NCERTCh 7निःशुल्क

Chapter 7

🎓 Class 12📖 Bharat main Samajik Parivartan aur Vikas📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 8Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

जनसंपर्क साधन और जनसंचार

व्याख्या

जनसंपर्क साधन और जनसंचार

मास मीडिया या जनसंपर्क के साधन हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इनमें टेलीविज़न, समाचारपत्र, रेडियो, पत्रिकाएँ, फ़िल्में, इंटरनेट, मोबाइल फोन आदि शामिल हैं। इन्हें मास मीडिया इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये एक साथ बड़ी संख्या में दर्शकों, श्रोताओं और पाठकों तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं। आज की युवा पीढ़ी के लिए जनसंपर्क के बिना जीवन की कल्पना करना कठिन है। उदाहरण के लिए, सुबह उठते ही अधिकांश लोग रेडियो या टीवी चालू करते हैं, बच्चे मोबाइल फोन पर मैसेज या कॉल चेक करते हैं। नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न सेवाएँ देने वाले लोग मोबाइल फोन पर उपलब्ध रहते हैं। टेलीविज़न सेट दुकानों में भी आम हो गया है, जिससे ग्राहक मनोरंजन या खेल के विषय में बातचीत करते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय इंटरनेट और टेलीफोन के माध्यम से अपने परिवार से जुड़े रहते हैं। इस प्रकार, जनसंपर्क के साधनों ने सामाजिक जीवन के अनेक पहलुओं को प्रभावित किया है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संदर्भों के अनुसार मास मीडिया की संरचना और विषय-वस्तु में परिवर्तन होते रहते हैं। स्वतंत्रता के बाद राज्य और विकास की सोच ने मीडिया को प्रभावित किया, जबकि 1990 के बाद भूमंडलीकरण के दौर में बाजार की भूमिका बढ़ी। मास मीडिया बड़े पूंजी निवेश और औपचारिक संगठन की मांग करता है, जिससे यह अन्य संचार माध्यमों से भिन्न होता है। साथ ही, विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग मास मीडिया का उपयोग कर सकते हैं, हालांकि डिजिटल अंतर के कारण कुछ असमानताएँ भी हैं।

  • मास मीडिया में टेलीविज़न, रेडियो, समाचारपत्र, पत्रिकाएँ, इंटरनेट आदि शामिल हैं।
  • मास मीडिया एक साथ बड़ी संख्या में लोगों तक सूचनाएँ पहुँचाता है।
  • मास मीडिया की संरचना और विषय-वस्तु सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संदर्भों से प्रभावित होती है।
  • स्वतंत्रता के बाद राज्य की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जबकि 1990 के बाद बाजार की भूमिका बढ़ी।
  • मास मीडिया बड़े पूंजी निवेश और औपचारिक संगठन की मांग करता है।
  • डिजिटल अंतर के कारण सभी वर्गों को समान रूप से मास मीडिया तक पहुँच नहीं है।
  • 📌 मास मीडिया: जनसंपर्क के वे साधन जो बड़ी संख्या में लोगों तक सूचना पहुँचाते हैं।
  • 📌 जनसंचार: व्यापक स्तर पर सूचना का आदान-प्रदान।
  • 📌 डिजिटल अंतर: तकनीकी साधनों तक पहुँच में असमानता।

7.1 आधुनिक मास मीडिया का प्रारंभ

व्याख्या

7.1 आधुनिक मास मीडिया का प्रारंभ

आधुनिक मास मीडिया की शुरुआत मुद्रणालय (प्रिंटिंग प्रेस) के विकास से हुई। मुद्रणकला का इतिहास कई सदियों पुराना है, लेकिन आधुनिक प्रौद्योगिकियों के प्रयोग से पुस्तकें छापने का काम सबसे पहले यूरोप में जोहान गुटनबर्ग ने 1440 में शुरू किया। प्रारंभ में छपाई का काम धार्मिक पुस्तकों तक सीमित था। मुद्रणालय के विकास से सूचना का प्रसार तेज़ हुआ और लोगों में 'हम' की भावना विकसित हुई, जिससे राष्ट्रवाद का उदय हुआ। विद्वान बेनेडिक्ट ऐंडरसन के अनुसार राष्ट्र एक 'काल्पनिक समुदाय' है, जो मुद्रण माध्यमों के कारण संभव हुआ। भारत में भी 19वीं सदी में समाचारपत्रों और पत्रिकाओं ने सामाजिक सुधार और राष्ट्रवादी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ब्रिटिश शासन ने राष्ट्रवादी प्रेस पर सेंसरशिप लगाई, लेकिन समाचारपत्रों ने आंदोलन का समर्थन जारी रखा। राजा राममोहन राय ने बंगला भाषा में 1821 में 'संवाद कौमुदी' और फ़ारसी में 1822 में 'मिरात-उल-अखबार' प्रकाशित किए, जिनमें राष्ट्रवादी दृष्टिकोण स्पष्ट था। इसके बाद कई अन्य समाचारपत्र जैसे 'बॉम्बे समाचार', 'दि टाइम्स ऑफ इंडिया', 'दि पायनियर' आदि शुरू हुए। ब्रिटिश काल में रेडियो पूर्णतया सरकारी नियंत्रण में था और समाचारपत्रों तथा फ़िल्मों पर कड़ी निगरानी थी। हालांकि साक्षरता कम थी, फिर भी समाचारपत्रों का प्रभाव प्रशासनिक और वाणिज्यिक केंद्रों में अधिक था। इस प्रकार मुद्रण माध्यम ने सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

  • आधुनिक मास मीडिया की शुरुआत मुद्रणालय के विकास से हुई।
  • जोहान गुटनबर्ग ने 1440 में मुद्रणालय विकसित किया।
  • मुद्रण माध्यम ने राष्ट्रवाद और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया।
  • भारत में 19वीं सदी में समाचारपत्रों ने सामाजिक सुधार और राष्ट्रवादी आंदोलन में भूमिका निभाई।
  • ब्रिटिश शासन ने राष्ट्रवादी प्रेस पर सेंसरशिप लगाई।
  • प्रिंट मीडिया का प्रभाव प्रशासनिक और वाणिज्यिक केंद्रों में अधिक था।
  • 📌 मुद्रणालय: पुस्तकों और समाचारपत्रों को छापने की मशीन।
  • 📌 राष्ट्रवाद: अपने देश के प्रति प्रेम और एकता की भावना।
  • 📌 सेंसरशिप: सूचना पर नियंत्रण और प्रतिबंध।

7.2 स्वतंत्र भारत में मास मीडिया

व्याख्या

7.2 स्वतंत्र भारत में मास मीडिया

स्वतंत्र भारत में मास मीडिया को लोकतंत्र के पहरेदार के रूप में देखा गया। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मीडिया से अपेक्षा की कि वह आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास की भावना को बढ़ावा दे। स्वतंत्रता के बाद मीडिया ने सामाजिक कुरीतियों जैसे

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. आपके विचार से क्या पाठक बदल गए हैं अथवा समाचार पत्र बदल गए हैं? चर्चा करें। 2. ‘सूचनारंजन’ शब्द पर चर्चा करें। क्या आप इसके कुछ उदाहरण सोच सकते हैं? आपके विचार से सूचनारंजन का क्या प्रभाव होगा?

उत्तर:

1. पाठक और समाचार पत्र दोनों में समय के साथ बदलाव आया है। पाठकों की रुचियाँ, प्राथमिकताएँ और उनकी जानकारी प्राप्त करने के तरीके बदल गए हैं। डिजिटल मीडिया के आने से पाठकों की आदतें प्रभावित हुई हैं। समाचार पत्रों ने भी अपने स्वरूप, विषय-वस्तु और प्रस्तुति में बदलाव किया है ताकि वे पाठकों की बदलती जरूरतों को पूरा कर सकें। इसलिए कहा जा सकता है कि पाठक और समाचार पत्र दोनों बदल गए हैं। 2. ‘सूचनारंजन’ का अर्थ है सूचना और मनोरंजन का संयोजन। यह वह माध्यम है जिसमें सूचना को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया जाता है ताकि वह अधिक आकर्षक और प्रभावी हो। उदाहरण के लिए, समाचार चैनलों पर मनोरंजक कार्यक्रमों के बीच समाचार देना, या सोशल मीडिया पर सूचनात्मक वीडियो को मनोरंजक रूप में प्रस्तुत करना। सूचनारंजन का प्रभाव यह होता है कि सूचना अधिक लोगों तक पहुँचती है, लेकिन कभी-कभी इससे सूचना की गंभीरता कम हो सकती है और केवल मनोरंजन पर ध्यान केंद्रित हो सकता है।

व्याख्या:

प्रश्न 1 में पाठकों और समाचार पत्रों के बदलने के कारणों और प्रभावों पर चर्चा की गई है। प्रश्न 2 में सूचनारंजन की परिभाषा, उदाहरण और उसके प्रभावों को समझाया गया है। दोनों प्रश्नों के उत्तर में सामाजिक और तकनीकी परिवर्तनों का समावेश है।

MediumNCERT
Q2.मास मीडिया या जनसंपर्क के साधन क्या होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

मास मीडिया वे जनसंपर्क के साधन होते हैं जो एक साथ बड़ी संख्या में दर्शकों, श्रोताओं और पाठकों तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं। उदाहरण के लिए, टेलीविज़न, समाचारपत्र, रेडियो, पत्रिकाएँ, फ़िल्में, इंटरनेट और मोबाइल फोन।

व्याख्या:

मास मीडिया का अर्थ है ऐसे संचार माध्यम जो बड़े पैमाने पर सूचना प्रसारित करते हैं। ये साधन समाज के विभिन्न वर्गों तक सूचनाएँ पहुंचाने में सक्षम होते हैं, जैसे टेलीविज़न और रेडियो। उदाहरण के लिए, सुबह उठते ही लोग समाचारपत्र पढ़ते हैं या मोबाइल पर मैसेज चेक करते हैं।

Easy
Q3.जनसंपर्क के साधनों के अभाव में जीवन कैसा होता है? अपने दैनिक जीवन के उदाहरण के साथ समझाइए।

उत्तर:

जनसंपर्क के साधनों के अभाव में सूचना प्राप्ति और संचार में बाधा आती है। उदाहरण के लिए, यदि मोबाइल फोन, इंटरनेट या समाचारपत्र न हो तो लोगों को ताज़ा खबरें, सरकारी सूचनाएँ और मनोरंजन प्राप्त करना कठिन हो जाता है। इससे सामाजिक संपर्क और कार्य में भी कठिनाई होती है।

व्याख्या:

जनसंपर्क के साधनों के बिना लोगों को सूचना प्राप्त करने में देरी होती है और सामाजिक, आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं। उदाहरण के लिए, मोबाइल फोन के बिना आप तुरंत किसी से संपर्क नहीं कर पाते। पुराने समय में लोग पत्र या संदेशवाहक के माध्यम से ही सूचना प्राप्त करते थे, जो धीमा था।

Medium
Q4.मास मीडिया को "काल्पनिक समुदाय" क्यों कहा जाता है? बेनेडिक्ट ऐंडरसन के विचारों के आधार पर समझाइए।

उत्तर:

a) परिचय: मास मीडिया ने लोगों में 'हम' की भावना विकसित की जिससे राष्ट्रवाद का उदय हुआ। b) काल्पनिक समुदाय: बेनेडिक्ट ऐंडरसन के अनुसार, राष्ट्र एक 'काल्पनिक समुदाय' है क्योंकि इसके सदस्य एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी एक परिवार जैसा महसूस करते हैं। c) मुद्रण माध्यम की भूमिका: मुद्रणालय के माध्यम से समाचार और विचारों का प्रसार हुआ, जिसने लोगों को एक साझा पहचान दी। d) सामाजिक प्रभाव: इससे अपरिचित लोगों के बीच मैत्री और राष्ट्रीय भावना बढ़ी। e) निष्कर्ष: इस प्रकार, मास मीडिया ने राष्ट्र को एक काल्पनिक लेकिन सशक्त समुदाय बनाया।

व्याख्या:

मास मीडिया ने सूचना और विचारों का व्यापक प्रसार किया जिससे लोगों के बीच एक साझा पहचान और भावना विकसित हुई। बेनेडिक्ट ऐंडरसन ने इसे 'काल्पनिक समुदाय' कहा क्योंकि लोग एक-दूसरे को नहीं जानते, फिर भी एक राष्ट्र के सदस्य होने का अनुभव करते हैं। मुद्रण माध्यम ने इस भावना को मजबूत किया।

Hard
Q5.स्वतंत्र भारत में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मीडिया से क्या अपेक्षाएँ रखीं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

जवाहरलाल नेहरू ने मीडिया से अपेक्षा की कि वह लोकतंत्र के पहरेदार की भूमिका निभाए और लोगों में आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रीय विकास की भावना बढ़ाए। उदाहरण के लिए, मीडिया ने सामाजिक कुरीतियों जैसे अस्पृश्यता और बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाई।

व्याख्या:

नेहरू ने मीडिया को लोकतंत्र की सुरक्षा करने वाला माना और उसे विकास तथा सामाजिक सुधार के लिए प्रेरित किया। मीडिया ने सरकारी योजनाओं और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा कर जनता को जागरूक किया। उदाहरण के लिए, आकाशवाणी ने हरित क्रांति के दौरान किसानों को नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी।

Medium
Q6.रेडियो प्रसारण के विकास में ट्रांजिस्टर क्रांति का क्या महत्व था? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

ट्रांजिस्टर क्रांति ने रेडियो सेटों को बैटरी से चलने वाला और सस्ता बना दिया, जिससे वे अधिक सुलभ और पोर्टेबल हो गए। उदाहरण के लिए, 1960 के दशक में ट्रांजिस्टर रेडियो ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रेडियो सुनने वालों की संख्या बढ़ाई।

व्याख्या:

पहले रेडियो सेट महंगे और बिजली पर निर्भर थे, जिससे उनकी पहुँच सीमित थी। ट्रांजिस्टर रेडियो ने इन बाधाओं को दूर किया, जिससे रेडियो प्रसारण का विस्तार हुआ और सूचना अधिक लोगों तक पहुँची। इससे रेडियो मीडिया का प्रभाव बढ़ा।

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Q7.भारतीय मोबाइल फोन बाजार में कौन-कौन से ब्रांड सबसे लोकप्रिय हैं? निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए। A) Nokia, Samsung, Panasonic B) Apple, Samsung, LG C) Motorola, Sony Ericsson, Apple D) LG, Panasonic, Nokia
A.A) Nokia, Samsung, Panasonic
B.B) Apple, Samsung, LG
C.C) Motorola, Sony Ericsson, Apple
D.D) LG, Panasonic, Nokia

उत्तर:

Nokia, Samsung, Panasonic

व्याख्या:

भारत में मोबाइल फोन बाजार में Nokia और Samsung सबसे लोकप्रिय ब्रांड हैं, इसके बाद Panasonic आता है। यह वैश्विक पसंद के अनुरूप है। Apple और LG की लोकप्रियता कम है।

Easy
Q8.भारत में मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं की संख्या किस कारण से तेजी से बढ़ी है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

भारत में मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं की संख्या इसलिए तेजी से बढ़ी क्योंकि मोबाइल फोन ने संचार को सुलभ और त्वरित बना दिया है। उदाहरण के लिए, नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न सेवाएँ देने वाले लोग मोबाइल फोन पर उपलब्ध रहते हैं जिससे संपर्क आसान होता है।

व्याख्या:

मोबाइल फोन ने दूरसंचार को सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाया है। इससे व्यापार, सामाजिक संपर्क और सूचना का आदान-प्रदान तेज हुआ है। भारत में 176 मिलियन से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं जो इसे विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बनाता है।

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