Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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5.1 डीएनए
व्याख्या5.1 डीएनए
डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) जीवों में आनुवंशिक सूचना को संग्रहित करने वाला एक लंबा बहुलक अणु है। यह दो लंबी पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बना होता है, जो एक-दूसरे के चारों ओर डबल हेलिक्स संरचना बनाते हैं। डीएनए की लंबाई जीव के अनुसार भिन्न होती है, जैसे जीवाणुभोजी φ×174 में 5386 न्यूक्लियोराइड्स, इस्चेरिचिया कोलाई में 4.6×10⁶ धार युग्म और मनुष्य के डीएनए में लगभग 3.3×10⁹ धार युग्म होते हैं। डीएनए की पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला में प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन घटकों से मिलकर बनता है: एक नाइट्रोजनी आधार, एक पेंटोस शर्करा (डीऑक्सीरिबोज), और एक फॉस्फेट समूह। नाइट्रोजनी आधार दो प्रकार के होते हैं: प्यूरीन (एडेनीन और ग्वानीन) और पायरिमिडीन (साइटोसीन और थाइमीन)। डीएनए में थाइमीन होता है जबकि आरएनए में थाइमीन की जगह यूरेसील होता है। न्यूक्लियोटाइड्स फॉस्फोडाइस्टर बंधों द्वारा जुड़कर एक लंबी श्रृंखला बनाते हैं, जिसमें 5' से 3' दिशा में फॉस्फेट और शर्करा की रीढ़ होती है। डबल हेलिक्स संरचना में दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएं विपरीत ध्रुवणता (5'→3' और 3'→5') में होती हैं। वे हाइड्रोजन बंधों द्वारा पूरक आधारों (एडेनिन-थाइमीन के बीच दो हाइड्रोजन बंध और ग्वानीन-साइटोसीन के बीच तीन हाइड्रोजन बंध) से जुड़ी होती हैं। इस संरचना की खोज जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक ने 1953 में की, जो मौरिस विल्कन्स और रोजलिंड फ्रैंकलिन के एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी डेटा पर आधारित थी। डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की विशेषताएं हैं: दोनों श्रृंखलाएं दक्षिणवर्ती कुंडलित होती हैं, प्रत्येक घुमाव में लगभग 10 क्षार युग्म होते हैं, और क्षार युग्मों के बीच की दूरी लगभग 0.34 नैनोमीटर होती है। डीएनए की यह संरचना न केवल स्थिरता प्रदान करती है बल्कि आनुवंशिक सूचना के सटीक प्रतिलिपिकरण में भी सहायक होती है। डीएनए का पैकेजिंग भी अत्यंत जटिल होती है, विशेषकर सुकेंद्रकी जीवों में। यहाँ डीएनए हिस्टोन प्रोटीन के चारों ओर लिपटा होता है, जिससे न्यूक्लियोसोम बनते हैं। न्यूक्लियोसोम क्रोमेटीन के 'डोरी पर बीड्स' जैसे दिखाई देते हैं। ये क्रोमेटीन धागे आगे कुंडलित होकर गुणसूत्रों का निर्माण करते हैं।
- डीएनए दो लंबी पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बना होता है जो डबल हेलिक्स बनाती हैं।
- न्यूक्लियोटाइड में नाइट्रोजनी आधार, पेंटोस शर्करा और फॉस्फेट समूह होते हैं।
- एडेनिन थाइमीन से दो हाइड्रोजन बंध और ग्वानीन साइटोसीन से तीन हाइड्रोजन बंध बनाता है।
- डीएनए की लंबाई जीव के अनुसार भिन्न होती है, मानव में लगभग 3.3×10⁹ धार युग्म होते हैं।
- सुकेंद्रकी में डीएनए हिस्टोन प्रोटीन के चारों ओर लिपटा होता है, जिससे न्यूक्लियोसोम बनते हैं।
- डीएनए की संरचना आनुवंशिक सूचना के सटीक प्रतिलिपिकरण के लिए उपयुक्त है।
- 📌 डीएनए: आनुवंशिक सूचना संग्रहित करने वाला अम्ल
- 📌 न्यूक्लियोटाइड: डीएनए की एकल इकाई जिसमें आधार, शर्करा और फॉस्फेट होता है
- 📌 डबल हेलिक्स: डीएनए की द्विरज्जुकीय कुंडली संरचना
5.2 आनुवंशिक पदार्थ की खोज
व्याख्या5.2 आनुवंशिक पदार्थ की खोज
आनुवंशिक पदार्थ की खोज का इतिहास जीव विज्ञान में एक महत्वपूर्ण चरण है। प्रारंभ में यह स्पष्ट नहीं था कि आनुवंशिक सूचना किस अणु में संग्रहित होती है। फ्रेडरिक ग्रिफिथ ने 1928 में स्ट्रेप्टोकोकस नीमोनी जीवाणु पर प्रयोग कर रूपांतरण सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने पाया कि मृत एस (S) प्रकार के जीवाणु के साथ जीवित आर (R) प्रकार के जीवाणु मिलाने पर आर प्रकार जीवाणु एस प्रकार में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे चूहे की मृत्यु हो जाती है। यह दर्शाता है कि कोई रूपांतरण कारक आनुवंशिक सूचना को स्थानांतरित करता है। इसके बाद ओसवाल्ड एबेरी, कोलीन मैकलिओड और मैक्लीन मैककार्टी ने यह साबित किया कि यह रूपांतरण कारक डीएनए है, न कि प्रोटीन या आरएनए। उन्होंने विभिन्न एंजाइमों द्वारा जीवाणु के घटकों को नष्ट कर यह परीक्षण किया कि कौन सा घटक रूपांतरण को रोकता है। केवल डीएनए को नष्ट करने वाले एंजाइम (डीएनएज) ने रूपांतरण को रोका। अल्फ्रेड हर्ष और मार्था चेस ने 1952 में हर्ष-चेस प्रयोग किया, जिसमें उन्होंने विषाणुओं के प्रोटीन और डीएनए को रेडियोधर्मी तत्वों (सल्फर और फॉस्फोरस) से चिह्नित किया। विषाणु जब जीवाणु कोशिका में प्रवेश करते हैं, तो केवल डीएनए ही जीवाणु के अंदर प्रवेश करता है, जबकि प्रोटीन बाहर रह जाता है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आनुवंशिक पदार्थ डीएनए है। डीएनए और आरएनए के बीच विभिन्नताएं भी आनुवंशिक पदार्थ के चयन में महत्वपूर्ण हैं। डीएनए अधिक स्थिर होता है क्योंकि इसमें थाइमीन होता है और रिबोज की जगह डीऑक्सीरिबोज होती है, जबकि आरएनए अस्थिर होता है। आरएनए अधिक क्रियाशील होता है और विषाणुओं में आनुवंशिक पदार्थ के रूप में पाया जाता है। इस प्रकार, डीएनए को मुख्य आनुवंशिक पदार्थ माना गया, जबकि आरएनए के अन्य जैविक कार्य भी महत्वपूर्ण हैं।
- ग्रिफिथ के प्रयोग से पता चला कि आनुवंशिक सूचना जीवाणु से जीवाणु में स्थानांतरित होती है।
- एबेरी, मैकलिओड और मैककार्टी ने साबित किया कि डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है।
- हर्ष-चेस प्रयोग ने विषाणु के प्रोटीन और डीएनए के बीच अंतर स्पष्ट किया।
- डीएनए अधिक स्थिर और संरचनात्मक रूप से उपयुक्त आनुवंशिक पदार्थ है।
- कुछ विषाणुओं में आरएनए भी आनुवंशिक पदार्थ के रूप में कार्य करता है।
- डीएनए और आरएनए के बीच रासायनिक और संरचनात्मक अंतर आनुवंशिक स्थिरता को प्रभावित करते हैं।
- 📌 रूपांतरण सिद्धांत: जीवाणु में आनुवंशिक सूचना का स्थानांतरण
- 📌 हर्ष-चेस प्रयोग: आनुवंशिक पदार्थ के रूप में डीएनए की पुष्टि
- 📌 डीएनएज: डीएनए को नष्ट करने वाला एंजाइम
5.3 आरएनए संसार
व्याख्या5.3 आरएनए संसार
आरएनए संसार का सिद्धांत यह बताता है कि जीवन के आरंभिक चरणों में आरएनए ही मुख्य आनुवंशिक पदार्थ था। आरएनए न केवल आनुवंशिक सूचना संग्रहित करता था, बल्कि उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) के रूप में भी कार्य करता था। आरएनए उत्प्रेरक प्रोटीन एंजाइमों से स्वतंत्र जैव
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1- fuEu dks ukbVªkstuho`Qr {kkj o U;wfDy;ksVkbM osQ :i esa oxhZo`Qr dhft, — ,Msuhu] lkbVhMhu] Fkkbehu] Xokukslhu] ;wjslhy o lkbVkslhu
उत्तर:
उत्तर: 1. फेफड़े (lungs) - यह मुख्य श्वसन अंग हैं जहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है। 2. लीवर (liver) - यह शरीर का सबसे बड़ा ग्रंथि है जो पाचन, विषाक्त पदार्थों का निष्कासन, और अन्य कई कार्य करता है। 3. किडनी (kidney) - यह मूत्र प्रणाली का हिस्सा है जो रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को छानकर मूत्र बनाती है। 4. हृदय (heart) - यह रक्त परिसंचरण के लिए पंप का कार्य करता है। 5. पाचन तंत्र (digestive system) - भोजन को पचाने और पोषक तत्वों को अवशोषित करने का कार्य करता है। 6. मस्तिष्क (brain) - यह तंत्रिका तंत्र का मुख्य केंद्र है जो शरीर के कार्यों को नियंत्रित करता है।
व्याख्या:
प्रत्येक अंग का संक्षिप्त परिचय और कार्य दिया गया है।
Q2.2- ;fn ,d f}jTtqd Mh,u, esa 20 izfr'kr lkbVkslhu gS rks Mh,u, esa feyus okys ,Msuhu osQ izfr'kr dh x.kuk dhft,A
उत्तर:
उत्तर: यदि किसी जीव में 20 प्रतिशत लम्बाई होती है तो जीव में उपस्थित माइटोकॉन्ड्रिया या अन्य कोशिकीय संरचनाओं की संख्या और उनकी भूमिका पर प्रभाव पड़ता है। माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा उत्पादन के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसलिए उनकी संख्या जीव की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार बदलती है।
व्याख्या:
यह प्रश्न कोशिका संरचना और उनके अनुपात के महत्व को समझने के लिए है।
Q3.3- ;fn Mh,u, osQ ,d jTtqd osQ vuqØe fuEuor fy[ksa gS& 5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3' rks iwjd jTtqd osQ vuqØe dks 5^à3^ fn'kk esa fy[ksA
उत्तर:
उत्तर: दी गई DNA अनुक्रम है: 5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3' 5 से 3 तक तीसरे न्यूक्लियोटाइड तक अनुक्रम है: ATG इसका अर्थ है कि पहले तीन न्यूक्लियोटाइड्स ATG हैं। यह अनुक्रम एक विशिष्ट जीन या प्रोटीन कोडिंग क्षेत्र का हिस्सा हो सकता है।
व्याख्या:
DNA अनुक्रम को 5 से 3 तक तीसरे न्यूक्लियोटाइड तक पढ़ना है।
Q4.4- ;fn vuqys[ku bZdkbZ esa owQVys[ku jTtqd osQ vuqØe dks fuEuor fy[kk x;k gS& 5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3' rks nwr vkj,u, osQ vuqØe dks fy[ksaA
उत्तर:
उत्तर: दी गई DNA अनुक्रम है: 5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3' यह अनुक्रम नवरात्रि RNA अनुक्रम के लिए ट्रांसक्रिप्शन के दौरान उपयोग किया जा सकता है। RNA अनुक्रम होगा: 3'-UACG UACG UACG UACG UACG UACG UACG-5' यह RNA अनुक्रम प्रोटीन संश्लेषण के लिए टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है।
व्याख्या:
DNA से RNA अनुक्रम बनाने की प्रक्रिया को समझना आवश्यक है।
Q5.5- Mh,u, f}oqQaMyh dh dkSu lh fo'ks"krk okVlu o fØd dks Mh,u, izfro`Qfr osQ lseh&oaQtosZfVo :i dks dfYir djus esa lg;ksx fd;k_ bldh O;k[;k dhft,A
उत्तर:
उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना और कार्य को समझाते हुए, यह बताया गया है कि माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के ऊर्जा संयंत्र के रूप में कार्य करता है। इसमें क्रिस्टा और मैट्रिक्स होते हैं जो ऊर्जा उत्पादन में सहायक होते हैं।
व्याख्या:
माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना और कार्य का वर्णन आवश्यक है।
Q6.6- VsaiysV (Mh,u, ;k vkj,u,) osQ jklk;fud izo`Qfr o blls (Mh,u, ;k vkj,u,) la'ysf"kr U;wfDyd vEyksa dh izo`Qfr osQ vk/kj ij U;wfDyd vEy ikyhejst osQ fofHkUu izdkj dh lwph cukb,A
उत्तर:
उत्तर: विभिन्न (माइटोकॉन्ड्रिया या वाक्यांश) और जैविक प्रक्रियाओं से संबंधित उपयुक्त ऊर्जा स्रोतों के बारे में चर्चा करें। माइटोकॉन्ड्रिया में ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक एंजाइम और उनके कार्यों का वर्णन करें।
व्याख्या:
ऊर्जा उत्पादन और माइटोकॉन्ड्रिया की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करें।
Q7.7- Mh,u, vkuoq fa'kd inkFk Z g]S bl s fl¼ dju s grs q viu s i;z kxs oQs nkjS ku g"k Zs o pls u s Mh,u, o izksVhu osQ chp oSQls varj LFkkfir fd;k\
उत्तर:
उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया एक कोशिकीय अंगक है जो ऊर्जा उत्पादन के लिए जिम्मेदार है। यह कोशिका के भीतर स्थित होता है और इसमें अपनी DNA होती है। माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका श्वसन और ATP उत्पादन में सहायक होता है।
व्याख्या:
माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना और कार्य को समझाना आवश्यक है।
Q8.8- fuEu osQ chp varj crkb, — (d) iquko`fÙk Mh,u, ,oa vuq"kaxh Mh,u, ([k) ,evkj,u, vkjS Vhvkj,u, (x) VsEiysV jTtq vkSj dksfMax jTtq
उत्तर:
उत्तर: (d) इक्यूकोरियोटिक माइटोकॉन्ड्रिया और वाक्यांश माइटोकॉन्ड्रिया ([k) प्रोकारियोटिक जीवों के माइटोकॉन्ड्रिया (x) यूकैरियोटिक कोशिकाओं में उपस्थित जीन और प्रोटीन
व्याख्या:
प्रत्येक प्रकार के माइटोकॉन्ड्रिया और उनके जीवों में उपस्थिति को मिलाना है।