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Chapter 5

🎓 Class 12📖 Vyashthi Arthshasrta📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 5

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

बाजार संतुलन

व्याख्या

बाजार संतुलन

यह अध्याय उपभोक्ता और फर्म के व्यवहार के अध्ययन पर आधारित है, जो अध्याय 2 और 4 में विस्तार से समझाया गया था। बाजार संतुलन की अवधारणा में, बाजार माँग वक्र और बाजार पूर्ति वक्र का प्रतिच्छेदन बिंदु वह स्थिति दर्शाता है जहाँ वस्तु की माँग और पूर्ति बराबर होती है। इस स्थिति को बाजार संतुलन कहा जाता है। संतुलन कीमत वह कीमत होती है जिस पर उपभोक्ता और विक्रेता दोनों संतुष्ट होते हैं और बाजार रिक्त हो जाता है, अर्थात् कोई अधिमाँग या अधिपूर्ति नहीं होती। यदि किसी कीमत पर बाजार पूर्ति बाजार माँग से अधिक हो, तो उस स्थिति को अधिपूर्ति कहा जाता है, और यदि बाजार माँग बाजार पूर्ति से अधिक हो, तो उसे अधिमाँग कहते हैं। बाजार में असंतुलन की स्थिति में कीमतों में परिवर्तन की प्रवृत्ति होती है, जो अंततः संतुलन की ओर ले जाती है। इस प्रक्रिया को 'अदृश्य हाथ' के रूप में जाना जाता है, जो बाजार में स्वाभाविक रूप से संतुलन स्थापित करता है। इस अध्याय में हम फर्मों की स्थिर संख्या की स्थिति में बाजार संतुलन का अध्ययन करेंगे, माँग और पूर्ति वक्रों के शिफ्ट के प्रभावों को समझेंगे, और अंत में निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की स्थिति में बाजार संतुलन का विश्लेषण करेंगे।

  • बाजार संतुलन वह स्थिति है जहाँ बाजार माँग और बाजार पूर्ति बराबर होती है।
  • संतुलन कीमत वह कीमत है जिस पर खरीदार और विक्रेता दोनों संतुष्ट होते हैं।
  • अधिमाँग तब होती है जब किसी कीमत पर बाजार माँग बाजार पूर्ति से अधिक हो।
  • अधिपूर्ति तब होती है जब किसी कीमत पर बाजार पूर्ति बाजार माँग से अधिक हो।
  • असंतुलन की स्थिति में कीमतों में परिवर्तन की प्रवृत्ति होती है जो संतुलन की ओर ले जाती है।
  • ‘अदृश्य हाथ’ बाजार में स्वाभाविक रूप से संतुलन स्थापित करता है।
  • 📌 बाजार संतुलन: वह स्थिति जहाँ बाजार माँग और पूर्ति बराबर होती है।
  • 📌 संतुलन कीमत: वह कीमत जिस पर बाजार संतुलन स्थापित होता है।
  • 📌 अधिमाँग: बाजार माँग बाजार पूर्ति से अधिक होना।

संतुलन, अधिमाँग, अधिपूर्ति

व्याख्या

संतुलन, अधिमाँग, अधिपूर्ति

पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में क्रेता और विक्रेता स्वहित के उद्देश्य से कार्य करते हैं। उपभोक्ताओं का उद्देश्य अपनी उपयोगिता अधिकतम करना होता है, जबकि फर्मों का उद्देश्य लाभ अधिकतम करना होता है। बाजार संतुलन की स्थिति वह होती है जहाँ उपभोक्ता और फर्मों की योजनाएँ मेल खाती हैं और बाजार रिक्त हो जाता है। इस स्थिति में बाजार पूर्ति और बाजार माँग बराबर होती है। यदि किसी कीमत पर बाजार पूर्ति बाजार माँग से अधिक हो, तो अधिपूर्ति की स्थिति होती है, जिससे कीमतों में गिरावट की प्रवृत्ति होती है। वहीं, यदि बाजार माँग बाजार पूर्ति से अधिक हो, तो अधिमाँग की स्थिति होती है, जिससे कीमतों में वृद्धि होती है। इस प्रकार, बाजार में संतुलन की स्थिति को शून्य अधिमाँग और शून्य अधिपूर्ति की स्थिति के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है। इस खंड में यह भी बताया गया है कि बाजार में असंतुलन की स्थिति में कीमतों में परिवर्तन की प्रवृत्ति होती है, जो अंततः संतुलन की ओर ले जाती है।

  • पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में उपभोक्ता और फर्म स्वहित के अनुसार कार्य करते हैं।
  • संतुलन की स्थिति में बाजार माँग और पूर्ति बराबर होती है।
  • अधिपूर्ति की स्थिति में कीमतों में गिरावट की प्रवृत्ति होती है।
  • अधिमाँग की स्थिति में कीमतों में वृद्धि की प्रवृत्ति होती है।
  • संतुलन को शून्य अधिमाँग और शून्य अधिपूर्ति की स्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
  • 📌 अधिमाँग: किसी कीमत पर बाजार माँग बाजार पूर्ति से अधिक होना।
  • 📌 अधिपूर्ति: किसी कीमत पर बाजार पूर्ति बाजार माँग से अधिक होना।
  • 📌 संतुलन: बाजार माँग और पूर्ति के बराबर होने की स्थिति।

बाजार संतुलन: फर्मों की स्थिर संख्या

व्याख्या

बाजार संतुलन: फर्मों की स्थिर संख्या

इस खंड में फर्मों की संख्या स्थिर होने की स्थिति में बाजार संतुलन का अध्ययन किया गया है। बाजार माँग वक्र (DD) और बाजार पूर्ति वक्र (SS) के प्रतिच्छेदन बिंदु पर संतुलन कीमत (p') और संतुलन मात्रा (q') निर्धारित होती है। यदि कीमत p' से अधिक होती है, तो

अभ्यास प्रश्नChapter 5

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.अभ्यास 5 में संतुलन कीमत बाजार में फर्मों की न्यूनतम औसत लागत से अधिक है। अब यदि हम फर्मों के निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की अनुमति दे दें, तो बाजार कीमत इसके साथ किस प्रकार समायोजन करेगी?

उत्तर:

जब फर्मों को निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन की अनुमति होती है, तो बाजार में फर्मों की संख्या बढ़ती या घटती रहती है जब तक कि फर्मों की न्यूनतम औसत लागत (Minimum Average Cost) और बाजार कीमत बराबर न हो जाए। यदि बाजार कीमत न्यूनतम औसत लागत से अधिक है, तो नए फर्म बाजार में प्रवेश करेंगे, जिससे पूर्ति बढ़ेगी और कीमत घटेगी। यदि कीमत न्यूनतम औसत लागत से कम है, तो फर्म बाजार छोड़ देंगे, जिससे पूर्ति घटेगी और कीमत बढ़ेगी। अंततः, बाजार कीमत न्यूनतम औसत लागत के बराबर हो जाएगी और फर्मों का लाभ शून्य हो जाएगा। इस प्रकार, बाजार कीमत न्यूनतम औसत लागत के स्तर पर समायोजित होती है।

व्याख्या:

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्मों के लिए दीर्घकालिक स्थिति में लाभ शून्य होता है। यदि कीमत न्यूनतम औसत लागत से अधिक है, तो लाभ होने पर नए फर्म प्रवेश करते हैं, जिससे पूर्ति बढ़ती है और कीमत घटती है। यदि कीमत न्यूनतम औसत लागत से कम है, तो फर्म नुकसान में होते हैं और बाजार छोड़ देते हैं, जिससे पूर्ति घटती है और कीमत बढ़ती है। इस प्रक्रिया से कीमत न्यूनतम औसत लागत के स्तर पर स्थिर हो जाती है।

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Q2.7. जब बाजार में निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की अनुमति है, तो फर्म पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में कीमत के किस स्तर पर पूर्ति करती हैं? ऐसे बाजार में संतुलन मात्रा किस प्रकार निर्धारित होती है?

उत्तर:

पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में जब फर्मों को निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन की अनुमति होती है, तो फर्म पूर्ति न्यूनतम औसत लागत (Minimum Average Cost) के स्तर पर करती हैं। इस स्थिति में फर्मों का दीर्घकालिक लाभ शून्य होता है। संतुलन मात्रा इस प्रकार निर्धारित होती है कि बाजार की कुल माँग और कुल पूर्ति बराबर हो जाती है। फर्मों की संख्या और प्रत्येक फर्म की उत्पादन मात्रा इस संतुलन को सुनिश्चित करती हैं।

व्याख्या:

निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन की स्थिति में, यदि कीमत न्यूनतम औसत लागत से अधिक है, तो नए फर्म प्रवेश करते हैं और पूर्ति बढ़ती है, जिससे कीमत घटती है। यदि कीमत कम है, तो फर्म बाहर निकलते हैं और पूर्ति घटती है, जिससे कीमत बढ़ती है। अंततः कीमत न्यूनतम औसत लागत के बराबर हो जाती है। संतुलन मात्रा वह होती है जहाँ कुल माँग और कुल पूर्ति मिलती है।

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Q3.8. एक बाजार में फर्मों की संतुलन संख्या किस प्रकार निर्धारित होती है, जब उन्हें निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की अनुमति हो?

उत्तर:

जब फर्मों को निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन की अनुमति होती है, तो फर्मों की संख्या उस स्तर पर स्थिर हो जाती है जहाँ प्रत्येक फर्म का लाभ शून्य होता है। यदि बाजार कीमत न्यूनतम औसत लागत से अधिक है, तो नए फर्म प्रवेश करते हैं, जिससे फर्मों की संख्या बढ़ती है। यदि कीमत कम है, तो फर्म बाहर निकलते हैं, जिससे संख्या घटती है। अंततः, फर्मों की संख्या उस स्तर पर स्थिर हो जाती है जहाँ बाजार कीमत न्यूनतम औसत लागत के बराबर होती है और प्रत्येक फर्म का लाभ शून्य होता है।

व्याख्या:

निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन की स्थिति में, फर्मों की संख्या बाजार की पूर्ति और माँग के बीच संतुलन स्थापित करती है। जब फर्मों का लाभ शून्य होता है, तो कोई भी नया फर्म प्रवेश नहीं करता और कोई फर्म बाहर नहीं निकलता। इस स्थिति में फर्मों की संख्या स्थिर रहती है।

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Q4.9. संतुलन कीमत तथा मात्रा किस प्रकार प्रभावित होती है, जब उपभोक्ताओं की आय में:- (a) वृद्धि होती है। (b) कमी होती है।

उत्तर:

(a) उपभोक्ताओं की आय में वृद्धि होने पर सामान्य वस्तुओं की माँग बढ़ जाती है। इससे माँग वक्र दाएँ शिफ्ट होता है, जिससे संतुलन कीमत और मात्रा दोनों बढ़ती हैं। (b) उपभोक्ताओं की आय में कमी होने पर सामान्य वस्तुओं की माँग घट जाती है। इससे माँग वक्र बाएँ शिफ्ट होता है, जिससे संतुलन कीमत और मात्रा दोनों घटती हैं।

व्याख्या:

आय में वृद्धि से उपभोक्ता अधिक वस्तुएं खरीदने में सक्षम होते हैं, जिससे माँग बढ़ती है। माँग वक्र के दाएँ शिफ्ट से कीमत और मात्रा बढ़ती हैं। आय में कमी से माँग घटती है, माँग वक्र बाएँ शिफ्ट होता है, जिससे कीमत और मात्रा घटती हैं।

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Q5.10. पूर्ति तथा माँग वक्रों का उपयोग करते हुए दर्शाइए कि जूतों की कीमतों में वृद्धि, खरीदी व बेची जानी वाली मोजों की जोड़ी की कीमतों को तथा संख्या को किस प्रकार प्रभावित करती है?

उत्तर:

जूतों की कीमतों में वृद्धि होने पर मोजों की माँग प्रभावित होती है क्योंकि जूते और मोजे पूरक वस्तुएं हैं। जूतों की कीमत बढ़ने से मोजों की माँग घटती है, जिससे मोजों की संतुलन कीमत और मात्रा दोनों घटती हैं। पूर्ति वक्र पर इसका प्रभाव सीमित होता है, लेकिन माँग वक्र बाएँ शिफ्ट होता है। परिणामस्वरूप, मोजों की कीमत और बिक्री की संख्या कम हो जाती है।

व्याख्या:

पूरक वस्तुओं में से एक की कीमत बढ़ने पर दूसरी वस्तु की माँग घटती है। जूतों की कीमत बढ़ने से लोग कम जूते खरीदेंगे, जिससे मोजों की माँग भी घटेगी। माँग वक्र बाएँ शिफ्ट होगा, जिससे संतुलन कीमत और मात्रा दोनों कम हो जाएंगी।

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Q6.11. कॉफ़ी की कीमत में परिवर्तन, चाय की संतुलन कीमत को किस प्रकार प्रभावित करेगा। एक आरेख द्वारा संतुलन मात्रा पर प्रभाव को भी समझाइए।

उत्तर:

कॉफ़ी और चाय प्रतिस्थापन वस्तुएं हैं। यदि कॉफ़ी की कीमत बढ़ती है, तो उपभोक्ता कॉफ़ी की बजाय अधिक चाय खरीदेंगे, जिससे चाय की माँग बढ़ेगी। इससे चाय की माँग वक्र दाएँ शिफ्ट होगी, जिससे चाय की संतुलन कीमत और मात्रा दोनों बढ़ेंगी। यदि कॉफ़ी की कीमत घटती है, तो चाय की माँग घटेगी, माँग वक्र बाएँ शिफ्ट होगा, और चाय की कीमत तथा मात्रा घटेंगी। आरेख में माँग वक्र के शिफ्ट के कारण संतुलन बिंदु का परिवर्तन दिखाया जाता है।

व्याख्या:

प्रतिस्थापन वस्तुओं में से एक की कीमत बढ़ने पर दूसरी वस्तु की माँग बढ़ती है। कॉफ़ी की कीमत बढ़ने से चाय की माँग बढ़ती है, जिससे कीमत और मात्रा बढ़ती हैं। आरेख में माँग वक्र दाएँ शिफ्ट होता है, जिससे नया संतुलन उच्च कीमत और मात्रा पर होता है।

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Q7.12. जब उत्पादन में प्रयुक्त आगतों की कीमतों में परिवर्तन होता है तो किसी वस्तु की संतुलन कीमत तथा मात्रा किस प्रकार परिवर्तित होती है?

उत्तर:

उत्पादन में प्रयुक्त आगतों (Input) की कीमतों में वृद्धि होने पर उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इससे पूर्ति वक्र बाएँ शिफ्ट होता है क्योंकि फर्म कम मात्रा पूर्ति करेंगे। परिणामस्वरूप, वस्तु की संतुलन कीमत बढ़ेगी और संतुलन मात्रा घटेगी। यदि आगतों की कीमत घटती है, तो पूर्ति बढ़ेगी, पूर्ति वक्र दाएँ शिफ्ट होगा, जिससे कीमत घटेगी और मात्रा बढ़ेगी।

व्याख्या:

आगतों की कीमत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो जाता है, जिससे फर्म कम उत्पादन करते हैं। पूर्ति वक्र बाएँ शिफ्ट होता है। माँग स्थिर रहने पर कीमत बढ़ती है और मात्रा घटती है। आगतों की कीमत घटने पर इसका उल्टा प्रभाव होता है।

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Q8.13. यदि वस्तु x की स्थानापन्न वस्तु (y) की कीमत में वृद्धि होती है, तो वस्तु x की संतुलन कीमत तथा मात्रा पर इसका क्या प्रभाव होता है?

उत्तर:

यदि वस्तु x की स्थानापन्न वस्तु y की कीमत बढ़ती है, तो उपभोक्ता y की बजाय x खरीदना पसंद करेंगे। इससे x की माँग बढ़ेगी, माँग वक्र दाएँ शिफ्ट होगा। परिणामस्वरूप, x की संतुलन कीमत और मात्रा दोनों बढ़ेंगी।

व्याख्या:

स्थानापन्न वस्तुओं में से एक की कीमत बढ़ने पर दूसरी वस्तु की माँग बढ़ती है। y की कीमत बढ़ने से x की माँग बढ़ती है, जिससे कीमत और मात्रा बढ़ती हैं।

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