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Chapter 2

🎓 Class 11📖 Rasayan Vigyan bhag-I📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 6Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

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परमाणु की खोज

व्याख्या

परमाणु की खोज

परमाणु की खोज विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। प्राचीन भारतीय दार्शनिक कणाद ने महाभारत काल में पदार्थ के सबसे छोटे, अविभाज्य कण को 'परमाणु' कहा था। इसी प्रकार, ग्रीक दार्शनिक डेमोक्रिटस ने भी पदार्थ के छोटे कणों की अवधारणा दी थी, जिन्हें उन्होंने 'एटमोस' कहा, जिसका अर्थ है 'अविभाज्य'। आधुनिक विज्ञान में परमाणु की खोज 19वीं सदी के अंत में हुई। 1897 में जे. जे. थॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज की, जिससे पता चला कि परमाणु अविभाज्य नहीं है और इसके अंदर नकारात्मक आवेशित कण होते हैं। इसके बाद 1911 में रदरफोर्ड ने गोल्ड फॉयल प्रयोग के माध्यम से परमाणु के केन्द्रक (न्यूक्लियस) की खोज की। इस प्रयोग में α-कणों को सोने की पतली परत पर प्रक्षेपित किया गया था, जिससे यह पता चला कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान केन्द्रक में होता है और वह धनात्मक आवेशित होता है। परमाणु की खोज ने रसायन विज्ञान और भौतिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए और तत्वों की संरचना को समझने का मार्ग प्रशस्त किया।

  • प्राचीन काल में कणाद और डेमोक्रिटस ने परमाणु की अवधारणा दी।
  • 1897 में जे. जे. थॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज की।
  • 1911 में रदरफोर्ड ने गोल्ड फॉयल प्रयोग से परमाणु के केन्द्रक की खोज की।
  • परमाणु अब अविभाज्य नहीं माना जाता, इसमें उप-परमाण्विक कण होते हैं।
  • परमाणु की खोज से तत्वों के रासायनिक गुणों को समझने में मदद मिली।
  • 📌 परमाणु: पदार्थ का सबसे छोटा, अविभाज्य कण।
  • 📌 इलेक्ट्रॉन: नकारात्मक आवेशित उप-परमाण्विक कण।
  • 📌 न्यूक्लियस: परमाणु का केन्द्रक, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं।

परमाणु के घटक कण

व्याख्या

परमाणु के घटक कण

परमाणु तीन मुख्य उप-परमाण्विक कणों से मिलकर बना होता है: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन। इलेक्ट्रॉन नकारात्मक आवेशित कण होते हैं जिनका द्रव्यमान लगभग 9.1 × 10⁻³¹ किलोग्राम होता है। प्रोटॉन धनात्मक आवेशित कण होते हैं जिनका द्रव्यमान लगभग 1.6726 × 10⁻²⁷ किलोग्राम होता है। न्यूट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के समान होता है लेकिन यह आवेशित नहीं होता। इलेक्ट्रॉन परमाणु के बाहरी क्षेत्र में घूमते हैं जबकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन परमाणु के केन्द्रक (न्यूक्लियस) में स्थित होते हैं। प्रोटॉन की संख्या परमाणु की पहचान करती है और इसे परमाणु संख्या (Z) कहा जाता है। न्यूट्रॉन की संख्या प्रोटॉन से भिन्न हो सकती है, जिससे आइसोटोप बनते हैं। इलेक्ट्रॉन की संख्या प्रोटॉन के बराबर होती है जिससे परमाणु तटस्थ रहता है।

  • परमाणु के तीन मुख्य कण: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन।
  • इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत कम और नकारात्मक आवेशित।
  • प्रोटॉन धनात्मक आवेशित और न्यूट्रॉन आवेश रहित होते हैं।
  • प्रोटॉन और न्यूट्रॉन परमाणु के केन्द्रक में स्थित होते हैं।
  • इलेक्ट्रॉन परमाणु के बाहरी क्षेत्र में घूमते हैं।
  • प्रोटॉन की संख्या परमाणु संख्या (Z) कहलाती है।
  • 📌 इलेक्ट्रॉन: नकारात्मक आवेशित उप-परमाण्विक कण।
  • 📌 प्रोटॉन: धनात्मक आवेशित उप-परमाण्विक कण।
  • 📌 न्यूट्रॉन: आवेश रहित उप-परमाण्विक कण।

परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या

व्याख्या

परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या

परमाणु संख्या (Z) किसी परमाणु में प्रोटॉन की संख्या को कहते हैं। यह परमाणु की पहचान करता है क्योंकि किसी तत्व के सभी परमाणु में प्रोटॉन की संख्या समान होती है। द्रव्यमान संख्या (A) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या होती है। इसे A = Z + N के रूप में

अभ्यास प्रश्नChapter 2

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. परमाणु के घटक कणों के नाम लिखिए तथा उनके आवेश और द्रव्यमान का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

परमाणु के मुख्य घटक कण तीन हैं: 1. इलेक्ट्रॉन (Electron): - आवेश: -1 (ऋणात्मक) - द्रव्यमान: 9.109 × 10⁻³¹ किग्रा या लगभग 0.000548 amu 2. प्रोटॉन (Proton): - आवेश: +1 (धनात्मक) - द्रव्यमान: 1.6726 × 10⁻²⁷ किग्रा या लगभग 1.0073 amu 3. न्यूट्रॉन (Neutron): - आवेश: 0 (निरावेश) - द्रव्यमान: 1.6750 × 10⁻²⁷ किग्रा या लगभग 1.0087 amu

व्याख्या:

परमाणु के घटक कणों में इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेशित होते हैं और परमाणु के बाहर ऊर्जा स्तरों में घूमते हैं। प्रोटॉन धनात्मक आवेशित होते हैं और न्यूक्लियस में उपस्थित रहते हैं। न्यूट्रॉन निरावेश होते हैं और न्यूक्लियस में प्रोटॉनों के साथ रहते हैं। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत कम होता है जबकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का द्रव्यमान लगभग समान होता है।

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Q2.2. परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या में क्या अंतर है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

परमाणु संख्या (Z): किसी परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु संख्या कहते हैं। यह किसी तत्व की पहचान निर्धारित करती है। द्रव्यमान संख्या (A): किसी परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या को द्रव्यमान संख्या कहते हैं। उदाहरण: कार्बन (C) के लिए: - परमाणु संख्या (Z) = 6 (प्रोटॉन की संख्या) - द्रव्यमान संख्या (A) = 12 (6 प्रोटॉन + 6 न्यूट्रॉन) अर्थात्, परमाणु संख्या केवल प्रोटॉनों की संख्या है जबकि द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों की कुल संख्या है।

व्याख्या:

परमाणु संख्या तत्व की पहचान को दर्शाती है, जबकि द्रव्यमान संख्या परमाणु के द्रव्यमान का निर्धारण करती है। उदाहरण के लिए, कार्बन के परमाणु में 6 प्रोटॉन और 6 न्यूट्रॉन होते हैं, अतः उसकी परमाणु संख्या 6 और द्रव्यमान संख्या 12 है।

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Q3.3. आइसोटोप, आइसोबार और आइसोटोन क्या होते हैं? प्रत्येक के उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

आइसोटोप: वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है, लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है। उदाहरण: हाइड्रोजन के आइसोटोप - प्रोटियम (¹H), ड्यूटीरियम (²H), ट्रिटियम (³H) आइसोबार: वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है, लेकिन परमाणु संख्या भिन्न होती है। उदाहरण: ¹⁴C (कार्बन) और ¹⁴N (नाइट्रोजन) आइसोटोन: वे परमाणु जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, लेकिन प्रोटॉनों की संख्या भिन्न होती है। उदाहरण: ¹⁴C (6 प्रोटॉन, 8 न्यूट्रॉन) और ¹⁵N (7 प्रोटॉन, 8 न्यूट्रॉन)

व्याख्या:

आइसोटोप में प्रोटॉन की संख्या समान होती है, न्यूट्रॉन की संख्या अलग। आइसोबार में कुल द्रव्यमान संख्या समान, लेकिन प्रोटॉन की संख्या अलग। आइसोटोन में न्यूट्रॉन की संख्या समान, प्रोटॉन की संख्या अलग। उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट है।

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Q4.4. इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी? उसके गुण लिखिए।

उत्तर:

इलेक्ट्रॉन की खोज J.J. थॉमसन ने 1897 में की थी। इलेक्ट्रॉन के गुण: 1. इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेशित कण है। 2. इसका द्रव्यमान 9.109 × 10⁻³¹ किग्रा या लगभग 0.000548 amu है। 3. इसका आवेश -1.602 × 10⁻¹⁹ कूलॉम्ब है। 4. यह परमाणु के बाहर ऊर्जा स्तरों में घूमता है।

व्याख्या:

J.J. थॉमसन ने कैथोड रे ट्यूब प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज की। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत कम होता है और यह ऋणात्मक आवेशित होता है।

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Q5.5. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की मुख्य विशेषताएँ: 1. परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है। 2. परमाणु का केंद्रक (न्यूक्लियस) बहुत छोटा और घना होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं। 3. इलेक्ट्रॉन न्यूक्लियस के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं। 4. न्यूक्लियस धनात्मक आवेशित होता है।

व्याख्या:

रदरफोर्ड ने गोल्ड फॉयल प्रयोग द्वारा यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है और उसका केंद्रक बहुत छोटा होता है, जिसमें धनात्मक आवेश केंद्रित होता है। इलेक्ट्रॉन न्यूक्लियस के चारों ओर घूमते हैं।

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Q6.परमाणु के केन्द्रक (न्यूक्लियस) में कौन-कौन से कण पाए जाते हैं?
A.A) केवल इलेक्ट्रॉन
B.B) केवल प्रोटॉन
C.C) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन
D.D) इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन

उत्तर:

प्रोटॉन और न्यूट्रॉन

व्याख्या:

परमाणु के केन्द्रक में प्रोटॉन (धनात्मक आवेशित) और न्यूट्रॉन (तटस्थ) कण पाए जाते हैं। इलेक्ट्रॉन केन्द्रक के बाहर ऊर्जा स्तरों में घूमते हैं।

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Q7.रदरफोर्ड के गोल्ड फॉयल प्रयोग से कौन सा निष्कर्ष निकाला गया?
A.A) परमाणु का अधिकांश भाग खाली स्थान है
B.B) परमाणु का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के कारण होता है
C.C) परमाणु अविभाज्य है
D.D) परमाणु में केवल प्रोटॉन होते हैं

उत्तर:

परमाणु का अधिकांश भाग खाली स्थान है

व्याख्या:

रदरफोर्ड के गोल्ड फॉयल प्रयोग से पता चला कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली स्थान है और केन्द्र में एक छोटा, घना, धनात्मक केन्द्रक होता है।

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Q8.निम्नलिखित में से कौन सा परमाणु का मॉडल 'प्लम-पुडिंग' मॉडल कहलाता है?
A.A) थॉमसन का मॉडल
B.B) रदरफोर्ड का मॉडल
C.C) बोहर का मॉडल
D.D) क्वांटम मॉडल

उत्तर:

थॉमसन का मॉडल

व्याख्या:

थॉमसन ने परमाणु को 'प्लम-पुडिंग' मॉडल के रूप में समझाया जिसमें धनात्मक द्रव में इलेक्ट्रॉन बिखरे हुए होते हैं।

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