Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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6.1 परिचय
व्याख्या6.1 परिचय
रोज़गार का अर्थ केवल आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होना ही नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सामाजिक और व्यक्तिगत पहचान से भी जुड़ा हुआ है। लोग विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं, जैसे खेतों में कृषि, कारखानों में उत्पादन, बैंकों में प्रशासनिक कार्य, दुकानों में बिक्री आदि। आज के समय में घर से भी सूचना-प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक कार्य किए जा रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान लाखों श्रमिकों ने घर से काम करके अपनी आजीविका जारी रखी। कार्य करने का उद्देश्य केवल आय अर्जित करना नहीं, बल्कि अपनी सार्थकता की अनुभूति करना और सामाजिक संपर्क स्थापित करना भी है। महात्मा गांधी ने शिक्षा और हस्तकलाओं के माध्यम से कार्य के महत्व पर बल दिया। रोजगार की प्रकृति और गुणवत्ता का अध्ययन हमें देश के मानवीय संसाधनों को समझने और उनका उचित उपयोग करने में मदद करता है। इससे समाज के सीमांत वर्गों और बाल श्रमिकों के शोषण की समस्याओं का निदान भी संभव होता है।
- रोज़गार का अर्थ है आर्थिक गतिविधियों में श्रमशक्ति का उपयोग और पारिश्रमिक प्राप्ति।
- कार्य केवल आय का स्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और सार्थकता का माध्यम भी है।
- आधुनिक तकनीक ने घर से काम करने की संभावनाएँ बढ़ाई हैं।
- महात्मा गांधी ने विभिन्न प्रकार के कार्यों के माध्यम से प्रशिक्षण पर बल दिया।
- रोज़गार की प्रकृति और गुणवत्ता का अध्ययन मानवीय संसाधनों के उपयोग में सहायक है।
- यह समाज के सीमांत वर्गों के शोषण को समझने और सुधारने में मदद करता है।
- 📌 रोज़गार: वह स्थिति जिसमें व्यक्ति अपनी श्रमशक्ति का उपयोग कर आर्थिक गतिविधियों में भाग लेता है और बदले में पारिश्रमिक प्राप्त करता है।
- 📌 आजीविका: जीवन यापन के लिए आवश्यक आय अर्जित करना।
- 📌 मानवीय संसाधन: किसी देश की श्रमशक्ति जो आर्थिक विकास में योगदान करती है।
6.2 श्रमिक और रोजगार
व्याख्या6.2 श्रमिक और रोजगार
श्रमिक वे सभी व्यक्ति होते हैं जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं और सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान करते हैं। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो अस्थायी रूप से काम पर नहीं आ पाते, जैसे बीमारी या त्यौहार के कारण। स्व-नियोजित व्यक्ति भी श्रमिक माने जाते हैं, न केवल वे जो मजदूरी या वेतन प्राप्त करते हैं। भारत में श्रमशक्ति का आकार 2022-23 में लगभग 545 मिलियन था, जिसमें ग्रामीण श्रमिकों की संख्या शहरी श्रमिकों से अधिक है। पुरुष श्रमिकों की संख्या महिलाओं से अधिक है, और ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी शहरी महिलाओं से अधिक है। ग्रामीण महिलाओं को अक्सर नकद मजदूरी नहीं मिलती, इसलिए वे श्रमिक वर्ग में कम गिनी जाती हैं। अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि घरेलू कामकाज और खेतों में काम करने वाली महिलाओं को भी श्रमिक माना जाना चाहिए।
- श्रमिक वे व्यक्ति हैं जो आर्थिक क्रियाओं में लगे होते हैं।
- स्व-नियोजित व्यक्ति भी श्रमिक होते हैं।
- 2022-23 में भारत की श्रमशक्ति लगभग 545 मिलियन थी।
- ग्रामीण श्रमिकों की संख्या शहरी श्रमिकों से अधिक है।
- पुरुष श्रमिकों की संख्या महिलाओं से अधिक है।
- ग्रामीण महिलाओं की श्रमशक्ति में भागीदारी शहरी महिलाओं से अधिक है।
- 📌 श्रमिक: आर्थिक क्रियाओं में लगे व्यक्ति जो सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान करते हैं।
- 📌 स्व-नियोजित: जो व्यक्ति स्वयं अपना व्यवसाय या कार्य चलाते हैं।
- 📌 श्रमशक्ति: काम करने के लिए उपलब्ध व्यक्ति समूह।
6.3 लोगों की रोजगार में भागीदारी
व्याख्या6.3 लोगों की रोजगार में भागीदारी
श्रमिक जनसंख्या अनुपात यह दर्शाता है कि किसी देश की कुल जनसंख्या में से कितने प्रतिशत लोग आर्थिक क्रियाओं में सक्रिय रूप से लगे हैं। भारत में यह अनुपात लगभग 44% है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र का अनुपात शहरी क्षेत्र से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.WTO की स्थापना किस वर्ष में हुई थी?
उत्तर:
1995
Q2.निम्नलिखित में से कौन सा कर सुधार नहीं है?
उत्तर:
धन का अवमूल्यन
Q3.निम्नलिखित में से कौन से उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं?
उत्तर:
दोनों (क)और (ख)
Q4.WTO का अर्थ है
उत्तर:
विश्व व्यापार संगठन
Q5.सीआरआर है
उत्तर:
कुल जमा का प्रतिशत जो बैंकों को RBI के पास रखना होता है।
Q6.एलपीजी का मतलब है:
उत्तर:
उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण
Q7.जब सरकार बजट में घाटे को पूरा करने के लिए 5 से 10 प्रतिशत की सीमा तक अपने शेयर का विनिवेश करती है, तो इसे करार दिया जाता है।
उत्तर:
टोकन निजीकरण
Q8.कितने उद्योगों को अभी भी अपने संचालन के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है?
उत्तर:
4
Bhartiya Airthryavstha Ka Vikas के सभी 8 अध्याय
Economics · Class 11