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Chapter 7

🎓 Class 11📖 Raajneeti Sidhant📖 6 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~9 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 8Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

राष्ट्रवाद का परिचय

व्याख्या

राष्ट्रवाद का परिचय

राष्ट्रवाद एक राजनीतिक सिद्धांत और सामाजिक भावना है जो लोगों को एक राष्ट्र के रूप में जोड़ती है। आमतौर पर राष्ट्रवाद को देशभक्ति, राष्ट्रीय ध्वज, और देश के लिए बलिदान से जोड़ा जाता है। दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड भारतीय राष्ट्रवाद का एक प्रमुख प्रतीक है, जो सत्ता, शक्ति और विविधता की भावना को दर्शाती है। राष्ट्रवाद की स्पष्ट और सर्वमान्य परिभाषा करना कठिन है, लेकिन यह वैश्विक राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पिछले दो शताब्दियों में राष्ट्रवाद ने इतिहास रचने में योगदान दिया है। यह लोगों को जोड़ने के साथ-साथ विभाजित भी करता है, अत्याचारी शासन से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है, लेकिन कभी-कभी संघर्ष और युद्ध का कारण भी बनता है। 19वीं शताब्दी के यूरोप में राष्ट्रवाद ने छोटी-छोटी रियासतों को एकीकृत कर बड़े राष्ट्र-राज्यों का निर्माण किया। आज भी विश्व के कई हिस्से राष्ट्र-राज्यों में विभाजित हैं, और सीमाओं के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रवाद साम्राज्यों के पतन में भी सहायक रहा है, जैसे ऑस्ट्रियाई-हंगेरियाई और रूसी साम्राज्य का विघटन। भारत और अन्य उपनिवेशों के स्वतंत्रता संग्राम भी राष्ट्रवादी संघर्ष थे। राष्ट्रवाद आज भी प्रभावी शक्ति है, जो लोगों को एक साझा पहचान और राजनीतिक अस्तित्व के लिए प्रेरित करता है।

  • राष्ट्रवाद एक राजनीतिक और सामाजिक भावना है जो लोगों को राष्ट्र के रूप में जोड़ती है।
  • राष्ट्रवाद का इतिहास 18वीं-19वीं सदी के यूरोप से शुरू हुआ।
  • राष्ट्रवाद ने इतिहास रचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • राष्ट्रवाद लोगों को जोड़ने के साथ-साथ विभाजित भी करता है।
  • राष्ट्रवाद ने साम्राज्यों के पतन और नए राष्ट्र-राज्यों के निर्माण में योगदान दिया।
  • आज भी राष्ट्रवाद वैश्विक राजनीति में प्रभावी है।
  • 📌 राष्ट्रवाद: लोगों को एक राष्ट्र के रूप में जोड़ने वाली राजनीतिक और सामाजिक भावना।
  • 📌 राष्ट्र-राज्य: एक राजनीतिक इकाई जिसमें एक राष्ट्र की सीमाएं होती हैं।
  • 📌 गणतंत्र दिवस परेड: भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक।

राष्ट्र और राष्ट्रवाद

व्याख्या

राष्ट्र और राष्ट्रवाद

राष्ट्र एक आकस्मिक समूह नहीं होता, बल्कि यह परिवार, जनजाति या जातीय समूहों से भिन्न होता है। परिवार में सदस्यों के बीच प्रत्यक्ष संबंध होते हैं, जबकि राष्ट्र के सदस्यों को एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानने की आवश्यकता नहीं होती। राष्ट्र की पहचान भाषा, धर्म, जातीयता जैसी विशिष्टताओं पर आधारित नहीं होती, क्योंकि कई राष्ट्रों में कई भाषाएँ, धर्म और जातीयताएँ होती हैं, जैसे भारत और कनाडा। राष्ट्र एक 'काल्पनिक' समुदाय है जो सामूहिक विश्वास, आकांक्षाओं और साझा कल्पनाओं पर आधारित होता है। राष्ट्र की पहचान के चार मुख्य आधार होते हैं: साझे विश्वास, इतिहास, भू-क्षेत्र और साझे राजनीतिक आदर्श। साझे विश्वास से तात्पर्य है कि राष्ट्र के सदस्य स्वयं को एक समूह के रूप में मानते हैं, जैसे एक टीम। इतिहास साझा स्मृतियों, किंवदंतियों और अभिलेखों के माध्यम से राष्ट्र की स्थायी पहचान बनाता है। भू-क्षेत्र एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र होता है जिससे राष्ट्र की पहचान जुड़ी होती है, जैसे भारतीय राष्ट्र की पहचान भारतीय उपमहाद्वीप से है। साझे राजनीतिक आदर्श राष्ट्र को बाकी समूहों से अलग करते हैं, जिसमें लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और उदारवाद जैसे मूल्य शामिल होते हैं। सांस्कृतिक पहचान जैसे भाषा या धर्म पर आधारित राष्ट्रवाद लोकतंत्र के लिए खतरा हो सकता है क्योंकि ये विविधताओं को नजरअंदाज कर सकते हैं। इसलिए लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद को राजनीतिक आदर्शों और मूल्य समूहों के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए।

  • राष्ट्र परिवार या जातीय समूह से भिन्न, एक काल्पनिक समुदाय है।
  • राष्ट्र की पहचान भाषा, धर्म या जातीयता से सीमित नहीं होती।
  • राष्ट्र की पहचान के चार आधार: साझे विश्वास, इतिहास, भू-क्षेत्र, साझे राजनीतिक आदर्श।
  • साझे विश्वास राष्ट्र के सदस्यों को एक समूह के रूप में जोड़ते हैं।
  • इतिहास साझा स्मृतियों और अभिलेखों से राष्ट्र की पहचान बनती है।
  • लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद सांस्कृतिक पहचान से ऊपर राजनीतिक आदर्शों पर आधारित होता है।
  • 📌 काल्पनिक समुदाय: ऐसा समूह जो सामूहिक विश्वास और कल्पनाओं पर आधारित होता है।
  • 📌 साझे राजनीतिक आदर्श: लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल्य जो राष्ट्र को एकजुट करते हैं।
  • 📌 भू-क्षेत्र: वह भौगोलिक क्षेत्र जिससे राष्ट्र की पहचान जुड़ी होती है।

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय

व्याख्या

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अर्थ है कि राष्ट्र अपना शासन स्वयं करने और अपने भविष्य को तय करने का अधिकार चाहता है। यह अधिकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपने पृथक राजनीतिक इकाई या राज्य के दर्जे की मान्यता की मांग करता है। अक्सर यह मांग उन लोगों की ओर से आती

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.राष्ट्र किस प्रकार से बाकी सामूहिक संबद्धताओं से अलग है?

उत्तर:

राष्ट्र एक ऐसी सामूहिक संबद्धता है जो एक साझा इतिहास, संस्कृति, भाषा, और राजनीतिक इकाई के आधार पर लोगों को जोड़ती है। यह बाकी सामूहिक संबद्धताओं जैसे परिवार, जाति, या धर्म से अलग है क्योंकि राष्ट्र में एक राजनीतिक संप्रभुता और स्वायत्तता होती है। राष्ट्र की पहचान केवल सांस्कृतिक या सामाजिक आधार पर नहीं होती, बल्कि इसमें राजनीतिक नियंत्रण और अधिकार भी शामिल होते हैं। इसलिए राष्ट्र एक व्यापक और संगठित इकाई है जो अपने नागरिकों के लिए एक साझा पहचान और राजनीतिक अधिकार प्रदान करती है।

व्याख्या:

राष्ट्र अन्य सामूहिक संबद्धताओं से इसलिए अलग है क्योंकि इसमें राजनीतिक सत्ता और संप्रभुता का तत्व होता है, जो अन्य संबद्धताओं में नहीं होता। राष्ट्र का आधार केवल सांस्कृतिक या सामाजिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।

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Q2.राष्ट्रीय आत्म-निर्णय के अधिकार से आप क्या समझते हैं? किस प्रकार यह विचार राष्ट्र-राज्यों के निर्माण और उनको मिल रही चुनौती में परिणत होता है?

उत्तर:

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अधिकार वह सिद्धांत है जिसके अनुसार प्रत्येक राष्ट्र को अपनी राजनीतिक स्थिति और शासन व्यवस्था स्वयं निर्धारित करने का अधिकार होता है। इसका अर्थ है कि किसी भी बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप के बिना राष्ट्र अपने भविष्य का निर्णय स्वयं ले सकता है। यह विचार राष्ट्र-राज्यों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि इससे विभिन्न जातीय, सांस्कृतिक और भाषाई समूहों को अपनी अलग पहचान और राजनीतिक स्वायत्तता प्राप्त होती है। हालांकि, यह अधिकार कभी-कभी राष्ट्र-राज्यों के भीतर अलगाववादी आंदोलनों और संघर्षों को जन्म देता है, जिससे राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता को चुनौती मिलती है। इसलिए राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अधिकार राष्ट्र-राज्यों के निर्माण के साथ-साथ उनकी स्थिरता के लिए भी एक चुनौती बन जाता है।

व्याख्या:

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अधिकार राष्ट्रों को राजनीतिक स्वतंत्रता देता है, जो राष्ट्र-राज्यों के निर्माण में सहायक होता है। परन्तु यह अधिकार कभी-कभी अलगाववादी आंदोलनों को जन्म देता है, जिससे राष्ट्र-राज्यों को चुनौती मिलती है।

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Q3.हम देख चुके हैं कि राष्ट्रवाद लोगों को जोड़ भी सकता है और तोड़ भी सकता है। उन्हें मुक्त कर सकता है और उनमें कटुता और संघर्ष भी पैदा कर सकता है। उदाहरणों के साथ उत्तर दीजिए।

उत्तर:

राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना है जो लोगों को एक साझा पहचान और उद्देश्य के लिए जोड़ती है। उदाहरण के लिए, भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवाद ने लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट किया और उन्हें स्वतंत्रता दिलाई। इसी प्रकार, जर्मनी और इटली के राष्ट्रवाद ने उनके एकीकरण में मदद की। दूसरी ओर, राष्ट्रवाद कभी-कभी विभाजन और संघर्ष का कारण भी बनता है। जैसे, पूर्वी यूरोप में राष्ट्रवादी भावनाओं ने जातीय संघर्ष और युद्धों को जन्म दिया। भारत में भी विभाजन के समय धार्मिक राष्ट्रवाद ने कटुता और संघर्ष को बढ़ावा दिया। इसलिए राष्ट्रवाद दोनों तरह की भूमिका निभा सकता है - एकता और संघर्ष दोनों।

व्याख्या:

राष्ट्रवाद लोगों को एकजुट कर सकता है जैसे स्वतंत्रता संग्राम में, परन्तु यह कटुता और संघर्ष भी पैदा कर सकता है जैसे विभाजन के समय हुआ।

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Q4.वंश, भाषा, धर्म या नस्ल में से कोई भी पूरे विश्व में राष्ट्रवाद के लिए साझा कारण होने का दावा नहीं कर सकता। टिप्पणी कीजिए।

उत्तर:

वंश, भाषा, धर्म या नस्ल जैसे कारक राष्ट्रवाद के लिए आधार हो सकते हैं, लेकिन वे सार्वभौमिक साझा कारण नहीं हैं क्योंकि विभिन्न राष्ट्रों में ये कारक अलग-अलग प्रभाव डालते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ राष्ट्रों में भाषा राष्ट्रवाद का मुख्य आधार होती है, जबकि अन्य में धर्म या वंश अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा, कई राष्ट्रों में ये कारक मिश्रित रूप में पाए जाते हैं। इसलिए कोई भी एक कारक पूरे विश्व में राष्ट्रवाद के लिए साझा कारण नहीं बन सकता। राष्ट्रवाद के कारण सामाजिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों पर निर्भर करते हैं।

व्याख्या:

राष्ट्रवाद के लिए कोई एकल आधार सार्वभौमिक नहीं है क्योंकि विभिन्न राष्ट्रों में वंश, भाषा, धर्म या नस्ल की भूमिका अलग-अलग होती है।

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Q5.राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रेरित करने वाले कारकों पर सोदाहरण रोशनी डालिए।

उत्तर:

राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रेरित करने वाले कई कारक होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं: (1) सांस्कृतिक कारक जैसे भाषा, धर्म, परंपराएं; (2) ऐतिहासिक अनुभव जैसे उपनिवेशवाद या विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष; (3) राजनीतिक कारक जैसे स्वतंत्रता की आकांक्षा और स्वशासन की मांग; (4) आर्थिक कारक जैसे संसाधनों का नियंत्रण और विकास की इच्छा; (5) सामाजिक कारक जैसे समानता और न्याय की मांग। उदाहरण के लिए, भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम ने राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रबल किया। इसी प्रकार, फ्रांस में फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा दिया।

व्याख्या:

राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रेरित करने वाले कारक सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक होते हैं, जो लोगों को एकजुट करते हैं।

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Q6.संघर्षरत राष्ट्रवादी आकांक्षाओं के साथ बर्ताव करने में तानाशाही की अपेक्षा लोकतंत्र अधिक समर्थ होता है। कैसे?

उत्तर:

लोकतंत्र में विभिन्न समूहों की आवाज़ सुनी जाती है और उनके हितों का प्रतिनिधित्व होता है, जिससे संघर्षरत राष्ट्रवादी आकांक्षाओं को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का अवसर मिलता है। लोकतंत्र में बहुलतावाद और सहिष्णुता होती है, जो अलग-अलग पहचान और विचारों को स्वीकार करती है। इसके विपरीत, तानाशाही में सत्ता केंद्रीकृत होती है और विरोध को दबाया जाता है, जिससे राष्ट्रवादी संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकते हैं। इसलिए लोकतंत्र संघर्षरत राष्ट्रवादी आकांक्षाओं के साथ बेहतर तरीके से बर्ताव कर सकता है क्योंकि यह संवाद, समझौता और समावेशन को प्रोत्साहित करता है।

व्याख्या:

लोकतंत्र में बहुलतावाद और संवाद के माध्यम से राष्ट्रवादी संघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जा सकता है, जबकि तानाशाही में दबाव और दमन से संघर्ष बढ़ सकते हैं।

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Q7.आपको राय में राष्ट्रवाद की सीमाएँ क्या हैं?

उत्तर:

राष्ट्रवाद की सीमाएँ निम्नलिखित हैं: (1) यह कभी-कभी कटुता और असहिष्णुता को बढ़ावा देता है, जिससे सामाजिक और धार्मिक संघर्ष होते हैं; (2) राष्ट्रवाद के कारण अलगाववादी और क्षेत्रीय संघर्ष उत्पन्न हो सकते हैं; (3) यह वैश्विक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय समझ को बाधित कर सकता है; (4) अत्यधिक राष्ट्रवाद से युद्ध और हिंसा की संभावना बढ़ जाती है; (5) यह व्यक्तिगत और सामाजिक विविधता को दबा सकता है। इसलिए राष्ट्रवाद के सकारात्मक पहलू होने के बावजूद इसकी सीमाओं को समझना आवश्यक है ताकि इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सके।

व्याख्या:

राष्ट्रवाद की सीमाएँ सामाजिक असहिष्णुता, संघर्ष, वैश्विक सहयोग में बाधा, युद्ध की संभावना और विविधता का दमन हैं।

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Q8.राष्ट्रवाद शब्द के सामान्य अर्थ में क्या समझा जाता है और गणतंत्र दिवस की परेड भारतीय राष्ट्रवाद का किस प्रकार प्रतीक है?

उत्तर:

राष्ट्रवाद आमतौर पर देशभक्ति, राष्ट्रीय ध्वज और देश के लिए बलिदान से जुड़ी भावना है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक है जो सत्ता, शक्ति और विविधता की भावना को दर्शाती है।

व्याख्या:

राष्ट्रवाद का सामान्य अर्थ देश के प्रति गहरी निष्ठा और प्रेम है। गणतंत्र दिवस की परेड में विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों का प्रदर्शन होता है, जो भारत की विविधता और एकता को दर्शाता है। यह परेड लोगों में राष्ट्र के प्रति गर्व और एकता की भावना जगाती है।

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