Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
राजस्थान की रजत बूँदें
व्याख्याराजस्थान की रजत बूँदें
यह अध्याय राजस्थान की जल समस्या और वहाँ के पारंपरिक जल संचयन के तरीकों पर केंद्रित है। राजस्थान, जो भारत के पश्चिमी भाग में स्थित है, अपनी शुष्क जलवायु और सीमित वर्षा के कारण जल संकट से जूझता रहा है। यहाँ वर्षा कम होती है और भूजल स्तर भी तेजी से गिर रहा है। इस कठिन परिस्थिति में राजस्थान के लोगों ने सदियों से जल संरक्षण के लिए अनोखे और कुशल उपाय विकसित किए हैं। इस अध्याय में कुंई की खुदाई की प्रक्रिया, उसमें लगे चेलवांजी (विशेष कुंई खुदाई करने वाले लोग), और कुंई के निर्माण की तकनीक का विस्तार से वर्णन है। कुंई का व्यास संकरा और गहराई बहुत अधिक होती है, जो इस क्षेत्र की जल संरचना के अनुरूप है। कुंई वर्षा जल को रेत के भीतर जमा करती है, जो भूजल से अलग होता है। इस जल को पाने के लिए कुंई की खुदाई में सावधानी और कुशलता की आवश्यकता होती है। कुंई की खुदाई के दौरान गरमी और संकरी जगह की चुनौतियाँ होती हैं, जिनका समाधान पारंपरिक उपकरणों और तकनीकों से किया जाता है। इस प्रकार राजस्थान की जल समस्या को समझने और उसे हल करने के लिए कुंई की महत्ता को इस अध्याय में प्रमुखता से बताया गया है।
- राजस्थान की जल समस्या मुख्यतः कम वर्षा और शुष्क जलवायु के कारण है।
- कुंई एक संकरी और गहरी संरचना होती है, जो वर्षा जल को जमा करती है।
- कुंई की खुदाई चेलवांजी नामक विशेषज्ञ लोग करते हैं।
- कुंई का जल भूजल से अलग होता है और इसे रेत के भीतर जमा किया जाता है।
- कुंई की खुदाई में पारंपरिक औजार जैसे बसौली का उपयोग होता है।
- कुंई की सुरक्षा के लिए उसे ढकना आवश्यक होता है।
- 📌 कुंई: संकरी और गहरी संरचना जो वर्षा जल को जमा करती है।
- 📌 चेलवांजी: कुंई की खुदाई और चिनाई करने वाले विशेषज्ञ।
- 📌 बसौली: छोटा फावड़ा जैसा औजार जो कुंई खुदाई में उपयोग होता है।
राजस्थान की जल संरचना और कुंई का महत्व
व्याख्याराजस्थान की जल संरचना और कुंई का महत्व
राजस्थान की मरुभूमि में रेत की सतह के नीचे खड़िया पत्थर की एक पट्टी होती है, जो पानी के प्रवाह को रोकती है। इस पट्टी के कारण वर्षा का जल भूजल से अलग होकर रेत में नमी के रूप में जमा रहता है। इस जल को कुंई के माध्यम से निकाला जाता है। कुंई भूजल से सीधे जुड़ी नहीं होती, बल्कि यह रेत में जमा वर्षा जल को बूँद-बूँद करके इकट्ठा करती है। मरुभूमि की रेत के कण बहुत बारीक और अलगाव वाले होते हैं, जो पानी को धरती में समा कर रखते हैं और दरारें नहीं पड़ने देते। इस प्रकार कुंई एक अनोखी जल संचयन प्रणाली है जो खारे पानी के बीच मीठा पानी उपलब्ध कराती है। कुंई के जल को तीन रूपों में बाँटा गया है: पालरपानी (सतही जल), पातालपानी (भूजल), और रेजाणीपानी (रेत में जमा वर्षा जल)। कुंई से निकाला जाने वाला जल रेजाणीपानी कहलाता है, जो खड़िया पट्टी के कारण भूजल से अलग रहता है। इस जल संरचना को समझना राजस्थान के जल संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- खड़िया पत्थर की पट्टी वर्षा जल को भूजल से अलग करती है।
- रेत के कण पानी को धरती में समा कर रखते हैं और दरारें नहीं पड़ने देते।
- कुंई में जमा जल रेत में समाई नमी से आता है।
- जल के तीन रूप हैं: पालरपानी, पातालपानी, और रेजाणीपानी।
- रेजाणीपानी भूजल से अलग मीठा पानी होता है।
- कुंई की गहराई और व्यास जल संरचना के अनुसार निर्धारित होते हैं।
- 📌 खड़िया पट्टी: पत्थर की एक पट्टी जो रेत के नीचे जल के प्रवाह को रोकती है।
- 📌 पालरपानी: सतह पर बहने वाला वर्षा जल।
- 📌 पातालपानी: भूजल जो कुओं में पाया जाता है।
कुंई निर्माण की तकनीक और चेजारों का कार्य
व्याख्याकुंई निर्माण की तकनीक और चेजारों का कार्य
राजस्थान में कुंई निर्माण एक विशिष्ट कला है, जिसमें चेजारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। चेजारो वे कुशल लोग होते हैं जो कुंई की खुदाई और चिनाई का कार्य करते हैं। कुंई का व्यास लगभग चार-पाँच हाथ होता है, जबकि गहराई तीस से सत्तावन हाथ तक हो सकत
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.लेखक भावुक है जबकि लेखक का मित्र....
उत्तर:
तर्कशील
Q2.‘नये की जन्म कुंडली’ रचना लेखक की किस बड़ी रचना का अंश है?
उत्तर:
एक साहित्यिक की डायरी
Q3.‘नये की जन्म कुंडली’ पाठ किस विधा की रचना है?
उत्तर:
निबन्ध
Q4.लेखक के मित्र के अनुसार राजनीति और साहित्य के पास किस तरह के कार्यक्रमों का अभाव है?
उत्तर:
समाज-सुधार
Q5.‘नये की जन्म कुंडली’ के अनुसार धर्म भावना चली गई किन्तु उसके स्थान पर .....
उत्तर:
वैज्ञानिक बुद्धि नहीं आई
Q6.लेखक के अनुसार किसी देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
उत्तर:
चारित्रिक पतन
Q7.एकल परिवार बन जाने के कारण सबसे अधिक नुकसान किस का हुआ है?
उत्तर:
सांस्कृतिक विरासत का
Q8.1. राजस्थान में कुंई किसे कहते हैं? इसकी गहराई और व्यास तथा सामान्य कुओं की गहराई और व्यास में क्या अंतर होता है?
उत्तर:
राजस्थान में कुंई को उस जलाशय या जलस्रोत के रूप में जाना जाता है जो जमीन के भीतर गहरा और संकरा होता है, जिससे पानी निकाला जाता है। राजस्थान के कुंए सामान्य कुओं की तुलना में अधिक गहरे और संकरे होते हैं। सामान्य कुएं की गहराई और व्यास कम होते हैं, जबकि राजस्थान के कुंए अधिक गहरे और व्यास में भी भिन्न होते हैं। इस प्रकार, राजस्थान के कुंए पानी की कमी वाले क्षेत्र में जल संरक्षण और उपलब्धता के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
व्याख्या:
राजस्थान की जलवायु शुष्क और अर्धशुष्क है, इसलिए पानी की उपलब्धता कम होती है। इसलिए वहां के कुंए गहरे खोदे जाते हैं ताकि भूमिगत जल तक पहुंचा जा सके। सामान्य कुएं अपेक्षाकृत कम गहरे और चौड़े होते हैं, जो अधिकतर वर्षा जल या सतही जल स्रोतों पर निर्भर करते हैं। राजस्थान के कुंए गहरे और संकरे होते हैं ताकि वे भूमिगत जल स्रोतों से पानी निकाल सकें।
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