल्यानुपातों का औसत कहते हैं
उत्तर:
सही उत्तर है (क) भारित सूचकांक कहते हैं। क्योंकि भारित सूचकांक में प्रत्येक मद को उसके महत्व के अनुसार भार दिया जाता है।
व्याख्या:
मदों के सापेक्षिक महत्व को बताने वाले सूचकांक को भारित सूचकांक कहते हैं। सरल समूहित सूचकांक में सभी मदों को समान महत्व दिया जाता है और सरल मूल्यानुपातों का औसत भी बिना भार के होता है।
Q2.2. अधिकांश भारित सूचकांकों में भार का संबंध, (क) आधार वर्ष से होता है (ख) वर्तमान वर्ष से होता है (ग) आधार एवं वर्तमान वर्ष दोनों से होता है
उत्तर:
सही उत्तर है (क) आधार वर्ष से होता है। क्योंकि भार सामान्यतः आधार वर्ष के व्यय पैटर्न के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं।
व्याख्या:
भारित सूचकांकों में भार वस्तुओं और सेवाओं के आधार वर्ष में उपभोग या व्यय के अनुपात के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं, जिससे सूचकांक की गणना में स्थिरता बनी रहती है।
Q3.3. ऐसी वस्तु जिसका सूचकांक में कम भार है, उसकी कीमत में परिवर्तन से सूचकांक में कैसा परिवर्तन होगा, (क) कम (ख) अधिक (ग) अनिश्चित
उत्तर:
सही उत्तर है (क) कम। क्योंकि वस्तु का भार कम होने पर उसकी कीमत में परिवर्तन का सूचकांक पर प्रभाव भी कम होगा।
व्याख्या:
सूचकांक में किसी वस्तु का भार जितना कम होगा, उसकी कीमत में परिवर्तन का कुल सूचकांक पर प्रभाव उतना ही कम होगा। इसलिए कम भार वाली वस्तु के दाम बढ़ने से सूचकांक में कम परिवर्तन होगा।
Q4.4. कोई उपभोक्ता कीमत सूचकांक किस परिवर्तन को मापता है? (क) खुदरा कीमत (ख) थोक कीमत (ग) उत्पादकों की कीमत
उत्तर:
सही उत्तर है (क) खुदरा कीमत। उपभोक्ता कीमत सूचकांक खुदरा स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन को मापता है।
व्याख्या:
उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा कीमतों में समय के साथ हुए परिवर्तनों को दर्शाता है।
Q5.5. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक में किस मद के लिए उच्चतम भार होता है? (क) खाद्य-पदार्थ (ख) आवास (ग) कपड़े
उत्तर:
सही उत्तर है (क) खाद्य-पदार्थ। क्योंकि औद्योगिक श्रमिकों के खर्च में खाद्य पदार्थों का हिस्सा सबसे अधिक होता है।
व्याख्या:
औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता कीमत सूचकांक में खाद्य पदार्थों का भार सबसे अधिक होता है क्योंकि उनका मासिक व्यय में खाद्य पदार्थों का हिस्सा सबसे बड़ा होता है।
Q6.6. सामान्यतः मुद्रा-स्फीति के परिकलन में किसका प्रयोग होता है? (क) थोक कीमत सूचकांक (ख) उपभोक्ता कीमत सूचकांक (ग) उत्पादक कीमत सूचकांक
उत्तर:
सही उत्तर है (ख) उपभोक्ता कीमत सूचकांक। क्योंकि मुद्रा-स्फीति का मापन उपभोक्ता स्तर पर कीमतों के परिवर्तन से किया जाता है।
व्याख्या:
मुद्रा-स्फीति का मापन उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) के आधार पर किया जाता है क्योंकि यह उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है।
Q7.7. हमें सूचकांक की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
सूचकांक की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों, उत्पादन या अन्य आर्थिक मापदंडों में समय के साथ हुए परिवर्तनों को मापा और समझा जा सके। यह आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करने और नीतिगत निर्णय लेने में सहायक होता है।
व्याख्या:
सूचकांक के माध्यम से हम विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों या उत्पादन के स्तर में हुए परिवर्तनों को एक संख्या के रूप में व्यक्त कर सकते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों का तुलनात्मक अध्ययन संभव होता है।
Q8.8. आधार अवधि के वांछित गुण क्या होते हैं?
उत्तर:
आधार अवधि के वांछित गुण होते हैं: 1. स्थिरता: आधार अवधि में कीमतें और व्यय पैटर्न स्थिर होने चाहिए। 2. प्रतिनिधित्व: यह अवधि सामान्य आर्थिक स्थिति का प्रतिनिधित्व करे। 3. प्रासंगिकता: आधार अवधि हाल की हो ताकि सूचकांक वर्तमान स्थिति के लिए उपयोगी हो। 4. उपलब्धता: उस अवधि के लिए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध हों।
व्याख्या:
आधार अवधि का चयन सूचकांक की विश्वसनीयता और उपयोगिता के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इसे ऐसी अवधि चुना जाता है जो स्थिर, प्रासंगिक और आंकड़ों की उपलब्धता वाली हो।
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