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Chapter 5

🎓 Class 11📖 Manav Paristhitiki evm pariwar vigyan Bhag-I📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 7Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

कपड़े — हमारे आस-पास

व्याख्या

कपड़े — हमारे आस-पास

कपड़े हमारे जीवन का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे न केवल हमें शारीरिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पहचान का भी अभिन्न अंग हैं। कपड़े आराम और ऊष्मा प्रदान करते हैं। हमारे दैनिक जीवन में कपड़े विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिनमें रंग, बनावट, मोटाई, और उपयोगिता के अनुसार भिन्नता होती है। उदाहरण स्वरूप, सुबह उठते समय हम जिस चादर और तकिए के कपड़े को छूते हैं, वह नरम और आरामदायक होता है। स्कूल की ड्रेस, बैग, तौलिया, पर्दे, किचन के डस्टर, दरी आदि सभी कपड़े के विभिन्न रूप हैं। कपड़े की बनावट और मोटाई उनके उपयोग के अनुसार चुनी जाती है। कपड़ों की संरचना में सूत और रेशे होते हैं। सूत धागों का समूह होता है, जो रेशों से बना होता है। रेशे वस्त्रों की मूल इकाई होते हैं। कपड़े को बनाने के लिए पहले रेशों को सूत में बदला जाता है, फिर सूत से कपड़ा बुना जाता है। इसके बाद कपड़े को परिष्कृत किया जाता है, जिससे उसकी बनावट, रंग, चमक और टिकाऊपन में सुधार आता है। इस अध्याय में हम कपड़ों के प्रकार, उनके रेशों, सूत, कपड़ा निर्माण की विधियाँ, और कपड़ों के परिष्करण की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे।

  • कपड़े हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा हैं जो सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान प्रदान करते हैं।
  • कपड़े विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिनका चयन उपयोग के अनुसार किया जाता है।
  • कपड़े की मूल इकाई रेशा होता है, जो सूत और फिर कपड़े में परिवर्तित होता है।
  • परिष्करण से कपड़े की बनावट, रंग और टिकाऊपन में सुधार होता है।
  • 📌 रेशा: वस्त्रों की मूल इकाई, जो सूत बनाने के लिए उपयोग होता है।
  • 📌 सूत: रेशों से बना धागा जो कपड़ा बनाने के लिए उपयोग होता है।
  • 📌 परिष्करण: कपड़े को संसाधित कर उसकी गुणवत्ता बढ़ाने की प्रक्रिया।

रेशे के गुण

व्याख्या

रेशे के गुण

रेशे कपड़ों के गुणों को निर्धारित करते हैं। एक रेशा उपयोगी तभी होता है जब वह बड़ी मात्रा में उपलब्ध हो, किफायती हो और कताई योग्य हो। कताई योग्य होने का अर्थ है कि रेशा आसानी से सूत में बदला जा सके। रेशे की लंबाई, मजबूती, नम्यता (लचीलापन), और ऊपरी बनावट कपड़े की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। उपभोक्ता की संतुष्टि के लिए रंग, चमक, भार, आर्द्रता, डाई अवशोषण, और लोच जैसे गुण भी महत्वपूर्ण हैं। कपड़ों की देखभाल और अनुरक्षण में अपचर्षण (घिसाव), रसायनों, साबुन, डिटर्जेंट, ताप, और जैविक जीवों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता जैसे कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए रेशों का चयन करते समय इन गुणों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है ताकि कपड़ा टिकाऊ और आरामदायक हो।

  • रेशे की उपलब्धता और किफायती होना जरूरी है।
  • कताई योग्य रेशा सूत और कपड़े में परिवर्तित किया जा सकता है।
  • रेशे की लंबाई, मजबूती, और लचीलापन कपड़े की गुणवत्ता निर्धारित करते हैं।
  • रंग, चमक, और आर्द्रता उपभोक्ता संतोष के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • कपड़ों की देखभाल में अपचर्षण और रसायनों का प्रभाव होता है।
  • 📌 कताई योग्य: रेशा जो आसानी से सूत में बदला जा सके।
  • 📌 अपचर्षण: वस्त्रों की सतह का घिसना।
  • 📌 नम्यता: रेशा या कपड़े की लचीलापन क्षमता।

वस्त्र रेशों का वर्गीकरण

व्याख्या

वस्त्र रेशों का वर्गीकरण

वस्त्र रेशों को उनके उद्भव, रासायनिक प्रकार, जातिगत प्रकार और ट्रेड नाम के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। मुख्य रूप से रेशे प्राकृतिक और विनिर्मित (मानव निर्मित) होते हैं। प्राकृतिक रेशे चार प्रकार के होते हैं: (क) सेल्युलोसिक रेशे: ये पौधों से प्रा

अभ्यास प्रश्नChapter 5

15 विस्तृत उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

Q1.कपड़े हमारे जीवन में किस प्रकार की भूमिका निभाते हैं?

उत्तर:

कपड़े हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जो हमें आराम और ऊष्मा प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, स्कूल की ड्रेस, चादर, तकिया आदि हमारे दैनिक जीवन के कपड़े हैं।

व्याख्या:

कपड़े न केवल शारीरिक सुरक्षा देते हैं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी प्रदान करते हैं। वे विभिन्न रंग, बनावट और मोटाई में होते हैं जो उपयोग के अनुसार चुने जाते हैं।

Easy
Q2.कपड़े की बनावट में सूत और रेशे किस प्रकार जुड़े होते हैं? इसे स्पष्ट करें।

उत्तर:

कपड़े की मूल इकाई रेशे होते हैं जो सूत में बटे होते हैं। सूत धागों के समूह होते हैं जो कपड़ा बनाने के लिए उपयोग होते हैं। उदाहरण के लिए, ऊनी कार्डिगन में रेशे धागों के रूप में अंतर्ग्रथित होते हैं।

व्याख्या:

रेशे सूत का आधार होते हैं और सूत से कपड़ा बुना जाता है। रेशों को संसाधित कर सूत बनाया जाता है, फिर सूत से कपड़ा तैयार किया जाता है।

Medium
Q3.रेशे के गुणों में कताई योग्य होना क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर:

कताई योग्य होना रेशे का वह गुण है जिससे वह आसानी से सूत में परिवर्तित हो सकता है। उदाहरण के लिए, लंबाई और मजबूती के कारण सूत बनाना संभव होता है।

व्याख्या:

कताई योग्य रेशे सूत और कपड़ा निर्माण की प्रक्रिया में आसानी प्रदान करते हैं। यदि रेशा कताई योग्य नहीं होगा तो सूत निर्माण संभव नहीं होगा।

Easy
Q4.निम्नलिखित में से कौन सा प्राकृतिक सेल्युलोसिक रेशा नहीं है?
A.A) कॉटन
B.B) जूट
C.C) नायलॉन
D.D) कापोक

उत्तर:

नायलॉन

व्याख्या:

कॉटन, जूट और कापोक सभी प्राकृतिक सेल्युलोसिक रेशे हैं जो पौधों से प्राप्त होते हैं। नायलॉन एक कृत्रिम (सिंथेटिक) रेशा है जो रासायनिक प्रक्रिया से बनाया जाता है।

Easy
Q5.रेशम किस प्रकार का प्राकृतिक रेशा है और यह किस स्रोत से प्राप्त होता है?

उत्तर:

रेशम एक प्राकृतिक प्रोटीन रेशा है जो रेशम कीट के कोकून से प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए, शहतूत के पत्तों पर पलने वाला रेशम कीट रेशम का उत्पादन करता है।

व्याख्या:

प्रोटीन रेशे जंतु स्रोत से आते हैं और रेशम का तंतु चिकना, लंबा और चमकीला होता है। यह कपड़ों में विशेष चमक और मुलायम स्पर्श प्रदान करता है।

Medium
Q6.विनिर्मित रेशों के उत्पादन की प्रक्रिया में स्पिनरेट की भूमिका क्या है?

उत्तर:

स्पिनरेट एक उपकरण है जिसमें रासायनिक रूप से तैयार चक्रण घोल को छोटे-छोटे छिद्रों से गुजारकर पतले तंतु के रूप में ठोस किया जाता है। उदाहरण के लिए, रेयान जैसे विनिर्मित रेशे इसी प्रक्रिया से बनते हैं।

व्याख्या:

स्पिनरेट की मदद से घोल को सूक्ष्म तंतुओं में बदला जाता है जो बाद में सूत और कपड़े के निर्माण के लिए उपयोग होते हैं। यह प्रक्रिया विनिर्मित रेशों के उत्पादन का मुख्य चरण है।

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Q7.सूत क्या है और इसे बनाने की प्रक्रिया में किन मुख्य चरणों से गुजरना पड़ता है?

उत्तर:

सूत वस्त्र रेशों की लंबी-लंबी बटें होती हैं जो कपड़ा बनाने के लिए धागों के रूप में उपयोग होती हैं। सूत बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं। मुख्य चरण हैं: (a) सफाई: रेशों से अशुद्धियाँ हटाना। (b) पूनी बनाना: कार्डिंग और कॉम्बिंग द्वारा रेशों को सीधा करना। (c) तनुकरण, तानना और बटना: पूनी को लंबा और पतला करना। (d) कताई: रेशों को सूत के रूप में गूँथना और कोन पर लपेटना। इस प्रक्रिया से सूत तैयार होता है जो कपड़ा निर्माण में उपयोग होता है।

व्याख्या:

सूत निर्माण में रेशों को साफ कर, सीधा कर, तना कर और अंतिम रूप दिया जाता है। इससे सूत की गुणवत्ता और मजबूती बढ़ती है। सूत संख्या और बटों की संख्या सूत की गुणवत्ता को दर्शाती है।

Medium
Q8.सूत संख्या और बटों की संख्या सूत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करती है?

उत्तर:

सूत संख्या सूत की लंबाई और भार के अनुपात को दर्शाती है, अधिक संख्या वाली सूत बेहतर मानी जाती है। बटों की संख्या सूत की कसावट को दर्शाती है, ढीली बटी हुई सूत मुलायम और चमकीली होती है। उदाहरण के लिए, जीन्स की डेनिम सामग्री कसकर बटी सूत से बनती है।

व्याख्या:

सूत संख्या सूत की बेहतरी का सूचक है जबकि बटों की संख्या सूत की मजबूती और बनावट को प्रभावित करती है।

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