Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
3.1 रीमा की जिज्ञासा
व्याख्या3.1 रीमा की जिज्ञासा
इस अनुभाग में रीमा की जिज्ञासा के माध्यम से संख्याओं के इतिहास की शुरुआत की गई है। रीमा एक पुरानी पुस्तक में से एक पन्ना गिरता हुआ देखती है जिस पर अजीब प्रतीक बने होते हैं। उसके पिताजी बताते हैं कि ये प्रतीक लगभग 4000 वर्ष पूर्व मेसोपोटामिया सभ्यता में उपयोग किए जाते थे, जो वर्तमान ईराक और आसपास के देशों में थी। इस सभ्यता में संख्याओं को लिखने के लिए विभिन्न प्रतीकों का उपयोग होता था। इतिहास में संख्याओं का विकास मानव जीवन की आवश्यकताओं से जुड़ा है, जैसे वस्तुओं की गिनती, मापन, व्यापार, और समय की गणना। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी संख्याओं के नाम और दशमलव पद्धति के प्रारंभिक रूपों का उल्लेख मिलता है। बख्शाली पांडुलिपि में शून्य का प्रयोग तीसरी शताब्दी सामान्य संवत् में हुआ था। आर्यभट्ट ने 499 सामान्य संवत् में भारतीय संख्या पद्धति को वैज्ञानिक गणनाओं के लिए स्पष्ट किया। इस पद्धति का विस्तार अरब जगत और फिर यूरोप में हुआ, जहाँ इसे 'अरबी संख्यांक' कहा गया। इस प्रकार, भारतीय संख्या पद्धति विश्व स्तर पर अपनाई गई और आज भी इसका उपयोग होता है।
- रीमा ने प्राचीन मेसोपोटामिया के संख्यात्मक प्रतीकों को देखा।
- संख्याओं का विकास मानव जीवन की आवश्यकताओं से हुआ।
- भारतीय संख्या पद्धति में 0 का प्रयोग लगभग 2000 वर्ष पूर्व हुआ।
- आर्यभट्ट ने 10 प्रतीकों वाली पद्धति को स्पष्ट किया।
- भारतीय संख्या पद्धति अरब और यूरोप में फैल गई।
- संख्या पद्धति का विकास विभिन्न सभ्यताओं में हुआ।
- 📌 मेसोपोटामिया: प्राचीन सभ्यता जो वर्तमान ईराक क्षेत्र में थी।
- 📌 बख्शाली पांडुलिपि: प्राचीन भारतीय गणितीय दस्तावेज।
- 📌 संख्या पद्धति: संख्याओं को निरूपित करने का मानक अनुक्रम।
3.1 रीमा की जिज्ञासा
व्याख्या3.1 रीमा की जिज्ञासा
इस अनुभाग में रीमा की जिज्ञासा के माध्यम से संख्याओं के इतिहास और उनके प्रारंभिक रूपों की खोज की शुरुआत की गई है। रीमा एक पुरानी पुस्तक पढ़ते हुए एक पन्ना देखती है जिस पर अज्ञात प्रतीक बने होते हैं। उसके पिताजी उसे बताते हैं कि ये प्रतीक लगभग 4000 वर्ष पूर्व मेसोपोटामिया सभ्यता में उपयोग किए जाते थे, जो वर्तमान ईराक और आसपास के क्षेत्रों में थी। उस समय मनुष्य को गिनती, मापन, व्यापार, और समय के महत्वपूर्ण चक्रों को समझने के लिए संख्याओं की आवश्यकता हुई। प्रारंभ में वे आधुनिक संख्याओं का उपयोग नहीं करते थे, बल्कि चित्रों, निशानों और प्रतीकों के माध्यम से संख्या व्यक्त करते थे। भारत में भी हजारों वर्ष पूर्व संख्याओं के मौखिक और लिखित रूप विकसित हुए। यजुर्वेद संहिता में 10 की घातों के आधार पर संख्याओं के नामों का उल्लेख मिलता है, जैसे एक, दस, सौ, हजार आदि। भारतीय संख्या पद्धति में 0 का आविष्कार भी हुआ, जो गणित की प्रगति में क्रांतिकारी था। बख्शाली पांडुलिपि में शून्य का पहला ज्ञात उदाहरण मिलता है। आर्यभट्ट ने 499 सामान्य संवत् में इस पद्धति को वैज्ञानिक गणनाओं में उपयोग किया। भारतीय संख्या पद्धति अरब जगत और फिर यूरोप तक पहुँची। अरब गणितज्ञ अल-ख्वारिज्मी और अल-किंदी ने इसे लोकप्रिय बनाया। यूरोप में इसे 'अरबी संख्यांक' कहा गया, जबकि वास्तव में इसका मूल भारत था। इस पद्धति की सरलता और उपयोगिता ने इसे विश्वव्यापी बना दिया।
- रीमा ने मेसोपोटामिया के प्राचीन संख्यात्मक प्रतीकों को देखा।
- संख्या प्रणाली का विकास पाषाण युग से शुरू हुआ।
- भारतीय संख्या पद्धति में 0 का आविष्कार हुआ।
- बख्शाली पांडुलिपि में शून्य का पहला प्रमाण मिलता है।
- भारतीय संख्या पद्धति अरब और फिर यूरोप में पहुँची।
- 'अरबी संख्यांक' नामकरण में मूल भारत की भूमिका।
- 📌 मेसोपोटामिया: प्राचीन सभ्यता जो वर्तमान ईराक क्षेत्र में थी।
- 📌 बख्शाली पांडुलिपि: तीसरी शताब्दी की प्राचीन गणितीय पांडुलिपि जिसमें शून्य का उल्लेख है।
- 📌 अल-ख्वारिज्मी: अरब गणितज्ञ जिन्होंने भारतीय संख्या पद्धति को लोकप्रिय बनाया।
गणन की क्रियाविधि
व्याख्यागणन की क्रियाविधि
इस अनुभाग में प्राचीन काल में वस्तुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए अपनाई गई विभिन्न विधियों का वर्णन किया गया है। उदाहरण स्वरूप, पाषाण युग में गायों की संख्या जानने के लिए छड़ियों का उपयोग किया जाता था, जहाँ प्रत्येक गाय के लिए एक छड़ी रखी जाती थी। इस
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.यदि एक आयताकार बक्से की ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई क्रमशः 20 cm, 15 cm और 10 cm है। तब इसका सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल है:
उत्तर:
1300 cm 2
Q2.यदि एक बेलन की ऊँचाई मूल ऊँचाई की 1/4 हो जाती है और त्रिज्या दोगुनी हो जाती है, तो निम्नलिखित में से कौन सा सही होगा?
उत्तर:
उपरोक्त में से कोई नहीं
Q3.4 cm भुजा के एक घन को 1 cmभुजा के घनों में काट दिया जाता है। मूल घन और काटे गए घनों के सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात क्या है?
उत्तर:
1:4
Q4.एक समचतुर्भुज का क्षेत्रफल जिसके विकर्णों की लंबाई 10 सेमी और 8.2 सेमी है:
उत्तर:
41 cm 2
Q5.एक समलंब (ट्रेपीज़ियम) की परिधि 52 cm है और इसकी प्रत्येक गैर-समानांतर भुजा 10 cm तथा ऊंचाई 8 cm है। इसका क्षेत्रफल है:
उत्तर:
128 cm 2
Q6.∛1000 के बराबर है ।
उत्तर:
10
Q7.निम्नलिखित में से कौन सी संख्या एक पूर्ण घन नहीं है?
उत्तर:
547
Q8.64 का मुख्य गुणनखंड है:
उत्तर:
4 x 4 x 4
Ganita Prakash (Hindi) के सभी 7 अध्याय
Mathematics · Class 8