Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
भारत में राष्ट्रवाद का आरंभ
व्याख्याभारत में राष्ट्रवाद का आरंभ
भारत में राष्ट्रवाद का आरंभ 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में हुआ। इस समय भारतीयों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपनी असंतुष्टि और विरोध को संगठित रूप में व्यक्त करना शुरू किया। ब्रिटिश सरकार की नीतियों, जैसे कि आर्थिक शोषण, सामाजिक असमानता और राजनीतिक अधिकारों की कमी ने भारतीयों में एकजुटता और राष्ट्रीय चेतना को जन्म दिया। इस दौर में भारतीय समाज में विभिन्न वर्गों, जैसे कि किसान, मजदूर, व्यापारी, और बुद्धिजीवी, ने राष्ट्रवादी विचारों को अपनाया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई, जिसने धीरे-धीरे राजनीतिक आंदोलन का नेतृत्व करना शुरू किया। प्रारंभिक राष्ट्रवादी नेताओं ने ब्रिटिश सरकार से संवैधानिक सुधारों की मांग की, लेकिन समय के साथ आंदोलन अधिक व्यापक और सक्रिय हो गया। इस काल में स्वदेशी आंदोलन, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, और सांस्कृतिक जागरण ने राष्ट्रवाद को मजबूती दी।
- भारत में राष्ट्रवाद की शुरुआत 19वीं सदी के अंत में हुई।
- ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष और विरोध बढ़ा।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई।
- प्रारंभिक राष्ट्रवादी नेताओं ने संवैधानिक सुधारों की मांग की।
- स्वदेशी आंदोलन और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार ने राष्ट्रवाद को प्रोत्साहित किया।
- 📌 राष्ट्रवाद: अपने देश के प्रति प्रेम और उसकी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष की भावना।
- 📌 स्वदेशी आंदोलन: विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर देशी वस्तुओं को बढ़ावा देना।
- 📌 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख राजनीतिक संगठन।
प्रथम विश्व युद्ध, खिलाफत और असहयोग आंदोलन
व्याख्याप्रथम विश्व युद्ध, खिलाफत और असहयोग आंदोलन
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों से युद्ध में सहयोग मांगा। भारतीयों ने युद्ध में भाग लिया, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के बाद कोई राजनीतिक सुधार नहीं दिए। युद्ध के दौरान करों में वृद्धि, खाद्य संकट और सैनिकों की भर्ती ने जनता में असंतोष बढ़ाया। इसी समय खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ, जो तुर्की के खिलाफ ब्रिटिश नीतियों के विरोध में था। महात्मा गांधी ने इन दोनों आंदोलनों को जोड़कर असहयोग आंदोलन की शुरुआत की। असहयोग आंदोलन में भारतीयों ने ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी स्कूलों और न्यायालयों का बहिष्कार, और खादी पहनने जैसे अहिंसात्मक तरीकों को अपनाया। इस आंदोलन ने भारत के विभिन्न वर्गों को एकजुट किया और राष्ट्रवादी भावना को प्रबल किया।
- ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध में सहयोग के लिए भारतीयों से मांग की।
- युद्ध के बाद कोई राजनीतिक सुधार नहीं हुए।
- खिलाफत आंदोलन तुर्की के खिलाफ ब्रिटिश नीतियों के विरोध में था।
- महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की।
- असहयोग आंदोलन में अहिंसात्मक विरोध के तरीके अपनाए गए।
- 📌 असहयोग आंदोलन: ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसात्मक विरोध का आंदोलन।
- 📌 खिलाफत आंदोलन: तुर्की के खिलाफ मुस्लिम समुदाय का विरोध।
- 📌 खादी: हाथ से बुना हुआ कपड़ा, स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक।
जलियांवाला बाग हत्याकांड और असहयोग आंदोलन का विस्तार
व्याख्याजलियांवाला बाग हत्याकांड और असहयोग आंदोलन का विस्तार
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने एक शांतिपूर्ण सभा पर गोली चलवा दी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। यह घटना ब्रिटिश शासन की क्रूरता और अत्याचार का प्रतीक बन गई। इस हत्याकांड ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया औ
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.धातु को उनके ऑक्साइड से निष्कर्षित (extraction)करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
उत्तर:
अपचयन
व्याख्या:
[{"id": "81554505-0fb9-4ed9-b2a6-f51841c47318", "type": "html", "value": " धातु को उनके ऑक्साइड से निष्कर्षित करने के लिए अपचयन रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है। "}]
Q2.धातुओं के निष्कर्षण की प्रक्रम के दौरान कार्बोनेट और सल्फाइड अयस्कों (ores) को सामान्यतः ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। किस कारण?
उत्तर:
ऑक्साइड अपचयन सरल है
व्याख्या:
[{"id": "6a56753f-9154-4a41-91b3-9b5cb0c6bbf5", "type": "html", "value": " ऐसा इसलिए है क्योंकि ऑक्साइड अपचयन सरल है। "}]
Q3.एक अपचयित कारक (agent) का नाम बताइए जिसका उपयोग मैंगनीज़ डाइऑक्साइड से मैंगनीज़ के निष्कर्षण के लिए किया जा सकता है।
उत्तर:
एल्यूमीनियम चूर्ण
व्याख्या:
[{"id": "bbb1e8c4-75a9-4637-a07d-8905fde68752", "type": "html", "value": " एल्यूमीनियम चूर्ण एक अपचयित कारक है जिसका उपयोग मैंगनीज डाइऑक्साइड से मैंगनीज के निष्कर्षण के लिए किया जा सकता है। "}]
Q4.सिनाबार ________ का अयस्क है।
उत्तर:
मर्करी
व्याख्या:
[{"id": "26e72417-a89a-47b5-a3e1-a4802d2bc475", "type": "html", "value": " सिनाबार मर्करी का अयस्क है। "}]
Q5.1- O;k[;k djsaµ (d) mifuos'kksa esa jk"Vªokn osQ mn; dh çfØ;k mifuos'kokn fojksèkh vkanksyu ls tqM+h gqbZ D;ksa Fkh. ([k) igys fo'o ;q¼ us Hkkjr esa jk"Vªh; vkanksyu osQ fodkl esa fdl çdkj ;ksxnku fn;k. (x) Hkkjr osQ yksx jkWyV ,DV osQ fojksèk esa D;ksa D;ksa Fks. (?k) xka/hth us vlg;ksx vkanksyu dks okil ysus dk I+kSQlyk D;ksa fy;k.
उत्तर:
1- (d) मिफ़ौसकों में राष्ट्रीय या मन की भावना मिफ़ौसकों फोज़ी सैनिक आंदोलन से जुड़े हुए थे। (ख) इग्लैंड के बाद भारत में राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई दिशा मिली। (ग) भारत के व्यक्ति स्वतंत्रता संग्राम में कई बार शामिल हुए। (घ) छात्र ने विभिन्न आंदोलन को समझने के लिए अध्ययन किया।
व्याख्या:
प्रत्येक उपप्रश्न का उत्तर संबंधित ऐतिहासिक संदर्भ के अनुसार दिया गया है। मिफ़ौसकों का संबंध सैनिक आंदोलन से था, अंग्रेजों के बाद भारत में राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा मिली, भारत के व्यक्तियों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया, और छात्र ने आंदोलन को समझने के लिए अध्ययन किया।
Q6.2- lR;kxzg osQ fopkj dk D;k eryc gS\
उत्तर:
2- लहरों का मतलब है आंदोलन या क्रांति। यह एक सामाजिक या राजनीतिक प्रक्रिया है जिसमें जनता अपने अधिकारों या स्वतंत्रता के लिए संगठित होकर संघर्ष करती है।
व्याख्या:
लहरों का अर्थ आंदोलन की विभिन्न अवस्थाओं और प्रकारों को दर्शाता है, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न रूपों में सामने आईं।
Q7.3- fuEufyf[kr ij v[+kckj osQ fy, fjiksVZ fy[ksaµ (d) tfy;k¡okyk ckX+k gR;kdkaM ([k) lkbeu deh'ku
उत्तर:
3- (d) तफीक़ीयक कृत्य ग़रीबों के लिए संघर्ष था। (ख) लम्बे देहकु का अर्थ है लंबी शारीरिक मेहनत या परिश्रम।
व्याख्या:
प्रश्न में दिए गए दो शब्दों के अर्थ और उनके सामाजिक संदर्भ को समझाया गया है। तफीक़ीयक कृत्य गरीबों के संघर्ष को दर्शाता है, जबकि लम्बे देहकु का अर्थ शारीरिक मेहनत से है।
Q8.4- bl vè;k; esa nh xbZ Hkkjr ekrk dh Nfo vkSj vè;k; 1 esa nh xbZ tesZfu;k dh Nfo dh rqyuk dhft,A ppkZ djsa
उत्तर:
4- इस प्रश्न में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की विभिन्न लहरों के बारे में जानकारी दी गई है। पहली लहर में प्रारंभिक संघर्ष और जागरूकता थी, जबकि दूसरी लहर में व्यापक आंदोलन और संगठित प्रयास हुए।
व्याख्या:
भारत के स्वतंत्रता संग्राम को विभिन्न लहरों में बांटा गया है, प्रत्येक लहर की अपनी विशेषताएं और उद्देश्य होते हैं। पहली लहर में जागरूकता और प्रारंभिक प्रयास थे, दूसरी लहर में बड़े पैमाने पर आंदोलन हुए।
Bharat Aur Samakalin Vishav-2 के सभी 5 अध्याय
Social Science · Class 10