Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
मौसम और इसके तत्व
व्याख्यामौसम और इसके तत्व
मौसम वह स्थिति है जो किसी विशेष समय और स्थान पर पृथ्वी के वायुमंडल में पाई जाती है। यह वायुमंडल की गैसीय परत होती है, जो पृथ्वी को चारों ओर घेरे रहती है। पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे निचली परत को क्षोभमंडल (ट्रोपोस्फीयर) कहा जाता है, जो लगभग 6 से 18 किलोमीटर ऊँची होती है। इसी परत में सभी मौसम संबंधी घटनाएँ घटित होती हैं। मौसम के तत्व वे प्राकृतिक घटक हैं जो मौसम की स्थिति को निर्धारित करते हैं। मुख्य मौसम तत्व हैं: तापमान, वर्षण (वर्षा, हिम, ओले आदि), वायुमंडलीय दबाव, पवन (हवा की दिशा और गति), और आर्द्रता (वायु में जलवाष्प की मात्रा)। ये तत्व मिलकर मौसम की स्थिति को परिभाषित करते हैं। उदाहरण के लिए, तापमान बताता है कि वायु कितनी गर्म या ठंडी है, वर्षा बताती है कि कितना पानी आकाश से गिर रहा है, वायुमंडलीय दबाव वायु के भार को दर्शाता है, पवन हवा के बहाव की दिशा और गति को दर्शाता है, और आर्द्रता वायु में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को। मौसम का अनुभव हम अपने शरीर के माध्यम से करते हैं, जैसे सर्दी में ठंड लगना या गर्मी में पसीना आना। प्राचीन काल से मनुष्य ने पक्षियों के व्यवहार, चीटियों के अंडे ले जाने, मेंढकों की आवाज़ आदि से मौसम का अनुमान लगाया है। आज हम आधुनिक उपकरणों के माध्यम से इन तत्वों को मापकर सटीक पूर्वानुमान करते हैं।
- मौसम पृथ्वी के वायुमंडल की एक विशेष स्थिति है जो समय और स्थान के अनुसार बदलती रहती है।
- क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली परत है जहाँ सभी मौसम संबंधी घटनाएँ होती हैं।
- मौसम के मुख्य तत्व हैं: तापमान, वर्षण, वायुमंडलीय दबाव, पवन, और आर्द्रता।
- प्राचीन लोग प्राकृतिक संकेतों से मौसम का अनुमान लगाते थे, जैसे पक्षियों का व्यवहार।
- आधुनिक यंत्रों से मौसम के तत्वों को मापा जाता है जिससे पूर्वानुमान संभव होता है।
- 📌 मौसम: किसी विशेष स्थान और समय पर वायुमंडल की स्थिति।
- 📌 क्षोभमंडल (ट्रोपोस्फीयर): वायुमंडल की सबसे निचली परत जहाँ मौसम संबंधी घटनाएँ होती हैं।
- 📌 तापमान: वायु की गर्मी या ठंडक।
मौसम मापन के उपकरण
व्याख्यामौसम मापन के उपकरण
मौसम के विभिन्न तत्वों को मापने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग किया जाता है। तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का प्रयोग होता है, जो सेल्सियस (°C) या फॉरेनहाइट (°F) में तापमान दिखाता है। वर्षा की मात्रा मापने के लिए वर्षामापी (रेन गेज) का उपयोग किया जाता है, जिसमें वर्षा जल एकत्रित होकर उसकी ऊँचाई मापी जाती है। वायुमंडलीय दबाव को मापने के लिए वायुदाबमापी (बैरोमीटर) का उपयोग होता है, जो मिलीबार (mb) में दबाव को दर्शाता है। पवन की दिशा और गति को मापने के लिए वात दिक्सूचक (विंड वेन) और पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) का प्रयोग किया जाता है। वात दिक्सूचक पवन की दिशा बताता है जबकि पवन वेगमापी पवन की गति को किलोमीटर प्रति घंटे में मापता है। आर्द्रता को मापने के लिए आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) का उपयोग होता है, जो वायु में जलवाष्प की मात्रा को प्रतिशत में दर्शाता है। इन उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों को मौसम केंद्रों में संग्रहित किया जाता है, जहाँ उनका विश्लेषण कर मौसम का पूर्वानुमान किया जाता है। आधुनिक युग में स्वचालित मौसम केंद्रों का विकास हुआ है, जो सेंसरों के माध्यम से तापमान, आर्द्रता, वर्षा, पवन और दबाव की जानकारी स्वतः एकत्रित करते हैं। इससे मौसम की सटीक और त्वरित जानकारी मिलती है, जो कृषि, विमानन, आपदा प्रबंधन आदि क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है।
- तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का उपयोग होता है।
- वर्षा की मात्रा मापने के लिए वर्षामापी (रेन गेज) का प्रयोग होता है।
- वायुमंडलीय दबाव मापने के लिए वायुदाबमापी (बैरोमीटर) का उपयोग किया जाता है।
- पवन की दिशा और गति मापने के लिए वात दिक्सूचक और पवन वेगमापी का उपयोग होता है।
- आर्द्रता मापने के लिए आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) का प्रयोग किया जाता है।
- स्वचालित मौसम केंद्र आधुनिक तकनीक से मौसम के सभी तत्वों को स्वतः मापते हैं।
- 📌 थर्मामीटर: तापमान मापने का यंत्र।
- 📌 वर्षामापी (रेन गेज): वर्षा की मात्रा मापने का यंत्र।
- 📌 वायुदाबमापी (बैरोमीटर): वायुमंडलीय दबाव मापने का यंत्र।
वायुमंडलीय दबाव
व्याख्यावायुमंडलीय दबाव
वायुमंडलीय दबाव वह दबाव है जो वायु के भार के कारण पृथ्वी की सतह पर पड़ता है। समुद्र तल पर यह दबाव अधिक होता है और जैसे-जैसे हम ऊँचाई पर जाते हैं, यह कम होता जाता है। उदाहरण के लिए, पहाड़ों पर वायु पतली होती है और दबाव कम होता है, जिससे ऑक्सीजन की मात
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.अवधारणा - मृदा परिच्छेदिका निम्न में से ह्यूमस किसे कहते हैं?
उत्तर:
सड़े- गले जैव पदार्थ
Q2.अवधारणा - मृदा के प्रकार जल धारण क्षमता निम्न में से किस में सबसे अधिक होती है?
उत्तर:
मृण्मय मृदा में
Q3.अवधारणा - मृदा परिच्छेदिका शैल कणों के अतिरिक्त, मृदा में होते हैं -
उत्तर:
खनिज, जैव पदार्थ, वायु और जल
Q4.अवधारणा - मृदा परिच्छेदिका जड़ों द्वारा अधिकतम अवशोषण के लिए मिट्टी में पानी और खनिजों की उपलब्धता है–
उत्तर:
A- क्षितिज
Q5.अवधारणा - मृदा परिच्छेदिका मिट्टी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों को पढ़ें। (i) अपक्षय मिट्टी के निर्माण की एक बहुत तेज़ प्रक्रिया है। (ii) रेतीली मिट्टी में पानी का बहाव तेज होता है। (iii) दोमट मिट्टी में केवल रेत और मिट्टी होती है। (iv) शीर्ष मिट्टी में ह्यूमस की अधिकतम मात्रा होती है। ऊपर से सही कथन चुनें।
उत्तर:
(ii) और (iv)
Q6.अवधारणा - मृदा के गुण मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों को वृद्धि और जीवित रहने के लिए नमी (पानी) और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। निवास स्थान के लिए नीचे के विकल्पों में से चुनें जहाँ मिट्टी में पानी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हों।
उत्तर:
वन
Q7.अवधारणा - मृदा और फसलें मृदा संरक्षण के उपाय मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किसकी रक्षा के उद्देश्य से हैं?
उत्तर:
शीर्ष मिट्टी
Q8.अवधारणा - मृदा और फसलें धान की फसल निम्न में से किस तरह की मृदा में होती है?
उत्तर:
मृत्तिका मृदा में
Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage Part-I के सभी 12 अध्याय
Social Science · Class 7