Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
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दिल्ली सल्तनत का उदय
व्याख्यादिल्ली सल्तनत का उदय
12वीं शताब्दी के अंत में भारत के राजनीतिक मानचित्र में एक नया युग आरंभ हुआ जब दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई। यह सल्तनत 1192 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद स्थापित हुई। तुर्की-आफगान सेनाओं ने उत्तर भारत में अपनी सत्ता स्थापित की और इस प्रकार दिल्ली सल्तनत का उदय हुआ। दिल्ली सल्तनत ने भारतीय उपमहाद्वीप के राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया। इस सल्तनत के पाँच प्रमुख राजवंश थे: ममलकु (गलुाम वंश), खिलजी, तुगलक, सय्यद और लोदी। इन राजवंशों ने उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों पर शासन किया। दिल्ली सल्तनत ने सैन्य, प्रशासनिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए। सल्तनत के दौरान इस्लामी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा और कई मस्जिद, किले और अन्य स्थापत्य कला के नमूने बने। इस काल में व्यापार और कृषि भी विकसित हुए। हालांकि, राजनीतिक अस्थिरता और बाहरी आक्रमणों के कारण सल्तनत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अंततः 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को पराजित कर दिल्ली सल्तनत का अंत किया और मुगल साम्राज्य की स्थापना की। **Table on page 1 (3×4)** | | | | | | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | चि | त्र 2.1 — दिल््लली के कुतबु मीनार परिसर का हवाई दृश््य | | | | महतव् परू ्ण प्रश्न | 1. इस कालखंड में विदशे ी आक्रमणोों एवं नए राजवंशोों के उदय ने भारत की राजनैतिक सीमाओ ंको किस प्रकार नया आकार दिया? 2. भाारतीीय समााज ने वि�देशीी आक्रमणोंं काा साामन कि�स प्रकाार कि�याा? रााजनैति�क अस्थिÖिरताा केे वााताावरण में भाारतीीय अर्थव्यवस्थाा ने कि�स प्रकाार साामंजस्य स्थाापिYत कि�याा? 3. इस कालखंड ने लोगोों के जीवन पर क््यया प्रभा | ाा व | **Table on page 8 (5×5)** | | | | | | | --- | --- | --- | --- | --- | | कााफिर� वह व््कय ््तति जो (कि सी दि ए गए पंथ के) विश्व् वास को साझा नहीीं करता। मध््ययगु ीन ईसाई पंथ में, काफि र मसु लमान या 1 प्रति माप जू क भाग ा होते थे। 8, ाष् का मध््ययगु ीन क | े ग इस््ललाम में, आ काफि र ईसाई ेे क उस होते थे या भारत और के संदर््भ, में भारत ा हि दं ,ू बौद्ध या : धययन जैन होते थे। ् अ ा का | | आइए विचार करें | | | | | हम पत्र ि मा (इमजे ) शब्् दक ा प्रयोग क््योों करते ह,ैं जबकि सामान््यत: ‘मरू ््तति’ या ‘चि ह्न’ जैसे शब््द प्रचलि त हैं? वास््तव में, ये दोनोों शब््द— ‘मरू ््तति’ या ‘चि ह्न’ यहूदी, ईसाई एवं इस््ललाम जैसे पंथोों-मजहबोो ं के संदर््भ में नि ंदनीय ह ैक््योोंकि इन पंथोों की रूढ़िवादी शाखाए ँमरू ््ततिज पू ा या चि ह्ननों की पजू ा की िनंदा करती हैं। | | | | | | | | | | | | भारतीय शा्स ्त्रयी गं्र ोथो ं म ें ‘मरू्् ’तति , ‘वगि ्हर ’, ‘पत्र ि मा’, ‘रपू ’ जसै े शब्् ोदो ं का उपय ोग पा्र य : मदंरि ोो ंय ा घरोो ंम ेंहोन ेवाली पजू ाम े ंपय्र कु ् तम रू्् तत ोियो ंके लि ए कयि ा जाताथ ा। | | | | | | कुछ सुल््ततानोों ने ‘जजिया ’ कर भी लगाया , जो गैर-मसु ््ललिम प्रजा प र सुरक्षा प्रदा करने और सैन््य सेवा से छूट देने के बदले वसूला जाता था । व््ययावहारिक रूप मे शासक पर निर्भर करते हुए, यह भेदभावपूर््ण कर आर््थिक बोझ एवं सार्वजनि क अपमा का कारण बनता था । इसने प्रजा को इस््ललाम पंथ अपनाने के लि ए एक आर््थिक ए सामाजि क प्रोत््ससाहन भी प्रदान किया । 14वीीं सदी के अंत में तैमरू , जो कि मध््य एशिया का एक कू्रर तुर््क-मंगोल आक््रांता था , ने उत्तर-पश््चचिम भारत पर आक्रमण किया औ दि ल््लली पर घातक प्रहार किया । उस समय दिल््लली एक सम्ृद ध नगरी थी। जैसा कि उस अपने आत््म-संस््मरण मे ें लि खा ह,ै उसके दो उद्दशे ्य थ े— काफिरोों के साथ य ुद्ध करन एवं उनकी धन-संपत्ति को लूटकर कुछ प्राप्त करना। बड़ी संख््यया में लोगोों की हत्् की गई या उन््हें गलु ाम बना लिया गया और नगरोों को खंडहर में बदल दिया गया तैमरू अपा र लूट के साथ भारत से लौटा, पीछे केवल अराजकता रह गई। इसके उपरां लोदी वंश उभरा एवं दि ल््लली सल््तनत के अंति म राजवंश की स््थथापना हुई। यद्यपि त तक भारत के भीतर अन््य राज््योों एवं राजवंशोों के बढ़ते प्रति रोध के कारण सल््तनत क क्षेत्रफल अत््यंत सि कुड़ चकु ा था । | | | | **Table on page 9 (5×5)** | | | | | | | --- | --- | --- | --- | --- | | अधीन करन े म ें वि फलता हा थ लगी, जि सम ेंवरम््त ान ओडि शा, आधं ्रपद्र शे आरै प्श ् िचच म बगं ाल के कुछ भाग सम्् मम ििल त थ।े 13वीी ंशताब्् ददकी े मध्् य म ेंइस राज्् यके एक शासक नरसि हं दवे पथ्र म, जि न् हें नरसि हं दवे ा पथ्र म भी उच्् चरचा ित कयि ा जाता ह,ै को उनकी सनै ्् य शक्् त ति एव ं सासं ्् कृतक ि क वभै व के लि ए जाना जाता ह,ै जो उन्् ोहो नं े अपने राज्् य को पद्र ान कि ए। सल्् नत त के कई आकम्र णोो ं को वि फल करन े के अति रिक् ,त उन्् ोहो नं े बगं ाल म ें सल्् नत त दव् रा ान िय कु ् त पश्र ासक को भी परािज त कयि ा । वि जयोो ं की स्् ृममित म ें उन्् ोहो नं े कोण्ार क् (वरम््त ान ओडि शा) चित्र 2.8 — एक मरू्तति जिसमें नरसिंहदवे प्रथम को अपने सिंहा म ें पस्र दि ्ध सरू य् मदं ि र कान ि्र ्मणाम संगीतकारोों से घिरे हुए दिखाया गया ह।ै करवााय । आइए विचार करें तगु लक काल म,ें तेलगु ु मखु िया ओ,ं मसु नु रु ी नायको ों ने क्षेत्र के 75 स े अधि क अन््य मखु िया ओ ंको संगठि त कर एक संघ बनाया । इस संघ ने छोटे राज््योों एवं दि ल््लली सल््तनत की सेनाओ ं को पराजि त किया तथा 1330–1336 के आस-पा स वारंगल (वर््तमान तेलंगाना) से महु म्् मद बि न तगु लक की सेना को खदड़े दिया । क््यया आपको लगता ह ैकि उस | | | | | | | | अपने सिंहा गया ह।ै | | | | | | | | सन | | | तगु लक काल म,ें तेलगु ु मखु िया ओ,ं मसु नु रु ी नायको ों ने क्षेत्र के 75 स े अधि क अन््य मखु िया ओ ंको संगठि त कर एक संघ बनाया । इस संघ ने छोटे राज््योों एवं दि ल््लली सल््तनत की सेनाओ ं को पराजि त किया तथा 1330–1336 के आस-पा स वारंगल (वर््तमान तेलंगाना) से महु म्् मद बि न तगु लक की सेना को खदड़े दिया । क््यया आपको लगता ह ैकि उस | | | | | | समय 75 मखु िया ओ ंको एकजटु करना सरल कार्य् रहा होगा? | | | | **Table on page 13 (34×21)** | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | | | | बीीदर | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | बीीजाापुर (बि�जयपुर) | | | | | | | | गोो | लकुंं�डाा | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | वि�जयनगर | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | (हंपी) | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | काालीीकट (कोोझिLकोोड) | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | सं | केेत | ि | � | **Table on page 13 (4×2)** | | | | --- | --- | | | | | | | | | | | | | **Table on page 17 (2×3)** | बाबर और भारत बाबर ने अपनी आत््मकथा बाबरनामा लि खी, जो ऐति हासि क दृष्टि से अत््तयं महत्वपरू ्् ण ह वह स््वंय को संस््ककारी, बौद्धकि एवं जि ज्ञसा ु व् यक्ति के रूप मे ं प्रस्् तततु करता ह,ै जि स े वास् कवि ता, पशओु ं(वि शेषकर पक्षियोों, जि नमें से कई को उसने कुछ वि वरणोों में सचू ीबद्ध किय तथा वनस््पति (वि शषे कर फलदार व्ृक षषों) की गहरी समझ थी। कि ंत ु वह एक निर्दीय वि जेता कई नगरोों के नि वासियो ो ं की हत््यया, महि लाओ ंतथा बच््चोों को दास बनाना तथा लटू े गए नगरोो नि वासियो ों के मतृ शरीरोों से ‘खोपड़़िय ोों की मीनारे’ं बनवाना, इसमें उसे गर््व का अनभु व हा बाबर मध््य एशिया से अति शय जड़ु ाव रखताथ ा और भारत को ‘अल््प आकर्् षणोों का दशे हुए भी लि खता ह ै कि “हि दं सु ्् नतता वि शाल दशे ह ै एवं इसमें सोना-चाँदी बहुताय त म ें ह.ै .. व के समयय हाँ की हवा अत््तयं शदु ्ध एवं स््वसवा ््थ््यप्रद ह.ै .. हि दं सु ्् ततान में हर प्रकार के शि ल्् पक कारीगर अनगि नत संख््यया म ें उपलब््ध ।हैं ” शाय द भारत की सम्ृद धि तथा संसाधनोों को दखे क मध््य एशिया वाप स जाने के स््थथ ान पर यहीी ं अपनी सत्ता बनाए रखने का निर््णयल िया । | | ।ै इसमें ्कततु ला, ा ह)ै भी था । | | --- | --- | --- | | | कई नगरोों के नि वासियो ो ं की हत््यया, महि लाओ ंतथा बच््चोों को दास बनाना तथा लटू े गए नगरोो नि वासियो ों के मतृ शरीरोों से ‘खोपड़़िय ोों की मीनारे’ं बनवाना, इसमें उसे गर््व का अनभु व हा बाबर मध््य एशिया से अति शय जड़ु ाव रखताथ ा और भारत को ‘अल््प आकर्् षणोों का दशे हुए भी लि खता ह ै कि “हि दं सु ्् नतता वि शाल दशे ह ै एवं इसमें सोना-चाँदी बहुताय त म ें ह.ै .. व के समयय हाँ की हवा अत््तयं शदु ्ध एवं स््वसवा ््थ््यप्रद ह.ै .. हि दं सु ्् ततान में हर प्रकार के शि ल्् पक कारीगर अनगि नत संख््यया म ें उपलब््ध ।हैं ” शाय द भारत की सम्ृद धि तथा संसाधनोों को दखे क मध््य एशिया वाप स जाने के स््थथ ान पर यहीी ं अपनी सत्ता बनाए रखने का निर््णयल िया । | ं के हतं ेता था । ’ मानते र्षष् ा ऋत ु ार तथा र उसने | | | आइए विचार करें भारत के वि षयम े ंबाबर के वि चाोर ो ंम ेंआप क्् यय ावि शषे पात ेह?ैं समहू ोो ंम ेंचर्चच्का र।ें 1530 में बाबर की म्ृत ्ुय के पश््चचता उसके पतु ्र हुमायू ँ को साम्राज््य बनाए रखने म ें संघर्् ष करना प ड़ा। इसका लाभ उठाते हुए अफगान नेता शरे शाह सरू ी ने उत्तरी भारत के बड़़े भाग पर शासन स््थथापि त किया एवं कई दीरक््घ ालि क सधु ार कि ए। यद्यपि य ह शासन अल््पकालि क रहा, क््योोकं ि हुमाय ँ ू ने शीघ्र ही अपना साम्राज््य पनु ः प्राप् त कर लिया । इससे परू ््व, हेमू, जो सरू वंश के अंति म शासकोों के अंतर््गत एक कुशल सेनापति एवं मखु ््यमंत्री (वजीर) था , ने दि ल््लली पर अल््पकालि क निय ंत्रण स््थथापि त कर हमे चन्दद्र वि क्रमादित् ्य के नाम से शासन किया । यद्यपि उसने कुछ सैन््य सफलताएँ अर््जजित कीीं, परंत ु वह बाबर के पौत्र अकबर से यदु ्ध करते हुए (पा नीपत का द्वितीय य दु ्ध) यदु ्धभमू ि मे ं घाय ल हो गया । उसे बंदी बनाकर अकबर के समक्ष प्रस््तततु किया गया , जि सने उसका सि र धड़ से अलग करवा दिया । शीघ्र ही अकबर ने दि ल््लली को मगु लोों के लि ए पनु ः प्राप्त कर लिया । | | **Table on page 18 (2×3)** | जब तरु ््क कर लेती थ बनाकर ले 1 भाग ा व्यवहार क 8, ाष् का राजपतू स्त क | े ग एवं सम््मनमा आ ेे क उस को अग््नन ि और प्रति रोध त भारत ा जाता था । : धययन पर वि जय प ् अ ा का | | उसने चित्तौड़ (या राजस््थथ ान में चित्तौ ड़गढ़) म ें कोई दया नहीीं दि खाई। चित्तौड़गढ़ के दु को उसने पा ँच माह से अधि क समय तक घरे े रखा। राजपतू सैनिकोों ने दृढ़ प्रति रोध किया और मगु ल सेना को भारी क्षति पहुचँ ाई, िकंत ु अतं तः कि ले म ें सेंध लगा दी गई। राजपू सैनि क लड़ते हुए बड़़ी संख््यय ा म ें हताहत हुए, जबकि सैकड़ोो ं महि लाओ ंने जौहर (बाॅक् दखे ें) किया । अकबर ने कि ले में लगभग 30,000 नागरिकोों के नरसंहार का आदशे दिया और जीवि त महि लाओ ंएव ंबच्् चोों को दास बना लिया गया । अकबर की आय ुउस सम 25 वर््षी थ । उसने वि जय संदशे भजे ा, जि समें लि खा था “हमने काफिरोों के अनेक दरु ््तग थ नगरोो ं पर अधि क ार कर लि या ह ै और वहाँ इस््ललाम स््थथापि त किया ह।ै अपनी रक् तपिपा तलवार की सहाय ता से हमने उनके मस््ततिष््क से कुफ ्र के चि ह्न मि टा दि ए ह ैं तथा संपू हि दं सु ्् तनता में मदं िरोों को नष्ट किया ह।ै ” अकबर ने अपने परू ््ववर््ततियोों का अनसु र जौौहर क्याा है? करते हुए ये वि चार अपनाया — “एक शास या मगं ोल सेनाए ँकि सी क्षेत्र पर अधि कार को सदवै वि जय की इच््छछा रखनी चाहि ीीं, तो वे प्राय ः वहाँ की स् त््रोियो ं को गलु ाम अन््थय ा उसके शत ्रु उसके वि रुद्ध शस्त ्र उठ जाते थे अथवा उनके सा थ अमानवीय लेंगे।” जैसे-जैस े उसके साम्राज््य का वि स््त रते थे। कई ऐति हासि क उदाहरण ऐसी होता गया (चि त्र 2.16), उसने इसे स््थथ ््रोियो ं के प्राप्तह ोते ह,ैं जो अपनी पवि त्रता करने के लि ए राजनैति क यकु ््ततोियो ं का प्रयो की रक्षा हते ु सामहू ि क रूप से स््वंय किया । उसने पड़़ोसी राज््ोयो ं की राजकुमारिय में समर्् पित कर दते ी थीी।ं ‘जौहर’ अतं ि म के साथ वि वाह संबंध स््थथापि त कि ए, राजपू था प्रति ष््ठठा की रक्षा का प्रतीक माना एव ं कषे् त्रीय शक््ततियोों का राजदरबार में स््ववाग जब अकबर ने अतं ि म रूप से चित्तौड़ किया , ‘जजिया ’ कर का उन्् लममू न किया औ ्रा प्तक ी तो सैकड़ोो ं राजपतू महि लाओ ं सलु ह-ए-कु ल — वस््तततु ः सभी के साथ शांति | | --- | --- | --- | | | जब तरु ््क कर लेती थ बनाकर ले व्यवहार क राजपतू स्त एवं सम््मनमा को अग््नन ि प्रति रोध त जाता था । पर वि जय प | जौौहर क्याा है? या मगं ोल सेनाए ँकि सी क्षेत्र पर अधि कार ीीं, तो वे प्राय ः वहाँ की स् त््रोियो ं को गलु ाम जाते थे अथवा उनके सा थ अमानवीय रते थे। कई ऐति हासि क उदाहरण ऐसी ््रोियो ं के प्राप्तह ोते ह,ैं जो अपनी पवि त्रता की रक्षा हते ु सामहू ि क रूप से स््वंय में समर्् पित कर दते ी थीी।ं ‘जौहर’ अतं ि म था प्रति ष््ठठा की रक्षा का प्रतीक माना जब अकबर ने अतं ि म रूप से चित्तौड़ ्रा प्तक ी तो सैकड़ोो ं राजपतू महि लाओ ं | | | ने अपनी साथ जौहर | महारानियो ों एवं कुलीन महि लाओ ं के किया । | **Table on page 19 (37×18)** | लााहौौर पठाान जनजााति� मुल्ताान | | | | | | | | | | | | | | | | उ॰ प॰ पू॰ द॰ गुवाहाटी ी | | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | प | ल ठाान | ााहौौर | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | जन | जााति� | | | | | | | | | | | | | | | | | | | मुल्ताान | | | | | | | | | | | गुवाहाटी ी | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | दि�ल्लीी | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | ज | यपुर | | | | | | | | | | | | | | | | | | मेवाड़ | आगराा | | | | | पटनाा | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | ढााकाा | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | स | ूरत | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | मुंं�बई | | | | | | क | टक | | | | | | | | गोलकुंडा बंगाल क पुणे खाड़़ी मछलीपट्टनम अरब बीीजाापुर सागर (बि�जयपुर) संकेेति�काा अकबर केे अधीीन मुगल सााम्रााज्य (1605) कांं�चीीपुरम औरंगजेब केे अधीीन मुगल वि�स्ताार (1700) रााजपूत भूखंड (1751) 0 250 500 कि�.मीी. अहाे�म रााज्य (1826) हि ंद सि�ख सााम्रााज्य (1839) महाासाागर महत्वपूर्ण नगर | | | | | | | | | | | | | | बंगाल क खाड़़ी | | | | | | | | | | | छलीप | ट् | ट | नम | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | स | ंकेेत | ि�काा | | | | | | | | | | | | | | | | अकबर केे अधीीन मुगल सााम्रााज्य (1605) औरंगजेब केे अधीीन मुगल वि�स्ताार (1700) रााजपूत भूखंड (1751) अहाे�म रााज्य (1826) सि�ख सााम्रााज्य (1839) महत्वपूर्ण नगर | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | 70° पू॰ 80° पू॰ 90° पू॰ चित्र 2.16 — विभिन्नक ालखडं ोों में मगु ल और क्षेत्रीय शक््तोतियो ंका उदय अधि कारियोों की उच््च पदोों पर निय कु ््ततएि वं अन्् यसाहसि क सधु ारोों के माध््यम स ेअकबर ने अपने सामर् ाज््य को वि स््तरता तथा स््थथि रता प्रदान की और कई राजपतू शासकोो ं का समरन्थ | | | | | | | | | | | | | | | | | **Table on page 21 (5×5)** | | आइए पताा लगााएँ | | | | | --- | --- | --- | --- | --- | | | चि त्र 2.3, 2.12 और 2.16. के मानचित्ररों की तलु ना करें। आप क््यया अंतर दखे ते हैं? इनमें क््यया ‘परिवर््तन’ हुए हैं? | | | | | | | | | | | | | | | | | चित्र 2.18 — फतेहपरु सीकरी म ेंअकबर द्वारा निर्त्ममि पाँच मजंिला ‘पंचमहल’ (वर््ातमन आगर स् वंय नरि क्षर होने के उपरांत भी अकबर फारसी तथा भारतीय ग्रंथोों का अध््यय न करने के लि ए उत््सकु रहता था । उसने भारतीय शा्स त््रीय विचारोों म ेंगहरी रुचि दि खाई एवं बहुधा वि द्वानोों को अपने राजदरबार में आमतं ्रित कयि ा । उसने फतेहपरु सीकरी में एक ‘अनवु ाद भवन’ स््थथापि त कि या जहाँ उसने प्रमखु संस््कृतक ग्रंथोों का अनवु ाद फारसी म ें करवाया । इनमें महाभारत (फारसी म ें रज़्मनामा या ‘यदु ्ध का ग्रंथ’), रामायण (176 संदु र लघ ु चि त्ररों के साथ ), भगव दग् ीता और पंचतंत्र सम््ममििल त थे। अकबर के पत्र ने पि ता की भाँति ही कला तथा वास््कला के पत्र ि रुचि | | | | | | | | आगर ने | ा के सम | |
- दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1192 में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद हुई।
- सल्तनत के पाँच प्रमुख राजवंश: ममलकु (गलुाम), खिलजी, तुगलक, सय्यद, और लोदी।
- सल्तनत ने उत्तर भारत के राजनीतिक मानचित्र को नया आकार दिया।
- इस्लामी संस्कृति और स्थापत्य कला का विकास हुआ।
- सल्तनत काल में व्यापार और कृषि में वृद्धि हुई।
- 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने दिल्ली सल्तनत को समाप्त किया।
- 📌 सल्तनत: एक मुस्लिम राज्य व्यवस्था जिसमें सल्तान सर्वोच्च शासक होता है।
- 📌 पृथ्वीराज चौहान: 12वीं शताब्दी के अंतिम दशक के एक प्रमुख राजपूत शासक।
- 📌 तुर्की-आफगान सेनाएँ: मध्य एशिया से आई सेनाएं जिन्होंने भारत में आक्रमण कर सत्ता स्थापित की।
मुगल साम्राज्य की स्थापना
व्याख्यामुगल साम्राज्य की स्थापना
मुगल साम्राज्य की स्थापना 1526 में हुई जब बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को पराजित किया। बाबर मध्य एशिया से आया था और उसने भारत में आधुनिक युद्ध तकनीक जैसे तोपखाने और बंदूकों का उपयोग किया, जिससे उसकी सेना को युद्ध में बड़ी सफलता मिली। बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' में भारत की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक जीवन का विस्तार से वर्णन किया है। मुगल साम्राज्य ने भारत के राजनीतिक मानचित्र को पुनः आकार दिया और कई प्रशासनिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक सुधार किए। बाबर के बाद हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहाँ और औरंगजेब जैसे शासकों ने इस साम्राज्य का विस्तार किया। विशेष रूप से अकबर का शासनकाल मुगल साम्राज्य के स्वर्ण युग के रूप में जाना जाता है, जिसमें धार्मिक सहिष्णुता और प्रशासनिक सुधारों को महत्व दिया गया। मुगल साम्राज्य ने भारत के विभिन्न हिस्सों को एकीकृत किया और कला, संस्कृति तथा स्थापत्य में अद्भुत योगदान दिया। **Table on page 3 (1×2)** | 1520 1560 1600 1640 1680 1720 1760 1800 1565 — तालीकोटा का 1754 — दि ल्् लली पर यदु ्ध, वि जयनगर साम्राज्् यका मराठा निय ंत्रण का आरंभ वि ध््ववंस 1671 — सराय घाट का य दु ्ध, अहोमोो ंद्वारा मगु लोों की पराजय 1526 — पानीपत का प्रथम यदु ्ध, बाबर की वि जय से मगु ल साम्रजा ््य की स््थथपा ना | | | --- | --- | | शब््द विन््ययास… आपको यत्र-तत ्र कोष्ठकोों म ें कुछ वैकल्् पपकि वर््तनी मि ल जाएगी। उदाहरण के लि ए ‘खि लजी’ या ‘खलजी’ एक ही ह।ैं इसी प्रकार अब हम यहाँ ‘मगु ल’ को मानक वर््तनी के रपू में प्रयोग करते हैं, कि ंत ु ‘मोगल’ जैसी वैकल््पपकि वर््तनी का उपय ोग कभी-कभी किया जाता ह।ै 11वीी ं शताब्् ददकी े आरंभ म ें भारत की यता र् मा े ें एक नए यगु का आरंभ हआु । हि दं कु ुश प्र तव के पा र स े हएु आकम्र णोो ं न े भारत के राजनतै ि क मानचि त ्र को नय ा रपू द े दयि ा । नि ःसदं हे भारत न ेइसस ेपहल ेभी कई यदु ्धदखे ेथ,े िकंत ुइस अवध ि मे ंभारतीय उपमहादव् ीप स े बाहर के लोगोो ं दव् रा ाक ि ए गए आकम्र ण अभतू परू ्् व।े थ इनम ें स े कई हमलावर मध्् य एशयि ा ई — तुर््क य ा अफगान थ।े य े आकर्् तां ा केवल भारत के अतलु ्् य धन और सामर् जा ्् य वि स्् तरता के उदद् शे ्् य के सा थ ही नहीी ं आत े थ,े वरन ् पा्र य : आवश्् कय ताप ड़ न े पर हि सं ा के बल पर अपन े पथं -मजहब के स्् व ंय के ससं ्् रक ण का पस्र ार करन े के ध्् ेय य स े भी आत े थ।े | तुर््क उन लोगोों, भाषाओ ंएवं संस््कृकतियोो ंको इगंि त करता ह ै जो ऐति हासि क रूप से मध््य एशिया से लेकर तरु क् ी एवं साइबेरिय ा तक वि स््तततृ व िशाल क्षेत्र से संबद्ध रह ेहैं। |
- मुगल साम्राज्य की स्थापना 1526 में बाबर द्वारा की गई।
- बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को पराजित किया।
- मुगलों ने आधुनिक युद्ध तकनीक जैसे तोपखाने और बंदूकों का उपयोग किया।
- बाबर ने बाबरनामा में भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विशेषताओं का वर्णन किया।
- अकबर का शासनकाल मुगल साम्राज्य का स्वर्ण युग माना जाता है।
- मुगल साम्राज्य ने भारत के राजनीतिक मानचित्र को एकीकृत किया।
- 📌 बाबर: मुगल साम्राज्य के संस्थापक और मध्य एशिया से आए एक शासक।
- 📌 पानीपत का प्रथम युद्ध: 1526 में बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच लड़ा गया युद्ध।
- 📌 बाबरनामा: बाबर द्वारा लिखी गई आत्मकथा।
अकबर का शासन और प्रशासन
व्याख्याअकबर का शासन और प्रशासन
अकबर (1556-1605) मुगल साम्राज्य के सबसे प्रभावशाली शासकों में से एक थे। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों को लागू किया और साम्राज्य के विस्तार के लिए कई सैन्य अभियान चलाए। अकबर ने ज़मीन के कर निर्धारण के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली लागू की, जिसे 'दाहसाल' प्रणा
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.बरसात के मौसम में ___________ के जमा होने के कारण खुली रोटी खराब हो जाती है।
उत्तर:
कवक (Fungi)
व्याख्या:
[{"id": "ff60d22f-bd4f-4323-9a0e-2172a2f259d2", "type": "html", "value": " वर्षा के ऋतु में रोटी के कुछ सतह को ढकने वाले भूरे रंग के सफेद धब्बे कवक होते हैं। कवक वे सुक्ष्मजीव हैं जो अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते हैं। "}]
Q2.निम्न में से कौन-सा रोग विषाणुओं के कारण नहीं होता है?
उत्तर:
क्षयरोग (Tuberculosis)
व्याख्या:
[{"id": "3e25568e-4d68-46ea-a1c5-22a6f44f3b2d", "type": "html", "value": " सामान्य सर्दी-जुखाम, इन्फ्लूएंजा (फ्लू), चिकनपॉक्स और पोलियो जैसे रोग विषाणु के कारण होते हैं, जबकि थाइरोइड और क्षयरोग जैसे रोग जीवाणु रोग होते हैं। "}]
Q3.संचरणीय रोग _________ से नहीं फैलते हैं।
उत्तर:
ऑनलाइन बातचीत
व्याख्या:
[{"id": "e1a5b4f3-7507-4c4d-9b79-e90bbb105821", "type": "html", "value": " सुक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले रोग जो वायु , जल, भोजन या कायिक संपर्क से फैलते हैं, संचरणीय रोग कहलाते हैं। "}]
Q4.निम्नलिखित में से कौन मलेरिया और डेंगू के संचरण का एक तरीका है?
उत्तर:
मच्छर
व्याख्या:
[{"id": "0d3e3703-ad14-43ed-9e21-fcbf3f99f6d9", "type": "html", "value": " मलेरिया और डेंगू मच्छरों से फैलते हैं। "}]
Q5.सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकने के लिए जिन अवयवों (ingredients) का उपयोग किया जाता है, उन्हें _______ कहा जाता है।
उत्तर:
परिरक्षक (Preservatives)
व्याख्या:
[{"id": "a6f9abf5-1d70-4f56-a202-e4db74480bf2", "type": "html", "value": " नमक और तेल जिनका उपयोग सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकने के लिए किया जाता है, परिरक्षक कहलाते हैं। "}]
Q6.निम्नलिखित में से कौन सा जीवाणु फलीदार पौधों में नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सम्मिलित होता है?
उत्तर:
राइजोबियम
व्याख्या:
[{"id": "58a98290-c253-42ca-9ddb-0bf2280a74e0", "type": "html", "value": " राइजोबियम वह जीवाणु है जो नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सम्मिलित है। यह फलियां और मटर जैसे लैग्युम (फलीदार) पौधों की जड़ की ग्रंथिकाओ में उपस्थित रहता है। "}]
Q7.दिल्ली सल्तनत की स्थापना कब हुई और इसके पाँच प्रमुख राजवंश कौन-कौन से थे?
उत्तर:
1192 में; ममलकु (गलुआम), खिलजी, तुगलक, सय्यद और लोदी
व्याख्या:
दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1192 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद हुई थी। इसके पाँच प्रमुख राजवंश ममलकु (गलुआम), खिलजी, तुगलक, सय्यद और लोदी थे, जिन्होंने उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों पर शासन किया।
Q8.दिल्ली सल्तनत के दौरान किस प्रकार के सांस्कृतिक और प्रशासनिक बदलाव हुए?
उत्तर:
दिल्ली सल्तनत के दौरान इस्लामी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा। मस्जिद, किले और स्थापत्य कला के कई नमूने बने। प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हुई और व्यापार तथा कृषि का विकास हुआ। उदाहरण के लिए, कुतुब मीनार का निर्माण इस काल का प्रमुख स्थापत्य है।
व्याख्या:
दिल्ली सल्तनत ने भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी संस्कृति का विस्तार किया। प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ मस्जिदों और किलों का निर्माण हुआ। व्यापार और कृषि भी इस काल में विकसित हुए, जिससे सामाजिक और आर्थिक जीवन में सुधार हुआ।
Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage Part-I के सभी 7 अध्याय
Social Science · Class 8