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Chapter 5

🎓 Class 8📖 Vasant📖 10 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~15 min

Chapter 5Study Notes

NCERT-aligned · 10 notes · 3 shown free

ओस की उत्पत्ति

Explanation

ओस की उत्पत्ति

ओस एक प्राकृतिक घटना है जो रात के समय ठंडी सतहों पर जलवाष्प के संघनन से बनती है। दिन के समय सूरज की गर्मी से वायु में जल वाष्प की मात्रा बढ़ जाती है। जब रात होती है, तो वायु और जमीन की सतह ठंडी हो जाती है। यदि वायु का तापमान उस बिंदु तक गिर जाए जहाँ जलवाष्प संघनित होकर जल की बूंदों का रूप ले ले, तो ओस बनती है। इसे संघनन (Condensation) कहा जाता है। ओस मुख्य रूप से पौधों की पत्तियों, घास, छतों और अन्य ठंडी सतहों पर दिखाई देती है। यह प्रक्रिया वायुमंडल में नमी की उपस्थिति और तापमान के बीच के संबंध को दर्शाती है। ओस की उत्पत्ति के लिए आवश्यक है कि हवा में पर्याप्त नमी हो और तापमान उस बिंदु तक गिर जाए जहाँ जलवाष्प संघनित हो सके। ओस की बूंदें बहुत छोटी होती हैं, लेकिन जब वे एकत्रित हो जाती हैं तो उन्हें आसानी से देखा जा सकता है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया कृषि के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पौधों को नमी प्रदान करती है।

  • ओस जलवाष्प के संघनन से बनती है।
  • रात के समय तापमान गिरने पर ओस बनती है।
  • ओस मुख्यतः ठंडी सतहों पर बनती है।
  • ओस बनने के लिए हवा में नमी की उपस्थिति जरूरी है।
  • ओस पौधों को नमी प्रदान करती है।
  • 📌 ओस: रात के समय जलवाष्प के संघनन से बनने वाली जल की बूंदें।
  • 📌 संघनन: गैस से द्रव में परिवर्तन की प्रक्रिया।

ओस का महत्व

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ओस का महत्व

ओस का प्राकृतिक चक्र में महत्वपूर्ण स्थान है। यह न केवल पौधों को नमी प्रदान करती है, बल्कि सूखे इलाकों में भी यह जीवनदायिनी होती है। ओस की बूंदें पौधों की पत्तियों पर जमा होकर उन्हें सूखने से बचाती हैं और उनकी वृद्धि में सहायक होती हैं। इसके अलावा, ओस वायुमंडल में नमी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। जब बारिश नहीं होती, तब भी ओस के माध्यम से पौधों को आवश्यक जल मिलता रहता है। यह जल स्रोत छोटे जीवों के लिए भी आवश्यक होता है। ओस की उपस्थिति से वातावरण में ठंडक बनी रहती है, जो गर्मी के मौसम में राहत देती है। कृषि के लिए भी ओस का महत्व है क्योंकि यह फसलों को प्राकृतिक रूप से नमी प्रदान करती है। इस प्रकार, ओस प्राकृतिक जल चक्र का एक अनिवार्य हिस्सा है जो जीवन को बनाए रखने में सहायक है।

  • ओस पौधों को नमी प्रदान करती है।
  • यह सूखे इलाकों में जीवनदायिनी होती है।
  • ओस वायुमंडल में नमी के संतुलन को बनाए रखती है।
  • यह छोटे जीवों के लिए जल स्रोत है।
  • कृषि में ओस का महत्वपूर्ण योगदान है।
  • 📌 प्राकृतिक जल चक्र: पृथ्वी पर जल के निरंतर परिवर्तन की प्रक्रिया।
  • 📌 नमी संतुलन: वायुमंडल में जल वाष्प की मात्रा का संतुलित रहना।

ओस और पाला में अंतर

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ओस और पाला में अंतर

ओस और पाला दोनों ही जलवाष्प के संघनन से बनते हैं, लेकिन इनके बनने की परिस्थितियाँ और स्वरूप अलग होते हैं। ओस तब बनती है जब वायु का तापमान संघनन बिंदु से नीचे गिरता है, लेकिन तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है। इस स्थिति में जलवाष्प सीधे जल क

Practice QuestionsChapter 5

Includes NCERT exercise questions with answers

Q1.लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है फिर भी वह निराश नहीं है। आपके विचार से इस बात का क्या कारण हो सकता है?

Answer:

लेखक निराश नहीं है क्योंकि वह मानता है कि अच्छाई और ईमानदारी अभी भी मौजूद हैं। वह जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है और विश्वास करता है कि अच्छे लोग भी हैं जो बिना स्वार्थ के कार्य करते हैं। इसलिए धोखे के बावजूद वह उम्मीद नहीं छोड़ता।

Explanation:

लेखक का दृष्टिकोण सकारात्मक है। वह मानता है कि जीवन में अच्छाई और ईमानदारी की जगह है, इसलिए निराशा नहीं करता। यह सोच हमें भी जीवन में सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देती है।

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Q2.समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और टेलीविजन पर आपने ऐसी अनेक घटनाएँ देखी-सुनी होंगी जिनमें लोगों ने बिना किसी लालच के दूसरों की सहायता की हो या ईमानदारी से काम किया हो। ऐसे समाचार तथा लेख एकत्रित करें और कम-से-कम दो घटनाओं पर अपनी टिप्पणी लिखें।

Answer:

छात्रों को समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और टेलीविजन से दो ऐसी घटनाएँ एकत्रित करनी चाहिए जहाँ लोगों ने बिना स्वार्थ के दूसरों की मदद की हो या ईमानदारी से कार्य किया हो। फिर उन घटनाओं पर अपनी समझ और भावना व्यक्त करनी चाहिए, जैसे कि समाज में अच्छाई की उम्मीद बनी रहती है और ईमानदारी से काम करने वाले लोग प्रेरणा देते हैं।

Explanation:

यह प्रश्न छात्रों को सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों की समझ विकसित करने के लिए है। वे वास्तविक जीवन की घटनाओं से सीख लेकर अपने विचार लिखेंगे।

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Q3.लेखक ने अपने जीवन की दो घटनाओं में रेलवे के टिकट बाबू और बस कंडक्टर की अच्छाई और ईमानदारी की बात बताई है। आप भी अपने या अपने किसी परिचित के साथ हुई किसी घटना के बारे में बताइए जिसमें किसी ने बिना किसी स्वार्थ के भलाई, ईमानदारी और अच्छाई के कार्य किए हों।

Answer:

छात्रों को अपने या परिचितों के अनुभव साझा करने चाहिए जहाँ किसी ने निःस्वार्थ भाव से भलाई या ईमानदारी दिखाई हो। उदाहरण के लिए, किसी ने खोया हुआ सामान वापस किया हो या जरूरतमंद की मदद की हो। इससे वे नैतिक मूल्यों को समझेंगे और दूसरों को प्रेरित करेंगे।

Explanation:

यह प्रश्न नैतिक शिक्षा और सामाजिक व्यवहार को प्रोत्साहित करता है। व्यक्तिगत अनुभव साझा करने से नैतिकता की समझ गहरी होती है।

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Q4.दोषों का पदार्धाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?

Answer:

दोषों का पदार्धाश तब बुरा रूप ले सकता है जब वह केवल नकारात्मकता फैलाने लगे, लोगों की छवि खराब करने लगे और समाज में असहिष्णुता और अविश्वास पैदा करे। इससे लोगों का मनोबल गिरता है और वे सुधार के बजाय हतोत्साहित हो जाते हैं।

Explanation:

दोषों को उजागर करना जरूरी है लेकिन संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण से ताकि सुधार हो सके। अतिशय नकारात्मकता से समाज में विघटन होता है।

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Q5.आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल ‘दोषों का पदार्धाश’ कर रहे हैं। इस प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए?

Answer:

दोषों का पदार्धाश समाज में जागरूकता लाने के लिए आवश्यक है क्योंकि इससे गलत कार्यों का पता चलता है और सुधार की दिशा मिलती है। परन्तु यदि यह केवल नकारात्मकता फैलाने के लिए हो तो इसका हानिकारक प्रभाव होता है। इसलिए दोषों का पदार्धाश संतुलित, तथ्यात्मक और समाधानपरक होना चाहिए।

Explanation:

समाचार माध्यमों का उद्देश्य समाज को सचेत करना है, परन्तु उन्हें जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए ताकि समाज में विश्वास और सकारात्मकता बनी रहे।

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Q6.निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं? आपस में चर्चा कीजिए, जैसे—“ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।” परिणाम—भ्रष्टाचार बढ़ेगा। 1. “सचाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।” ... 2. “शूठ और फरेब का रोजगार करनेवाले फल-फूल रहे हैं।” ... 3. “हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम।” ...

Answer:

1. यदि सचाई को केवल भीरु और बेबस लोगों का गुण माना जाए तो लोग सच बोलने से डरेंगे और झूठ को बढ़ावा मिलेगा। इससे सामाजिक विश्वास कमजोर होगा। 2. यदि शूठ और फरेब करने वाले फल-फूल रहे हैं तो लोग ईमानदारी छोड़ देंगे और भ्रष्टाचार बढ़ेगा। समाज में अनैतिकता फैल जाएगी। 3. जब हर आदमी दोषी अधिक दिखे और गुणी कम, तो लोगों में निराशा और अविश्वास बढ़ेगा। इससे समाज में असंतोष और विघटन होगा।

Explanation:

यह प्रश्न नैतिक मूल्यों के सामाजिक प्रभाव को समझने के लिए है। इन विचारों पर चर्चा से छात्र समाज में नैतिकता के महत्व को समझेंगे।

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Q7.आपने इस लेख में एक बस की यात्रा के बारे में पढ़ा। इससे पहले भी आप एक बस यात्रा के बारे में पढ़ चुके हैं। यदि दोनों बस-यात्राओं के लेखक आपस में मिलते तो एक-दूसरे को कौन-कौन सी बातें बताते? अपनी कल्पना से उनकी बातचीत लिखिए।

Answer:

छात्रों को कल्पना से दोनों लेखकों के बीच संवाद लिखना चाहिए जिसमें वे अपनी-अपनी बस यात्राओं के अनुभव साझा करें। वे ईमानदारी, भलाई, समाज की स्थिति, और यात्राओं से मिली सीखों पर चर्चा कर सकते हैं। यह अभ्यास रचनात्मकता और समझ विकसित करने में सहायक होगा।

Explanation:

यह प्रश्न कल्पना और संवाद लेखन कौशल को बढ़ावा देता है तथा विषय की गहरी समझ प्रदान करता है।

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Q8.लेखक ने लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ क्यों रखा होगा? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं?

Answer:

लेखक ने शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ इसलिए रखा होगा क्योंकि वह जीवन में आने वाली कठिनाइयों और धोखे के बावजूद उम्मीद और सकारात्मक सोच बनाए रखने की बात करता है। बेहतर शीर्षक हो सकता है – ‘आशा की किरणें’, ‘निराशा से ऊपर उठो’, या ‘जीवन में उम्मीद’।

Explanation:

शीर्षक लेख के मुख्य भाव को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। बेहतर शीर्षक सोच को और स्पष्टता से व्यक्त कर सकता है।

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