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पद

🎓 Class 10📖 Sparsh📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 14Chapter 3

पदअध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

पद - परिचय

परिभाषा

पद - परिचय

पद कविता का वह सबसे छोटा भाग होता है जिसमें अर्थ और भाव की पूर्णता निहित होती है। इसे कविता की इकाई भी कहा जाता है क्योंकि पद में ही कविता की आत्मा समाहित होती है। पद के बिना कविता अधूरी होती है। पद न केवल शब्दों का समूह होता है, बल्कि वह भावों और विचारों का संप्रेषण भी करता है। प्रत्येक पद में एक निश्चित अर्थ होता है जो पाठक के मन में भावों की एक छवि उत्पन्न करता है। पद कविता की संरचना का मूल आधार है और इसके माध्यम से कवि अपनी भावनाओं को संप्रेषित करता है। इस प्रकार पद कविता की आत्मा और उसकी अभिव्यक्ति का केंद्र होता है।

  • पद कविता का सबसे छोटा और पूर्ण भाग होता है।
  • पद में अर्थ और भाव की पूर्णता होती है।
  • पद कविता की इकाई के रूप में कार्य करता है।
  • पद के बिना कविता अधूरी मानी जाती है।
  • पद में भावों और विचारों का संप्रेषण होता है।
  • 📌 पद: कविता का वह छोटा भाग जिसमें पूर्ण अर्थ और भाव होता है।
  • 📌 कविता की इकाई: कविता का मूल भाग जिसे पद कहा जाता है।

पद की विशेषताएँ

अवधारणा

पद की विशेषताएँ

पद की कुछ विशेषताएँ होती हैं जो इसे कविता के अन्य भागों से अलग करती हैं। सबसे पहली विशेषता यह है कि पद में पूर्णता होती है, अर्थात् पद स्वयं में एक पूर्ण विचार या भाव व्यक्त करता है। दूसरा, पद संक्षिप्त होता है लेकिन उसमें गहराई और अर्थ की व्यापकता होती है। तीसरी विशेषता यह है कि पद की भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली होती है जिससे भाव सहजता से समझ में आ जाता है। चौथी, पद में लय और छंद की व्यवस्था होती है जो उसे संगीतात्मक बनाती है। इसके अतिरिक्त, पद में प्रयुक्त शब्दों का चयन सावधानीपूर्वक किया जाता है ताकि वे भावों को सटीक रूप से व्यक्त कर सकें। इन विशेषताओं के कारण पद कविता की आत्मा कहलाता है और इसके बिना कविता की अभिव्यक्ति अधूरी रहती है।

  • पद में पूर्णता होती है, अर्थात् पूर्ण विचार या भाव।
  • पद संक्षिप्त होते हुए भी अर्थपूर्ण होते हैं।
  • पद की भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली होती है।
  • पद में लय और छंद की व्यवस्था होती है।
  • शब्दों का चयन पद के भावों के अनुसार किया जाता है।
  • 📌 पूर्णता: पद में एक संपूर्ण भाव या विचार होना।
  • 📌 लय: पद में शब्दों की ताल और छंद की व्यवस्था।

पद के प्रकार

अवधारणा

पद के प्रकार

पद के विभिन्न प्रकार होते हैं जो छंद, लय और भाव के आधार पर वर्गीकृत किए जाते हैं। मुख्य रूप से पदों को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है - छंदबद्ध पद और मुक्त पद। छंदबद्ध पद वे होते हैं जिनमें निश्चित मात्रा, लय और तुकांत होती है। ये पद पारंपरिक छंदों

अभ्यास प्रश्नपद

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए- 1. पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है? 2. दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए। 3. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है? 4. मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए। 5. वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?

उत्तर:

1. पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती बहुत ही श्रद्धापूर्वक और भक्ति भाव से की है। उन्होंने हरि से कहा है कि वे अपनी कृपा दृष्टि से उनकी भीड़ (पीड़ा) को दूर करें। यह विनती प्रेम और विश्वास से भरी हुई है। 2. दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी इसलिए करना चाहती हैं क्योंकि वे अपने प्रभु श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पित हैं। वे उनकी सेवा में अपना जीवन व्यतीत करना चाहती हैं और उनकी भक्ति में लीन रहना चाहती हैं। 3. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन बहुत ही मनमोहक और भावपूर्ण तरीके से किया है। उन्होंने उनके रूप को नरहरि (नर और हरि का मेल) कहा है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। 4. मीराबाई की भाषा शैली सरल, भावपूर्ण और भक्तिमय है। वह स्थानीय बोली का प्रयोग करती हैं जिससे पदों में सहजता और प्रभावशीलता आती है। उनकी भाषा में भक्ति रस की प्रधानता है। 5. वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए चाकरी करने, सुमरण करने, और भाव-भक्ति जागीर रखने को तैयार हैं। वे अपने जीवन की सारी इच्छाएं त्यागकर केवल श्रीकृष्ण की सेवा और स्मरण में लीन रहना चाहती हैं।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पदों के भाव और भाषा शैली के आधार पर विस्तार से दिया गया है। पहले प्रश्न में विनती के स्वरूप को समझाया गया है। दूसरे में भक्ति के कारण को स्पष्ट किया गया है। तीसरे में रूप-सौंदर्य का वर्णन किया गया है। चौथे में भाषा शैली की विशेषताओं को बताया गया है। पांचवें में भक्ति के लिए किए जाने वाले कार्यों का उल्लेख किया गया है।

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Q2.(ख) निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए- 1. हरि आप हरो जन री भीर। द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर। भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर। 2. बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर। दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर। 3. चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

उत्तर:

1. पहली पंक्ति में श्रीकृष्ण को हरि कहा गया है जो भक्तों की भीड़ (पीड़ा) को हरने वाले हैं। द्रोपदी की लाज रखने का उल्लेख महाभारत की कथा से लिया गया है, जहाँ श्रीकृष्ण ने द्रोपदी का चीरहरण होने से बचाया था। यह पंक्ति भक्तिभाव और श्रीकृष्ण की महिमा को दर्शाती है। 2. दूसरी पंक्ति में बूढ़े हाथी (गजराज) की रक्षा करने और हाथी के कष्ट (पीर) को काटने का उल्लेख है, जो श्रीकृष्ण की दयालुता और शक्ति को दर्शाता है। मीराबाई को दासी कहा गया है जो लाल गिरधर (श्रीकृष्ण) की है। यह पंक्ति भक्त और भगवान के बीच प्रेम को दर्शाती है। 3. तीसरी पंक्ति में चाकरी (सेवा), दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति को तीन महत्वपूर्ण बातें बताया गया है जो भक्त के जीवन में आवश्यक हैं। ये तीनों बातें सरस (मधुर) हैं और भक्ति के मार्ग को स्पष्ट करती हैं।

व्याख्या:

प्रत्येक पंक्ति के काव्य-सौंदर्य को उसके भाव, संदर्भ और प्रतीकों के माध्यम से समझाया गया है। पहली पंक्ति में श्रीकृष्ण की महिमा, दूसरी में उनकी दयालुता और तीसरी में भक्ति के आवश्यक तत्वों का वर्णन है।

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Q3.भाषा अध्ययन 1. उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए— उदाहरण—भीर — पीड़ा / कष्ट / दुख; री — की चीर — ———— बूढ़ता ———— धर्यो — ———— लगास्यूँ ———— कुण्जर — ———— घणा ———— बिन्दरावन — ———— सरसी ———— रहस्यूँ — ———— हिवड़ा ———— राखो — ———— कुसुम्बी ————

उत्तर:

चीर — वस्त्र / कपड़ा बूढ़ता — वृद्धावस्था धर्यो — लिया / धरा लगास्यूँ — लगाने / जोड़ने कुण्जर — हाथी घणा — बहुत / अधिक बिन्दरावन — बिंदरावन (स्थान का नाम) सरसी — मधुर / स्वादिष्ट रहस्यूँ — रहस्य हिवड़ा — हृदय / दिल राखो — रखो / सुरक्षित करो कुसुम्बी — कुसुम्बी (एक प्रकार का फूल)

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द का प्रचलित रूप उसके अर्थ के अनुसार दिया गया है। उदाहरण के रूप में भीर का अर्थ पीड़ा/कष्ट/दुख बताया गया है। इसी प्रकार अन्य शब्दों के सामान्य और प्रचलित अर्थ लिखे गए हैं।

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Q4.परियोजना 1. मीरा के पदों का संकलन करके उन पदों को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए। 2. पहले हमारे यहाँ दस अवतार माने जाते थे। विष्णु के अवतार राम और कृष्ण प्रमुख हैं। अन्य अवतारों के बारे में जानकारी प्राप्त करके एक चार्ट बनाइए।

उत्तर:

1. मीरा के पदों का संकलन करके उन्हें सुंदर और स्पष्ट रूप में चार्ट पर लिखें। इस चार्ट को कक्षा की भित्ति पत्रिका पर लगाएं ताकि सभी विद्यार्थी उनकी भक्ति और पदों की सुंदरता को देख सकें। 2. विष्णु के दस अवतारों की जानकारी एकत्रित करें, जिसमें राम और कृष्ण प्रमुख हैं। अन्य अवतारों जैसे मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण और कल्कि के बारे में जानकारी लेकर एक चार्ट बनाएं और उसमें प्रत्येक अवतार का नाम, रूप और कथा लिखें।

व्याख्या:

प्रोजेक्ट कार्य में विद्यार्थियों को पदों का संकलन और अवतारों की जानकारी एकत्रित करने के लिए कहा गया है। यह कार्य उनके ज्ञान और प्रस्तुति कौशल को बढ़ाने में सहायक होगा।

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Q5.पद कविता का सबसे छोटा भाग होता है जिसमें क्या निहित होता है?
A.A) केवल शब्दों का समूह
B.B) अर्थ और भाव की पूर्णता
C.C) केवल छंद और लय
D.D) केवल कवि के नाम

उत्तर:

अर्थ और भाव की पूर्णता

व्याख्या:

पद कविता का वह सबसे छोटा भाग होता है जिसमें अर्थ और भाव की पूर्णता निहित होती है। यह कविता की इकाई भी कहलाता है क्योंकि इसमें कविता की आत्मा समाहित होती है।

Easy
Q6.पद की कौन सी विशेषता इसे कविता के अन्य भागों से अलग करती है?
A.A) पद में पूर्णता होती है
B.B) पद में केवल शब्दों का समूह होता है
C.C) पद की भाषा जटिल होती है
D.D) पद में कोई लय नहीं होती

उत्तर:

पद में पूर्णता होती है

व्याख्या:

पद में पूर्णता होती है अर्थात् पद स्वयं में एक पूर्ण विचार या भाव व्यक्त करता है। यह पद की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है जो इसे कविता के अन्य भागों से अलग करती है।

Easy
Q7.पद की भाषा की विशेषता क्या होती है?
A.A) जटिल और अस्पष्ट
B.B) सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली
C.C) केवल संस्कृत शब्दों की होती है
D.D) केवल क्षेत्रीय भाषा में होती है

उत्तर:

सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली

व्याख्या:

पद की भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली होती है जिससे भाव सहजता से समझ में आ जाता है। यह पद की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

Easy
Q8.पदों के प्रकारों में से कौन सा पद स्वतंत्र रूप से भावों को अभिव्यक्त करता है?
A.A) छंदबद्ध पद
B.B) मुक्त पद
C.C) भक्ति पद
D.D) वीर रस के पद

उत्तर:

मुक्त पद

व्याख्या:

मुक्त पदों में छंदबद्धता का बंधन नहीं होता, वे स्वतंत्र रूप से भावों को अभिव्यक्त करते हैं।

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