Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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12.1 भूमिका
व्याख्या12.1 भूमिका
उन्नीसवीं शताब्दी तक पदार्थ की परमाण्वीय परिकल्पना के समर्थन में अनेक साक्ष्य प्राप्त हो चुके थे। सन् 1897 में ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी जोसेफ जे. टॉमसन ने गैसों के विद्युत विसर्जन प्रयोगों द्वारा यह ज्ञात किया कि विभिन्न तत्वों के परमाणुओं में उपस्थित ऋणात्मक आवेशित संघटक, जिन्हें इलेक्ट्रॉन कहा जाता है, सभी परमाणुओं के लिए समान होते हैं। इसके साथ ही यह भी ज्ञात हुआ कि परमाणु स्वयं वैद्युत रूप से उदासीन होते हैं, अर्थात् परमाणु में धनात्मक और ऋणात्मक आवेश की मात्राएँ बराबर होती हैं। इस तथ्य से यह स्पष्ट होता है कि परमाणु में धनात्मक आवेश भी होता है जो इलेक्ट्रॉनों के ऋण आवेश को निष्प्रभावित करता है। सन् 1898 में टॉमसन ने परमाणु का पहला मॉडल प्रस्तुत किया जिसे प्लम पुडिंग मॉडल कहा जाता है। इस मॉडल के अनुसार, परमाणु में धनात्मक आवेश एकसमान रूप से वितरित होता है और इलेक्ट्रॉन इसमें अंतःस्थापित होते हैं जैसे तरबूज में बीज। हालांकि बाद के अध्ययनों ने इस मॉडल की सीमाएँ स्पष्ट कीं। सघन पदार्थ और गैसें ताप के विभिन्न स्तरों पर वैद्युतचुंबकीय विकिरण उत्सर्जित करती हैं, जिसमें अनेक तरंगदैर्घ्य होते हैं। परन्तु विरलित गैसों में उत्सर्जित प्रकाश विशिष्ट तरंगदैर्घ्यों का होता है, जिन्हें रेखीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। प्रत्येक तत्व का अपना अभिलाक्षणिक स्पेक्ट्रम होता है, जो उस तत्व की आंतरिक संरचना का संकेत देता है। अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने 1906 में एल्फा-कणों के प्रकीर्णन के प्रयोग प्रस्तावित किए, जिन्हें बाद में गाइगर और मार्सडन ने 1911 में किया। इन प्रयोगों ने परमाणु के नाभिकीय मॉडल की नींव रखी, जिसमें परमाणु का अधिकांश धनात्मक आवेश और द्रव्यमान एक सूक्ष्म नाभिक में संकेंद्रित होता है और इलेक्ट्रॉन इसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं। रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु की संरचना की समझ में क्रांतिकारी था, लेकिन यह हाइड्रोजन जैसे सरल परमाणु के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर पाया। इस दुविधा को दूर करने के लिए नील्स बोर ने 1913 में बोर मॉडल प्रस्तुत किया, जो क्वांटम विचारों पर आधारित था।
- परमाणु वैद्युत रूप से उदासीन होते हैं, अर्थात् धनात्मक और ऋणात्मक आवेश बराबर होते हैं।
- टॉमसन का प्लम पुडिंग मॉडल परमाणु में धनात्मक आवेश के एकसमान वितरण और इलेक्ट्रॉनों के अंतःस्थापन की परिकल्पना करता है।
- परमाणुओं का अभिलाक्षणिक स्पेक्ट्रम उनके आंतरिक संरचना का संकेत देता है।
- रदरफोर्ड के गाइगर-मार्सडन प्रयोगों ने परमाणु के नाभिकीय मॉडल की पुष्टि की।
- रदरफोर्ड मॉडल में परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और धनात्मक आवेश नाभिक में संकेंद्रित होता है।
- बोर ने रदरफोर्ड मॉडल की सीमाओं को दूर करते हुए क्वांटम सिद्धांत आधारित मॉडल प्रस्तुत किया।
- 📌 परमाणु: पदार्थ का सबसे छोटा इकाई जो रासायनिक गुणों को बनाए रखता है।
- 📌 इलेक्ट्रॉन: ऋणात्मक आवेशित कण जो परमाणु में उपस्थित होता है।
- 📌 नाभिक: परमाणु का वह केंद्र जिसमें अधिकांश धनात्मक आवेश और द्रव्यमान होता है।
12.2 एल्फा कण प्रकीर्णन तथा परमाणु का रदरफोर्ड नाभिकीय मॉडल
व्याख्या12.2 एल्फा कण प्रकीर्णन तथा परमाणु का रदरफोर्ड नाभिकीय मॉडल
सन् 1911 में रदरफोर्ड के सुझाव पर हैस गाइगर और अर्नेस्ट मास्टिन ने एल्फा-कणों के प्रकीर्णन पर एक महत्वपूर्ण प्रयोग किया। इस प्रयोग में रेडियोधर्मी स्रोत ^{214}_{83}Bi से उत्सर्जित 5.5 MeV ऊर्जा वाले α-कणों के एक पुंज को बहुत पतली स्वर्ण पन्नी पर दिष्ट किया गया। इस प्रक्रिया में α-कणों के प्रकीर्णन कोणों को मापा गया। प्रयोग में α-कणों का पुंज लेड की ईंटों के मध्य से गुजार कर संरेखित किया गया और फिर इसे स्वर्ण पन्नी पर प्रहारित किया गया। प्रकीर्णित कणों का पता लगाने के लिए एक घूर्णी संसूचक का उपयोग किया गया जिसमें जिंक सल्फाइड का परदा और सूक्ष्मदर्शी था। α-कण जब परदे से टकराते हैं तो चमकीले फ्लैश उत्पन्न करते हैं जिन्हें सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है। परिणामों से ज्ञात हुआ कि अधिकांश α-कण बिना किसी विक्षेप के स्वर्ण पन्नी को पार कर जाते हैं, परन्तु कुछ कण बड़े कोण से प्रकीर्णित होते हैं। लगभग 0.14% कण 1° से अधिक कोण पर प्रकीर्णित होते हैं और 8000 α-कणों में से लगभग 1 कण 90° से अधिक विक्षेपित होता है। रदरफोर्ड ने तर्क दिया कि इतने बड़े कोणों पर विक्षेपण के लिए परमाणु के भीतर धनात्मक आवेश और द्रव्यमान का अत्यंत संकेंद्रित होना आवश्यक है। इस संकेंद्रित क्षेत्र को नाभिक कहा गया। नाभिक की त्रिज्या लगभग 10^{-15} से 10^{-14} मीटर होती है, जबकि परमाणु का कुल आकार लगभग 10^{-10} मीटर होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि परमाणु के भीतर अधिकांश भाग खाली होता है। α-कणों और नाभिक के बीच कूलॉम बल के कारण α-कणों के प्रक्षेप पथ का विश्लेषण किया जा सकता है, जिससे नाभिक के आकार और आवेश का अनुमान लगाया जाता है। इस प्रकार रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल परमाणु की संरचना की एक क्रांतिकारी व्याख्या प्रस्तुत करता है।
- गाइगर-मार्सडन प्रयोग में α-कणों को स्वर्ण पन्नी पर दिष्ट किया गया।
- अधिकांश α-कण बिना विक्षेप के पार हो जाते हैं, कुछ बड़े कोण से प्रकीर्णित होते हैं।
- प्रकीर्णन के बड़े कोणों से नाभिक की अत्यंत संकेंद्रित धनात्मक आवेश की पुष्टि होती है।
- नाभिक की त्रिज्या लगभग 10^{-15} से 10^{-14} मीटर होती है।
- परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है।
- α-कणों और नाभिक के बीच कूलॉम बल के कारण प्रक्षेप पथ का विश्लेषण संभव है।
- 📌 α-कण: हीलियम नाभिक के समान धनात्मक आवेशित कण।
- 📌 प्रकीर्णन: किसी कण का दिशा में परिवर्तन।
- 📌 नाभिक: परमाणु का केंद्र जिसमें अधिकांश धनात्मक आवेश और द्रव्यमान होता है।
12.2.1 ऐल्फा-कण प्रक्षेप-पथ
व्याख्या12.2.1 ऐल्फा-कण प्रक्षेप-पथ
α-कण द्वारा अनुरेखित प्रक्षेप पथ संघट्ट प्राचल (impact parameter), जिसे b से दर्शाया जाता है, पर निर्भर करता है। संघट्ट प्राचल α-कण के प्रारंभिक वेग सदिश की नाभिक के केंद्र से अभिलंबीय दूरी है। जब α-कण नाभिक के बहुत समीप से गुजरता है (कम b), तो उसे
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.हाइड्रोजन परमाणु में निम्नलिखित में से कौन सी वर्णक्रमीय श्रृंखला 4860 A की वर्णक्रमीय रेखा देती है?
उत्तर:
बाल्मर
Q2.बोह्र मॉडल के अनुसार, न्यूनतम आयतन (eV में ) डबल आयनित ली परमाणु (Z = 3) की जमीन से एक इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक है
उत्तर:
122.4 eV
Q3.n = 4, 5, 6, ……… से इलेक्ट्रॉन का संक्रमण। n = 3 से मेल खाती है
उत्तर:
पास्चेन श्रृंखला
Q4.हाइड्रोजन परमाणु की आयनियोजन ऊर्जा 13.6 eV है। बोह्र के सिद्धांत के बाद तीसरी और चौथी कक्षा के बीच एक संक्रमण के लिए ऊर्जा है
उत्तर:
0.66 eV
Q5.राइडबर्ग निरंतर आर के संदर्भ में, पहली बामर लाइन की लहर संख्या है
उत्तर:
5R/36
Q6.हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की बाल्मर श्रृंखला में सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य होगी
उत्तर:
6557 Å
Q7.बोहर राडिए के बीच का अनुपात है
उत्तर:
1 : 4 : 9
Q8.बोह्र के मॉडल में, पहली कक्षा की परमाणु त्रिज्या rQ है। फिर, तीसरी कक्षा की त्रिज्या है
उत्तर:
9r 0
Bhautiki-II के सभी 6 अध्याय
Physics · Class 12