NCERTCh 7निःशुल्क

Chapter 7

🎓 Class 11📖 Bhartiya Airthryavstha Ka Vikas📖 6 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~9 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 8Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

7.1 परिचय

व्याख्या

7.1 परिचय

इस अनुभाग में पर्यावरण और धारणीय विकास की पृष्ठभूमि और आवश्यकता को समझाया गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के साथ-साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। आर्थिक विकास के लिए संसाधनों का अत्यधिक दोहन और औद्योगीकरण के कारण पर्यावरण की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। वैश्वीकरण के युग में उच्च आर्थिक संवृद्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। इस अध्याय को तीन भागों में विभाजित किया गया है: पहला भाग पर्यावरण के कार्यों और उसकी भूमिका पर केंद्रित है, दूसरा भाग भारत में पर्यावरण की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करता है, और तीसरा भाग धारणीय विकास के लिए आवश्यक कदमों और रणनीतियों पर विचार करता है। मानव प्रजाति आधुनिक तकनीक के माध्यम से पर्यावरण में गहरे और अपरिवर्तनीय प्रभाव डाल रही है, जो कि पर्यावरणीय संकट की ओर ले जाता है। इसलिए, आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और धारणीय विकास पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

  • आर्थिक विकास के कारण पर्यावरण की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
  • वैश्वीकरण के युग में धारणीय विकास की आवश्यकता बढ़ी है।
  • अध्याय को तीन भागों में विभाजित किया गया है: पर्यावरण के कार्य, भारत में पर्यावरण की स्थिति, और धारणीय विकास के उपाय।
  • मानव प्रजाति पर्यावरण में दूरगामी और अपरिवर्तनीय प्रभाव डाल रही है।
  • 📌 पर्यावरण: जीवित और निर्जीव तत्वों का समग्र तंत्र जो एक-दूसरे को प्रभावित करता है।
  • 📌 धारणीय विकास: ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के संसाधनों की पूर्ति क्षमता को प्रभावित न करे।

7.2 पर्यावरण परिभाषा और कार्य

व्याख्या

7.2 पर्यावरण परिभाषा और कार्य

पर्यावरण को जैविक (biotic) और अजैविक (abiotic) तत्वों का समष्टि कहा गया है, जिसमें सभी जीवित प्राणी, पौधे, सूक्ष्मजीव और निर्जीव तत्व जैसे हवा, पानी, भूमि आदि शामिल हैं। पर्यावरण के चार मुख्य कार्य हैं: संसाधनों की पूर्ति, अवशेषों का समायोजन, जीवन के लिए आवश्यक जैविक विविधता प्रदान करना, और सौंदर्य सेवाएँ प्रदान करना। संसाधन पूर्ति में नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधन शामिल होते हैं। नवीकरणीय संसाधन जैसे पेड़ और मछलियाँ पुनः उत्पन्न होते रहते हैं, जबकि गैर-नवीकरणीय संसाधन जैसे जीवाश्म ईंधन सीमित हैं। पर्यावरण तब तक अपने कार्यों को सही ढंग से कर सकता है जब तक संसाधनों का दोहन उसकी धारण क्षमता के भीतर हो। धारण क्षमता का अर्थ है पर्यावरण की वह सीमा जिसमें वह संसाधनों का पुनर्निर्माण और प्रदूषण का अवशोषण कर सकता है। वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण, और उपभोग की बढ़ती मांग के कारण पर्यावरण की धारण क्षमता पर अत्यधिक दबाव है, जिससे पर्यावरण संकट उत्पन्न हो रहा है। इस अनुभाग में जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण के कारण होने वाले रोगों का एक सारणीबद्ध विवरण भी दिया गया है। **Table on page 3 (3×3)** | वायु प्रदूषण | जल प्रदूषण | ध्वनि प्रदूषण | | --- | --- | --- | | दमा | हैजा | | | | | | **Table on page 8 (7×4)** | ट्रक | स्टील और रबर | खनिज | पृथ्वी | | --- | --- | --- | --- | | स्टील | लोहा | वन | पृथ्वी | | रबर | वृक्ष | वृक्ष | पृथ्वी | | पुस्तकें | कागज | वृक्ष | पृथ्वी | | वस्त्र | कपास | पौधा | प्रकृति | | पेट्रोल | पृथ्वी | खनिज | पृथ्वी | | मशीनें | लोहा | खनिज | पृथ्वी |

  • पर्यावरण में जैविक और अजैविक घटक शामिल हैं।
  • पर्यावरण के चार मुख्य कार्य हैं: संसाधन पूर्ति, अवशेष समायोजन, जैविक विविधता प्रदान करना, और सौंदर्य सेवाएँ।
  • नवीकरणीय संसाधन पुनः उत्पन्न होते हैं, गैर-नवीकरणीय संसाधन सीमित होते हैं।
  • पर्यावरण की धारण क्षमता संसाधनों के दोहन और प्रदूषण के अवशोषण की सीमा निर्धारित करती है।
  • जनसंख्या वृद्धि और औद्योगीकरण ने पर्यावरण पर दबाव बढ़ाया है।
  • 📌 नवीकरणीय संसाधन: ऐसे संसाधन जो प्राकृतिक रूप से पुनः बनते रहते हैं।
  • 📌 गैर-नवीकरणीय संसाधन: ऐसे संसाधन जो उपयोग के बाद समाप्त हो जाते हैं।
  • 📌 धारण क्षमता: पर्यावरण की वह सीमा जिसमें वह संसाधनों का पुनर्निर्माण और प्रदूषण का अवशोषण कर सकता है।

7.3 भारत की पर्यावरण स्थिति

व्याख्या

7.3 भारत की पर्यावरण स्थिति

भारत प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध देश है, जिसमें उपजाऊ भूमि, नदियाँ, वन, खनिज भंडार, और समुद्री क्षेत्र शामिल हैं। दक्षिण भारत के पठार की काली मिट्टी कपास की खेती के लिए उपयुक्त है, और गंगा मैदान विश्व के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में से एक है।

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1997 में_____में आयोजित जलवायुपरिवर्तन पर संयुक्तराष्ट्र का एक सम्मेलन, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक वार्मिंग से लड़ने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता हुआ, जिसने औद्योगिक देशों द्वारा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी का आह्वान किया।
A.चीन
B.अमेरीका
C.जापान
D.ब्राज़िल

उत्तर:

जापान

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Q2.इसके अलावा क्या अजैविक तत्व हैं:
A.पानी
B.भूमि
C.वायु
D.पौधे

उत्तर:

पौधे

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Q3.पर्यावरणीय समस्याओं के संबंध में जब हम कहते हैं कि "हम विश्व स्तर पर सोचें, स्थानीय रूप से कार्य करें" तो इसका क्या मतलब है
A.वैश्विक पर्यावरणीय समस्याएं आवश्यक मुद्दे हैं
B.वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय समस्याओं पर विचार किया जाना चाहिए
C.वैश्विक स्तर पर व्यापक शोध और सोच को आगे बढ़ाया गया है
D.स्थानीय गतिविधियों के वैश्विक प्रभाव के बारे में सोचें

उत्तर:

स्थानीय गतिविधियों के वैश्विक प्रभाव के बारे में सोचें

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Q4.भारत _______ और ______ पावर संयंत्रों पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
A.दिया गया कोई भी नहीं
B.थर्मल, हाइड्रो
C.सीएनजी, सौर
D.सौर, गोबर गैस

उत्तर:

थर्मल, हाइड्रो

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Q5.कौन सा विकल्प सही है, जब हम केवल सतत विकास के तीन में से दो स्तंभों को पूरा करते हैं
A.आर्थिक + पर्यावरणीय स्थिरता = व्यवहार्य
B.सामाजिक + पर्यावरणीय स्थिरता = कमजोर
C.सामाजिक + आर्थिक स्थिरता = न्यायसंगत
D.उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

उपरोक्त में से कोई नहीं

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Q6.'सतत विकास' शब्द किस वर्ष अस्तित्व में आया?
A.1992
B.1978
C.1980
D.1987

उत्तर:

1980

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Q7.भूनिर्माण के लिए दूसरा नाम क्या है
A.कटौती
B.बहाली
C.टॉपसॉइल निकालना
D.पुनर्स्थापित करें

उत्तर:

बहाली

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Q8.पारा और सीसा विषाक्त तत्व हैं, जो कारण बनता है
A.शोर प्रदूषण
B.वायु प्रदूषण
C.जल प्रदूषण
D.भूमि संदूषण

उत्तर:

भूमि संदूषण

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