NCERTCh 3निःशुल्क

Chapter 3

🎓 Class 11📖 Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 14Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

अध्याय

व्याख्या

अध्याय

पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। पृथ्वी की प्रकृति के बारे में हमारे अनुमान पृथ्वी को एक ठोस गेंद मानने से लेकर एक खोखली गेंद मानने तक भिन्न हो सकते हैं। पृथ्वी की सतह पर ज्वालामुखी उद्गारों को देखकर हम समझ सकते हैं कि पृथ्वी के भीतर से गर्म लावा, गैसें, धुआँ, और अन्य पदार्थ सतह तक पहुँचते हैं। पृथ्वी के आंतरिक भाग को सीधे देखना या वहाँ पहुँच पाना संभव नहीं है, इसलिए वैज्ञानिक अप्रत्यक्ष प्रमाणों के आधार पर इसकी संरचना का अध्ययन करते हैं। पृथ्वी की सतह का विन्यास भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम है, जिसमें बहिर्जात और अंतर्जात दोनों प्रक्रियाएँ शामिल हैं। अंतर्जात प्रक्रियाओं के प्रभाव को समझना भूआकृति के अध्ययन के लिए आवश्यक है क्योंकि ये प्रक्रियाएँ भूकंप, ज्वालामुखी, और अन्य भूगर्भीय घटनाओं को जन्म देती हैं। इस अध्याय में हम पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूकंप, भूकंपीय तरंगों, ज्वालामुखी और उनसे बनने वाली स्थलाकृतियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन भूगोल का महत्वपूर्ण भाग है।
  • पृथ्वी के आंतरिक भाग तक पहुँच संभव नहीं, इसलिए अप्रत्यक्ष प्रमाणों का उपयोग होता है।
  • पृथ्वी की सतह का विन्यास अंतर्जात और बहिर्जात प्रक्रियाओं का परिणाम है।
  • भूगर्भीय प्रक्रियाओं का अध्ययन भूआकृति को समझने के लिए आवश्यक है।
  • ज्वालामुखी उद्गार पृथ्वी के भीतर की गतिविधियों का संकेत देते हैं।
  • 📌 पृथ्वी की आंतरिक संरचना: पृथ्वी के भीतर की विभिन्न परतें और उनकी विशेषताएँ।
  • 📌 ज्वालामुखी उद्गार: पृथ्वी के भीतर से लावा, गैस, और अन्य पदार्थों का सतह पर निकलना।
  • 📌 भूगर्भीय प्रक्रियाएँ: पृथ्वी के भीतर और सतह पर होने वाली प्रक्रियाएँ जो भूआकृति को प्रभावित करती हैं।

भूगर्भ की जानकारी के साधन

व्याख्या

भूगर्भ की जानकारी के साधन

पृथ्वी की त्रिज्या लगभग 6,378 कि0मी0 है, और इसकी आंतरिक परिस्थितियाँ इतनी कठिन हैं कि कोई भी मानव या यंत्र पृथ्वी के केंद्र तक पहुँचकर निरीक्षण नहीं कर सकता। फिर भी वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की है। यह जानकारी मुख्यतः अप्रत्यक्ष स्रोतों से प्राप्त होती है, हालांकि कुछ प्रत्यक्ष स्रोत भी उपलब्ध हैं। प्रत्यक्ष स्रोतों में धरातलीय चट्टानें और खनन क्षेत्रों से प्राप्त नमूने शामिल हैं। उदाहरण के लिए, दक्षिणी अफ्रीका की सोने की खानें लगभग 3-4 कि0मी0 गहरी हैं। समुद्र के गहरे भागों में प्रवेधन परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनमें सबसे गहरी खुदाई आर्कटिक महासागर के कोला क्षेत्र में 12 कि0मी0 तक की गई है। इससे प्राप्त चट्टानों के विश्लेषण से पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में जानकारी मिलती है। ज्वालामुखी उद्गार भी प्रत्यक्ष स्रोत हैं क्योंकि इससे निकले मैग्मा का अध्ययन किया जा सकता है। हालांकि यह पता लगाना कठिन होता है कि मैग्मा कितनी गहराई से आया है। अप्रत्यक्ष स्रोतों में भूकंपीय तरंगों का अध्ययन, गुरुत्वाकर्षण बल, चुंबकीय क्षेत्र, और उल्काओं का विश्लेषण शामिल है। भूकंपीय तरंगों के अध्ययन से पृथ्वी की परतों की मोटाई, घनत्व, और भौतिक अवस्था का पता चलता है। गुरुत्व विसंगति से पदार्थ के द्रव्यमान वितरण का ज्ञान होता है। चुंबकीय सर्वेक्षण से चुंबकीय पदार्थों का वितरण ज्ञात होता है। उल्काओं का अध्ययन पृथ्वी के समान पदार्थों के बारे में जानकारी देता है। इस प्रकार, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के स्रोतों से पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझा जाता है।

  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन मुख्यतः अप्रत्यक्ष स्रोतों से होता है।
  • प्रत्यक्ष स्रोतों में खनन, गहरे समुद्र में प्रवेधन परियोजनाएँ, और ज्वालामुखी उद्गार शामिल हैं।
  • अप्रत्यक्ष स्रोतों में भूकंपीय तरंगें, गुरुत्वाकर्षण बल, चुंबकीय क्षेत्र, और उल्काएँ शामिल हैं।
  • खनन से पता चलता है कि गहराई बढ़ने पर तापमान, दबाव, और घनत्व बढ़ते हैं।
  • भूकंपीय तरंगों के अध्ययन से पृथ्वी की परतों की मोटाई और संघटन का पता चलता है।
  • 📌 प्रत्यक्ष स्रोत: वे स्रोत जिनसे सीधे पृथ्वी के पदार्थ प्राप्त होते हैं।
  • 📌 अप्रत्यक्ष स्रोत: वे स्रोत जिनसे पृथ्वी के भीतर की जानकारी अनुमानित की जाती है।
  • 📌 गुरुत्व विसंगति: पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल में स्थान-स्थान पर होने वाली भिन्नता।

भूकंप

व्याख्या

भूकंप

भूकंप का अर्थ है पृथ्वी का कंपन, जो प्राकृतिक घटना है। यह तब होता है जब पृथ्वी के भीतर ऊर्जा अचानक मुक्त होती है और कंपन की तरंगें उत्पन्न होती हैं। पृथ्वी की भूपर्पटी में भ्रंश (Fault) होते हैं, जो दरारें होती हैं जहाँ चट्टानें एक दूसरे के सापेक्ष ह

अभ्यास प्रश्नChapter 3

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.यदि मैग्मा का बड़ा पिंड भूपर्पटी में अधिक गहराई पर ठंडा हो जाये तो यह एक गुम्बद के आकर में विकसित हो जाता हैं, इन स्थालाकृति को ........... कहते है|
A.बैथोलिथ
B.लैकोलिथ
C.लैपोलिथ
D.सिल

उत्तर:

बैथोलिथ

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Q2.महासागरों के नीचे भूपर्पटी की औसत मोटाई कितनी है?
A.3 किलोमीटर
B.5 किलोमीटर
C.12 किलोमीटर
D.15 किलोमीटर

उत्तर:

5 किलोमीटर

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Q3.निम्नलिखित में से वह ज्वालामुखी स्थल रूप को पहचानो जो सबसे बड़े व ऊंचे शंकुओं में गिने जाते हैं|
A.लावा
B.शील्ड
C.मिश्रित
D.काल्डेरा

उत्तर:

मिश्रित

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Q4.वह भूकम्प जो भ्रंस तल के किनारे चट्टानों के सरक जाने के कारण उत्पन्न होते है । उचित विकल्प चुने ।
A.विस्फोट भूकम्प
B.विवर्तनिक भूकम्प
C.नियात भूकम्प
D.ज्वालामुखी भूकम्प

उत्तर:

विवर्तनिक भूकम्प

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Q5.क्रोड का निर्माण किन धातुओं से हुआ है?
A.सिलिकन और मैग्नेशियम
B.ग्रेनाईट और फ़ास्फ़रोस
C.सिलिकन और अल्लुमिनियम
D.निकिल और लोहा

उत्तर:

निकिल और लोहा

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Q6.मैंटल के उपरी भाग को क्या कहा जाता है?
A.ज्वलखण्डाशिम
B.दुर्बलतामंडल
C.स्थलमंडल
D.सिंडर शंकु

उत्तर:

दुर्बलतामंडल

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Q7.भूकंपलेखी भूकंप अधिकेंद्र से ...................... के भीतर किसी भी दूरी पर ‘P’ व ‘S’ दोनों ही तरंगों का अभिलेखन करते हैं|
A.45°
B.90°
C.105°
D.145°

उत्तर:

105°

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Q8.निम्नलिखित में से तीव्र गति से चलने वाली भूकंपीय तरंगों का नाम बताए, जो धरातल पर सबसे पहले पहुँचती हैं?
A.प्राथमिक तरंगें
B.द्वितीयक तरंगें
C.‘S’ तरंगें
D.रैले तरंगें

उत्तर:

प्राथमिक तरंगें

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