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Chapter 3

🎓 Class 7📖 Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage Part-I📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 12Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

मौसम, ऋतुएँ और जलवायु

अवधारणा

मौसम, ऋतुएँ और जलवायु

जलवायु और मौसम दोनों शब्द अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, लेकिन इनके बीच महत्वपूर्ण अंतर है। मौसम वह स्थिति है जिसे हम प्रतिदिन अनुभव करते हैं, जैसे वर्षा, तेज धूप, तेज हवा आदि। मौसम समय-समय पर बदलता रहता है। जलवायु, दूसरी ओर, किसी क्षेत्र में लंबे समय तक (कम से कम कई दशकों तक) मौसम की औसत स्थिति को कहते हैं। यह क्षेत्र विशेष के मौसम के प्रतिरूप को दर्शाता है। पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने के कारण ऋतुएँ बनती हैं। एक वर्ष में विभिन्न ऋतुएँ आती हैं जैसे बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर। भारत में वर्षा ऋतु विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहाँ वर्षा मुख्यतः मानसून के दौरान होती है। मौसम ऋतुओं के अनुसार बदलता है, जैसे गर्मी में शुष्क और गर्म मौसम होता है, जबकि मानसून में आर्द्र और वर्षा होती है। विश्व के अधिकांश भागों में चार मुख्य ऋतुएँ होती हैं, लेकिन भारत में छह ऋतुएँ मानी जाती हैं। ये ऋतुएँ न केवल प्राकृतिक परिवर्तनों को दर्शाती हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, त्योहारों और जीवनशैली से भी जुड़ी होती हैं। इस प्रकार, मौसम और जलवायु दोनों पृथ्वी के जीवन और मानव गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जलवायु की समझ से हम कृषि, वस्त्र, भोजन और अन्य जीवन आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समायोजित कर सकते हैं।

  • मौसम अल्पकालिक होता है, जबकि जलवायु दीर्घकालिक प्रतिरूप है।
  • ऋतुएँ पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिक्रमा के कारण बनती हैं।
  • भारत में छह ऋतुएँ मानी जाती हैं: बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।
  • मानसून वर्षा ऋतु के रूप में विशेष महत्व रखता है।
  • जलवायु क्षेत्र विशेष के मौसम की औसत स्थिति को दर्शाता है।
  • 📌 मौसम: प्रतिदिन या अल्पकालिक समय में मौसम की स्थिति।
  • 📌 जलवायु: किसी क्षेत्र में लंबे समय तक मौसम की औसत स्थिति।
  • 📌 ऋतु: वर्ष के विभिन्न मौसमों के चक्र, जैसे बसंत, ग्रीष्म आदि।

भारत में जलवायु के प्रकार

व्याख्या

भारत में जलवायु के प्रकार

भारत की जलवायु अत्यंत विविधतापूर्ण है, जो इसकी भौगोलिक स्थिति, स्थलाकृति और समुद्र से निकटता के कारण होती है। उत्तर में हिमालय पर्वतों में अल्पाइन जलवायु पाई जाती है, जहाँ सर्दियाँ बहुत ठंडी और बर्फीली होती हैं। इसके नीचे के पहाड़ी क्षेत्रों में समशीतोष्ण जलवायु होती है, जहाँ सर्दियाँ कम ठंडी और गर्मियाँ मध्यम होती हैं। उत्तरी मैदानों में उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु है, जिसमें ग्रीष्मकाल अत्यधिक गर्म और शीतकाल ठंडा होता है। पश्चिम में थार मरुस्थल की जलवायु शुष्क और गर्म होती है, जहाँ वर्षा कम होती है। पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु है, जो मानसून के दौरान भारी वर्षा प्राप्त करती है। मध्य दक्कन पठार की जलवायु अर्ध-शुष्क है, जबकि पूर्वी भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। इन जलवायु प्रकारों के कारण भारत में कृषि, वनस्पति, पशुपालन और मानव जीवन के विविध रूप विकसित हुए हैं। जलवायु की यह विविधता भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक विविधता में भी परिलक्षित होती है।

  • हिमालय क्षेत्र में अल्पाइन जलवायु, अत्यंत ठंडी सर्दियाँ।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में समशीतोष्ण जलवायु, मध्यम तापमान।
  • उत्तरी मैदानों में उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु।
  • थार मरुस्थल में शुष्क और गर्म जलवायु।
  • पश्चिमी तटीय पट्टी में उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु।
  • मध्य दक्कन में अर्ध-शुष्क जलवायु।
  • 📌 अल्पाइन जलवायु: उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की ठंडी जलवायु।
  • 📌 समशीतोष्ण जलवायु: मध्यम तापमान वाली जलवायु।
  • 📌 उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु: गर्मियों में गर्म और सर्दियों में ठंडी जलवायु।

जलवायु निर्धारित करने वाले कारक

व्याख्या

जलवायु निर्धारित करने वाले कारक

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जो वैश्विक और स्थानीय स्तर पर कार्य करते हैं। मुख्य कारक हैं अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से निकटता, पवनें और स्थलाकृति। अक्षांश: अक्षांश भूमध्य रेखा से दूरी को दर्शाता है। भूमध्य रेखा के निकट के क्षेत्र ग

अभ्यास प्रश्नChapter 3

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. जलवायु के कारकों का उनके प्रभावों के साथ निम्नलिखित सूची में मिलान कीजिए — | अ | ब | | --- | --- | | (1) अक्षांश | (क) भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है। | | (2) ऊँचाई | (ख) उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है। | | (3) समुद्र से निकटता | (ग) ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है। | | (4) मानसूनी पवन | (घ) तापमान को प्रभावित करता है।

उत्तर:

मिलान इस प्रकार होगा: (1) अक्षांश — (ख) उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है। (2) ऊँचाई — (ग) ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है। (3) समुद्र से निकटता — (घ) तापमान को प्रभावित करता है। (4) मानसूनी पवन — (क) भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है। व्याख्या: - अक्षांश के कारण भारत के उत्तर और दक्षिण भागों में जलवायु में भिन्नता आती है। - ऊँचाई बढ़ने पर तापमान कम होता है, इसलिए ऊँचे स्थान ठंडे रहते हैं। - समुद्र के निकटता से तापमान में स्थिरता आती है, जिससे तापमान प्रभावित होता है। - मानसूनी पवन गर्मी के मौसम में नमीयुक्त हवा लेकर आता है, जो वर्षा लाने में सहायक होती है।

व्याख्या:

प्रत्येक कारक का जलवायु पर प्रभाव समझकर सही जोड़ी बनाई गई है। अक्षांश जलवायु क्षेत्र निर्धारित करता है, ऊँचाई तापमान को प्रभावित करती है, समुद्र से निकटता तापमान में स्थिरता लाती है, और मानसूनी पवन वर्षा लाने में महत्वपूर्ण है।

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Q2.2. नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए — क) मौसम और जलवायु में क्या अंतर है? ख) समुद्र के निकट स्थित स्थानों का तापमान समुद्र से दूर स्थित स्थानों की तुलना में कम क्यों होता है? ग) भारतीय जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की क्या भूमिका है? घ) चेन्नई पूरे वर्ष गर्म क्यों रहता है, जबकि लेह ठंडा रहता है?

उत्तर:

क) मौसम और जलवायु में अंतर: - मौसम अल्पकालिक होता है, जैसे दिन या सप्ताह का तापमान, वर्षा आदि। - जलवायु दीर्घकालिक प्रतिरूप होता है, जो दशकों या सदियों तक रहता है। ख) समुद्र के निकट स्थानों का तापमान कम होता है क्योंकि समुद्र तापमान को स्थिर रखता है। दिन में समुद्र गर्मी सोखता है और रात में छोड़ता है, जिससे तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। ग) मानसूनी पवन भारतीय जलवायु को प्रभावित करता है क्योंकि यह गर्मियों में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के रूप में नमीयुक्त हवा लेकर आता है, जिससे वर्षा होती है और कृषि को लाभ मिलता है। घ) चेन्नई पूरे वर्ष गर्म रहता है क्योंकि यह समुद्र के निकट है और समुद्री हवाएँ इसे गर्म रखती हैं। लेह पहाड़ी क्षेत्र में है, ऊँचाई अधिक होने के कारण वहाँ ठंडक रहती है।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर जलवायु विज्ञान के आधार पर दिया गया है। मौसम और जलवायु के बीच समय अवधि का अंतर है। समुद्र तापमान को स्थिर करता है। मानसून वर्षा लाने में मुख्य भूमिका निभाता है। ऊँचाई और समुद्र की निकटता तापमान को प्रभावित करती है।

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Q3.3. इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के मानचित्र को देखिए। लेह, चेन्नई, दिल्ली, पाणजी, इन शहरों की जलवायु को पहचानिए। - क्या यह स्थान समुद्र के समीप हैं, पर्वत पर हैं या रेगिस्तान में हैं? - ये कारक वहाँ की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?

उत्तर:

लेह: यह पहाड़ों पर स्थित है और ऊँचाई अधिक होने के कारण ठंडी जलवायु है। चेन्नई: यह समुद्र के समीप है, जिससे यहाँ गर्म और नमीयुक्त जलवायु रहती है। दिल्ली: यह मैदान में स्थित है, जहाँ गर्मी और सर्दी दोनों का अनुभव होता है। पाणजी: यह समुद्र के समीप है, जिससे यहाँ नमीयुक्त और समशीतोष्ण जलवायु है। कारक प्रभाव: - समुद्र के समीप होने से तापमान स्थिर रहता है और नमीयुक्त हवा मिलती है। - पहाड़ों पर ऊँचाई के कारण तापमान कम होता है और ठंडी जलवायु रहती है। - मैदानों में तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव होता है।

व्याख्या:

प्रत्येक स्थान की भौगोलिक स्थिति उसके जलवायु को प्रभावित करती है। समुद्र के समीपता, ऊँचाई और स्थलाकृति जलवायु के मुख्य निर्धारक हैं।

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Q4.4. भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी के मानसून चक्र को प्रदर्शित कीजिए। - गर्मियों और सर्दियों में पवनें कहाँ चलती हैं, इसके प्रतीक लगाइए। - मानसून के दौरान पवनों की दिशा दिखाइए।

उत्तर:

उत्तर: - गर्मियों में दक्षिण-पश्चिमी मानसून पवनें समुद्र से भारत की ओर चलती हैं। - सर्दियों में उत्तर-पूर्वी मानसून पवनें भारत से समुद्र की ओर चलती हैं। मानचित्र पर: - गर्मियों के लिए तीर दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर दिखाएं। - सर्दियों के लिए तीर उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर दिखाएं। व्याख्या: मानसून चक्र में पवनों की दिशा ऋतुओं के अनुसार बदलती है, जो वर्षा और जलवायु को प्रभावित करती है।

व्याख्या:

मानसून पवनों की दिशा और उनका चक्र भारत की जलवायु के लिए महत्वपूर्ण है। गर्मियों में समुद्र से नमीयुक्त हवा आती है, जबकि सर्दियों में शुष्क हवा वापस समुद्र की ओर जाती है।

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Q5.5. भारत में कृषि और मौसम से जुड़े त्योहारों (जैसे – बैसाखी, ओणम) को दिखाते हुए एक रंगीन पोस्टर बनाइए। इन त्योहारों की तस्वीरें या रेखाचित्र लगाइए।

उत्तर:

उत्तर: - बैसाखी: पंजाब में फसल कटाई का त्योहार, अप्रैल में मनाया जाता है। - ओणम: केरल का प्रमुख त्योहार, जो फसल और वर्षा के मौसम से जुड़ा है। पोस्टर में इन त्योहारों की तस्वीरें, रंगीन चित्र और कृषि से संबंधित प्रतीक शामिल करें। व्याख्या: ये त्योहार कृषि और मौसम के चक्र से जुड़े हैं और भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

व्याख्या:

त्योहारों का कृषि और मौसम से संबंध समझकर पोस्टर बनाना चाहिए। यह विषय की समझ को बढ़ाता है।

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Q6.6. कल्पना कीजिए कि आप भारत में एक किसान हैं। बरसात के मौसम के लिए आप कैसे तैयारी करेंगे? इस बारे में डायरी में संक्षेप में लिखिए।

उत्तर:

उत्तर: मैं एक किसान के रूप में बरसात के मौसम के लिए निम्नलिखित तैयारी करूंगा: - खेत की जुताई और बीज बोने की तैयारी समय पर करूँगा। - जल निकासी के लिए नालियाँ और नहरें साफ रखूँगा ताकि बाढ़ से बचा जा सके। - फसल की सुरक्षा के लिए कीट नियंत्रण के उपाय अपनाऊंगा। - मौसम की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त करूँगा ताकि समय पर कार्य कर सकूँ। व्याख्या: बरसात के मौसम की तैयारी से फसल की सुरक्षा और उत्पादन बेहतर होता है।

व्याख्या:

किसान के दृष्टिकोण से बरसात के मौसम की तैयारी में कृषि कार्यों, जल प्रबंधन और कीट नियंत्रण पर ध्यान देना आवश्यक है।

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Q7.7. किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे – चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन या दावानल) की पहचान कीजिए और एक छोटा निबंध लिखिए, जिसमें इसके कारण और प्रभाव सम्मिलित हों। ऐसे सुझाव दीजिए जो व्यक्ति, समुदाय और सरकार को इस आपदा के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

उत्तर:

उत्तर: प्राकृतिक आपदा: बाढ़ बाढ़ का कारण: - भारी वर्षा या मानसून के दौरान नदी का उफान आना। - नदियों के तटबंध टूटना। - जल निकासी की कमी। प्रभाव: - फसलें नष्ट हो जाती हैं जिससे कृषि प्रभावित होती है। - घरों और सम्पत्ति को नुकसान होता है। - लोगों का जीवन संकट में पड़ता है और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ती हैं। सुझाव: व्यक्ति: - जल निकासी के रास्ते साफ रखें। - बाढ़ के समय सुरक्षित स्थान पर जाएं। समुदाय: - तटबंधों की मरम्मत और रखरखाव करें। - आपदा के लिए जागरूकता अभियान चलाएं। सरकार: - बाढ़ नियंत्रण के लिए बांध और नहरें बनाएं। - आपदा प्रबंधन योजनाएँ बनाएं और आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध कराएं। व्याख्या: बाढ़ एक गंभीर प्राकृतिक आपदा है जो जीवन और संपत्ति को प्रभावित करती है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास आवश्यक हैं।

व्याख्या:

प्राकृतिक आपदा के कारण, प्रभाव और समाधान विस्तार से समझाए गए हैं। व्यक्ति, समुदाय और सरकार की भूमिका स्पष्ट की गई है।

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Q8.जलवायु और मौसम में क्या अंतर है? दोनों की परिभाषा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

जलवायु वह प्रतिरूप है जो किसी क्षेत्र में लंबे समय तक (कई दशकों तक) मौसम की औसत स्थिति को दर्शाता है। मौसम वह स्थिति है जिसे हम प्रतिदिन अनुभव करते हैं जैसे वर्षा, तेज धूप, तेज हवा आदि। मौसम समय-समय पर बदलता रहता है, जबकि जलवायु स्थिर होती है। उदाहरण के लिए, भारत में मानसून का मौसम प्रतिदिन बदलता रहता है, पर भारत की जलवायु वर्षा ऋतु के कारण आर्द्र रहती है।

व्याख्या:

जलवायु और मौसम दोनों पृथ्वी के पर्यावरण से जुड़े हैं, लेकिन मौसम दैनिक परिवर्तनीय होता है जबकि जलवायु दीर्घकालिक औसत होती है। जलवायु क्षेत्र विशेष के मौसम के प्रतिरूप को दर्शाती है, जो कृषि, जीवनशैली आदि को प्रभावित करती है।

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