Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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साझेदारी फर्म का विघटन - परिचय
व्याख्यासाझेदारी फर्म का विघटन - परिचय
साझेदारी फर्म का विघटन उस स्थिति को कहते हैं जब साझेदारी फर्म का अस्तित्व समाप्त हो जाता है या फर्म के साझेदारों के बीच साझेदारी संबंध समाप्त हो जाता है। इसका अर्थ है कि फर्म के सभी साझेदारों के बीच व्यापारिक संबंध समाप्त हो जाते हैं और फर्म के नाम पर चल रहे व्यवसाय का अंत हो जाता है। विघटन का मतलब केवल फर्म के व्यापार को बंद करना ही नहीं है, बल्कि फर्म की संपत्तियों और देनदारियों का निपटारा करना भी होता है। विघटन के बाद फर्म के खाते बंद कर दिए जाते हैं और साझेदारों के बीच लाभ या हानि का वितरण किया जाता है। साझेदारी फर्म के विघटन की प्रक्रिया में फर्म की संपत्तियों को नकदी में परिवर्तित करना, देनदारियों का भुगतान करना, और अंत में बची हुई राशि को साझेदारों में उनके लाभांश के अनुपात में बांटना शामिल होता है। विघटन के बाद फर्म का कोई अस्तित्व नहीं रहता। यह प्रक्रिया साझेदारी समझौते के नियमों के अनुसार या साझेदारों की सहमति से होती है।
- साझेदारी फर्म का विघटन फर्म के अस्तित्व का समाप्त होना है।
- विघटन में फर्म की संपत्तियों और देनदारियों का निपटारा किया जाता है।
- साझेदारों के बीच लाभ या हानि का वितरण किया जाता है।
- विघटन के बाद फर्म के खाते बंद कर दिए जाते हैं।
- विघटन साझेदारी समझौते या साझेदारों की सहमति से होता है।
- 📌 विघटन: फर्म के अस्तित्व का समाप्त होना।
- 📌 संपत्तियाँ: फर्म के पास मौजूद आर्थिक मूल्य वाली वस्तुएं।
- 📌 देनदारियाँ: फर्म के ऊपर बकाया ऋण या भुगतान।
साझेदारी फर्म के विघटन के कारण
व्याख्यासाझेदारी फर्म के विघटन के कारण
साझेदारी फर्म के विघटन के कई कारण हो सकते हैं। ये कारण साझेदारी समझौते में वर्णित हो सकते हैं या साझेदारों के बीच आपसी सहमति से भी फर्म का विघटन हो सकता है। प्रमुख कारणों में साझेदारी समझौते की समाप्ति, साझेदारों की मृत्यु, दिवालियापन, साझेदारी में विवाद, या फर्म के व्यवसाय को बंद करने का निर्णय शामिल हैं। 1. साझेदारी समझौते की समाप्ति: यदि साझेदारी समझौते में फर्म के समाप्ति की कोई निश्चित अवधि या शर्तें निर्धारित हैं, तो वे पूरी होने पर फर्म का विघटन हो जाता है। 2. साझेदार की मृत्यु: किसी साझेदार की मृत्यु से फर्म का स्वाभाविक रूप से विघटन हो जाता है, जब तक कि अन्य साझेदार नए समझौते के तहत फर्म को जारी न रखें। 3. दिवालियापन: यदि कोई साझेदार दिवालिया घोषित हो जाता है, तो फर्म का विघटन हो सकता है। 4. विवाद: साझेदारों के बीच गंभीर विवाद होने पर फर्म का विघटन हो सकता है। 5. अन्य कारण: फर्म के व्यवसाय का बंद होना, साझेदारों की सहमति से फर्म का समाप्त होना आदि। इन कारणों से फर्म का विघटन होता है और इसके बाद फर्म की संपत्तियों और देनदारियों का निपटारा किया जाता है।
- साझेदारी समझौते की समाप्ति फर्म के विघटन का प्रमुख कारण है।
- साझेदार की मृत्यु से फर्म का स्वाभाविक विघटन होता है।
- दिवालियापन के कारण फर्म का विघटन हो सकता है।
- साझेदारों के बीच विवाद फर्म के विघटन का कारण बन सकता है।
- साझेदारों की सहमति से भी फर्म का विघटन संभव है।
- 📌 दिवालियापन: किसी व्यक्ति या फर्म का कर्ज चुकाने में असमर्थ होना।
- 📌 विवाद: साझेदारों के बीच मतभेद या असहमति।
साझेदारी फर्म के विघटन की प्रक्रिया
व्याख्यासाझेदारी फर्म के विघटन की प्रक्रिया
साझेदारी फर्म के विघटन की प्रक्रिया में फर्म की संपत्तियों और देनदारियों का निपटारा किया जाता है तथा साझेदारों के खातों को बंद किया जाता है। यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाती है: 1. फर्म की संपत्तियों का मूल्यांकन और बिक्री: फर्म की सभी
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.न्यायालय फर्म के विघटन का आदेश पारित कर सकता है जहां
उत्तर:
जब फर्म के व्यवसाय को नुकसान के अलावा नहीं किया जा सकता है
Q2.भारतीय भागीदारी अधिनियम 1932 की धारा 48 से संबंधित है
उत्तर:
फर्म के भंग होने पर खाते का निपटान
Q3.साझेदारी फर्म के विघटन के मामले में तीसरे पक्ष के लिए देयताएं शामिल नहीं हैं
उत्तर:
उपरोक्त सभी।
Q4.जब वसूली खर्च वहन और भुगतान एक ही साझेदार द्वारा किया जाता है
उत्तर:
कोई प्रविष्टि पारित नहीं होगी
Q5.साझेदारी फर्म के विघटन का क्या मतलब है ?
उत्तर:
सभी भागीदारों के बीच साझेदारी का विघटन
Q6.विघटन होने पर साख/ख्याति खाता स्थानांतरित किया जाता है
उत्तर:
वसूली खाते का डेबिट पक्ष
Q7.यदि किसी साझेदार ने परिसंपति का कुछ भाग रु 7,200 (पुस्तक मूल्य से 10% कम) में ले लिया तो इसका पुस्तक मूल्य है।
उत्तर:
रु .. 8,000
Q8.साझेदारों में से एक 'ए' को सभी वसूली खर्चों को वहन करना था, जिसके लिए उन्हें विघटन से प्राप्त होने वाली शुद्ध नकदी का 3% कमीशन दिया गया था। परिसंपत्तियों से प्राप्त नकद रु 25,000 देय देनदारियों के लिए भुगतान की गई राशि रु 5,000 तो कमीशन की राशि क्या होगी ?
उत्तर:
रु .. 600
Lekhashastra Part-I के सभी 4 अध्याय
Accountancy · Class 12