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Chapter 5

🎓 Class 12📖 Bharat main Samajik Parivartan aur Vikas📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 8Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास

व्याख्या

औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास

यह अध्याय मुंबई के बॉलीवुड उद्योग के उदाहरण से प्रारंभ होता है, जहाँ विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग एक ही शहर में रहते हैं और काम करते हैं। बॉलीवुड उद्योग में नर्तक, कलाकार, अतिरिक्त कलाकार, और अन्य श्रमिक संघ के सदस्य होते हैं, जो आठ घंटे की शिफ्ट, उचित वेतन और सुरक्षित कार्यावस्था की मांग करते हैं। इस उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि औद्योगिक समाज में लोग किस प्रकार कार्य करते हैं, वे कहाँ रहते हैं, और उनकी सामाजिक पहचान कैसे बनती है। मुंबई जैसे शहर में विभिन्न वर्गों के लोग रहते हैं, जैसे फिल्मी सितारे और मिल मालिक जुहू में, जबकि मज़दूर गॉरेगाँव में रहते हैं। इसके बावजूद वे समान सामाजिक अनुभव जैसे फिल्में देखना, क्रिकेट मैच देखना, और प्रदूषित वातावरण में रहना साझा करते हैं। इस खंड में यह भी बताया गया है कि औद्योगिक समाज में कार्य और सामाजिक संबंध कैसे बदलते हैं। प्रौद्योगिकी के विकास से कार्य के स्वरूप में बदलाव आता है, जिससे सामाजिक संस्थाएँ जैसे जाति, नातेदारी, लिंग और क्षेत्र कार्य के संगठन और उत्पाद के वितरण को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, महिलाएँ नर्सिंग या शिक्षण जैसे कार्यों में अधिक होती हैं क्योंकि समाज उन्हें देखभाल के क्षेत्र के लिए उपयुक्त मानता है। इसके विपरीत, इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र पुरुषप्रधान माने जाते हैं। सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक मान्यताएँ कार्य के प्रकार और सामाजिक पहचान को प्रभावित करती हैं। समाजशास्त्रियों के लिए यह अध्ययन महत्वपूर्ण है कि कौन क्या उत्पादित करता है, कौन कहाँ कार्य करता है, और उत्पाद को बाजार में कैसे पहुँचाया जाता है। ये व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक संरचनाओं और सांस्कृतिक मान्यताओं का परिणाम होते हैं। इस प्रकार, औद्योगिक समाज में परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी होते हैं।

  • मुंबई के बॉलीवुड उद्योग में विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग काम करते हैं।
  • औद्योगिक समाज में कार्य, निवास, और सामाजिक पहचान आपस में जुड़े होते हैं।
  • प्रौद्योगिकी और औद्योगीकरण से सामाजिक संबंधों में परिवर्तन आता है।
  • जाति, लिंग, नातेदारी जैसे सामाजिक संस्थाएँ कार्य के संगठन को प्रभावित करती हैं।
  • महिलाएँ देखभाल और पालन पोषण के कार्यों में अधिक होती हैं।
  • सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक मान्यताएँ कार्य के प्रकार को निर्धारित करती हैं।
  • 📌 औद्योगिक समाज: ऐसा समाज जहाँ उत्पादन के लिए मशीनों और फैक्ट्रियों का उपयोग होता है।
  • 📌 सामाजिक पहचान: व्यक्ति की सामाजिक स्थिति और भूमिका जो उसके कार्य, निवास और आर्थिक स्थिति से बनती है।
  • 📌 सामाजिक संस्थाएँ: जैसे जाति, लिंग, नातेदारी, जो समाज के नियम और व्यवहार को निर्धारित करती हैं।

5.1 औद्योगिक समाज की कल्पना

व्याख्या

5.1 औद्योगिक समाज की कल्पना

औद्योगिक समाज की कल्पना 19वीं सदी के समाजशास्त्रियों कार्ल मार्क्स, मैक्स वेबर और एमील दुर्खाइम ने की थी। इस काल में औद्योगीकरण और मशीनों का उदय हुआ, जिसने समाज के पारंपरिक ग्रामीण स्वरूप को नगरीय औद्योगिक स्वरूप में बदल दिया। ग्रामीण समाजों में जहाँ लोग आमने-सामने के व्यक्तिगत संबंधों पर निर्भर थे, वहीं औद्योगिक समाज में अज्ञात व्यावसायिक संबंधों का प्रभुत्व होता है। औद्योगीकरण ने श्रम विभाजन को बढ़ाया, जिससे कामगार केवल उत्पादन के छोटे-छोटे हिस्सों को बनाते हैं और अंतिम उत्पाद को नहीं देखते। यह कार्य दोहराव और थकाने वाला होता है, जिससे कामगार अपने कार्य से अलगाव महसूस करते हैं। मार्क्स ने इसे 'अलगाव' की स्थिति कहा, जहाँ कामगार अपने श्रम से प्रसन्न नहीं होते और उनकी उत्तरजीविता मशीनों पर निर्भर होती है। औद्योगीकरण ने सामाजिक समानता के कुछ पहलुओं को बढ़ावा दिया, जैसे सार्वजनिक परिवहन में जातीय भेदभाव का कम होना। परंतु आर्थिक असमानताएँ बनी रहती हैं, जहाँ उच्च वेतन वाले व्यवसायों में उच्च जाति के लोगों का वर्चस्व है और महिलाओं को समान कार्य के लिए कम वेतन मिलता है। इस प्रकार, औद्योगिक समाज में सामाजिक और आर्थिक असमानताओं का नया स्वरूप उभरता है।

  • कार्ल मार्क्स, वेबर, और दुर्खाइम ने औद्योगिक समाज की अवधारणा विकसित की।
  • औद्योगीकरण ने ग्रामीण आमने-सामने संबंधों की जगह अज्ञात व्यावसायिक संबंध लिए।
  • श्रम विभाजन बढ़ा और कामगार अपने कार्य से अलगाव महसूस करने लगे।
  • औद्योगीकरण ने कुछ सामाजिक समानताएँ बढ़ाईं, जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जातीय भेदभाव में कमी।
  • आर्थिक असमानताएँ बनी रहीं, उच्च जाति और पुरुषों का वर्चस्व।
  • महिलाओं को समान कार्य के लिए कम वेतन मिलता है।
  • 📌 अलगाव (Alienation): मार्क्स द्वारा वर्णित स्थिति जहाँ कामगार अपने कार्य से असंतुष्ट और अलग-थलग महसूस करता है।
  • 📌 श्रम विभाजन: उत्पादन प्रक्रिया को छोटे-छोटे कार्यों में बाँटना।
  • 📌 नगरीकरण: ग्रामीण से शहरी क्षेत्र की ओर जनसंख्या का प्रवास।

5.2 भारत में औद्योगीकरण

व्याख्या

5.2 भारत में औद्योगीकरण

भारत में औद्योगीकरण का अनुभव पश्चिमी देशों से भिन्न रहा है। विकसित देशों में अधिकांश लोग नौकरीपेशा होते हैं और कृषि कार्यों में लगे लोगों की संख्या कम होती है, जबकि भारत में 2018–19 के आँकड़ों के अनुसार लगभग 43% लोग प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं खदान) म

अभ्यास प्रश्नChapter 5

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.2020–21 के दौरान, कोविड-19 महामारी के कारण सैकड़ों और हजारों आई.टी. सेक्टर कर्मचारियों ने घर से काम किया। घर आधारित काम तथा घर से काम करने वालों के बीच अंतर और समानताओं का पता लगाएँ

उत्तर:

घर आधारित काम और घर से काम करने वालों के बीच अंतर और समानताएँ निम्नलिखित हैं: अंतर: 1. घर आधारित काम: इसमें कामगार अपने घर पर काम करते हैं, जैसे बीड़ी बनाना, लेस बनाना आदि। यह पारंपरिक और कच्चे माल पर आधारित होता है। 2. घर से काम करना: यह आधुनिक तकनीक पर आधारित होता है, जैसे आई.टी. सेक्टर में कर्मचारी घर से कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से काम करते हैं। समानताएँ: 1. दोनों ही प्रकार के काम घर पर किए जाते हैं। 2. दोनों में कामगारों को अपने घर से काम करने की सुविधा मिलती है। 3. दोनों में कामगारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार, दोनों में स्थान की समानता है, पर तकनीक, काम के प्रकार और सामाजिक संरचना में भिन्नता है।

व्याख्या:

यह प्रश्न घर आधारित काम और घर से काम करने वालों के बीच के अंतर और समानताओं को समझने के लिए है। घर आधारित काम पारंपरिक और कच्चे माल पर आधारित होता है जबकि घर से काम करना आधुनिक तकनीक पर आधारित होता है। दोनों में स्थान समान है पर कार्य की प्रकृति और सामाजिक प्रभाव भिन्न हैं।

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Q2.1. अपने आस-पास वाले किसी भी व्यवसाय को चुनिए और इसका वर्णन निम्नलिखित पंक्तियों में कीजिए— (क) कार्य शक्ति का सामाजिक संघटन— जाति, जेंडर, आयु, क्षेत्र; (ख) मज़दूर प्रक्रिया— काम किस तरह किया जाता है; (ग) वेतन एवं अन्य सुविधाएँ; (घ) कार्यावस्था— सुरक्षा, आराम का समय, कार्य के घंटे इत्यादि।

उत्तर:

यह प्रश्न विद्यार्थियों को अपने आस-पास के किसी व्यवसाय का सामाजिक और आर्थिक विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करता है। उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए: (क) कार्य शक्ति का सामाजिक संघटन: व्यवसाय में काम करने वाले लोगों की जाति, लिंग, आयु और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि का वर्णन। उदाहरण के लिए, क्या अधिकतर पुरुष हैं या महिलाएं, युवा या वृद्ध, किस जाति या समुदाय से हैं। (ख) मज़दूर प्रक्रिया: काम किस प्रकार किया जाता है, क्या यह हाथ से होता है या मशीन से, क्या काम में कौशल की आवश्यकता है। (ग) वेतन एवं अन्य सुविधाएँ: मजदूरी की दर, बोनस, छुट्टियाँ, बीमा आदि सुविधाओं का विवरण। (घ) कार्यावस्था: कार्य स्थल की सुरक्षा, आराम का समय, कार्य के घंटे, कार्य का माहौल आदि। विद्यार्थी अपने अनुभव और पर्यवेक्षण के आधार पर विस्तृत उत्तर दे सकते हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न सामाजिक संरचना और कार्य प्रक्रिया की समझ विकसित करने के लिए है। उत्तर में सामाजिक संघटन, कार्य प्रक्रिया, वेतन और कार्यावस्था के पहलुओं का समावेश आवश्यक है।

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Q3.2. ईट बनाने के, बीड़ी रोल करने के, सॉफ्टवेयर इंजीनियर या खदान के काम जो बॉक्स में वर्णित किए गए हैं, के कामगारों के सामाजिक संघटन का वर्णन कीजिए। कार्यावस्थाएँ कैसी हैं और उपलब्ध सुविधाएँ कैसी हैं? मधु जैसी लड़कियाँ अपने काम के बारे में क्या सोचती हैं?

उत्तर:

उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए: - सामाजिक संघटन: ईट बनाने वाले, बीड़ी रोल करने वाले, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और खदान के कामगारों के जाति, लिंग, आयु, और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि का वर्णन। उदाहरण के लिए, बीड़ी रोल करने वाली महिलाएँ अधिकतर ग्रामीण और निम्न आर्थिक वर्ग से होती हैं, जबकि सॉफ्टवेयर इंजीनियर शहरी और उच्च शिक्षा प्राप्त वर्ग से होते हैं। - कार्यावस्थाएँ: ईट बनाने और बीड़ी रोल करने के काम में शारीरिक श्रम अधिक होता है, कार्य स्थल पर सुरक्षा कम होती है, जबकि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के पास बेहतर कार्य स्थल और सुविधाएँ होती हैं। खदान के कामगारों को भी खतरनाक कार्यस्थल का सामना करना पड़ता है। - उपलब्ध सुविधाएँ: सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को बेहतर वेतन, स्वास्थ्य सुविधाएँ और आराम के समय मिलते हैं, जबकि अन्य श्रमिकों को कम वेतन और कम सुविधाएँ मिलती हैं। - मधु जैसी लड़कियाँ अपने काम के बारे में सोचती हैं: वे अपने काम को आर्थिक आवश्यकताओं के लिए मजबूरी मानती हैं, कभी-कभी इसे सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता का माध्यम भी समझती हैं, लेकिन अक्सर काम की कठिनाइयों और असुरक्षा से चिंतित रहती हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न विभिन्न प्रकार के कामगारों के सामाजिक और कार्य संबंधी पहलुओं को समझने के लिए है। उत्तर में सामाजिक संघटन, कार्यावस्था, सुविधाओं और कामगारों की मानसिकता का समावेश आवश्यक है।

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Q4.3. उदारीकरण ने रोजगार के प्रतिमानों को किस प्रकार प्रभावित किया है?

उत्तर:

उत्तर: उदारीकरण ने रोजगार के प्रतिमानों को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित किया है: 1. औपचारिक क्षेत्र में नौकरियों की संख्या में कमी आई है, जबकि अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार बढ़ा है। 2. ठेकेदारी और अस्थायी रोजगार बढ़े हैं, जिससे कामगारों की सुरक्षा कम हुई है। 3. निजीकरण और वैश्वीकरण के कारण प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिससे काम के घंटे बढ़े और वेतन में असमानता आई। 4. नई तकनीकों के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियाँ समाप्त हुईं, लेकिन आई.टी. और सेवा क्षेत्र में नए रोजगार उत्पन्न हुए। 5. कामगारों के अधिकारों और संघों की भूमिका कमजोर हुई है। इस प्रकार, उदारीकरण ने रोजगार के स्वरूप को बदलकर अस्थिरता और असमानता बढ़ाई है।

व्याख्या:

यह प्रश्न उदारीकरण के प्रभावों को समझने के लिए है। उत्तर में रोजगार के स्वरूप, सुरक्षा, तकनीकी बदलाव और सामाजिक प्रभावों का समावेश आवश्यक है।

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Q5.मुंबई के बॉलीवुड उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक पहचान किस प्रकार भिन्न होती है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

मुंबई के बॉलीवुड उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक पहचान उनके कार्य, वेतन और रहने के स्थान के आधार पर भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, फिल्मी सितारे और कपड़ा मिल के मालिक जुहू में रहते हैं, जबकि अतिरिक्त कलाकार और मज़दूर गॉरेगाँव में रहते हैं। वे अलग-अलग भोजन करते हैं और अलग-अलग जीवनशैली अपनाते हैं, परंतु वे समान फिल्में देखते हैं और प्रदूषित वातावरण में रहते हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न औद्योगिक समाज में सामाजिक पहचान और वर्ग विभाजन को समझने के लिए है। मुंबई के उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक स्थिति और कार्य के प्रकार से लोगों की सामाजिक पहचान बनती है। यह सामाजिक विभाजन औद्योगिक समाज की विशेषता है।

Medium
Q6.निम्नलिखित में से कौन सा कारण महिलाओं को नर्सिंग और शिक्षण जैसे कार्यों में अधिक पाता है जबकि इंजीनियरिंग में कम? A) महिलाओं की शारीरिक क्षमता कम होती है B) समाज की सोच कि महिलाएँ देखभाल के क्षेत्र के लिए उपयुक्त हैं C) इंजीनियरिंग में अधिक वेतन मिलता है D) नर्सिंग में तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती
A.A) महिलाओं की शारीरिक क्षमता कम होती है
B.B) समाज की सोच कि महिलाएँ देखभाल के क्षेत्र के लिए उपयुक्त हैं
C.C) इंजीनियरिंग में अधिक वेतन मिलता है
D.D) नर्सिंग में तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती

उत्तर:

समाज की सोच कि महिलाएँ देखभाल के क्षेत्र के लिए उपयुक्त हैं

व्याख्या:

महिलाएँ नर्सिंग और शिक्षण जैसे कार्यों में अधिक पाई जाती हैं क्योंकि समाज उन्हें देखभाल और पालन-पोषण के क्षेत्र के लिए उपयुक्त मानता है। यह सामाजिक मान्यता है, न कि शारीरिक क्षमता या तकनीकी ज्ञान की कमी।

Easy
Q7.कार्ल मार्क्स ने औद्योगिक समाज में कामगारों की स्थिति को किस शब्द से वर्णित किया है, जिसमें वे अपने कार्य से प्रसन्न नहीं होते? वह शब्द क्या है?

उत्तर:

अलगाव

व्याख्या:

कार्ल मार्क्स ने औद्योगिक समाज में कामगारों की स्थिति को 'अलगाव' कहा है, जहाँ कामगार अपने श्रम से प्रसन्न नहीं होते क्योंकि वे केवल उत्पादन के छोटे-छोटे हिस्सों में लगे होते हैं और अंतिम उत्पाद को नहीं देखते।

Easy
Q8.औद्योगीकरण के कारण सामाजिक समानता और असमानता दोनों में क्या परिवर्तन आते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

(a) परिचय: औद्योगीकरण से समाज में समानता और असमानता दोनों के नए स्वरूप उभरते हैं। (b) सामाजिक समानता: जैसे रेलगाड़ियों, बसों और साइबर कैफे में जातीय भेदभाव कम होता है, जिससे कुछ सामाजिक समानता आती है। (c) सामाजिक असमानता: आर्थिक असमानताएँ बनी रहती हैं, जैसे उच्च वेतन वाले व्यवसायों में उच्च जाति के लोगों का वर्चस्व और महिलाओं को समान कार्य के लिए कम वेतन मिलना। (d) निष्कर्ष: औद्योगिक समाज में सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ एक साथ मौजूद रहती हैं, जो सामाजिक संरचनाओं को प्रभावित करती हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न औद्योगीकरण के सामाजिक प्रभावों को समझने के लिए है। सामाजिक समानता के उदाहरण सार्वजनिक परिवहन में जातीय भेदभाव का कम होना है, जबकि असमानता के उदाहरण वेतन और जाति आधारित भेदभाव हैं।

Hard