Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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साम्राज्य क्या होता है?
परिभाषासाम्राज्य क्या होता है?
साम्राज्य एक विशाल राजनीतिक संगठन होता है जिसमें एक सम्राट या राजा कई छोटे-छोटे राज्यों या क्षेत्रों पर शासन करता है। साम्राज्य में विभिन्न जातियों, भाषाओं, संस्कृतियों और धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। साम्राज्य की विशेषता यह होती है कि यह एक केंद्रीकृत सत्ता के अधीन होता है, जहां सम्राट के पास सर्वोच्च अधिकार होते हैं। साम्राज्य के विस्तार के कारण इसमें विभिन्न प्रकार के लोग और क्षेत्र शामिल हो जाते हैं, जो सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विविध होते हैं। साम्राज्य के भीतर एकता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था, कानून, सेना और आर्थिक नीतियाँ बनाई जाती हैं। साम्राज्य का उदय प्राचीन भारत में छोटे-छोटे राज्यों के विलय से हुआ, जिससे राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण संभव हुआ। **Table on page 1 (1×3)** | — कौटिल्् य (अरश्थ ास्त्र) ्र 5.1 — बिह ार की बराबर पह ाड़ियोों म ेंस््थथित शलै कृत गफु ा | | | | --- | --- | --- | | महत्वपरू ्ण प्रश्न | 1. साा म्रााजय् क्याा होोताा है? 2. साा म्रााज् ंयों काा उदय कैैस ेहुआ और उनह् ोंंने भाारतीी सभ्यताा कोो कैैस े आकाा र दि�याा? 3. राज्य से साम्रा ज्य बनने म ें कौन-कौन से तत् सहायक हुए? | य व | **Table on page 3 (1×3)** | भविषा और ध्वरु अत््यंत आनंदि अभी-अभी अपने नवीन यंत्र ‘ सक्रिय किया था, जो उन््हें अती वाला एक काल-यंत्र था। अपन अध््ययाय से संकेत ग्रहण कर उन््होों यात्रा के लिए पाटलिपतु ्र भ्रमण किया। वे जानते थे कि यह नगर जहाँ आधिुन क पटना ह।ै | भविषा और ध्वरु अत््यंत आनंदि अभी-अभी अपने नवीन यंत्र ‘ सक्रिय किया था, जो उन््हें अती वाला एक काल-यंत्र था। अपन अध््ययाय से संकेत ग्रहण कर उन््होों यात्रा के लिए पाटलिपतु ्र भ्रमण किया। वे जानते थे कि यह नगर जहाँ आधिुन क पटना ह।ै | त थे। उन््होोंने इतिहास’ को त में ले जाने े इतिहास के ने अपनी प्रथम का निश्चय वहीीं स््थथित था | | --- | --- | --- | | | | | **Table on page 7 (10×4)** | | | | | | --- | --- | --- | --- | | | Æ एक विशाल साम्राज्य का संच ालन करना अनेक प्रकार की कठिनाइयोों से भरा होता | | | | ह,ै फिर भी कोई राजा अपना राज््य बढ़ाकर सम्राट क््योों बनना चाहता होगा? नीच े कुछ संभावित उत्तर दिए गए हैं, आप चाहें तो इसमें और भी उत्तर जोड़ सकते हैं। ‘संपरू ्ण विश्व पर शासन’ करने की महत््ववाकांकष् ा अर्तथथा ् एक बड ़े प्रदशे को नियतं ्रण में रखना एक ऐसा रूपक ह,ै जिससे संकेत मिलता ह ै कि वह विशाल कषेत् ्र पर अधिकार करना चाहता था तथा यह सिुन श््चचित करना चाहता था कि भावी पीढ़ियाँ उन््हें याद रखेंगी। एक विशाल भ-ू प्रदशे को अपने अधीन कर, वहाँ के संसाधनोों का प्रयोग कर अपनी आर्कथथि एव ं सैन्् य शक््तति बढ़ाने की इच्् छछा। स्् वय ं एव ं अपने साम्राज््य के लिए महान संपदा प्राप्त करने की उत््ककंाठ । सामान््यतः सम्राट स््थथानीय राजाओ ं या प्रमोुख ों को अपने प्रति निष््ठठा तथा भेंट के बदले अपने क्षेत्रर ों का प्रशासन करने की अनमु ति दते े थे। चित्र 5.4.1 — प्रशिक्षित सेनाए ँ पड़ ोसी राज््योों को जीतने, उन पर नि यंत्रण स््थथापित करने तथ ा साम्राज््य की सीमाओ ंकी सरु क्षा करने हते ुभजे ी जाती थीीं। | ह,ै फिर भी कोई राजा अपना राज््य बढ़ाकर सम्राट क््योों बनना चाहता होगा? नीच े कुछ संभावित उत्तर दिए गए हैं, आप चाहें तो इसमें और भी उत्तर जोड़ सकते हैं। | | भावी पीढ़िय आने वाली पीढ़ियाँ। | | | | | | | | ‘संपरू ्ण विश्व पर शासन’ करने की महत््ववाकांकष् ा अर्तथथा ् एक बड ़े प्रदशे को नियतं ्रण में रखना एक ऐसा रूपक ह,ै जिससे संकेत मिलता ह ै कि वह विशाल कषेत् ्र पर अधिकार करना चाहता था तथा यह सिुन श््चचित करना चाहता था कि भावी पीढ़ियाँ उन््हें याद रखेंगी। | | | | | | | | | | एक विशाल भ-ू प्रदशे को अपने अधीन कर, वहाँ के संसाधनोों का प्रयोग कर अपनी आर्कथथि एव ं सैन्् य शक््तति बढ़ाने की इच्् छछा। | | | | | | | | | | स्् वय ं एव ं अपने साम्राज््य के लिए महान संपदा प्राप्त करने की उत््ककंाठ । | | | | | | चित्र 5.4.1 — प्रशिक्षित सेनाए ँ पड़ ोसी राज््योों को जीतने, उन पर नि यंत्रण स््थथापित करने तथ ा साम्राज््य की सीमाओ ंकी सरु क्षा करने हते ुभजे ी जाती थीीं। | | | | | | | **Table on page 10 (2×3)** | का अ ् ध य यन: भारत और उस े क आ े ग | क ् का ष 7, भाग 1 10º उ० 20º उ० 30º उ० | | उ० प० पू० तकश्षeि लाा द० शeि बीीपरु हसÖ्ति िनाापरु शा्रावस्ीती मथुराा वैशाालीी पाटलिप ुत्र पा्राग्ज्योोति�षपुर कााशीी चंपा कौशांबी रााजगृह द्वाारकाा उज्जयि^नीी तााम्रलि�प्तिÈि� भरुकच्छ सोोपााराा कलिंंग� नग र प्रति�ष्ठाान अरब बंगााल सव् र्णगिFरि� साागर कीी खााड़ीी कांचीपुरम् कावेरीपट्टनम मच्छेडी़ी मदुुरई सकं ेेति�काा महत्वूपरण ््नग र कि�मीी उत्तराापथ दक्षि�णाापथ अन्य माार्गग | | --- | --- | --- | | | | | | | | चि | **Table on page 12 (4×4)** | 1 भाग 7, चित्र 5.6 — ् का ष क हाथियोो ं पर सै | े ग आ े क उस और भारत यन: य ् ध अ का | | मगध सामर् ाज्् यसंसाधनोों से समदृ ्ध गंगा के उपजाऊ मदै ानोों में स््थथित था, जहाँ उपजा भमू ि, प्रचरु मात्रा में इमारती लकड़ी प्रदान करने वाले वन तथा हाथी जैसे महत्वपरू ्ण प थे। यह भी ध्् ययान रखने वाली बात ह ै कि लौह धात ु का उपयोग कृषि एव ं युद्ध कलाओ सहित अन्् य तकनीकी परिवर्नत ोों का प्रमखु कारण बना। निकट के पर्वतीय कषेत् ्ररों से प्राप् लौह अयस््क एव ं अन्् य खनिज संसाधन मगध सामर् ाज्् य के विस््ततार में अत््यंत सहाय सिद्ध हुए। लोह ेके हल दव् ारा भमू ि की जतु ाई से कृषि उत्् पपादन म ें तीव्र वृधद् ि हुई और हल् व तेज धार वाले लोह े के शस्त्ररों ने सेना की युद्ध क्षमता को अधिक सशक्त बनाया। उत्तर भारत के नगर कुशीनारा (आधनुि क कुशीनगर) की घरे ाबंदी करते तथ ा यदु ्ध करते हुए पैदल, घडु ़सवार औ निकोों को दर््शशाती साँची के स््ततपू की विस््ततृत पटि्टका। इसका उदद् शे ् य बदु ्ध के अवशषे ोों को पनु ः प्राप्त करना थ पटि्टका के बाए ँभाग में एक हाथी पर इन्ह ेंले जाते हुए दि खाया गया ह।ै आइए पताा लगााएँ | | | --- | --- | --- | --- | | | — पर सै | उत्तर निको | | | | | आइए पताा लगााएँ | | | | | Æ उपर्युक्त शिल््प-पटि्टका का सकू ्षष्म अवलोकन करें। आप इनमें कितने प्रकार के शस्त्ररों की पहचान कर सकते हैं? आपको लोह े के कौन-कौन से उपयोग दिखाई दते े हैं? | | | | | | | **Table on page 13 (4×4)** | | | | | | --- | --- | --- | --- | | किया जा सकता था। फलते-फूलते व््ययापार चित्र 5.7 — मह ापद म् नंद का चाँदी क आहत सिक््कका ने राज्् य की आय में वृधद् ि की तथा मगध के उत्् थथान म ें योगदान दिया। 5वीी ं शताब््द दी सा.सं.प ू के लगभग महापदम् नंद मगध म ें प्रमखु ता से उभरे और उन्् होोंने नंद वंश की स््थपथा ना की। उन्् होोंने छोटे-छोटे राज्् योों को सफलतापरू ्वक संगठित किया तथा अपने साम्रजा ््य का विस््ततरा उत्तरी तथा परू ्वी भारत में किया। जैसे-जैसे उनकी अर््थव््यवस्थ् था समदृ ्ध हुई, उन्् होोंने अपनी आर्थथिक शक््तति के प्रदरन््श हते ुसिक्कों का पच्र लन आरंभ किया। गी्र क विव रणोों से यह भी ज्ञा त होता ह ै कि नंद वंश के पास एक विशाल सेना थी। नंद वंश के विभि न्न लेखोों से ऐसा प्रतीत होता ह ै कि इस वंश का अिंत म शासक धनानंद अत्धय िक धनवान होने के बावजदू , अत््तयं अलोकप्रिय हो गया था, क््योोंकि वह अपनी प्रजा का उत्् पडपी ़न व शोषण करता था। इससे नंद वंश की पराजय तथा विशालतम सामर् ाज््योों में से एक मौर्य साम्राज्् य में इसके समाहित होने का मार््ग प्रशस््त हो गया। इसे अनदेखा न करेंे प्रसिद्ध संस््ककृत व््ययाकरणाचार्य पाणिनि का समय भी लगभग 5वीीं शताब््ददी सा.सं. प.ू में ही माना जाता ह,ै जब नंदोों का राज््य था। उन््हें एक प्राचीन संस््ककृत ग्रंथ अष््टटाध््ययायी की रचना के लिए जाना जाता ह,ै जिसमें 3996 सूत्ररों के माध्यम से संस््ककृत व््ययाकरण के नियमोों को संकलित चित्र 5.8 — पाणिनि की स््मृति में जारी | | ी क | ा एक | | | प्रसिद्ध संस््ककृत व््ययाकरणाचार्य पाणिनि का समय भी लगभग 5वीीं शताब््ददी सा.सं. प.ू में ही माना जाता ह,ै जब नंदोों का राज््य था। उन््हें एक प्राचीन संस््ककृत ग्रंथ अष््टटाध््ययायी की रचना के लिए जाना जाता ह,ै जिसमें 3996 सूत्ररों के माध्यम से संस््ककृत व््ययाकरण के नियमोों को संकलित चित्र 5.8 — पाणिनि की स््मृति में जारी | | | | | किया गया ह।ै एक भारतीय डाक टिकट | | | | | | | | **Table on page 14 (1×3)** | 30º पू० ग्रनि�कस पैलल् ाा उ० 45º काालाा सााग अलके ्जनै्डि्रि� याा भूमध्य साागर मेम्फिÌZस उ० 30º मिस्र उ० 15º कि�मीी 30º पू० 1 भाग 7, ् का ष क | े ग आ े क उस और भारत यन: य ् ध अ का | 30º पू० ग्रनि�कस पैलल् ाा उ० 45º काालाा सााग अलके ्जनै्डि्रि� याा भूमध्य साागर मेम्फिÌZस उ० 30º मिस्र उ० 15º कि�मीी 30º पू० | 40º पू० 60º पू० 70º पू० 90º पू० गौौगाामेलाा उ० प० पू० द० उ० आर इसुस ियन ्पि� ैÖ ैस क 45º हााइडेस्पीीज ागर सा ससू ाा बैक्ůट्रि�ियाा बेबीलोन पर्सीीपोोलि�स उ० फाारस 30º कीी ख ााड़ीी अरब साागर ला ाल साागर उ० 15º संकेेति�काा एलेक्जेडंर काा सााम्रााज्य एलेक्जेडंर काा माार्गग युद्ध हिंं�द महाासाागर 40º पू० 60º पू० 70º पू० 90º पू० | | --- | --- | --- | | | | 334 – 331 सा.सं.पू. मैसीडोनिया के एक युव ा और शक््ततिशाली ग्रीक श एलेक््जेंडर ने ग्रीस पर परू ्व में हुए फारसी आक्रमणोों का ब लेने के लिए फारसी साम्राज््य के विरूद्ध अभियान च (उस समय फारसशासित भारत के उत्तर-पश््चचिम क्षेत्र के भारतीय सैनिकोों ने ग्रीक सेना के विरुद्ध लड़़ाइयाँ ल | **Table on page 15 (2×4)** | आइए वि चार करेें आपके विच ार में एलेक््जेंडर संपरू ्ण विश्व पर राज क््योों करना चाहता था? इससे वह क््यया प्राप्त करना चाहता था? आइए पता लगाए ँ जब युद्ध के उपरांत एलेक््जेंडर ने राजा परु ु से पछू ा कि उसके साथ कैसा व््यवहार किया जाए, तब परु ु ने उत्तर दिया— “एक राजा की तरह”। इस उत्तर से प्रभावित होकर एलेक््जेंडर ने उन््हें उनके ही राज््य का क्षत्रप नियुक् त कर दिया। अपने शिक्षकोों की सहायता से राजा परु ु और एलेक््जेंडर के मध््य हुए युद्ध के विषय में और अधिक विव रण प्राप्त करें। अपने शोध के साथ-साथ अपनी कल््पनाशक््तति का उपयोग करते हुए इस युद्ध दृश््य का नाट्य मंच न करें। | आइए वि चार करेें | | | | --- | --- | --- | --- | | | आपके विच ार में एलेक््जेंडर संपरू ्ण विश्व पर राज क््योों करना चाहता था? इससे वह क््यया प्राप्त करना चाहता था? | | | | फारस वापस आकर एलेक््जेंडर को विद्रोह तथा राजनीतिक उथल-पथु ल का सामना करना पड़़ा। बेबीलोन में बीमार पड़ने और मात्र 32 वर्ष की अायु में निधन के बाद, उसका विशाल साम्राज््य शीघ्र ही उसके सेनापतियोों और क्षत्रपोों के बीच विभाजित हो गया, जिन््होोंने अपने स्वतंत्र राज्य स््थथापित कर लिए। 327–325 324–323 साा.सं.पू. साा.सं.पू. दिुनय ा के अंति म छोर तक पहुचँ ने के लिए उत््कससु एलेक््जेंडर ने आगे परू ्व की ओर बढ़ते हुए भारत में अपना अभियान प्रारंभ किया। पंजाब में राजा पोरस को पराजित किया और स््थथानीय जनजातियोों एवं शासकोों के भीषण प्रतिरोध का सामना करते हुए कई नगरोों में नरसंहार किया। ग्रीक अभिलेखोों में उल््ललेख ह ैकि कुछ लड़़ाइयोों में महिलाओ ंने परु ुषोों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध किया। एलेक््जेंडर स््वयं एक युद्ध में गंभीर रूप से घायल हो गया था। थके हुए | | | | **Table on page 16 (2×4)** | का अ ् ध य यन: भारत और उस े क आ े ग | क ् का ष 7, भाग 1 | | | मतृ ््दयु ंड दगे ा। जिम््ननोसोफिस््टोों ने एलेक््जडें र के प्रश्न का शांति और ब्ुद धिमत्ता से उत्तर दिया। एलेकज्् ेंड दारश्् निकोों के उत्तर से प्रभावित हुआ और अतं में सभ दारश्् निकोों को म्ुक त कर दिया। सदियोो ं से इस घटन के अनेक संस््करण प्रचलित हैं, जो इसे इतिहास क सबसे रोचक दारश्् निक घटनाओ ंमें से एक बनाता ह चित्र 5.11 — एक ग्रीक सिक््कका, एक विव रण के अनसु ार एलेक््जडें र ने पछू जि सम ेंसंभवत ः घोड़़े पर सवार “जीवन या मतृ ्् यु में कौन अधिक शक््ततिशाली ह?ै एलेक््जेंडर को हाथी पर सवार पोरस पर आक्रमण करते हुए दि खाया गया ह।ै एक ऋषि ने उत्तर दिया, “जीवन, क््योो ंकि वह लंबा जबकि मतृ ्् यु नहीीं।” एलेक््जडें र ने फिर प्रश्न किया “कोई व््यक््तत ि सबसे अधिक प्यरि कै हो सकता ह?ै ” उत्तर आया, “यदि वह सबसे अधिक शक््तत िशाली ह ै और फिर भी भ उत््पन्् न नहीीं करता ह।ै ” संभवतः यह शक््ततिशाली शासक के लिए एक संकेत था। इतिहासकार इस प्रकार के वैचारिक संव ादोों को ग्रीक और भारतीय दरन््श परंपराओ के मध्य एक महान बौद्धिक संगम के रूप में दखे ते हैं। | | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | | | स | **Table on page 17 (6×5)** | 70º पू० 80º पू० 90º पू० उ० 40º | | 40º उ० | | | | --- | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | ि स ं� ं ु ध चेनााब झ ेल म यासा रा ी वी ् ब ा उ० ल ज त स 30º श्राावस्तीी वैशाालीी मथुराा यमुन मान स वाारााणसीी पाटि ल पुत्र च म ब ् ल ुाा गंगाा घ ााघ राा ो को ी सी तीीस्ताा ा ब र्ह म्ु प र् त कौशांबी न ब ाास चंपा रााजगृह स ोोन उज्जयि�नी ी व�ि दिश� ाा े बव ताा माी ही ा महाानदीी न म् र ाद मा सुबर् णणरेखाा तााम्रलि�प्तिÈि� ा ता ी प ी 20º उ० गोोदाावरीी े वन ं ग ा गा तेल ब्रााहम्णीी इन्द्राावतीी भीीमाा ृृष्णाा क �ंु तग द भ ार ्ा पेन्नर पलाार पोोन्नयाार उ० ाावेरीी क 10º संकेेति�काा नंद वंश रााजधाानीी | | | 10º उ० 20º उ० 30º उ० | | | | बरााक | ि द� ा ह � ंग | | | | | | | | | | महत्वपूर््णन गर नदि�याँँ� 70º पू० 80º पू० 90º पू० | | | | | | | | | | | **Table on page 18 (1×3)** | | | | | --- | --- | --- | | का अ ् ध य यन: भारत और उस े क आ े ग | क ् का ष 7, भाग 1 10º उ० 20º उ० 30º उ | | | **Table on page 21 (3×3)** | ू प्रशासन की आवश््य कता है। उन््होोंने भ्रष््टटाचार से निपटने के लिए अनेक कानूनोों का भी विव रण दिया और लोगोों की भलाई के विरुद्ध जाने वाले किसी भी कार्य के लिए दंड -विधान भी निर्ददिष्ट किया। आइए वि चार करेें कौटिल्् य कहत े ह,ैं “एक राजा को अपनी पज्र ा के कल्् यय ा ण को बढ़़ााव दके र अपनी शक्् तत ि म े वधृद्ि करनी चाहिए, कय्् ोो कं ि शक्् तत ि गा्र म-कतषे् ्र स े आती ह,ै जो समस् त आर्कथथि गतिवििध योो ं का सर् तो ह।ै (राजा को) गा्र मीण कत्षे ्र म ें उन लोगोो ं पर विशषे अनगु ह्र करना चाहिए, जो लोगोो ं को लाभ पहचुँ ान े वाल े कार ्य करत े ह,ैं जसै े– तटबधं या सडक़ -पलु बनाना, गावँ ोो ंका सौौ दं रय् की रण करना अथवा उनकी रकष् ाकरन ेम ेंसहायता पद्र ान करना।” आपके अनसु ार ग्रामीण क्षेत्र का विशेष ध््ययान रखना क््योों महत्वपरू ्ण था? (संकेत – इस अध््ययाय के आरंभ में आपने जो पढ़़ा ह,ै उस पर पनु ः विच ार कीजिए।) कौटिल््य के शासन का मूल दर््शन भारतीय मूल््योों के अनुरूप है — “अपनी प्रजा की प्रसन््नता में राजा की प्रसन््नता निहित है, प्रजा की भलाई में उसकी भलाई है। राजा को केवल वही अच््छछा नहीीं मानना चाहिए जो उसे प्रसन््न करे, बल््ककि जो उसकी प्रजा को अच््छछा लगे, उसे अपने लिए भी वही लाभदायक मानना चाहिए।” दूसरे शब््दोों में, राजा चाहे कितना भी शक््ततिशाली क््योों न हो, उसे सदैव प्रजा के हितोों को प्राथमिकता देनी चाहिए। आइए पता लगाएँ अपनी कक्षा में एक सामहू िक चर्चचा आयोजित करें और कौटिल््य के साम्राज््य के प्रति विच ारोों की विशेषताओ ंकी तलु ना आधिुन क राष्टट्र से करें। | | | | --- | --- | --- | | | आइए पता लगाएँ | | | | अपनी कक्षा में एक सामहू िक चर्चचा आयोजित करें और कौटिल््य के साम्राज््य के प्रति विच ारोों की विशेषताओ ंकी तलु ना आधिुन क राष्टट्र से करें। | | | | | | **Table on page 22 (3×3)** | महत्वपरू ्ण उपलब््धधियोों का श्रे दिया जाता ह।ै अपन े शासन के आरंभि काल म ें अशोक अत्् यं महत्् वव का ाकं ष् ी थ।े उन्् हें विरास म ें एक विशाल सामर् जा ्् य पा्र प् हआु था, जिस े उन्् ोहो नं े भारती चित्र 5.16 — नेपाल में रामगर्ाम स््ततपू का भ्रमण करते हुए अशोक का उपमहादव् पी के दक्िष ीण भाग क साँची स््ततपू की एक पटि्टका से लि या गया दृश््य छोड़कर सपं रू ्ण भभू ाग म ें वि्स त् ृ किया। इसम ें व्र मत ान बागं्् लदला शे , पाकिस्् तनता तथा अफगानिस्् तनता के कुछ भाग भ शि�लाालखे सम्म् मितलि थ।े हालाकँ ि, राज्् य वि्स त् तरा की पक्र र् यि ा म ें घटित एक यदु ्ध न े अशोक वर्ततमाान सदंं र ्भभ जीवन की दिशा ही बदल दी। उनके एक शि लालेख के अनसु ार, उन्् ोहो नं े एक ब म ेंंएक राा जाा याा कलिगं (आधिुन क ओडिशा) पर आकम्र ण किया तथा भयकं र यदु ्ध लड़़ ।ा यदु ्ध कतषे् ्र अधि�काारि�योंं द्वााराा जनहि�त भारी विनाश और मतृ ्् यु को दखे कर अशोक न े हिसं ा का परित्् य गया कर यथासभं व शािंत 1 केे लि�ए और अहिसं ा के मार ््ग को अपनान े का निरय्ण लिया, जो महात्् म मा बदु ्ध की शिकष् ा भाग नि�दर्ेेशि�त एक 7, अनरु पू था। आधि�काारि�क ् का ष क घोोषणाा | े ग आइए वि चार करेे ं आ े क दूतू उस अशोक ने अपने शिलालेखोों में कलिंग युद्ध का उल््ललेख किया ह।ै वे चाहते तो इसका प्राायःः और उल््ललेख न करके भविष््य की पीढ़ियोों के समक्ष स्वयं को एक शांति परू ्ण, परोपकारी कूूटनीी तिक� भारत पक्र ृृति� केे राजा के रूप में प्रस््तततु कर सकते थे। आपके विच ार में उन्होंने इस विनाशकारी युद्ध का यन: वि�शेष काारयय् केे उल््ललेख अपने शिलालेखोों में क््योों किया? य ् ध लि�ए भेजाा गयाा अ का | | | | --- | --- | --- | | | आइए वि चार करेे ं | | | | अशोक ने अपने शिलालेखोों में कलिंग युद्ध का उल््ललेख किया ह।ै वे चाहते तो इसका उल््ललेख न करके भविष््य की पीढ़ियोों के समक्ष स्वयं को एक शांति परू ्ण, परोपकारी राजा के रूप में प्रस््तततु कर सकते थे। आपके विच ार में उन्होंने इस विनाशकारी युद्ध का उल््ललेख अपने शिलालेखोों में क््योों किया? | | | | | | **Table on page 23 (6×5)** | | | हमने ब्राहम् ी लिपि में लिख का उल््ललेख किया ह।ै इस ह?ै सरल शब्् दोों में, भाषा बोलते हैं, जबकि लिपि व एक भाषा को लिखते हैं। क दनै िक जीवन में इसके | ी प्राकृत भाषा का क््यया अर््थ वह ह ै जो हम ह ह ै जिसम ें हम ््यया आप हमारे उदाहरण सोच | | | --- | --- | --- | --- | --- | | सकते हैं? लिख े गए थे (बर् ाह्म ी भारत की सभी कषे् त्रीय लिपियोों की जननी मानी जाती ह)ै । 70º पू० 80º पू० 90º पू० उ० 40º उ० प० पू० द० माानसेहराा कंदं हाार कलसीी उ० 30º मेरठ लुंं�बि�नीी बैरााट कौौशंा�बीी बरााबर परवव्त साारनााथ गि�रनाार सां�चीी धौौलीी उ० 20º बगं ाल अमराावतीी अरब मसक् ीी की सागर खाडी़ ब्रहग्मि रि सकं ेेति�काा प्रमुखश ि�ला ालखे उ० लघु शि�लाालेख 10º स्तंभ शि�ला ालखे लघु स्तंभ शि�ला ालखे गुफाा अभि�लेख कि�मीी | | सकते हैं? | | | | | | | 10º उ० 20º उ० 30º उ० 40º उ० | | | | | | | | | | 70º पू० 80º पू० 90º पू० उ० 40º उ० प० पू० द० माानसेहराा कंदं हाार कलसीी उ० 30º मेरठ लुंं�बि�नीी बैरााट कौौशंा�बीी बरााबर परवव्त साारनााथ गि�रनाार सां�चीी धौौलीी उ० 20º बगं ाल अमराावतीी अरब मसक् ीी की सागर खाडी़ ब्रहग्मि रि सकं ेेति�काा प्रमुखश ि�ला ालखे उ० लघु शि�लाालेख 10º स्तंभ शि�ला ालखे लघु स्तंभ शि�ला ालखे गुफाा अभि�लेख कि�मीी | | 10º उ० 20º उ० 30º उ० 40º उ० | | | | वर्तमाान अंतररााष्टी्रीय सी ीमाा 70º पू० 80º पू० 90º पू० | | | | | | | | | | **Table on page 25 (2×3)** | | इसे अनदेखा न करेंे | | | --- | --- | --- | | | आपने ककष् ा 6 में धर ््म (प्राकृत में ‘धम्’म ) शब्द के बारे में पढ़़ा ह।ै इसका भाव सहजता से नहीीं समझा जा सकता। सरल शब्दों म ेंधर््म का अर््थ ह ै— नैतिक नियम या परिवार, समदु ाय या राष्ट्र के प्रति किसी व्कय ््तति का ‘नैतिक’ अथवा ‘धार्ममिक’ कर््तव्य। यद्यपि, गहन रूप से ‘धर’््म का अर््थ ह ै— ब्रह््माांड या ‘ऋतम ’ के अनसु ार जीवन-यापन की पदत्ध ि। इसमें अपने कर््तव्य का सत्नय िष्् ठठा से निरह्व न, ‘धर’््म के अनसु ार नियमोों का पालन करना एव ंबह्र ््मााींड य | | | व्यवस््थथा के साथ सामजं स्य स््थथापित कर जीवन-यापन सम््ममिलित ह।ै इसलिए ‘धर’््म का अर््थ कर््तव्य, नियमोों का पालन, सत्य, व्यवस््थथा और नैतिकता आदि में निहित ह।ै आइए पता लगाए ँ अशोक ने अपने एक अभिलेख में अपने अधिकारियोों के आचरण संबंधि त विस््तततृ निर्शदे दिए हैं। उन्होंने यह सिुन श्चित करने की व्यवस््थथा की कि अधिकारी निष्पक्षता से कार्य करें। निम्नलिखित अनुव ाद को पढ़़िए और बताइए कि क््यया ये उपाय साम्राज्य के प्रबंधन में सहायक सिद्ध हुए होोंगे? यदि हाँ, तो कैसे? ‘दवे ानामिप य’ के आदशे ानसु ार— अधि कारियोों और नगर न््ययायाध््यक्षषों को यह निर्शदे दि या गया ह—ै (...) तमु लोग अनेक सहस्र पा्र णयि ोों के ऊपर नि यकु ्त कि ए गए हो। तमु ् ह ें मनषु ्यों का स््ननेह अर््जजित करना चाहि ए। सब मनषु ् य मरे ी संतान के समान हैं। जि स तरह मैं चाहत ा हँू कि मरे ी संतान इस लोक और परलोक दोनोों में मगं ल और सखु प्राप्त करे, उसी तरह मैं सब मनषु ्य ोंके लि ए कामना करता हँू। (...) तमु ् ह ेंनि ष्पक्षता से न्् ययाय करना चाहि ए। (...) इन सबका मलू को्र ध का त््गयया और धरै ््य का पालन ह।ै (...) यह लेख यहाँ इसलि ए लि खवाया गया ह ै कि नगर के न््ययाय शासक हम शे ा सावधान रह ें कि मनषु ्यों को कभी अकारण कैद या यातना न दी जाए। (...) और इस उदद् शे ् यकी परू ््ति हते ुमैं प्रत्् ययेक पाँचव ेंवर ्षएक नम्र और दयाल ु मह ामात्र भजे ँगू ा जो इसकी खोज करने के बाद ..., यह दखे गे ा कि मरे े आदशे ोों का पालन कि या जाता ह ैया नहीी ं।’’ अशोक की मतृ ्् ययु के बाद मौर्य सामर् जा ् य लगभग आधी शताब््ददी तक चलता रहा। हालाँकि, उनके उत्तराधिकारी सामर् ाज््य को एकजटु रखने में असमर््थ रह े और कई छोटे राज्य टूट गए और स् वतंत्र हो गए। लगभग 185 सा.सं.प.ू भारत ने अपनी यात्रा के दसू रे | व्यवस््थथा के साथ सामजं स्य स््थथापित कर जीवन-यापन सम््ममिलित ह।ै इसलिए ‘धर’््म का अर््थ कर््तव्य, नियमोों का पालन, सत्य, व्यवस््थथा और नैतिकता आदि में निहित ह।ै | | **Table on page 26 (2×4)** | का अ ् ध य यन: भारत और उस े क आ े ग | क ् का ष 7, भाग 1 | इसे अनदेखा न करेंे | | | | --- | --- | --- | --- | | | सोहगौरा तामप्र त ्र अभिलखे , जो चौथी-तीसरी शताब्् ददीसा.स.ंप.ू का ह,ै भारत के सबस े पा्र चीन पश्र ासनिक अभिलखे ोो ंम ेंस ेएक ह।ै उतर्त पद्र शे के सोहगौरा म ें खोज े गए इस अभिलखे पर पा्र कृत भाषा म ें बर् हा म् ी लिपि में लिखा गया ह।ै यह माना जाता ह ैकि इस े च्ंद गर पु ् त मौर ्य के शासनकाल में जारी किया गया था। इस अभिलखे चि�त्र 5.19 म ेंद्ुर्िभभ क्षस ेराहत एव ंबचाव हते ुएक अन्् गनना ार की स्् पथथा ना का उल्् खलले ह।ै यह राज् य दव् रा ा खाद ्य सरु कष् ा सिुनश््चच ति करन े और सकं ट के समय अपन ेलोगोो ंको सहारा दने ेके पय्र ासोो ंपर पक्र ाश डालता ह।ै | | | | | मगे स्थनीज के विव रण से भी उस समय के समाज पर कुछ प्रकाश पड़ता ह।ै जनसंख्् का एक बड़़ ा भाग कृषि म ें संलग्न था, जो मगध सामर् ाज्य के लिए राजस्व का ए महत्वपरू ्ण सर् ोत था। एक वर् ष म ें दो फसल ें बोई जाती थीीं क् योंकि गर्मी और सर्दी दोनोों वर््षषा होती थी। इससे स्पष् टहोता ह ैकि द्ुर ्िभभ क्षकी संभावना कम थी और लोगोों को पर््ययाप् भोजन उपलब्ध था। किसी भी संभावित स््थथिति के लिए अन् न भंड ारोों में पर््ययाप्त अन््न होत था। अगर आस-पास यदु ्ध छिड़ भी जाए, तो भी किसानोों को इससे बचाया जाता था औ कृषि कार्य को क्षति नहीीं पहुचँ ाई जाती थी। लोहार, कुम्् रहहा , बढ़ई, जौहरी और अन्य कारीगर नगरोों म ें रहते थे। नग भली-भाँति योजनाबद्ध थे और सडक़ ोो ं पर पहचान सचू क लगे होते थे। संदशे वाहकोों | | | **Table on page 30 (8×3)** | आइए पता लगाए ँ नीचे दर्शशाए गए सिक्कों के अलग-अलग चिह्नंाे पर ध््ययान दीजिए। इन चिह्ननों का अर््थ क््यया हो सकता ह,ै क््यया आप अनमु ान लगा सकते हैं? चित्र 5.29.1 — मौर््यकालीन आहत (पंचमार््क) सिक्कों का एक संग्रह चि�त्र 5.29.2 — अशोोक काा एक आहत सि�क्काा 1 इसे अनदेखा न करेंे भाग 7, ् का ष स््पततू के केंेद्र में स््थथित बड़़ी अर््धगोलाकार संरचना अंड ाकार होती ह।ै यह ब्रह््माांड का क | प्रतिनिधित्व करती ह ै और प्राय: पवित्र अवशेषोों को रखने के लिए निर्ममित की जाती ह।ै े ग आ उपासक इसके चारोों ओर परिक्रमा करते हैं जिसे ‘प्रदक्षिणा’ कहा जाता ह।ै े क उस और साम्राज्यों क ी दुर्बलताएँ भारत यन: आप आगे की ककष् ओा ंमें विश्व के अन्य स््थथानोों पर अतीत के शक््तत िशाली साम्रजा ् य ् ध के बारे में पढेंग़ े जैसे – रोमन, फारसी, ऑटोमन, स््पपैनिश, रूसी, ब्रिटिश, इत््ययादि। वे सभ अ का | | | | --- | --- | --- | | | आइए पता लगाए ँ | | | | नीचे दर्शशाए गए सिक्कों के अलग-अलग चिह्नंाे पर ध््ययान दीजिए। इन चिह्ननों का अर््थ क््यया हो सकता ह,ै क््यया आप अनमु ान लगा सकते हैं? | | | | | | | | चित्र 5.29.1 — मौर््यकालीन आहत (पंचमार््क) सिक्कों का एक संग्रह चि�त्र 5.29.2 — अशोोक काा एक आहत सि�क्काा | | | | इसे अनदेखा न करेंे | | | | इसे अनदेखा न करेंे | | | | स््पततू के केंेद्र में स््थथित बड़़ी अर््धगोलाकार संरचना अंड ाकार होती ह।ै यह ब्रह््माांड का प्रतिनिधित्व करती ह ै और प्राय: पवित्र अवशेषोों को रखने के लिए निर्ममित की जाती ह।ै उपासक इसके चारोों ओर परिक्रमा करते हैं जिसे ‘प्रदक्षिणा’ कहा जाता ह।ै | | | | साम्राज्यों क ी दुर्बलताएँ आप आगे की ककष् ओा ंमें विश्व के अन्य स््थथानोों पर अतीत के शक््तत िशाली साम्रजा ् के बारे में पढेंग़ े जैसे – रोमन, फारसी, ऑटोमन, स््पपैनिश, रूसी, ब्रिटिश, इत््ययादि। वे सभ | | **Table on page 31 (3×3)** | ं साथ हुआ था। सदु रू क्षेत्र प्राय: साम्रजा ्य से अलग होने वाले पहले कषेत् ्र होते हैं। अतं म,ें प्राकृति क आपदाओ ं(जैस े– लंबे समय तक सखू ा या बाढ़) के कारण होने वाले आर्कथथि संकट भी सामर् जा ्य के पतन का कारण बन सकते हैं। अतः सामर् ाज्य अपने आप में एक विरोधाभास की तरह ह।ै एक ओर, वे राजनीतिक एकता स््थथतापि कर सकते हैं जैसे कि मौर्य सामर् ाज्य ने लगभग संपरू ्ण भारतीय उपमहाद्वीप में किया था। वे छोटे-छोटे राज्यों के बीच में युद्ध को कम या समाप्त भी कर सकते हैं। वास्तव में, एक सपु ्रबंधि त सामर् जा ्य छोटे यदु ्धरत राज्यों की तलु ना में अधिक सम्ृद धि ला सकता ह।ै दसू री ओर, सामर् जा ्य सामान््तय ः निरंतर युद्ध के द्वारा स््थथापित होते ह ैं और अपना अस््ततति ्व शक््तति और दंड के द्वरा ा बनाए रखते ह,ैं जिससे वे समय के साथ आतं रिक रूप से द्ुर बल और अस्थरि हो जाते हैं। | | | | --- | --- | --- | | | | | | महापदम् नंद चंंद्रुगुप्त मौौरयय् अजाातशत्रुु अशोोक 600 500 400 321 300 200 185 100 साा.सं.पू. साा.सं.पू. साा.सं.पू. साा.सं.पू. साा.सं.पू. साा.सं.पू.साा.सं.पू.साा.सं.पू. महााजनपद नंंद मौौरयय् | ू. | | | | | | **Table on page 32 (1×3)** | का अ ् ध य यन: भारत और उस े क आ े ग | क ् का ष 7, भाग 1 | | संपन्न क्षेत्ररों में उदित हुए। उत्तर-पश््चचिम भारत में एलेक््जेंडर के अभियान का राजनीतिक प्रभाव सीमित थ Æ लेकिन इसने भारतीय-ग्रीक सांस््कृकतिक संपर्ककों के द्वार खोल दिए। मौर्ययों ने एक विशाल साम्राज्य बनाया जिसकी विरासत शताब््ददियोों तक चल Æ उनकी विरासत में व््ययापारिक मार्गगों और आर्थथिक प्रणालियोों को सदु ृढ़ करन व््ययापार के लिए सिक्कों का व््ययापक उपयोग, उत््कृकष्ट रूप से संरचित की ग नगरीय बस््ततियाँ और प्रशासन की एक विस््तततृ प्रणाली सम््ममिलित ह।ै उन्होंने कल और वास््कततु ला को भी प्रोत््ससाहन दिया। अशोक अपनी उपलब््धधियोों का प्रसार करने और एक दयालु सम्राट की छव Æ प्रस््ततुत करने के लिए उत््ससुक थे। उन्होंने अपनी प्रजा को धर््म का पालन कर के लिए प्रोत््ससाहित किया। | | --- | --- | --- | | | | प्रश्न और काार्यकला ाप 1. साम्राज्य की विशेषताएँ क््यया हैं और यह राज्य से किस प्रकार भिन्न ह?ै इसकी व््ययाख्् कीजिए। 2. राज्यों से साम्राज्यों में परिवर्तन के लिए महत्वपरू ्ण कारक क््यया हैं? 3. एलेक््जेंडर को विश्व इतिहास में एक महान शासक माना जाता ह,ै आपके विच ार ऐसा क््योों ह?ै 4. प्रारंभि क भारतीय इतिहास में मौर्य वंश को महत्वपरू ्ण माना जाता ह।ै कारण बताएँ। |
- साम्राज्य एक विशाल राजनीतिक संगठन है।
- एक सम्राट या राजा कई राज्यों पर शासन करता है।
- साम्राज्य में विभिन्न जातियाँ, भाषाएँ और संस्कृतियाँ होती हैं।
- साम्राज्य की केंद्रीय सत्ता होती है।
- साम्राज्य के विस्तार से प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता बढ़ती है।
- 📌 साम्राज्य: एक बड़ा राजनीतिक संगठन जिसमें एक सम्राट कई राज्यों पर शासन करता है।
- 📌 सम्राट: साम्राज्य का सर्वोच्च शासक।
- 📌 केंद्रीकृत सत्ता: एक ऐसी सत्ता जिसमें निर्णय और शक्ति का केंद्र एक स्थान पर होता है।
साम्राज्यों का उदय कैसे हुआ?
व्याख्यासाम्राज्यों का उदय कैसे हुआ?
प्राचीन भारत में प्रारंभ में छोटे-छोटे स्वतंत्र राज्य थे। समय के साथ कृषि उत्पादन में वृद्धि, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के कारण ये छोटे राज्य बड़े साम्राज्यों में परिवर्तित होने लगे। कृषि में सुधार और लौह युग की तकनीकों ने उत्पादन बढ़ाया, जिससे आर्थिक शक्ति बढ़ी। व्यापार के विस्तार ने धन-संपदा को बढ़ावा दिया। इसके साथ ही, युद्ध और विजय के माध्यम से छोटे राज्यों का विलय हुआ। साम्राज्यों के उदय के पीछे राजनीतिक एकता की आवश्यकता, आर्थिक संसाधनों का नियंत्रण, और सुरक्षा की वजहें प्रमुख थीं। साम्राज्य बनने के लिए एक सशक्त सेना, कुशल प्रशासन और प्रभावशाली नेतृत्व आवश्यक था। इस प्रक्रिया में मगध जैसे राज्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो बाद में नंद और मौर्य साम्राज्यों का केंद्र बने।
- प्राचीन भारत में छोटे-छोटे राज्य थे।
- कृषि उत्पादन में वृद्धि से आर्थिक समृद्धि आई।
- व्यापार के विस्तार ने धन-संपदा बढ़ाई।
- युद्ध और विजय से राज्यों का विलय हुआ।
- साम्राज्य बनने के लिए सशक्त सेना और कुशल प्रशासन जरूरी था।
- 📌 कृषि उत्पादन: फसलों की पैदावार।
- 📌 आर्थिक समृद्धि: धन और संसाधनों की वृद्धि।
- 📌 राजनीतिक एकता: विभिन्न राज्यों का एक साथ आना।
मगध और नंद वंश
व्याख्यामगध और नंद वंश
मगध प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य था जो गंगा के उपजाऊ मैदानों में स्थित था। इसकी भूमि अत्यंत उपजाऊ थी और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों से लौह अयस्क प्राप्त होता था, जिससे कृषि और हथियार निर्माण में सहायता मिली। मगध की भौगोलिक स्थिति ने इसे सामरिक
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. साम्राज्य की विशेषताएँ क्या हैं और यह राज्य से किस प्रकार भिन्न है? इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
साम्राज्य अनेक छोटे राज्यों या क्षेत्रों से मिलकर बना एक बड़ा क्षेत्र होता है। साम्राज्य की विशेषताएँ हैं: (i) यह कई राज्यों या क्षेत्रों का समूह होता है, (ii) इसका शासक सम्राट होता है जो पूरे साम्राज्य पर शासन करता है, (iii) साम्राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था व्यापक और सुव्यवस्थित होती है, (iv) साम्राज्य का विस्तार सैन्य शक्ति, संसाधनों और आर्थिक जीवन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। राज्य एक सीमित क्षेत्र और लोगों पर शासन करता है जबकि साम्राज्य कई राज्यों को एक साथ जोड़ता है। अतः साम्राज्य राज्य से बड़ा और अधिक संगठित होता है।
व्याख्या:
साम्राज्य और राज्य में मुख्य अंतर क्षेत्र, प्रशासन और शासन की व्यापकता में होता है। साम्राज्य में कई राज्यों का समावेश होता है और इसका शासक सम्राट होता है, जबकि राज्य एक सीमित क्षेत्र होता है। साम्राज्य की विशेषताएँ जैसे विस्तार, प्रशासनिक व्यवस्था और सैन्य शक्ति इसे राज्य से अलग बनाती हैं।
Q2.2. राज्यों से साम्राज्यों में परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण कारक क्या हैं?
उत्तर:
राज्यों से साम्राज्यों में परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं: (i) सैन्य विजय और विस्तार, (ii) संसाधनों और आर्थिक जीवन का नियंत्रण, (iii) प्रशासनिक व्यवस्था का विकास, (iv) राजनीतिक एकता स्थापित करना, (v) व्यापारिक मार्गों और आर्थिक प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण। ये कारक छोटे-छोटे राज्यों को एक बड़े साम्राज्य में बदलने में सहायक होते हैं।
व्याख्या:
राज्यों से साम्राज्यों में परिवर्तन मुख्यतः सैन्य शक्ति, आर्थिक संसाधनों का नियंत्रण और प्रशासनिक व्यवस्था के विकास से होता है। जब कोई राज्य अन्य राज्यों को जीतकर या उनसे समझौता करके अपने अधीन कर लेता है और एक व्यापक प्रशासन स्थापित करता है, तब वह साम्राज्य बन जाता है।
Q3.3. एलेक्जेंडर को विश्व इतिहास में एक महान शासक माना जाता है, आपके विचार से ऐसा क्यों है?
उत्तर:
एलेक्जेंडर को विश्व इतिहास में महान शासक इसलिए माना जाता है क्योंकि उसने बहुत बड़े क्षेत्र पर विजय प्राप्त की और एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की। उसने अपनी सैन्य रणनीति और नेतृत्व कौशल से कई देशों को परास्त किया। इसके अलावा, उसने भारतीय उपमहाद्वीप में भी आक्रमण किया और भारतीय-ग्रीक सांस्कृतिक संपर्कों के द्वार खोले, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान हुआ। उसकी विजय और प्रशासनिक नीतियाँ इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
व्याख्या:
एलेक्जेंडर की महानता उसके सैन्य अभियानों, साम्राज्य विस्तार और सांस्कृतिक प्रभाव के कारण है। उसने यूनान से लेकर भारत तक का विशाल क्षेत्र जीता और विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ा। यह उसकी महानता का प्रमाण है।
Q4.4. प्रारंभिक भारतीय इतिहास में मौर्य वंश को महत्वपूर्ण माना जाता है। कारण बताएँ।
उत्तर:
मौर्य वंश को प्रारंभिक भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने लगभग संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की। उन्होंने व्यापारिक मार्गों और आर्थिक प्रणालियों को सुदृढ़ किया, सिक्कों का व्यापक उपयोग किया, उत्कृष्ट नगरीय बस्तियाँ और प्रशासन की विस्तृत प्रणाली विकसित की। मौर्यों ने कला और वास्तुकला को प्रोत्साहित किया और अशोक जैसे सम्राट ने धर्म और शांति का प्रचार किया। उनकी विरासत शताब्दियों तक चली।
व्याख्या:
मौर्य वंश की महत्वपूर्णता उनके साम्राज्य के विस्तार, प्रशासनिक दक्षता, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक योगदान से सिद्ध होती है। अशोक के धर्म प्रचार और शासन की नीति ने भारतीय इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।
Q5.5. कौटिल्य के कुछ प्रमुख विचार क्या थे? इनमें से कौन-से विचार आप आज भी आस-पास देख सकते हैं?
उत्तर:
कौटिल्य के प्रमुख विचारों में राजनीतिक एकता, सुदृढ़ प्रशासन, आर्थिक समृद्धि, युद्ध नीति, और कूटनीति शामिल थे। उन्होंने राज्य के मजबूत शासन और न्याय व्यवस्था पर बल दिया। आज भी हम उनके विचार जैसे कि प्रशासनिक दक्षता, आर्थिक प्रबंधन, और कूटनीतिक समझदारी को अपने आस-पास देख सकते हैं, जो आधुनिक शासन और प्रबंधन में उपयोगी हैं।
व्याख्या:
कौटिल्य ने अपने ग्रंथ 'अर्थशास्त्र' में शासन, अर्थव्यवस्था और युद्ध नीति के विषयों पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किए। उनके विचार आज भी प्रशासन और राजनीति में प्रासंगिक हैं।
Q6.6. अशोक और उसके साम्राज्य के बारे में असाधारण बातें क्या थीं? उनमें से कौन-सी बातें आज भी भारत को प्रभावित करती रही हैं और क्यों? अपने विचार लगभग 250 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
अशोक मौर्य साम्राज्य के महान सम्राट थे जिन्होंने अपने शासनकाल में कई असाधारण कार्य किए। उन्होंने अपने साम्राज्य में धर्म और नैतिकता का प्रचार किया, विशेषकर बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया। अशोक ने अपने शिलालेखों के माध्यम से अपने धर्म प्रचार और शासन की नीति को जनता तक पहुँचाया। उन्होंने सभी धार्मिक संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता दिखाई और अपने प्रजा के कल्याण के लिए अनेक सामाजिक और धार्मिक सुधार किए। अशोक के शासन में व्यापार और प्रशासनिक व्यवस्था भी सुदृढ़ हुई। आज भी अशोक का आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में है, जो सत्य और न्याय की विजय का संदेश देता है। उनकी सहिष्णुता, धर्म प्रचार और सामाजिक कल्याण की नीतियाँ आज भी भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक सोच को प्रभावित करती हैं।
व्याख्या:
अशोक का साम्राज्य प्रशासन, धर्म प्रचार, सामाजिक सुधार और सहिष्णुता के लिए जाना जाता है। उनकी नीतियाँ और आदर्श आज भी भारत के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों में जीवित हैं।
Q7.7. अशोक के उपरोक्त शिलालेख को पढ़ने के उपरांत, क्या आपको लगता है कि वे अन्य धार्मिक विश्वासों और विचारधाराओं के प्रति सहिष्णु थे? अपने विचार कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर:
अशोक के शिलालेख से स्पष्ट होता है कि वे सभी संप्रदायों के प्रति सहिष्णु थे। उन्होंने बौद्ध संघ, ब्राह्मणों, आजीवकों, जैनियों और अन्य विभिन्न संप्रदायों के सदस्यों के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की और उनके कल्याण के लिए कार्य किया। यह दर्शाता है कि अशोक ने धार्मिक सहिष्णुता को अपनाया और सभी धर्मों के प्रति सम्मान दिखाया। इसलिए, वे एक दयालु और समावेशी शासक थे।
व्याख्या:
अशोक के शिलालेख में विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के लिए अधिकारियों की नियुक्ति और उनके कल्याण की बात की गई है, जो उनकी धार्मिक सहिष्णुता का प्रमाण है।
Q8.8. ब्राह्मी लिपि एक लेखन प्रणाली थी जिसका प्राचीन भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था। इस लिपि के बारे में अधिक जानने का प्रयास कीजिए। जहाँ भी आवश्यक हो, अपने शिक्षक से सहायता लीजिए। एक लघु कार्य परियोजना बनाएँ और इस दौरान आपने ब्राह्मी लिपि के बारे में जो कुछ भी सीखा, उसे संलग्न कीजिए।
उत्तर:
ब्राह्मी लिपि प्राचीन भारत की एक प्रमुख लेखन प्रणाली थी जिसका उपयोग शिलालेखों, अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों में किया जाता था। यह लिपि बाएं से दाएं लिखी जाती थी और इसमें स्वर तथा व्यंजन दोनों के लिए चिन्ह होते थे। ब्राह्मी लिपि से कई आधुनिक भारतीय लिपियों का विकास हुआ। इस लिपि के अध्ययन से हमें प्राचीन भारतीय इतिहास, भाषा और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इस परियोजना में ब्राह्मी लिपि के अक्षरों, उनके उच्चारण और उनके ऐतिहासिक महत्व को शामिल किया जा सकता है।
व्याख्या:
ब्राह्मी लिपि का अध्ययन प्राचीन भारत के अभिलेखों और इतिहास को समझने के लिए आवश्यक है। यह लिपि भारतीय उपमहाद्वीप की कई भाषाओं की आधारशिला रही है।
Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage Part-I के सभी 12 अध्याय
Social Science · Class 7