Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 15 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
गिरिधर कविराय की कुंडलिया
व्याख्यागिरिधर कविराय की कुंडलिया
इस अध्याय की शुरुआत गिरिधर कविराय की प्रसिद्ध लोकप्रचलित कुंडलियों से होती है। गिरिधर कविराय अठारहवीं सदी के एक लोक कवि थे, जिनकी रचनाएँ जन-जन तक सरल भाषा में जीवन के महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाती हैं। उनकी कुंडलियाँ जीवन के व्यवहार, सोच-विचार, और निर्णय लेने के महत्व को दर्शाती हैं। पहली कुंडलिया में बताया गया है कि बिना सोच-विचार के किया गया कार्य बाद में पछतावा और दुख देता है। इससे न केवल व्यक्ति का काम बिगड़ता है, बल्कि समाज में उसका अपमान भी होता है। दूसरी कुंडलिया में बीती बातों को भूलकर भविष्य की चिंता करने और सहज जीवन अपनाने की सलाह दी गई है। इन कुंडलियों में जीवन के व्यावहारिक अनुभवों को सरल और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जो आज भी प्रासंगिक हैं। इस पाठ में कवि ने बिना बिचारे किए गए कार्यों के दुष्परिणामों को समझाया है और मन की शांति के लिए सोच-समझकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया है। साथ ही, उन्होंने अतीत की गलतियों को भूलकर भविष्य की ओर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा दी है। यह पाठ विद्यार्थियों को जीवन में सही निर्णय लेने और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन करता है।
- गिरिधर कविराय अठारहवीं सदी के लोक कवि थे।
- उनकी कुंडलियाँ जीवन के व्यवहार और सोच-विचार पर आधारित हैं।
- बिना बिचारे किए गए कार्यों से पछतावा और दुख होता है।
- अतीत को भूलकर भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
- सहज जीवन अपनाने की सलाह दी गई है।
- कविताएँ सरल भाषा में जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देती हैं।
- 📌 कुंडलिया: दो पंक्तियों की लोकप्रचलित कविता जो जीवन की सीख देती है।
- 📌 बिचार: सोच-विचार, विचार करना।
- 📌 सहज जीवन: सरल और स्वाभाविक जीवन।
कवि से परिचय
व्याख्याकवि से परिचय
गिरिधर कविराय का परिचय इस खंड में विस्तार से दिया गया है। वे अठारहवीं सदी के ऐसे कवि थे जिनकी कुंडलियाँ जन-जन में लोकप्रिय हैं। उनकी कविताओं में जीवन के व्यवहार, लोकनीति, और नैतिकता के विषय सरल भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं। उनकी रचनाएँ आज भी कहावतों की तरह प्रचलित हैं। कवि ने अपनी कविताओं में घर-गृहस्थी के अनुभवों को भी व्यक्त किया है, जैसे धन का सदुपयोग और सोच-समझकर कार्य करना। इस परिचय से विद्यार्थियों को कवि के सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ को समझने में मदद मिलती है।
- गिरिधर कविराय अठारहवीं सदी के लोक कवि थे।
- उनकी कुंडलियाँ लोकनीति और जीवन के व्यवहार पर आधारित हैं।
- उनकी कविताएँ सरल और जन-जन तक पहुँचने वाली हैं।
- उनकी रचनाएँ कहावतों की तरह प्रचलित हैं।
- कवि ने धन और व्यवहार संबंधी सलाह भी दी है।
- 📌 लोकनीति: जन-जीवन से जुड़ी नीति या व्यवहार।
- 📌 कुंडलिया: दो पंक्तियों की लोककविता।
पाठ से
व्याख्यापाठ से
इस भाग में कुंडलियों के आधार पर प्रश्नोत्तरी और चर्चा के लिए गतिविधियाँ दी गई हैं। विद्यार्थियों को बिना बिचारे कार्य करने के परिणाम, मन की शांति न पाने के कारण, अतीत को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की सलाह आदि विषयों पर सोचने और उत्तर देने के लिए प्रे
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.कौन-सा कथन गलत है ?
उत्तर:
विचित्रवीर्य अंबा से भी विवाह करना चाहता था ।
व्याख्या:
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Q2.पहले राजगद्दी पर कौन बैठा था ?
उत्तर:
चित्रांगद
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Q3.अंबा पहले से ही किस पर अनुरक्त थी ?
उत्तर:
शाल्व
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Q4.स्वयंवर में भीष्म की अवहेलना किसने की ?
उत्तर:
उपरोक्त तीनों ने
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Q5.अंबा को सम्मान दिलाने के लिए परशुराम ने किससे युद्ध किया ?
उत्तर:
भीष्म
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Q6.भीष्म ने स्वयंवर में नाम इसलिए दिया क्योंकि -
उत्तर:
अपने भाई का विवाह कराना चाहते थे ।
व्याख्या:
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Q7.कौन न इधर की रही न उधर की ?
उत्तर:
अंबा
व्याख्या:
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Q8.अंबा और भीष्म पाठ के सन्दर्भ में कौन-सा कथन गलत है ?
उत्तर:
यह अर्जुन की वीरता का प्रसंग है ।
व्याख्या:
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