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Chapter 6

🎓 Class 12📖 Samashty Arthshastra Ek Parichay📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 6

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

खुली अर्थव्यवस्था

व्याख्या

खुली अर्थव्यवस्था

खुली अर्थव्यवस्था वह आर्थिक व्यवस्था है जो अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं और वित्तीय परिसंपत्तियों के माध्यम से अंतर्व्यवहार करती है। बंद अर्थव्यवस्था के विपरीत, जहाँ देश के बाहर कोई लेन-देन नहीं होता, खुली अर्थव्यवस्था में निर्यात, आयात, विदेशी निवेश और श्रम आवागमन जैसे कई माध्यमों से विश्व के साथ जुड़ाव होता है। इस अध्याय की शुरुआत में बताया गया है कि खुली अर्थव्यवस्था के तीन मुख्य जुड़ाव हैं: 1) निर्गत बाजार, जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है; 2) वित्तीय बाजार, जहाँ विदेशी परिसंपत्तियों का क्रय-विक्रय होता है; 3) श्रम बाजार, जहाँ श्रमिकों का आवागमन होता है। हालांकि, इस अध्याय में मुख्य रूप से पहले दो पहलुओं पर ध्यान दिया गया है। खुली अर्थव्यवस्था के कारण उपभोक्ताओं और उत्पादकों के पास घरेलू और विदेशी वस्तुओं के बीच चयन की स्वतंत्रता होती है। उदाहरण के लिए, भारतीय उपभोक्ता विश्व के विभिन्न देशों में निर्मित वस्तुओं का उपभोग कर सकते हैं और भारतीय उत्पादकों द्वारा निर्मित वस्तुएं विदेशों को निर्यात की जाती हैं। इस प्रकार, विदेशी व्यापार घरेलू मांग को प्रभावित करता है। जब भारतीय विदेशी वस्तुओं को खरीदते हैं, तो यह घरेलू मांग को कम करता है क्योंकि यह आय के वर्तुल प्रवाह से रिसाव के रूप में काम करता है। इसके विपरीत, जब भारत विदेशों को वस्तुएं निर्यात करता है, तो यह घरेलू मांग को बढ़ाता है क्योंकि यह आय के वर्तुल प्रवाह में अंतः क्षेपण के रूप में जुड़ता है। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए मुद्रा का विनिमय आवश्यक होता है। विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न देशों की मुद्राओं का विनिमय होता है। किसी मुद्रा की क्रय शक्ति स्थिर रहनी चाहिए ताकि वह अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में स्वीकार्य हो सके। इस विश्वास के अभाव में कोई मुद्रा अंतरराष्ट्रीय विनिमय माध्यम के रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी। इतिहास में, मुद्राओं को सोने या अन्य मुद्राओं से जोड़ा गया था ताकि उनकी स्थिरता बनी रहे। लेकिन आधुनिक समय में, मुद्रा विनिमय दरें बाजार की माँग और पूर्ति पर निर्भर करती हैं। इस विषय को आगे के खंडों में विस्तार से समझाया गया है।

  • खुली अर्थव्यवस्था में देश अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं और वित्तीय परिसंपत्तियों का व्यापार करता है।
  • तीन प्रकार के जुड़ाव होते हैं: निर्गत बाजार, वित्तीय बाजार और श्रम बाजार।
  • विदेशी वस्तुओं की खरीद घरेलू मांग में कमी करती है, जबकि निर्यात घरेलू मांग को बढ़ाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए मुद्रा विनिमय आवश्यक है और मुद्रा की क्रय शक्ति स्थिर होनी चाहिए।
  • मुद्रा विनिमय दरें बाजार की माँग और पूर्ति पर निर्भर करती हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्रणाली मुद्राओं की स्थिरता बनाए रखने के लिए स्थापित की गई है।
  • 📌 खुली अर्थव्यवस्था: ऐसी अर्थव्यवस्था जो अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं और वित्तीय परिसंपत्तियों का व्यापार करती है।
  • 📌 निर्गत बाजार: वस्तुओं और सेवाओं के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बाजार।
  • 📌 वित्तीय बाजार: विदेशी परिसंपत्तियों के क्रय-विक्रय का बाजार।

6.1 अदायगी-संतुलन

व्याख्या

6.1 अदायगी-संतुलन

अदायगी-संतुलन (Balance of Payments - BOP) किसी देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच एक निश्चित अवधि में वस्तुओं, सेवाओं और परिसंपत्तियों के लेनदेन का लेखा-जोखा है। यह देश के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है। अदायगी-संतुलन के दो मुख्य खाते होते हैं: चालू खाता और पूँजी खाता। चालू खाता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार से संबंधित लेनदेन को दर्शाता है। इसमें वस्तुओं के निर्यात और आयात, सेवाओं के व्यापार (उपदान और गैर-उपदान आय), और अंतरण भुगतान शामिल होते हैं। अंतरण भुगतान वे निशुल्क प्राप्तियाँ हैं जो किसी देश के निवासियों को विदेशों से मिलती हैं, जैसे उपहार, अनुदान और प्रेषित धन। पूँजी खाता अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों के लेनदेन का लेखा है। परिसंपत्तियाँ मुद्रा, स्टॉक, बंधपत्र, सरकारी ऋण आदि हो सकती हैं। परिसंपत्तियों की खरीद पूँजी खाते में डेबिट होती है क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह होता है, जबकि परिसंपत्तियों की बिक्री क्रेडिट होती है। पूँजी खाते में विदेशी निवेश, ऋण, और अन्य वित्तीय प्रवाह शामिल होते हैं। अदायगी-संतुलन का मूल सिद्धांत यह है कि चालू खाते में घाटा होने पर उसे पूँजी खाते के अधिक्य या विदेशी मुद्रा भंडार की बिक्री से पूरा किया जाता है। यदि देश अपनी आय से अधिक व्यय करता है, तो उसे अपनी परिसंपत्तियाँ बेचनी पड़ती हैं या उधार लेना पड़ता है। इस प्रकार, चालू खाता और पूँजी खाता का योग शून्य होना चाहिए। स्वायत्त लेनदेन वे होते हैं जो अदायगी-संतुलन की स्थिति से स्वतंत्र होते हैं, जैसे लाभ कमाना। समायोजित लेनदेन अदायगी-संतुलन की विषमता को पूरा करने के लिए होते हैं, जैसे आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग। त्रुटि और लोप खाते में उन लेनदेन को शामिल किया जाता है जो सही ढंग से रिकॉर्ड नहीं हो पाते। **Table on page 3 (2×3)** | चालू खाते का अधिक्य | संतुलित चालू खाता | चालू खाते का घाटा | | --- | --- | --- | | प्राप्तियाँ > भुगतान | प्राप्तियाँ = भुगतान | प्राप्तियाँ < भुगतान |

  • अदायगी-संतुलन देश के अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का लेखा-जोखा है।
  • मुख्य खाते: चालू खाता (वस्तु एवं सेवा व्यापार) और पूँजी खाता (वित्तीय परिसंपत्तियाँ)।
  • चालू खाते में वस्तुओं के निर्यात-आयात, सेवाओं का व्यापार और अंतरण भुगतान शामिल हैं।
  • पूँजी खाते में विदेशी निवेश, ऋण और परिसंपत्तियों का क्रय-विक्रय होता है।
  • चालू खाते का घाटा पूँजी खाते के अधिक्य से पूरा होता है।
  • स्वायत्त और समायोजित लेनदेन अदायगी-संतुलन के दो प्रकार हैं।
  • 📌 अदायगी-संतुलन: देश के अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का लेखा-जोखा।
  • 📌 चालू खाता: वस्तुओं, सेवाओं और अंतरण भुगतान का लेखा।
  • 📌 पूँजी खाता: वित्तीय परिसंपत्तियों के लेनदेन का लेखा।

6.1.1 चालू खाता

व्याख्या

6.1.1 चालू खाता

चालू खाता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार से संबंधित लेनदेन का विवरण है। इसमें वस्तुओं के निर्यात और आयात, सेवाओं के व्यापार, और अंतरण भुगतान शामिल होते हैं। वस्तुओं के व्यापार में निर्यात क्रेडिट (प्राप्तियाँ) और आयात डेबिट (भुगतान) होते हैं। सेवाओं के

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण का एक उदाहरण होगा -
A.भोजन की कीमत और खरीदी गई मात्रा के बीच संबंधों का विश्लेषण।
B.यह निर्धारित करना कि प्रत्येक व्यक्ति को कितनी आय प्रदान की जानी चाहिए|
C.भोजन का उचित मूल्य निर्धारित करना|
D.कंपनी के उत्पादन को वितरित करने का निर्णय लेना|

उत्तर:

भोजन की कीमत और खरीदी गई मात्रा के बीच संबंधों का विश्लेषण।

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Q2.निम्नलिखित में से कौन-सा एक आदर्शक अर्थशास्त्र है -
A.भारत की 30% जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है|
B.प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(FDI) में वृद्धि से भारत का सकल घरेलू उत्पाद(GDP) बढ़ा है|
C.सरकार ने मुद्रा स्फीति की जाँच करने के लिए रेपो दर में वृद्धि की|
D.भारत में आय का समान वितरण निर्धनता की समस्या को हल करेगा।

उत्तर:

भारत में आय का समान वितरण निर्धनता की समस्या को हल करेगा।

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Q3.उपभोक्ता व्यवहार अध्ययन है -
A.व्यष्टिअर्थशास्त्र
B.समष्टि अर्थशास्त्र
C.आय सिद्धांत
D.उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

व्यष्टिअर्थशास्त्र

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Q4.आय और रोजगार किस सिद्धांत का हिस्सा है?
A.समष्टि अर्थशास्त्र
B.व्यष्टि अर्थशास्त्र
C.व्यष्टि तथा समष्टि दोनों
D.उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

समष्टि अर्थशास्त्र

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Q5.निम्न में से कौन व्यष्टिअर्थशास्त्र का उदाहरण है?
A.भारत में बेरोजगारी की समस्या
B.देश में बढ़ती कीमत स्तर
C.आय की असमानताओं में वृद्धि
D.उपर्युक्त सभी

उत्तर:

उपर्युक्त सभी

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Q6.व्यष्टि अर्थशास्त्रअध्ययन है -
A.एक उपभोक्ता
B.एक उद्योग
C.एक निर्माता
D.उपर्युक्त सभी

उत्तर:

उपर्युक्त सभी

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Q7.सीमांत अवसर लागत स्थिर होने पर उत्पादन संभावना वक्र (PPC) का आकार क्या होगा?
A.नतोदर (concave)
B.उन्नतोदर (convex)
C.पीछे की ओर झुका हुआ
D.सीधी रेखा

उत्तर:

सीधी रेखा

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Q8.कोई भी बिंदु जो उत्पादन संभावना वक्र के अंदर है वो दर्शाता है -
A.संसाधनों की वृद्धि
B.संसाधनों का पूर्ण रोजगार
C.संसाधनों काअल्प उपयोग
D.इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

संसाधनों काअल्प उपयोग

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