Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
10.1 भूमिका (Introduction)
व्याख्या10.1 भूमिका (Introduction)
हमारे दैनिक जीवन में कई प्रकार की मात्राएँ होती हैं जिनमें से कुछ मात्राएँ केवल परिमाण (मात्रा) रखती हैं, जैसे कि आपकी ऊँचाई, समय, द्रव्यमान आदि। इन्हें अदिश मात्राएँ कहते हैं क्योंकि इनमें केवल एक वास्तविक संख्या के रूप में परिमाण होता है। दूसरी ओर, कुछ मात्राएँ ऐसी होती हैं जिनमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है, जैसे कि बल, वेग, विस्थापन आदि। इन्हें सदिश मात्राएँ कहते हैं। गणित, भौतिकी और अभियांत्रिकी में दोनों प्रकार की मात्राएँ महत्वपूर्ण हैं। इस अध्याय में हम सदिशों की मूलभूत संकल्पनाओं, उनके प्रकारों, जोड़-घटाव, गुणा, और उनके अनुप्रयोगों का अध्ययन करेंगे। सदिशों के बीजीय और ज्यामितीय गुणधर्मों को समझना आवश्यक है क्योंकि ये विभिन्न विज्ञानों में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं।
- अदिश मात्राएँ केवल परिमाण रखती हैं, जैसे लंबाई, समय, द्रव्यमान।
- सदिश मात्राएँ परिमाण और दिशा दोनों रखती हैं, जैसे बल, वेग, विस्थापन।
- सदिश बीजगणित सदिशों के गुणों और संक्रियाओं का अध्ययन है।
- गणित, भौतिकी और अभियांत्रिकी में सदिशों का व्यापक उपयोग होता है।
- 📌 अदिश मात्रक: केवल परिमाण वाली मात्राएँ।
- 📌 सदिश मात्रक: परिमाण और दिशा दोनों वाली मात्राएँ।
10.2 कुछ आधारभूत संकल्पनाएँ (Some Basic Concepts)
व्याख्या10.2 कुछ आधारभूत संकल्पनाएँ (Some Basic Concepts)
त्रि-विमीय अंतरिक्ष में किसी सरल रेखा को तीर के निशानों द्वारा दो दिशाएँ दी जा सकती हैं, जिनमें से एक निश्चित दिशा वाली रेखा को दिष्ट रेखा कहते हैं। यदि इस रेखा को एक रेखाखंड तक सीमित कर दिया जाए, तो वह दिष्ट रेखाखंड सदिश कहलाता है क्योंकि इसमें परिमाण (लंबाई) और दिशा दोनों होते हैं। सदिश को सामान्यतः AB या a से निरूपित किया जाता है, जहाँ A प्रारंभिक बिंदु और B अंतिम बिंदु होता है। सदिश का परिमाण उसके प्रारंभिक और अंतिम बिंदु के बीच की दूरी होती है, जिसे हमेशा धनात्मक माना जाता है। एक बिंदु P(x, y, z) का स्थिति सदिश OP (या r) मूल बिंदु O(0, 0, 0) से P तक का सदिश होता है, जिसका परिमाण |OP| = Sqrt(x² + y² + z²) होता है। सदिश के दिशा कोण B1, B2, B3 x, y, z अक्षों के साथ बनते हैं, जिनके कोसाइन को दिक्-कोसाइन कहा जाता है। ये सदिश के दिशा को दर्शाते हैं और इनका वर्ग योग सदैव 1 होता है।
- दिष्ट रेखा वह रेखा है जिसकी एक निश्चित दिशा होती है।
- दिष्ट रेखाखंड सदिश होता है जिसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
- सदिश का परिमाण सदैव धनात्मक होता है।
- स्थिति सदिश मूल बिंदु से किसी बिंदु तक का सदिश होता है।
- दिक्-कोसाइन सदिश के दिशा कोणों के कोसाइन होते हैं और उनका योग 1 होता है।
- 📌 दिष्ट रेखा: निश्चित दिशा वाली रेखा।
- 📌 दिष्ट रेखाखंड: परिमाण और दिशा वाला रेखाखंड।
- 📌 स्थिति सदिश: मूल बिंदु से किसी बिंदु तक का सदिश।
10.3 सदिशों के प्रकार (Types of Vectors)
व्याख्या10.3 सदिशों के प्रकार (Types of Vectors)
सदिशों को उनके गुणों के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। शून्य सदिश वह सदिश होता है जिसका प्रारंभिक और अंतिम बिंदु समान होता है, इसका परिमाण शून्य होता है और इसकी कोई निश्चित दिशा नहीं होती। इसे 0 या से निरूपित किया जाता है।
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.दो यूनिट वैक्टर का योग एक तीसरी इकाई वेक्टर है, फिर यूनिट वेक्टर के अंतर का मापांक है
उत्तर:
√3
Q2.यदि |a|= 5, |b|= 13 और |a × b|= 25 , a.b खोजें
उत्तर:
±60
Q3.अगर |a × b| = 4 और |a.b| = 2, , तब |a| 2 |b| 2 बराबर है
उत्तर:
20
Q4.|a × b| 2 + |a.b| 2 = 144 और | a | = 4, तब | b | के बराबर है
उत्तर:
3
Q5.यदि a, b, c यूनिट वैक्टर हैं तो a + b + c = 0, तो a.b + b.c + c.a का मान है
उत्तर:
-3/2
Q6.अगर |a| = 4 और -3 ≤ λ ≤ 2, फिर की श्रेणी | λa | है
उत्तर:
[0, 12]
Q7.a, b और c क्रमशः वैक्टर 3, 4 और 5 के साथ वैक्टर हैं और a + b + c = 0, फिर a.b + b.c + c.a का मान है
उत्तर:
-25
Q8.अगर |a| = |b| = 1 और |a + b| = √3, फिर (3a - 4b)(2a + 5b) का मान हैl
उत्तर:
-21/2
Ganit-II के सभी 7 अध्याय
Mathematics · Class 12