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Chapter 6

🎓 Class 11📖 Manovigyan📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 8Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

स्मृति मानव जीवन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल संज्ञानात्मक प्रक्रिया है, जो हमारे अनुभवों, ज्ञान और सूचनाओं को संग्रहित, संरक्षित और पुनः प्राप्त करने की क्षमता प्रदान करती है। यह हमारे व्यक्तित्व, निर्णय लेने, समस्या समाधान, और सामाजिक संबंधों के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाती है। स्मृति के बिना हमारा अस्तित्व और अनुभव संभव नहीं है। स्मृति के अध्ययन का इतिहास लगभग सौ वर्षों पुराना है, जिसकी शुरुआत हर्मन एबिन्गहास (Hermann Ebbinghaus) ने की, जिन्होंने स्वयं पर प्रयोग कर स्मृति की गति और विस्मरण की प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया। स्मृति की प्रक्रिया में तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं: कूट संकेतन (encoding), भंडारण (storage), और पुनरुद्धार (retrieval)। कूट संकेतन वह प्रक्रिया है जिसमें सूचना को स्मृति तंत्र में पहली बार पंजीकृत किया जाता है। भंडारण में इस सूचना को एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रखा जाता है। पुनरुद्धार वह प्रक्रिया है जिसमें संग्रहित सूचना को आवश्यकतानुसार स्मृति से वापस प्राप्त किया जाता है। स्मृति की विफलता किसी भी एक या अधिक अवस्थाओं में हो सकती है। इस अध्याय में हम स्मृति के स्वरूप, प्रकार, विस्मरण के कारण, और स्मृति सुधार के उपायों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। **Table on page 5 (6×2)** | सूची | अंक | | --- | --- | | 1 (6 अंक) | 2-6-3-8-3-4 | | 2 (7 अंक) | 7-4-8-2-4-1-2 | | 3 (8 अंक) | 4-3-7-2-9-0-3-6 | | 4 (10 अंक) | 9-2-4-1-7-8-2-6-5-3 | | 5 (12 अंक) | 8-2-5-4-7-4-7-7-3-9-1-6 | **Table on page 11 (7×4)** | तालिका 6.1 पूर्वलक्षी तथा अग्रलक्षी अवरोध के लिए प्रायोगिक अभिकल्प | | | | | --- | --- | --- | --- | | पूर्वलक्षी अवरोध | चरण 1 | चरण 2 | परीक्षण चरण | | प्रायोगिक प्रतिभागी/समूह | अधिगम A | अधिगम B | प्रत्याहान A | | नियंत्रित प्रतिभागी/समूह | अधिगम A | आराम (कोई अधिगम नहीं) | प्रत्याहान A | | अग्रलक्षी अवरोध | | | | | प्रायोगिक प्रतिभागी/समूह | अधिगम A | अधिगम B | प्रत्याहान B | | नियंत्रित प्रतिभागी/समूह | आराम (कोई अधिगम नहीं) | अधिगम B | प्रत्याहान B | **Table on page 12 (5×3)** | बकरी | भेड़ | तेंदुआ | | --- | --- | --- | | सियार | बंदर | ऊँट | | खच्चर | हिरन | गिलहरी | | घोड़ा | चौंता | भेड़िया | | साँप | खरगोश | तोता | **Table on page 12 (5×3)** | सूअर | हाथी | गधा | | --- | --- | --- | | कबूतर | कोबरा | बाघ | | मैना | शेर | बछड़ा | | भालू | लोमड़ी | कौआ | | भैंस | चूहा | |

  • स्मृति अनुभवों और सूचनाओं को संग्रहित, संरक्षित और पुनः प्राप्त करने की क्षमता है।
  • स्मृति की तीन अवस्थाएँ हैं: कूट संकेतन, भंडारण, पुनरुद्धार।
  • हर्मन एबिन्गहास ने स्मृति के वैज्ञानिक अध्ययन की शुरुआत की।
  • स्मृति सभी संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं जैसे प्रत्यक्षण, चिंतन, समस्या समाधान में महत्वपूर्ण है।
  • 📌 स्मृति: सूचना को संग्रहित, संरक्षित और पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया।
  • 📌 कूट संकेतन: सूचना को स्मृति तंत्र में पंजीकृत करने की प्रक्रिया।
  • 📌 भंडारण: सूचना को एक समय तक सुरक्षित रखने की प्रक्रिया।

स्मृति का स्वरूप

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स्मृति का स्वरूप

स्मृति की प्रक्रिया तीन अंतःसंबंधित अवस्थाओं में विभाजित होती है: कूट संकेतन, भंडारण और पुनरुद्धार। कूट संकेतन वह प्रारंभिक चरण है जिसमें बाह्य उद्दीपक द्वारा प्राप्त सूचना को मस्तिष्क में इस प्रकार पंजीकृत किया जाता है कि उसे बाद में पुनः उपयोग किया जा सके। यह प्रक्रिया ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से तांत्रिका आवेग उत्पन्न कर मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों में सूचना के पुन: प्रक्रमण की शुरुआत करती है। भंडारण वह अवस्था है जिसमें कूट संकेतन की गई सूचना को एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में उसका उपयोग किया जा सके। पुनरुद्धार वह अंतिम अवस्था है जिसमें संग्रहित सूचना को स्मृति से वापस प्राप्त किया जाता है, जो समस्या समाधान, निर्णय लेने जैसे संज्ञानात्मक कार्यों के लिए आवश्यक होता है। स्मृति की विफलता किसी भी एक या अधिक अवस्थाओं में हो सकती है, जैसे कूट संकेतन में त्रुटि, भंडारण की कमी या पुनरुद्धार में असमर्थता। इस प्रकार स्मृति एक जटिल प्रक्रिया है जो संज्ञानात्मक कार्यों के लिए आधारशिला का काम करती है।

  • स्मृति की तीन अवस्थाएँ हैं: कूट संकेतन, भंडारण, पुनरुद्धार।
  • कूट संकेतन में सूचना को मस्तिष्क में पंजीकृत किया जाता है।
  • भंडारण में सूचना को सुरक्षित रखा जाता है।
  • पुनरुद्धार में संग्रहित सूचना को वापस प्राप्त किया जाता है।
  • स्मृति की विफलता किसी भी अवस्था में हो सकती है।
  • 📌 कूट संकेतन: सूचना को स्मृति तंत्र में पंजीकृत करने की प्रक्रिया।
  • 📌 भंडारण: सूचना को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया।
  • 📌 पुनरुद्धार: संग्रहित सूचना को स्मृति से वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया।

सूचना प्रक्रमण उपागम : अवस्था मॉडल

व्याख्या

सूचना प्रक्रमण उपागम : अवस्था मॉडल

स्मृति की प्रक्रिया को समझने के लिए एटकिंसन और शिफ्रिन ने 1968 में अवस्था मॉडल प्रस्तुत किया, जो कंप्यूटर के स्मृति तंत्र से प्रेरित है। इस मॉडल के अनुसार, सूचना सबसे पहले संवेदी स्मृति में प्रवेश करती है, जहाँ उसकी संचयी क्षमता अधिक लेकिन अवधि बहुत

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.I. नीचे लिखे गए अंकों की सूची (प्रत्येक अंक) को याद करने का प्रयत्न कीजिए : 19254981121 अब इन्हें निम्न समूहों में याद करने का प्रयास कीजिए : 19254981121 अंत में इन्हें निम्नलिखित तरीके से याद कीजिए : 1² 3² 5² 7² 9² 11² आपने इनमें क्या अंतर पाया? II. नीचे की पंक्ति में दी गई सूची का एक-एक अंक प्रति सेकण्ड की गति से पढ़िए तथा अपने मित्र को उसी क्रम में अंकों को दोहराने के लिए कहिए : | सूची | अंक | | --- | --- | | 1 (6 अंक) | 2-6-3-8-3-4 | | 2 (7 अंक) | 7-4-8-2-4-1-2 | | 3 (8 अंक) | 4-3-7-2-9-0-3-6 | | 4 (10 अंक) | 9-2-4-1-7-8-2-6-5-3 | | 5 (12 अंक) | 8-2-5-4-7-4-7-7-3-9-1-6 | याद रखिए कि आपके द्वारा एक पंक्ति के सभी अंकों को पढ़ लेने के बाद आपका मित्र प्रत्याहान करेगा। आपके मित्र द्वारा प्रत्याहान की गई अंकों की सही मात

उत्तर:

I. जब आप अंकों को बिना समूह बनाए याद करने की कोशिश करते हैं, तो याद रखना कठिन होता है क्योंकि अल्पकालिक स्मृति की क्षमता सीमित होती है। समूह बनाकर याद करने (chunking) से स्मृति की क्षमता बढ़ जाती है क्योंकि आप बड़ी संख्या को छोटे-छोटे अर्थपूर्ण समूहों में बाँट देते हैं, जिससे याद रखना आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, 19254981121 को 1² 3² 5² 7² 9² 11² के रूप में याद करना अधिक सरल होता है क्योंकि ये संख्याएँ गणितीय पैटर्न (वर्ग संख्याएँ) दर्शाती हैं। II. जैसे-जैसे अंक की संख्या बढ़ती है (6 से 12 तक), आपके मित्र के लिए उन्हें सही क्रम में याद रखना कठिन होता है। यह अल्पकालिक स्मृति की सीमित क्षमता को दर्शाता है। छोटे समूहों में अंक याद करना आसान होता है, जबकि बड़ी संख्या में अंक याद रखना चुनौतीपूर्ण होता है। यह अभ्यास अल्पकालिक स्मृति की सीमा और chunking की उपयोगिता को समझने में मदद करता है।

व्याख्या:

पहले भाग में, बिना समूह बनाए याद करने पर स्मृति पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे भूलने की संभावना बढ़ जाती है। समूह बनाकर याद करने से सूचना को अर्थपूर्ण इकाइयों में बाँटना संभव होता है, जिससे स्मृति की क्षमता बढ़ती है। दूसरे भाग में, विभिन्न लंबाई की संख्याओं को याद करने का अभ्यास स्मृति की सीमा को प्रदर्शित करता है। जैसे-जैसे संख्या बढ़ती है, स्मृति पर दबाव बढ़ता है, जिससे प्रत्याहान में त्रुटियाँ होती हैं। इस प्रकार, chunking स्मृति क्षमता बढ़ाने की एक प्रभावी तकनीक है।

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Q2.1. कूट संकेतन, भंडारण और पुनरुद्धार का क्या तात्पर्य है? 2. संवेदी, अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक स्मृति तंत्र से सूचना का प्रक्रमण किस प्रकार होता है? 3. अनुरक्षण एवं विस्तृत पूर्वाभ्यास में क्या अंतर है? 4. घोषणात्मक एवं प्रक्रियामूलक स्मृतियों में क्या अंतर है? 5. विस्मरण क्यों होता है? 6. अवरोध के कारण विस्मरण, पुनरुद्धार से संबंधित विस्मरण से किस प्रकार भिन्न है? 7. स्मृति-सहायक संकेत क्या हैं? अपनी स्मृति सुधार के लिए एक योजना के बारे में सुझाव दीजिए?

उत्तर:

1. कूट संकेतन का तात्पर्य सूचना को इस प्रकार पंजीकृत करना है कि वह स्मृति तंत्र के अनुरूप हो। भंडारण का अर्थ है सूचना को एक समय तक स्मृति में रखना। पुनरुद्धार का तात्पर्य है स्मृति में रखी गई सूचना को पुनः चेतना में लाना। 2. संवेदी स्मृति में सूचना संवेदी अंगों द्वारा ग्रहण की जाती है और कुछ समय के लिए रखी जाती है। अल्पकालिक स्मृति में सूचना थोड़े समय के लिए रखी जाती है और सक्रिय रूप से प्रक्रमित होती है। दीर्घकालिक स्मृति में सूचना स्थायी रूप से संग्रहित होती है। 3. अनुरक्षण पूर्वाभ्यास में सूचना को बिना अर्थ के दोहराया जाता है जबकि विस्तृत पूर्वाभ्यास में सूचना को अर्थपूर्ण तरीके से समझकर दोहराया जाता है, जिससे स्मृति बेहतर होती है। 4. घोषणात्मक स्मृति में तथ्य और घटनाओं की जानकारी होती है, जिसे हम शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं। प्रक्रियात्मक स्मृति में कौशल और क्रियाएँ होती हैं, जिन्हें हम बिना शब्दों के कर सकते हैं। 5. विस्मरण इसलिए होता है क्योंकि स्मृति में संग्रहित सूचना का ह्रास होता है, पुनरुद्धार में विफलता होती है या अवरोध उत्पन्न होता है। 6. अवरोध के कारण विस्मरण में नई या पुरानी सूचनाएँ एक-दूसरे के पुनरुद्धार में बाधा डालती हैं, जबकि पुनरुद्धार से संबंधित विस्मरण में स्मृति संकेतों की कमी के कारण सूचना याद नहीं आती। 7. स्मृति-सहायक संकेत वे संकेत होते हैं जो स्मृति को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जैसे कि शब्दावली, चित्र, संगठनात्मक ढाँचे आदि। स्मृति सुधार के लिए योजना में नियमित पुनरावृत्ति, अध्ययन के बीच आराम, और पुनरुद्धार संकेतों का उपयोग शामिल होना चाहिए।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर संबंधित स्मृति सिद्धांतों और अवधारणाओं के आधार पर दिया गया है। कूट संकेतन, भंडारण और पुनरुद्धार स्मृति की मूल प्रक्रियाएँ हैं। संवेदी, अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मृति के कार्य और अंतर को समझाया गया है। अनुरक्षण और विस्तृत पूर्वाभ्यास के बीच का अंतर स्मृति की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। घोषणात्मक और प्रक्रियात्मक स्मृतियाँ स्मृति के प्रकार हैं। विस्मरण के कारणों को समझना आवश्यक है, जिसमें अवरोध और पुनरुद्धार की भूमिका होती है। स्मृति-सहायक संकेत स्मृति को बेहतर बनाने के लिए उपयोगी होते हैं।

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Q3.1. अपने जीवन की कोई घटना जो बहुत स्पष्ट रूप से आपको याद हो उसे पुनःस्मरण करें और लिखें। उस घटना में जो अन्य लोग सम्मिलित थे, यथा, भाई/बहन, माता-पिता/रिश्तेदार, उन्हें भी लिखने को कहें। दोनों के प्रत्याहान की तुलना कीजिए तथा समानता और भिन्नता ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।

उत्तर:

यह परियोजना विचार है जिसमें विद्यार्थी को अपने जीवन की एक स्पष्ट घटना का चयन करना है और उसे विस्तार से लिखना है। फिर उस घटना में शामिल अन्य लोगों से भी उनके दृष्टिकोण में लिखवाना है। इसके बाद दोनों स्मृतियों की तुलना कर समानताएँ और भिन्नताएँ निकालनी हैं। यह अभ्यास स्मृति की प्रकृति और व्यक्तिगत अनुभवों के भिन्न-भिन्न प्रभावों को समझने में मदद करता है।

व्याख्या:

यह प्रश्न विद्यार्थियों को स्मृति की व्यावहारिक समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करता है। विभिन्न व्यक्तियों के स्मृति प्रत्याहान में अंतर और समानता को समझना स्मृति के विषय में गहन ज्ञान प्रदान करता है।

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Q4.स्मृति की प्रक्रिया में कौन-कौन सी तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं?
A.A) कूट संकेतन, भंडारण, पुनरुद्धार
B.B) ग्रहण, विश्लेषण, निष्कर्ष
C.C) अवधान, अभ्यास, पुनरावृत्ति
D.D) ध्यान, स्मरण, विस्मरण

उत्तर:

कूट संकेतन, भंडारण, पुनरुद्धार

व्याख्या:

स्मृति की प्रक्रिया में तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं: कूट संकेतन (सूचना को स्मृति में पंजीकृत करना), भंडारण (सूचना को सुरक्षित रखना), और पुनरुद्धार (सूचना को स्मृति से वापस प्राप्त करना)। ये तीनों अवस्थाएँ स्मृति की सफलता के लिए आवश्यक हैं।

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Q5.निम्नलिखित में से कौन-सा स्मृति तंत्र सूचना को सबसे पहले ग्रहण करता है और इसकी अवधि एक सेकण्ड से भी कम होती है?
A.A) संवेदी स्मृति
B.B) अल्पकालिक स्मृति
C.C) दीर्घकालिक स्मृति
D.D) कार्यकारी स्मृति

उत्तर:

संवेदी स्मृति

व्याख्या:

संवेदी स्मृति वह प्रारंभिक स्मृति तंत्र है जहाँ नई सूचना सबसे पहले प्रवेश करती है। इसकी संचयी क्षमता बहुत अधिक होती है, लेकिन इसकी अवधि एक सेकण्ड से भी कम होती है।

Easy
Q6.अल्पकालिक स्मृति की क्षमता सामान्यतः कितनी होती है और इसकी सूचना किस प्रकार कूट संकेतन होती है?
A.A) 7±2 आइटम, ध्वन्यात्मक कूट संकेतन
B.B) असीमित आइटम, दृश्यात्मक कूट संकेतन
C.C) 5 आइटम, शब्दार्थ कूट संकेतन
D.D) 10±3 आइटम, गंधात्मक कूट संकेतन

उत्तर:

7±2 आइटम, ध्वन्यात्मक कूट संकेतन

व्याख्या:

अल्पकालिक स्मृति की क्षमता लगभग 7±2 आइटम होती है और इसमें सूचना मुख्यतः ध्वन्यात्मक (आवाज़ आधारित) रूप में कूट संकेतन होती है।

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Q7.दीर्घकालिक स्मृति की मुख्य विशेषता क्या है?
A.A) असीमित क्षमता और स्थायी भंडारण
B.B) सीमित क्षमता और अल्पकालिक भंडारण
C.C) केवल ध्वन्यात्मक सूचना संग्रहित करना
D.D) सूचना का केवल अस्थायी भंडारण

उत्तर:

असीमित क्षमता और स्थायी भंडारण

व्याख्या:

दीर्घकालिक स्मृति में सूचना की क्षमता लगभग असीमित होती है और यह स्थायी रूप से सूचनाओं को संग्रहित करती है।

Easy
Q8.चित्र 6.1 में स्मृति के अवस्था मॉडल को दिखाया गया है। इस मॉडल के अनुसार, सूचना के प्रवाह का सही क्रम क्या है? चित्र विवरण: चित्र में तीन स्मृति भंडार दिखाए गए हैं - संवेदी स्मृति, अल्पकालिक स्मृति, और दीर्घकालिक स्मृति। तीरों द्वारा सूचना के क्रमबद्ध प्रवाह को दर्शाया गया है।
A.A) संवेदी स्मृति → अल्पकालिक स्मृति → दीर्घकालिक स्मृति
B.B) दीर्घकालिक स्मृति → अल्पकालिक स्मृति → संवेदी स्मृति
C.C) अल्पकालिक स्मृति → संवेदी स्मृति → दीर्घकालिक स्मृति
D.D) दीर्घकालिक स्मृति → संवेदी स्मृति → अल्पकालिक स्मृति

उत्तर:

संवेदी स्मृति → अल्पकालिक स्मृति → दीर्घकालिक स्मृति

व्याख्या:

अवस्था मॉडल के अनुसार, सूचना सबसे पहले संवेदी स्मृति में प्रवेश करती है, फिर अल्पकालिक स्मृति में जाती है, और अंत में दीर्घकालिक स्मृति में संग्रहित होती है।

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