Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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महाद्वीपीय प्रवाह (Continental drift)
व्याख्यामहाद्वीपीय प्रवाह (Continental drift)
इस खंड में महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत की अवधारणा, इतिहास और इसके पक्ष में प्रस्तुत प्रमाणों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। पृथ्वी की सतह पर महाद्वीप और महासागरों का वितरण आज जैसा है, वह सदैव ऐसा नहीं रहा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि महाद्वीप समय के साथ धीरे-धीरे अपनी स्थिति बदलते रहते हैं। सबसे पहले इस संभावना को सन् 1596 में डच मानचित्रवेत्ता अब्राहम ऑर्टलियस ने व्यक्त किया था। बाद में जर्मन वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगनर ने सन् 1912 में महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने कहा कि आज के सभी महाद्वीप एक विशाल महाद्वीप पैंजिया के भाग थे, जो लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व टूटकर अलग-अलग महाद्वीपों में बंट गया। पैंजिया के टूटने के बाद दो बड़े महाद्वीपीय पिंड लारेशिया (उत्तर) और गोंडवानालैंड (दक्षिण) बने, जो बाद में छोटे-छोटे महाद्वीपों में विभाजित हुए। महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में कई प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं, जैसे दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की तटरेखाओं में आश्चर्यजनक साम्य, महासागरों के पार चट्टानों की आयु में समानता, टिलाइट नामक हिमानी निक्षेपों का वितरण, प्लेसर निक्षेपों का समान होना, और जीवाश्मों का वितरण। इन प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि महाद्वीप कभी एक साथ जुड़े थे और धीरे-धीरे अलग हुए। वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन के लिए दो प्रमुख बलों का उल्लेख किया- पोलर फ्लीइंग बल और ज्वारीय बल। पोलर फ्लीइंग बल पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न होता है, जबकि ज्वारीय बल सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण से महासागरों में ज्वार उत्पन्न करता है। हालांकि, ये बल महाद्वीपीय विस्थापन के लिए अपर्याप्त माने गए। बाद में आर्थर होम्स ने मैंटल में संवहन धाराओं की भूमिका बताई, जो रेडियोधर्मी तत्वों से उत्पन्न ताप के कारण होती हैं और महाद्वीपों की गति का कारण बनती हैं।
- अल्फ्रेड वेगनर ने सन् 1912 में महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत प्रस्तुत किया।
- सभी महाद्वीप पहले एक विशाल महाद्वीप पैंजिया के भाग थे।
- पैंजिया के टूटने के बाद लारेशिया और गोंडवानालैंड बने।
- दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की तटरेखा में साम्य महाद्वीपीय विस्थापन का प्रमाण है।
- टिलाइट और जीवाश्मों का वितरण महाद्वीपों के पूर्व में जुड़े होने का संकेत देता है।
- पोलर फ्लीइंग बल और ज्वारीय बल महाद्वीपों की गति के लिए प्रस्तावित बल हैं।
- 📌 महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत: यह सिद्धांत कहता है कि महाद्वीप समय के साथ अपनी स्थिति बदलते हैं।
- 📌 पैंजिया: एक विशाल महाद्वीप जो लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व मौजूद था।
- 📌 टिलाइट: हिमानी निक्षेप से बनी अवसादी चट्टान।
महासागरीय अधस्तल का मानचित्रण (Mapping of the ocean floor)
व्याख्यामहासागरीय अधस्तल का मानचित्रण (Mapping of the ocean floor)
इस खंड में महासागरों के अधस्तल की बनावट और उनके मानचित्रण के बारे में बताया गया है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद महासागरीय अधस्तल के निरूपण अभियान ने महासागरों के तल की विस्तृत जानकारी प्रदान की। महासागरीय अधस्तल केवल एक समतल मैदान नहीं है, बल्कि इसमें जलमग्न पर्वतीय कटकें, गहरी खाइयाँ और मध्य महासागरीय कटक जैसी संरचनाएँ पाई जाती हैं। महासागरीय अधस्तल की बनावट को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है: महाद्वीपीय सीमा, गहरे समुद्री बेसिन (वितलीय मैदान), और मध्य महासागरीय कटक। महाद्वीपीय सीमा में महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, महाद्वीपीय उभार और गहरी महासागरीय खाइयाँ शामिल हैं। वितलीय मैदान महाद्वीपों से बहाए गए अवसादों के निक्षेप का क्षेत्र है। मध्य महासागरीय कटक पृथ्वी के सबसे लंबे पर्वत शृंखला की तरह है, जिसमें सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं। महासागरीय अधस्तल के मानचित्रण से यह भी पता चला कि महासागरों के तल की चट्टानें महाद्वीपीय चट्टानों की तुलना में नई होती हैं और मध्य महासागरीय कटक के दोनों ओर समान दूरी पर स्थित चट्टानों की आयु और संरचना समान होती है। इससे महासागरीय अधस्तल विस्तार की अवधारणा को बल मिला।
- महासागरीय अधस्तल में पर्वतीय कटकें, गहरी खाइयाँ और वितलीय मैदान पाए जाते हैं।
- महासागरीय अधस्तल का मानचित्रण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद व्यापक हुआ।
- महाद्वीपीय सीमा में मग्नतट, ढाल, उभार और खाइयाँ शामिल हैं।
- वितलीय मैदान महाद्वीपों से बहाए गए अवसादों का निक्षेप क्षेत्र है।
- मध्य महासागरीय कटक पृथ्वी की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला है।
- महासागरीय तल की चट्टानें महाद्वीपीय चट्टानों की तुलना में नई होती हैं।
- 📌 महाद्वीपीय सीमा: महाद्वीप और महासागर के बीच का क्षेत्र।
- 📌 वितलीय मैदान: महासागरीय तल का समतल क्षेत्र जहाँ अवसाद जमा होते हैं।
- 📌 मध्य महासागरीय कटक: महासागरों के बीच लंबी पर्वत श्रृंखला।
भूकंप व ज्वालामुखियों का वितरण (Distribution of earthquakes and volcanoes)
व्याख्याभूकंप व ज्वालामुखियों का वितरण (Distribution of earthquakes and volcanoes)
इस खंड में भूकंप और ज्वालामुखियों के वितरण की विशेषताओं का अध्ययन किया गया है। पृथ्वी की सतह पर भूकंप और ज्वालामुखी मुख्यतः प्लेटों की सीमाओं पर पाए जाते हैं। अटलांटिक महासागर के मध्य में एक बिंदु रेखा के रूप में भूकंप और ज्वालामुखी की गतिविधि देखी ज
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.महाद्वीपीय विस्थापन सिधांत का प्रतिपादन किसने किया था?
उत्तर:
अल्फ्रेड वेगनर
Q2.अल्फ्रेड वेगनर ने बड़े महाद्वीप को क्या नाम दिया था?
उत्तर:
पैंजिया
Q3.संवहन-धरा सिधांत का प्रतिपादन किसने किया था?
उत्तर:
आर्थर होम्स
Q4.प्लेट विवर्तनिक सिधांत को प्रतिपादित किसने किया था?
उत्तर:
मैक्कैन्ज़ी , पारकर और मोरगन
Q5.प्रशांत महासागर के किनारों को सक्रिय ज्वालामुखी के क्षेत्र होने के कारण यह क्षेत्र को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
रिंग ऑफ़ फायर
Q6.किस विधि से महासागरों पर महाद्वीपीयों की चट्टानों का निर्माण के समय को सरलता से जाना जा सकता है?
उत्तर:
रेडियोमिट्रिक काल निर्धारण विधि
Q7.सोनायुक्त शिराएँ किस देश में पाई जाती है?
उत्तर:
ब्राज़ील
Q8.सागरीय अधस्तल विस्तार’ की परिकल्पना किस ने प्रस्तुत की?
उत्तर:
हेस
Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant के सभी 14 अध्याय
Geography · Class 11