Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
1. प्रस्तावना
व्याख्या1. प्रस्तावना
इस अनुभाग में आँकड़ों के संगठन की आवश्यकता और महत्व को समझाया गया है। आँकड़ों का संगठन अर्थशास्त्र में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके द्वारा कच्चे, अव्यवस्थित आँकड़ों को व्यवस्थित, वर्गीकृत और सारणीबद्ध किया जाता है ताकि उनका विश्लेषण और अर्थ निकालना आसान हो सके। उदाहरण के लिए, कबाड़ी वाला अपने कबाड़ को विभिन्न प्रकारों जैसे अखबार, प्लास्टिक, काँच, धातु आदि में वर्गीकृत करता है। इसी प्रकार विद्यालय की पुस्तकें विषयों के अनुसार वर्गीकृत होती हैं। वर्गीकरण से वस्तुओं या आँकड़ों को खोजने, समझने और विश्लेषण करने में सुविधा होती है। वर्गीकरण मनमाने ढंग से नहीं किया जाता, बल्कि समान गुणों के आधार पर समूह बनाए जाते हैं। इस प्रकार, वर्गीकरण का उद्देश्य कच्चे आँकड़ों को व्यवस्थित करना है ताकि वे आगे के सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए उपयुक्त बन सकें।
- आँकड़ों का संगठन कच्चे आँकड़ों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है।
- वर्गीकरण से समान गुणों वाले आँकड़े एक समूह में रखे जाते हैं।
- वर्गीकरण से आँकड़ों को समझना और विश्लेषण करना आसान होता है।
- वर्गीकरण मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि विशेष आधार पर किया जाता है।
- 📌 आँकड़ों का संगठन: कच्चे आँकड़ों को व्यवस्थित, वर्गीकृत और सारणीबद्ध करने की प्रक्रिया।
- 📌 वर्गीकरण: समान गुणों के आधार पर वस्तुओं या आँकड़ों को समूहों में बांटना।
2. अपरिष्कृत आँकड़े
व्याख्या2. अपरिष्कृत आँकड़े
अपरिष्कृत आँकड़े वे होते हैं जो बिना किसी विशेष क्रम या संगठन के होते हैं। ये कच्चे आँकड़े होते हैं जो प्रायः बहुत बड़े और अव्यवस्थित होते हैं, इसलिए इनका विश्लेषण करना कठिन होता है। उदाहरण के लिए, 100 छात्रों के गणित के अंक या 50 परिवारों के मासिक भोजन व्यय के आँकड़े यदि बिना किसी वर्गीकरण के प्रस्तुत किए जाएं तो वे अपरिष्कृत आँकड़े कहलाएंगे। इन आँकड़ों को सीधे पढ़ना, समझना और विश्लेषण करना कठिन होता है। इसलिए, इन्हें वर्गीकृत और सारणीबद्ध करना आवश्यक होता है ताकि वे बोधगम्य और विश्लेषण योग्य बन सकें। अपरिष्कृत आँकड़ों को वर्गीकृत करने से वे संक्षिप्त और व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे सूचना प्राप्त करना आसान हो जाता है। **Table on page 3 (10×10)** | 47 | 45 | 10 | 60 | 51 | 56 | 66 | 100 | 49 | 40 | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 60 | 59 | 56 | 55 | 62 | 48 | 59 | 55 | 51 | 41 | | 42 | 69 | 64 | 66 | 50 | 59 | 57 | 65 | 62 | 50 | | 64 | 30 | 37 | 75 | 17 | 56 | 20 | 14 | 55 | 90 | | 62 | 51 | 55 | 14 | 25 | 34 | 90 | 49 | 56 | 54 | | 70 | 47 | 49 | 82 | 40 | 82 | 60 | 85 | 65 | 66 | | 49 | 44 | 64 | 69 | 70 | 48 | 12 | 28 | 55 | 65 | | 49 | 40 | 25 | 41 | 71 | 80 | 0 | 56 | 14 | 22 | | 66 | 53 | 46 | 70 | 43 | 61 | 59 | 12 | 30 | 35 | | 45 | 44 | 57 | 76 | 82 | 39 | 32 | 14 | 90 | 25 | **Table on page 3 (10×5)** | 1904 | 1559 | 3473 | 1735 | 2760 | | --- | --- | --- | --- | --- | | 2041 | 1612 | 1753 | 1855 | 4439 | | 5090 | 1085 | 1823 | 2346 | 1523 | | 1211 | 1360 | 1110 | 2152 | 1183 | | 1218 | 1315 | 1105 | 2628 | 2712 | | 4248 | 1812 | 1264 | 1183 | 1171 | | 1007 | 1180 | 1953 | 1137 | 2048 | | 2025 | 1583 | 1324 | 2621 | 3676 | | 1397 | 1832 | 1962 | 2177 | 2575 | | 1293 | 1365 | 1146 | 3222 | 1396 | **Table on page 6 (12×2)** | अंक | बारंबारता | | --- | --- | | 0–10 | 1 | | 10–20 | 8 | | 20–30 | 6 | | 30–40 | 7 | | 40–50 | 21 | | 50–60 | 23 | | 60–70 | 19 | | 70–80 | 6 | | 80–90 | 5 | | 90–100 | 4 | | योग | 100 | **Table on page 14 (10×2)** | परिवार का आकार | परिवारों की संख्या | | --- | --- | | 1 | 5 | | 2 | 15 | | 3 | 25 | | 4 | 35 | | 5 | 10 | | 6 | 5 | | 7 | 3 | | 8 | 2 | | योग | 100 | **Table on page 17 (3×15)** | 1 | 3 | 2 | 2 | 2 | 2 | 1 | 2 | 1 | 2 | 2 | 3 | 3 | 3 | 3 | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 3 | 3 | 2 | 3 | 2 | 2 | 6 | 1 | 6 | 2 | 1 | 5 | 1 | 5 | 3 | | 2 | 4 | 2 | 7 | 4 | 2 | 4 | 3 | 4 | 2 | 0 | 3 | 1 | 4 | 3 | **Table on page 17 (5×14)** | 28 | 17 | 15 | 22 | 29 | 21 | 23 | 27 | 18 | 12 | 7 | 2 | 9 | 4 | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 1 | 8 | 3 | 10 | 5 | 20 | 16 | 12 | 8 | 4 | 33 | 27 | 21 | 15 | | 3 | 36 | 27 | 18 | 9 | 2 | 4 | 6 | 32 | 31 | 29 | 18 | 14 | 13 | | 15 | 11 | 9 | 7 | 1 | 5 | 37 | 32 | 28 | 26 | 24 | 20 | 19 | 25 | | 19 | 20 | 6 | 9 | | | | | | | | | | |
- अपरिष्कृत आँकड़े बिना किसी क्रम या संगठन के होते हैं।
- ये आँकड़े विशाल और अव्यवस्थित होते हैं।
- इनका विश्लेषण करना कठिन होता है।
- वर्गीकरण से इन्हें संक्षिप्त और बोधगम्य बनाया जाता है।
- 📌 अपरिष्कृत आँकड़े: बिना वर्गीकरण के कच्चे और अव्यवस्थित आँकड़े।
- 📌 वर्गीकरण: कच्चे आँकड़ों को समूहों में बांटना ताकि वे व्यवस्थित हो सकें।
3. आँकड़ों का वर्गीकरण
व्याख्या3. आँकड़ों का वर्गीकरण
आँकड़ों का वर्गीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें कच्चे आँकड़ों को उनके समान गुणों के आधार पर समूहों में बांटा जाता है। वर्गीकरण के कई प्रकार होते हैं, जो अध्ययन के उद्देश्य पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, कालानुक्रमिक वर्गीकरण में आँकड़ों को समय के अनुस
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.निम्नलिखित में से क्या वर्गीकरण का उद्देश्य है?
उत्तर:
घ) उपरोक्त सभी
Q2.समय अवधि के आधार पर आँकड़ों का वर्गीकरण निम्नानुसार जाना जाता है-
उत्तर:
ख) कालानुक्रमिक वर्गीकरण
Q3.निम्नलिखित में से कौन सा चर का उदाहरण नहीं है:
उत्तर:
घ) बुद्धिमत्ता
Q4.एक छात्र की राष्ट्रीयता है:
उत्तर:
क) एक विशेषता
Q5.गणना अंक निर्धारित करता है:
उत्तर:
घ) वर्ग की आवृत्ति
Q6.किसी व्यक्ति की वार्षिक आय है:
उत्तर:
ख) असतत चर
Q7.एक वर्ग की ऊपरी और निचली सीमा के बीच का अंतर इस प्रकार है:
उत्तर:
ख) वर्ग अंतराल का परिमाण
Q8.आस-पास की वस्तुओं को सजीव या निर्जीव के रूप में समूहित किया जा सकता है। क्या यह मात्रात्मक वर्गीकरण है?
उत्तर:
यह मात्रात्मक वर्गीकरण नहीं है क्योंकि सजीव या निर्जीव गुणात्मक विशेषताएँ हैं जिन्हें मात्रात्मक रूप में मापा नहीं जा सकता। इसलिए यह गुणात्मक वर्गीकरण है।
व्याख्या:
मात्रात्मक वर्गीकरण में विशेषताएँ संख्यात्मक रूप में व्यक्त होती हैं, जबकि सजीव या निर्जीव का वर्गीकरण गुणात्मक है क्योंकि इसे मात्रात्मक रूप में मापा नहीं जा सकता।
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Economics · Class 11