Chapter 14
Chapter 14 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
हबीब तनवीर
व्याख्याहबीब तनवीर
यह अनुभाग प्रसिद्ध नाटककार हबीब तनवीर के जीवन और कार्यों का परिचय प्रस्तुत करता है। हबीब तनवीर का जन्म 1923 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। उन्होंने 1944 में नागपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे ब्रिटेन की नाटक अकादमी गए जहाँ उन्होंने नाट्य-लेखन का अध्ययन किया। भारत लौटकर उन्होंने पेशेवर नाट्यमंच की स्थापना की और लोकनाट्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हबीब तनवीर नाटककार, कवि, पत्रकार, नाट्य निर्देशक और अभिनेता के रूप में विख्यात हुए। उनके प्रमुख नाटकों में 'आगरा बाजार', 'चरनदास चोर', 'देख रहे हैं नैन', 'हिरमा की अमर कहानी' शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने 'बसंत ऋतु का सपना', 'शाजापुर की शांति बाई', 'मिट्टी की गाड़ी' और 'मुद्राराक्षस' जैसे नाटकों का आधुनिक रूपांतरण भी किया। उन्हें कई पुरस्कारों, फेलोशिप और पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इस परिचय से विद्यार्थियों को नाटककार के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और लोकनाट्य के महत्व की समझ विकसित होती है।
- हबीब तनवीर का जन्म 1923 में रायपुर में हुआ।
- उन्होंने नागपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
- ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन का अध्ययन किया।
- लोकनाट्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया।
- प्रमुख नाटक: आगरा बाजार, चरनदास चोर, देख रहे हैं नैन, हिरमा की अमर कहानी।
- पद्मश्री सहित कई पुरस्कार प्राप्त।
- 📌 नाटककार: नाटक लिखने वाला व्यक्ति।
- 📌 लोकनाट्य: जन-जन तक पहुँचने वाला पारंपरिक नाट्य रूप।
- 📌 नाट्य-लेखन: नाटक लिखने की कला।
पाठ प्रवेश
व्याख्यापाठ प्रवेश
इस खंड में अंग्रेजों के भारत आगमन और उनके असली इरादों का परिचय दिया गया है। अंग्रेज प्रारंभ में व्यापारी के रूप में भारत आए थे, लेकिन उनका उद्देश्य केवल व्यापार तक सीमित नहीं था। धीरे-धीरे उनकी ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की रियासतों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। जैसे ही अंग्रेजों की वास्तविक मंशा उजागर हुई, भारतवासियों में उन्हें खदेड़ने के प्रयास शुरू हो गए। प्रस्तुत पाठ में एक ऐसे वीर योद्धा का वर्णन है, जिसका उद्देश्य अंग्रेजों को भारत से बाहर करना था। यह योद्धा इतना निडर था कि वह अंग्रेजों के काफिले में घुसकर उनके कर्नल को चुनौती देता था। यह खंड पाठ की पृष्ठभूमि तैयार करता है और पाठ के नायक की बहादुरी को उजागर करता है।
- अंग्रेज भारत में व्यापारी के रूप में आए।
- उनका उद्देश्य केवल व्यापार नहीं था।
- ईस्ट इंडिया कंपनी ने रियासतों पर कब्जा शुरू किया।
- भारतवासियों ने अंग्रेजों को खदेड़ने के प्रयास किए।
- पाठ में एक बहादुर योद्धा का वर्णन है।
- यह योद्धा अंग्रेजों को चुनौती देता था।
- 📌 ईस्ट इंडिया कंपनी: अंग्रेजों की व्यापारिक कंपनी जिसने भारत पर शासन किया।
- 📌 रियासत: स्वतंत्र या अर्ध-स्वतंत्र राज्य।
- 📌 खदेड़ना: बाहर निकालना।
कारतूस
व्याख्याकारतूस
यह अनुभाग नाटक 'कारतूस' के संवाद और घटनाक्रम का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। कहानी का समय 1799 का है, स्थान गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिंज के खेमे का अंदरूनी हिस्सा। पात्रों में कर्नल कालिंज, लेफ्टीनेंट, सिपाही और सवार शामिल हैं। संवादों के माध्
अभ्यास प्रश्न — Chapter 14
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.भीड़ ख्यूक्रिन पर क्यों हँसने लगती है
उत्तर:
घायल व अपराधी सिद्ध होने पर
Q2.जनरल साहब के सभी कुत्ते किस नस्ल के थे
उत्तर:
पोंटर
Q3.येल्दीरीन ने ख्यूक्रिन को दोषी ठहराते हुए क्या कहा
उत्तर:
सिगरेट से कुत्ते को जला दिया
Q4.बाजार में खामोशी क्यों थी
उत्तर:
ओचुमेलाव के डर से
Q5.काठगोदाम के पास भीड़ क्यों इकट्ठी हो गई थी
उत्तर:
ख्यूक्रिन के चिल्लाने पर
Q6.इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
अच्छी शासन व्यवस्था वही है जिसमें सबको समान अधिकार मिले
Q7.भीड़ ख्यूक्रिन पर क्यों हँसती है ?
उत्तर:
उसे न्याय के बदले फटकार मिलती है ।
Q8.‘उसकी आँसुओं से सनी आँखों में संकट और आतंक की गहरी छाप थी’ यहाँ किसकी बात हो रही है ?
उत्तर:
कुत्ते की