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Chapter 6

🎓 Class 12📖 Bharat main Samajik Parivartan aur Vikas📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 8Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन

व्याख्या

भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन

भूमंडलीकरण ने भारतीय समाज के सामाजिक जीवन को गहरे रूप से प्रभावित किया है। इस प्रक्रिया ने भाषा, संस्कृति, उपभोग, रोजगार, संचार आदि क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन लाए हैं। आज के समय में सामाजिक परिवर्तन की चर्चा भूमंडलीकरण के बिना अधूरी मानी जाती है। भूमंडलीकरण केवल आर्थिक संबंधों के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी व्यापक प्रभाव डालता है। समाजशास्त्र इस प्रक्रिया को समझने के लिए व्यक्ति और समाज, स्थानीय और वैश्विक, सूक्ष्म और स्थूल के बीच संबंधों को देखता है। उदाहरण के लिए, एक दूरदराज के गाँव का किसान भी भूमंडलीकरण की वैश्विक आर्थिक नीतियों और तकनीकी प्रगति से प्रभावित होता है। भारत में बाजार को खोलने और आयात प्रतिबंधों को हटाने के कारण विदेशी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे उपभोक्ताओं के विकल्प बढ़े हैं, लेकिन साथ ही पारंपरिक व्यवसायों और आजीविका को खतरा भी हुआ है। जैसे चीन और कोरिया के सस्ते रेशम धागों के आने से बिहार की रेशम कातने वाली महिलाओं का रोजगार प्रभावित हुआ। भूमंडलीकरण के प्रभाव सामाजिक वर्ग, क्षेत्र और समूहों के अनुसार भिन्न-भिन्न हैं। कुछ वर्गों को इससे लाभ होता है, जबकि कई गरीब और वंचित वर्गों की स्थिति और खराब होती है। इसलिए भूमंडलीकरण को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक संदर्भ, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आयामों को गहराई से देखना आवश्यक है।

  • भूमंडलीकरण ने भारतीय समाज के सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।
  • यह प्रक्रिया केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी प्रभाव डालती है।
  • व्यक्ति और समाज, स्थानीय और वैश्विक के बीच संबंधों को समझना समाजशास्त्र का कार्य है।
  • भारत में बाजार खोलने और आयात प्रतिबंध हटाने से विदेशी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ी है।
  • भूमंडलीकरण के प्रभाव सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों के अनुसार भिन्न होते हैं।
  • परंपरागत व्यवसायों और आजीविका पर भूमंडलीकरण के नकारात्मक प्रभाव भी देखे गए हैं।
  • 📌 भूमंडलीकरण: विश्व के विभिन्न देशों और क्षेत्रों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अंतःसंबंधों का विस्तार।
  • 📌 उदारीकरण: भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाजार के लिए खोलने की नीति।
  • 📌 डिजिटल विभाजन: तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर।

भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास

व्याख्या

भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास

आज के युग में सामाजिक परिवर्तन की चर्चा भूमंडलीकरण के संदर्भ के बिना अधूरी है। भारत में सामाजिक परिवर्तन और विकास की प्रक्रिया में भूमंडलीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने 1991 में आर्थिक नीतियों में परिवर्तन कर उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू की, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व बाजार के लिए खुली। इससे पहले भारतीय बाजार और उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रखने के लिए कई प्रतिबंध थे। उदारीकरण के कारण आयात पर लगे प्रतिबंध हटाए गए, जिससे विदेशी वस्तुएँ भारत में उपलब्ध होने लगीं। यह परिवर्तन व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर प्रभाव डालता है। उदाहरण के लिए, पड़ोसी की दुकान में चीन और ऑस्ट्रेलिया के फल और खाद्य पदार्थ मिलने लगे। वहीं, पारंपरिक व्यवसायों को नुकसान भी हुआ। भूमंडलीकरण ने संचार माध्यमों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं, जिससे मीडिया का स्वरूप बदल गया है। टेलीविजन चैनलों की संख्या बढ़ी है और डिजिटल तकनीक ने सूचना के आदान-प्रदान को तेज़ किया है। भारत में डिजिटल विभाजन के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी में अंतर है। सामाजिक परिवर्तन के अध्ययन में समाजशास्त्रियों को इन अंतःसंबंधों को समझना आवश्यक है। भूमंडलीकरण के प्रभावों को समझने के लिए सूक्ष्म और स्थूल, स्थानीय और वैश्विक के बीच संबंधों को देखना जरूरी है।

  • भारत में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया में भूमंडलीकरण का महत्वपूर्ण स्थान है।
  • 1991 में भारत ने उदारीकरण की नीति अपनाई और अर्थव्यवस्था को विश्व बाजार के लिए खोला।
  • आयात प्रतिबंध हटने से विदेशी वस्तुएँ भारत में उपलब्ध होने लगीं।
  • भूमंडलीकरण ने संचार माध्यमों में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं।
  • डिजिटल विभाजन के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तकनीकी सुविधाओं में अंतर है।
  • समाजशास्त्रियों के लिए सूक्ष्म और स्थूल, स्थानीय और वैश्विक के बीच संबंधों को समझना आवश्यक है।
  • 📌 उदारीकरण: भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाजार के लिए खोलने की नीति।
  • 📌 डिजिटल विभाजन: तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर।
  • 📌 भूमंडलीकरण: विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अंतःसंबंधों का विस्तार।

6.1 क्या भूमंडलीकरण के अंत:संबंध विश्व और भारत के लिए नए हैं?

व्याख्या

6.1 क्या भूमंडलीकरण के अंत:संबंध विश्व और भारत के लिए नए हैं?

भूमंडलीकरण का अर्थ है विश्व के विभिन्न देशों और क्षेत्रों के बीच अंतःसंबंधों का विस्तार। यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। भारत का विश्व के अन्य भागों से प्राचीन काल से ही संबंध रहा है। रेशम मार्ग के माध्यम से भारत चीन, मिस्र, रोम आदि से जुड़ा था। इतिहास

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. अपनी रुचि का कोई भी विषय चुनें और यह चर्चा करें कि भूमंडलीकरण ने उसे किस प्रकार प्रभावित किया है। आप सिनेमा, कार्य, विवाह अथवा कोई भी अन्य विषय चुन सकते हैं। 2. एक भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था के विशिष्ट लक्षण क्या हैं? चर्चा करें। 3. संस्कृति पर भूमंडलीकरण के प्रभाव की संक्षेप में चर्चा करें। 4. भूस्थानीकरण क्या है? क्या यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपनाई गई बाजार संबंधी रणनीति है अथवा वास्तव में कोई सांस्कृतिक संश्लेषण हो रहा है, चर्चा करें।

उत्तर:

1. भूमंडलीकरण ने विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों को प्रभावित किया है। उदाहरण के लिए, सिनेमा क्षेत्र में विदेशी फिल्मों और तकनीकों का प्रभाव बढ़ा है, जिससे स्थानीय फिल्मों की शैली और विषय वस्तु में परिवर्तन आया है। कार्य क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों के आने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन साथ ही पारंपरिक कार्यशैली में बदलाव और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। विवाह जैसे सामाजिक संस्थान भी वैश्विक प्रभावों से प्रभावित हुए हैं, जैसे कि विवाह के रीति-रिवाजों में आधुनिकता का समावेश। 2. भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था के विशिष्ट लक्षण हैं: - वैश्विक स्तर पर पूंजी, वस्तुओं और सेवाओं का मुक्त प्रवाह। - बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका का बढ़ना। - सूचना प्रौद्योगिकी और संचार के माध्यम से बाजारों का एकीकरण। - उपभोक्तावाद और वैश्विक उपभोक्ता संस्कृति का प्रसार। - आर्थिक असमानताओं का बढ़ना और स्थानीय उद्योगों पर दबाव। 3. संस्कृति पर भूमंडलीकरण के प्रभाव में सांस्कृतिक विविधता का संकुचन, उपभोक्तावाद का प्रसार, स्थानीय परंपराओं का वैश्विक प्रभावों से प्रभावित होना, और सांस्कृतिक संश्लेषण शामिल हैं। इसके साथ ही, कुछ स्वदेशी सांस्कृतिक रूपों और ज्ञान व्यवस्थाओं को खतरा भी होता है। 4. भूस्थानीकरण (Glocalization) का अर्थ है वैश्विक और स्थानीय तत्वों का संयोजन। यह केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपनाई गई बाजार संबंधी रणनीति नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक संश्लेषण भी है जिसमें वैश्विक उत्पाद और सेवाएँ स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों के अनुसार अनुकूलित होती हैं। इस प्रक्रिया में स्थानीय संस्कृति और वैश्विक प्रभाव दोनों का समावेश होता है।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विस्तृत विश्लेषण पर आधारित है। प्रश्न 1 में विषय के चयन के आधार पर भूमंडलीकरण के प्रभावों का विवेचन किया गया है। प्रश्न 2 में भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था के मुख्य लक्षणों को सूचीबद्ध किया गया है। प्रश्न 3 में संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभावों का सारांश प्रस्तुत किया गया है। प्रश्न 4 में भूस्थानीकरण की परिभाषा और उसके स्वरूपों की व्याख्या की गई है।

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Q2.भूमंडलीकरण शब्द का अर्थ क्या है और यह सामाजिक परिवर्तन को किस प्रकार प्रभावित करता है?

उत्तर:

भूमंडलीकरण का अर्थ है विश्व के विभिन्न लोगों, क्षेत्रों और देशों के बीच सामाजिक एवं आर्थिक संबंधों का विस्तार और अंतःनिर्भरता की वृद्धि। यह सामाजिक परिवर्तन को प्रभावित करता है क्योंकि यह भाषा, संस्कृति, रोजगार, उपभोग और संचार जैसे क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाता है। उदाहरण के लिए, भारतीय बाजार में विदेशी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ी है जिससे उपभोक्ताओं के विकल्प बढ़े हैं।

व्याख्या:

भूमंडलीकरण विश्व के विभिन्न भागों के बीच संबंधों के विस्तार को दर्शाता है। यह सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है जैसे भाषा, संस्कृति, रोजगार, उपभोग आदि। इससे सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया तेज़ होती है और विभिन्न वर्गों तथा क्षेत्रों में इसके प्रभाव अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के तौर पर, विदेशी वस्तुओं के आयात से पारंपरिक व्यवसाय प्रभावित होते हैं।

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Q3.भारत में 1991 में लागू की गई आर्थिक नीति को क्या कहा जाता है और इसका भूमंडलीकरण से क्या संबंध है?

उत्तर:

1991 में भारत सरकार द्वारा लागू की गई आर्थिक नीति को उदारीकरण कहा जाता है। इसका संबंध भूमंडलीकरण से इस प्रकार है कि उदारीकरण के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाजार के लिए खोला गया जिससे आर्थिक संबंध विश्वव्यापी हो गए।

व्याख्या:

उदारीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया। इससे आयात प्रतिबंध हटाए गए और विदेशी वस्तुएँ बाजार में आने लगीं। यह आर्थिक नीति भूमंडलीकरण की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करती है क्योंकि इसके कारण भारत विश्व आर्थिक प्रणाली का हिस्सा बन गया।

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Q4.नीचे दिए गए चित्र में भारत में 1991 के बाद उदारीकरण के कारण आयात में वृद्धि के उदाहरण दिखाए गए हैं। इस चित्र में किन विदेशी उत्पादों को दिखाया गया है और इनका भारतीय उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ा है? चित्र विवरण: पड़ोसी की दुकान में चीन की नाशपाती, ऑस्ट्रेलिया के सेब, ऑस्ट्रेलियाई संतरे का रस और पैकेट में जमे हुए आलू के चिप्स दिखाए गए हैं।

उत्तर:

चित्र में चीन की नाशपाती, ऑस्ट्रेलिया के सेब, ऑस्ट्रेलियाई संतरे का रस और पैकेट में जमे हुए आलू के चिप्स दिखाए गए हैं। इन विदेशी उत्पादों की उपलब्धता से भारतीय उपभोक्ताओं के विकल्प बढ़े हैं और वे नई वस्तुएँ खरीदने लगे हैं, जिससे उपभोग की संस्कृति में बदलाव आया है।

व्याख्या:

यह चित्र भारत में उदारीकरण के बाद विदेशी वस्तुओं के बाजार में आने का उदाहरण है। आयात प्रतिबंध हटने से विदेशी फल और खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध होने लगे हैं। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं और उनकी जीवनशैली में परिवर्तन आता है। हालांकि, इससे पारंपरिक व्यवसायों को नुकसान भी हो सकता है।

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Q5.भूमंडलीकरण के तीन प्रमुख आयाम कौन-कौन से हैं? प्रत्येक आयाम का संक्षिप्त वर्णन करें।

उत्तर:

भूमंडलीकरण के तीन प्रमुख आयाम हैं: आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक। आर्थिक आयाम: पूंजी के प्रवाह, पारराष्ट्रीय निगमों का उदय, वैश्विक बाजार का विस्तार। राजनीतिक आयाम: राज्य की भूमिका में परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग संगठनों का उदय। सांस्कृतिक आयाम: स्थानीय और वैश्विक संस्कृतियों का मिश्रण, उपभोग की संस्कृति का विकास।

व्याख्या:

आर्थिक आयाम में उदारीकरण, वैश्विक वित्तीय बाजार और मल्टीनेशनल कंपनियों का प्रभाव शामिल है। राजनीतिक आयाम में राज्य की भूमिका सीमित होना और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का महत्व बढ़ना शामिल है। सांस्कृतिक आयाम में वैश्विक और स्थानीय संस्कृतियों के बीच संवाद और संघर्ष शामिल है। ये तीनों आयाम भूमंडलीकरण की व्यापक प्रक्रिया को दर्शाते हैं।

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Q6.भारत में भूमंडलीकरण के कारण पारंपरिक व्यवसायों को किस प्रकार का खतरा हुआ? एक उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

भूमंडलीकरण के कारण विदेशी वस्तुओं के आयात से पारंपरिक व्यवसाय प्रभावित हुए। उदाहरण के लिए, चीन और कोरिया के सस्ते रेशम धागों के आने से बिहार की रेशम कातने वाली महिलाओं का रोजगार खत्म हो गया क्योंकि वे सस्ते और चमकदार धागों को अधिक पसंद करती थीं।

व्याख्या:

विदेशी वस्तुओं की सस्ती उपलब्धता ने पारंपरिक उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर दिया। इससे उन व्यवसायों में लगे लोगों की आजीविका संकट में आ गई। बिहार की रेशम कातने वाली महिलाएँ इसका उदाहरण हैं, जिनका रोजगार विदेशी धागों के कारण समाप्त हो गया।

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Q7.नीचे दिए गए चित्र में विश्व के विभिन्न देशों में मधुमेह रोगियों की संख्या दर्शाई गई है। इस चित्र के अनुसार भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या किस प्रकार है और भविष्य में इसका क्या अनुमान है? चित्र विवरण: विश्व मानचित्र पर भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या सबसे अधिक दिख रही है, जबकि चीन दूसरे स्थान पर है।

उत्तर:

चित्र में भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या सबसे अधिक है और भविष्य में भी यह संख्या बढ़ने का अनुमान है। चीन वर्तमान में प्री-डायबिटिक अवस्था में भारत से आगे है। 2025 तक भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

व्याख्या:

अंतर्राष्ट्रीय डायबिटीज़ फेडरेशन के एटलस के अनुसार भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है। यह संख्या बढ़ती जा रही है और 2025 तक और अधिक होगी। चीन प्री-डायबिटिक अवस्था में भारत से आगे है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में वहाँ भी मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ेगी।

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Q8.भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का क्या महत्व है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने भूमंडलीकरण को तेजी से बढ़ावा दिया है। इससे विश्व के विभिन्न हिस्सों के लोग तेज़ी से जुड़ सके हैं। उदाहरण के लिए, इंटरनेट, मोबाइल फोन, डिजिटल टीवी ने समय और दूरी की बाधाओं को कम किया है और वैश्विक संचार को संभव बनाया है।

व्याख्या:

सूचना प्रौद्योगिकी के विकास ने लोगों के बीच संवाद की गति बढ़ाई है। भारत में इंटरनेट और मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग ने सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को वैश्विक स्तर पर जोड़ दिया है। इससे व्यापार, शिक्षा और सामाजिक संबंधों में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं।

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