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Chapter 3

🎓 Class 12📖 Jeev Vigyan📖 6 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~9 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 13Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

जनन स्वास्थ्य-समस्याएँ और कार्यनीतियाँ

व्याख्या

जनन स्वास्थ्य-समस्याएँ और कार्यनीतियाँ

जनन स्वास्थ्य का अर्थ केवल जनन अंगों का शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक अवधारणा है जिसमें शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारात्मक और सामाजिक पहलू शामिल होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जनन स्वास्थ्य का मतलब है जनन के सभी पहलुओं का संपूर्ण स्वास्थ्य। भारत विश्व का पहला देश था जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए 1951 में परिवार नियोजन (अब परिवार कल्याण) कार्यक्रम शुरू किया। यह कार्यक्रम समय-समय पर उन्नत होता रहा और वर्तमान में इसे जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम (RCH) के नाम से जाना जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है, जिसमें जनन अंगों की शारीरिक देखभाल, किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों, सुरक्षित यौन संबंध, यौन संचारित रोगों (STI) और एड्स के प्रति जानकारी शामिल है। विद्यालयों में यौन शिक्षा को बढ़ावा देना भी आवश्यक माना गया है ताकि युवा सही जानकारी प्राप्त कर सकें और यौन संबंधी भ्रांतियों से बच सकें। सरकारी और गैर-सरकारी संगठन ऑडियो-विजुअल और मुद्रित सामग्री के माध्यम से जनसाधारण को जागरूक करते हैं। परिवार, शिक्षक और मित्र भी इस जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, जनन स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा सहायता, जैसे सगर्भता, प्रसव, यौन संचारित रोगों, गर्भपात, गर्भनिरोधक, माहवारी संबंधी समस्याओं, बंध्यता आदि की देखभाल उपलब्ध कराना आवश्यक है। मादा भ्रूण हत्या को रोकने के लिए कानूनी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जैसे कि उल्बवेधन (एमीनोसैटेसिस) में भ्रूण की जांच पर रोक। एमीनोसैटेसिस विधि से भ्रूण में आनुवांशिक विकारों जैसे डाउन सिंड्रोम, हीमोफीलिया आदि का पता लगाया जाता है। भारत में गर्भनिरोधक गोली 'सहेली' की खोज भी इसी क्षेत्र में हुई है। जनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कारण मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी आई है, लघु परिवार की संख्या बढ़ी है, और यौन संचारित रोगों की जांच एवं उपचार में सुधार हुआ है। यह सब जनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रगति के संकेत हैं।

  • जनन स्वास्थ्य में शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारात्मक और सामाजिक पहलू शामिल हैं।
  • भारत ने 1951 में परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया जो अब RCH कार्यक्रम है।
  • यौन शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी प्रयास जारी हैं।
  • चिकित्सा सहायता जैसे सगर्भता, प्रसव, यौन संचारित रोगों का उपचार आवश्यक है।
  • मादा भ्रूण हत्या रोकने के लिए कानूनी प्रतिबंध और उल्बवेधन जांच पर रोक है।
  • जनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों से मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी आई है।
  • 📌 जनन स्वास्थ्य: जनन के सभी पहलुओं का संपूर्ण शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य।
  • 📌 परिवार नियोजन: जनसंख्या नियंत्रण के लिए अपनाई गई योजनाएं।
  • 📌 एमीनोसैटेसिस: भ्रूण की जांच के लिए एमनीओटिक द्रव्य से कोशिकाओं का विश्लेषण।

जनसंख्या विस्फोट और जन्म नियंत्रण

व्याख्या

जनसंख्या विस्फोट और जन्म नियंत्रण

बीसवीं सदी में जीवन स्तर में सुधार और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के कारण विश्व की जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई। सन् 1900 में विश्व की जनसंख्या लगभग 2 अरब थी, जो 2000 में बढ़कर 6 अरब और 2011 में 7.2 अरब हो गई। भारत की जनसंख्या भी स्वतंत्रता के समय 35 करोड़ से बढ़कर 2011 में 1.2 अरब हो गई। इस वृद्धि का मुख्य कारण मृत्युदर में गिरावट, मातृ और शिशु मृत्युदर में कमी, और जनन आयु के लोगों की संख्या में वृद्धि है। इस जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने लघु परिवार को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न गर्भनिरोधक उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। 'हम दो हमारे दो' और 'हम दो हमारा एक' जैसे नारे इसके उदाहरण हैं। विवाह की वैधानिक आयु स्त्री के लिए 18 वर्ष और पुरुष के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। गर्भनिरोधक उपायों को प्राकृतिक/परंपरागत, रोध (बैरियर), अंतः गर्भाशयी युक्तियाँ (IUD), मुँह से लेने योग्य गोलियाँ, टीके, और शल्य क्रियात्मक विधियों में वर्गीकृत किया जा सकता है। प्राकृतिक विधियों में आवधिक संयम, बाह्य स्खलन, और स्तनपान अनार्तव शामिल हैं। रोध विधियों में पुरुष और स्त्री कंडोम, डायाफ्रॉम, गर्भाशय ग्रीवा टोपी आदि आते हैं। अंतः गर्भाशयी युक्तियाँ जैसे कॉपर-टी गर्भाशय में लगाई जाती हैं और शुक्राणुओं की गतिशीलता को कम करती हैं। मुँह से लेने वाली गर्भनिरोधक गोलियाँ प्रोजेस्टोजन और एस्ट्रोजन के संयोजन से बनी होती हैं, जो अंडोत्सर्जन को रोकती हैं। सहेली गोली एक नई गर्भनिरोधक गोली है जो सप्ताह में एक बार ली जाती है। शल्य क्रिया विधियाँ स्थायी गर्भनिरोधक उपाय हैं, जैसे पुरुषों में वासेक्टोमी और महिलाओं में ट्यूबैक्टोमी। इन विधियों में शुक्रवाहिका या डिंबवाहिनी नलिका को काटकर या बाँधकर गर्भधारण रोका जाता है। ये विधियाँ प्रभावशाली हैं लेकिन पुनः पूर्व स्थिति में लाने की संभावना कम होती है।

  • विश्व और भारत में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है।
  • लघु परिवार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गर्भनिरोधक उपाय अपनाए जाते हैं।
  • गर्भनिरोधक उपाय प्राकृतिक, रोध, अंतः गर्भाशयी, गोलियाँ, टीके और शल्य क्रियात्मक होते हैं।
  • प्राकृतिक विधियाँ जैसे आवधिक संयम और स्तनपान अनार्तव में दुष्प्रभाव कम होते हैं पर असफलता अधिक होती है।
  • कंडोम यौन संचारित रोगों से भी बचाव करता है।
  • वासेक्टोमी और ट्यूबैक्टोमी स्थायी गर्भनिरोधक विधियाँ हैं।
  • 📌 आवधिक संयम: माहवारी चक्र के निषेचन काल में मैथुन से परहेज।
  • 📌 कंडोम: पुरुष या स्त्री द्वारा उपयोग किया जाने वाला रोधक गर्भनिरोधक।
  • 📌 आईयूडी (IUD): गर्भाशय में डाली जाने वाली युक्ति जो गर्भधारण रोकती है।

सगर्भता का चिकित्सीय समापन

व्याख्या

सगर्भता का चिकित्सीय समापन

सगर्भता का चिकित्सीय समापन (Medical Termination of Pregnancy - MTP) का अर्थ है गर्भावस्था को जानबूझकर या स्वैच्छिक रूप से समाप्त करना। विश्व में हर वर्ष लगभग 45-50 मिलियन चिकित्सीय गर्भपात होते हैं, जो कुल सगर्भताओं का लगभग 1/5 हिस्सा हैं। यह प्रक्रि

अभ्यास प्रश्नChapter 3

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. समाज में जनन स्वास्थ्य के महत्व के बारे में अपने विचार प्रकट कीजिए?

उत्तर:

जनन स्वास्थ्य का समाज में अत्यंत महत्व है क्योंकि यह न केवल व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि समाज की समग्र प्रगति और विकास में भी योगदान देता है। स्वस्थ जनन प्रणाली से संतानोत्पत्ति नियंत्रित होती है, जिससे जनसंख्या नियंत्रण में मदद मिलती है। इसके अलावा, जनन स्वास्थ्य से यौन संचारित रोगों का प्रसार कम होता है, जिससे समाज में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं घटती हैं। इसलिए, जनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और उचित देखभाल समाज के लिए आवश्यक है।

व्याख्या:

जनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान से व्यक्ति और समाज दोनों का कल्याण होता है। इससे जनसंख्या नियंत्रण, यौन रोगों की रोकथाम, और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

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Q2.2. जनन स्वास्थ्य के उन पहलुओं को सुझाएँ, जिन पर आज के परिदृश्य में विशेष ध्यान देने की जरूरत है?

उत्तर:

आज के परिदृश्य में जनन स्वास्थ्य के निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है: 1. यौन शिक्षा का समुचित प्रचार-प्रसार। 2. यौन संचारित रोगों की रोकथाम और उपचार। 3. गर्भनिरोधक उपायों की उपलब्धता और जागरूकता। 4. महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए जनन स्वास्थ्य सेवाओं का सुलभ होना। 5. मानसिक स्वास्थ्य और यौन संबंधी समस्याओं का समाधान। 6. भ्रूण लिंग निर्धारण जैसी अवैध प्रथाओं का उन्मूलन।

व्याख्या:

इन पहलुओं पर ध्यान देने से जनन स्वास्थ्य बेहतर होगा, जिससे समाज में स्वास्थ्य और समृद्धि आएगी।

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Q3.3. क्या विद्यालयों में यौन शिक्षा आवश्यक है? यदि हाँ तो क्यों?

उत्तर:

हाँ, विद्यालयों में यौन शिक्षा आवश्यक है क्योंकि यह युवाओं को सही जानकारी प्रदान करती है, जिससे वे यौन संबंधी मिथकों और गलतफहमियों से बचते हैं। इससे वे यौन संचारित रोगों से बचाव कर सकते हैं, गर्भनिरोध के सही उपाय सीख सकते हैं, और अपने शरीर तथा भावनाओं को समझ पाते हैं। यौन शिक्षा से बच्चों में आत्म-सम्मान बढ़ता है और वे सुरक्षित व स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम होते हैं।

व्याख्या:

यौन शिक्षा युवाओं को जागरूक बनाती है, जिससे वे सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार अपनाते हैं।

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Q4.4. क्या आप मानते हैं कि पिछले 50 वर्षों के दौरान हमारे देश के जनन स्वास्थ्य में सुधार हुआ है? यदि हाँ, तो इस प्रकार के सुधार वाले कुछ क्षेत्रों का वर्णन कीजिए?

उत्तर:

हाँ, पिछले 50 वर्षों में हमारे देश के जनन स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। सुधार के कुछ क्षेत्र हैं: 1. गर्भनिरोधक उपायों की उपलब्धता और उपयोग में वृद्धि। 2. यौन संचारित रोगों के प्रति जागरूकता और उपचार सुविधाओं का विकास। 3. मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार। 4. महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण। 5. भ्रूण लिंग निर्धारण जैसी अवैध प्रथाओं पर नियंत्रण। 6. यौन शिक्षा के प्रति समाज में बढ़ती स्वीकृति।

व्याख्या:

इन सुधारों के कारण जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है और जनन स्वास्थ्य बेहतर हुआ है।

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Q5.5. जनसंख्या विस्फोट के कौन से कारण हैं?

उत्तर:

जनसंख्या विस्फोट के मुख्य कारण हैं: 1. जन्म दर में वृद्धि। 2. मृत्यु दर में कमी। 3. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार जिससे जीवन प्रत्याशा बढ़ी। 4. परिवार नियोजन के उपायों की कमी या उनका सही उपयोग न होना। 5. सामाजिक और आर्थिक कारण जैसे शिक्षा की कमी, गरीबी।

व्याख्या:

इन कारणों के कारण जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे संसाधनों पर दबाव पड़ता है।

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Q6.6. क्या गर्भनिरोधकों का उपयोग न्यायोचित है? कारण बताएँ।

उत्तर:

हाँ, गर्भनिरोधकों का उपयोग न्यायोचित है क्योंकि वे अनचाहे गर्भधारण को रोकते हैं, जिससे परिवार नियोजन संभव होता है। इससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य बेहतर होता है, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, और समाज में जनसंख्या नियंत्रण होता है। गर्भनिरोधक उपयोग से यौन संचारित रोगों के प्रसार को भी कम किया जा सकता है। इसलिए, गर्भनिरोधकों का उपयोग सामाजिक और व्यक्तिगत दोनों दृष्टिकोण से उचित है।

व्याख्या:

गर्भनिरोधक उपयोग से परिवार नियोजन, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक विकास में मदद मिलती है।

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Q7.7. जनन ग्रंथि को हटाना गर्भ निरोधकों का विकल्प नहीं माना जा सकता है? क्यों?

उत्तर:

जनन ग्रंथि को हटाना गर्भ निरोधकों का विकल्प नहीं माना जा सकता क्योंकि यह एक स्थायी और अत्यंत गंभीर शल्यक्रिया है, जो व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। यह प्रक्रिया प्रजनन क्षमता को स्थायी रूप से समाप्त कर देती है, जबकि गर्भ निरोधक उपाय अस्थायी और नियंत्रित होते हैं। इसलिए, जनन ग्रंथि को हटाना केवल तभी किया जाता है जब चिकित्सा कारण अत्यंत गंभीर हों, न कि गर्भ निरोधक के विकल्प के रूप में।

व्याख्या:

गर्भ निरोधक उपाय सुरक्षित, अस्थायी और कम जोखिम वाले होते हैं, जबकि जनन ग्रंथि हटाना स्थायी और जोखिमपूर्ण होता है।

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Q8.8. उल्बवेधन एक घातक लिंग निर्धारण (जाँच) प्रक्रिया है, जो हमारे देश में निषेधित है? क्या यह आवश्यक होना चाहिए? टिप्पणी करें।

उत्तर:

उल्बवेधन (अल्ट्रासाउंड) का उपयोग भ्रूण के लिंग निर्धारण के लिए किया जाता है, जो हमारे देश में निषेधित है क्योंकि इससे भ्रूण लिंग चयन और कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं को बढ़ावा मिलता है। यह सामाजिक और नैतिक दृष्टि से गलत है। इसलिए, लिंग निर्धारण के लिए उल्बवेधन आवश्यक नहीं होना चाहिए। इसका उपयोग केवल चिकित्सा कारणों के लिए होना चाहिए। इस निषेध का पालन समाज में लिंग समानता और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है।

व्याख्या:

लिंग निर्धारण निषेध से कन्या भ्रूण हत्या रोकी जा सकती है और समाज में महिलाओं का सम्मान बढ़ता है।

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