Chapter 14 — Study Notes
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बच्चों के प्रिय केशव शंकर पिल्लै
Explanationबच्चों के प्रिय केशव शंकर पिल्लै
यह अध्याय केशव शंकर पिल्लै के जीवन और उनके कार्यों का परिचय कराता है। वे एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने बच्चों के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी समर्पित कर दी। वे डाक-टिकट, सिक्के या गुड़ियों के संग्रह की तरह बच्चों के लिए गुड़ियों का विशाल संग्रह करते थे, जो पाँच हजार से भी अधिक गुड़ियों का था। यह संग्रह केवल उनके लिए नहीं, बल्कि भारतीय बच्चों के लिए था, जिसे उन्होंने दिल्ली के एक संग्रहालय में रखा। केशव शंकर पिल्लै ने बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं, पत्रिकाएँ निकालीं और बच्चों के हित में अनेक कार्य किए। उनका जन्म 1902 में त्रिवेंद्रम में हुआ था। उन्होंने त्रिवेंद्रम विश्वविद्यालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की और मुंबई में सिंधिया शिपिंग कंपनी के संस्थापक के निजी सचिव के रूप में नौकरी की। साथ ही उन्होंने कानून की पढ़ाई और चित्रकला का अभ्यास भी किया। वे भारत के पहले पूर्णकालिक कार्टूनिस्ट थे, जिन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स और बाद में इंडियन न्यूज क्रॉनिकल में काम किया। 1946 में उन्होंने अपनी पत्रिका 'शंकर्स वीकली' शुरू की, जो बच्चों के लिए पहली अनूठी कार्टून पत्रिका थी। इस पत्रिका के माध्यम से उन्होंने बाल-चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन शुरू किया, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुईं। उनके कार्यों ने बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्हें देश-विदेश में प्रसिद्धि दिलाई।
- केशव शंकर पिल्लै ने पाँच हजार से अधिक गुड़ियों का संग्रह किया।
- उनका संग्रह दिल्ली के एक संग्रहालय में रखा गया है।
- वे भारत के पहले पूर्णकालिक कार्टूनिस्ट थे।
- उन्होंने 'शंकर्स वीकली' नामक बच्चों की कार्टून पत्रिका निकाली।
- 1948 में उन्होंने पहली बाल-चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया।
- उनके कार्यों को देश-विदेश में बच्चों ने सराहा।
- 📌 संग्रह: वस्तुओं को जमा करना और सुरक्षित रखना।
- 📌 कार्टूनिस्ट: जो कार्टून बनाता है।
- 📌 पत्रिका: नियमित रूप से छपने वाली पुस्तक या पत्र।
बाल-चित्रकला प्रतियोगिता और बच्चों के लिए कार्य
Explanationबाल-चित्रकला प्रतियोगिता और बच्चों के लिए कार्य
केशव शंकर पिल्लै ने बच्चों के लिए बाल-चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया, जो 1948 में पहली बार 'शंकर्स वीकली' के माध्यम से शुरू हुई। यह विचार नया था और बच्चों के हित में था, इसलिए इसे देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी सराहा। 1949 में पहली अंतर्राष्ट्रीय बाल-चित्रकला प्रतियोगिता हुई, जिसमें विभिन्न देशों के बच्चे भाग लेने लगे। नेहरू जी ने 1950 के बाल-विशेषांक में लिखा कि विभिन्न देशों के बच्चे भाषा, वेशभूषा और जाति से भले अलग हों, पर वे खेल और लड़ाई में समान होते हैं और कभी रंग, भाषा या जाति के आधार पर लड़ाई नहीं करते। इस प्रतियोगिता में 1970 में 103 देशों के 1,90,000 से अधिक बच्चों ने भाग लिया था। इस प्रतियोगिता में नेहरू स्वर्ण पदक सहित कई पुरस्कार दिए जाते थे। नेहरू जी जब तक जीवित रहे, वे पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि रहे। शंकर पिल्लै ने बच्चों की प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी सहायता भी प्राप्त की। इसके अलावा, उन्होंने चिल्ड्रेन बुक ट्रस्ट, बाल-पुस्तकालय, गुड़िया-घर और हॉबी सेंटर जैसे संस्थान स्थापित किए।
- 1948 में पहली बाल-चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
- 1950 में नेहरू जी ने बाल-विशेषांक में बच्चों की एकता पर लिखा।
- 1970 में 103 देशों के 1,90,000 बच्चे प्रतियोगिता में भाग लिए।
- प्रतियोगिता में नेहरू स्वर्ण पदक सहित 482 पुरस्कार दिए गए।
- शंकर पिल्लै ने बच्चों के लिए कई संस्थान स्थापित किए।
- सरकारी सहायता से बच्चों के विकास में योगदान दिया।
- 📌 अंतर्राष्ट्रीय: विभिन्न देशों के बीच।
- 📌 विशेषांक: किसी विशेष विषय पर आधारित पत्रिका का अंक।
- 📌 स्वर्ण पदक: सर्वोच्च पुरस्कार।
गुड़ियों का संग्रह और गुड़िया-घर
Explanationगुड़ियों का संग्रह और गुड़िया-घर
1954 में शंकर पिल्लै को हंगरी की एक सुंदर गुड़िया उपहार में मिली, जिसने उन्हें प्रेरित किया कि वे विभिन्न देशों से गुड़ियाँ इकट्ठा करें। उन्होंने विदेशी और भारतीय गुड़ियों का विशाल संग्रह बनाया। पहले वे गुड़ियों को विभिन्न प्रदर्शनियों में दिखाते थे,
Practice Questions — Chapter 14
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.(क) गुड़ियों का संग्रह करने में केशव शंकर पिल्लै को कौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? (ख) वे बाल चित्रकला प्रतियोगिता क्यों करना चाहते थे? (ग) केशव शंकर पिल्लै ने बच्चों के लिए विश्वभर की चुनी हुई गुड़ियों का संग्रह क्यों किया? (घ) केशव शंकर पिल्लै हर वर्ष छुट्टियों में कैंप लगाकर सारे भारत के बच्चों को एक जगह मिलने का अवसर देकर क्या करना चाहते थे?
Answer:
उत्तर: (क) केशव शंकर पिल्लै को गुड़ियों का संग्रह करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा जैसे कि विभिन्न देशों से गुड़ियाँ इकट्ठा करना, उनकी देखभाल करना, सही स्थान पर संग्रह करना और बच्चों तक पहुँचाना। इसके अलावा, गुड़ियों की विविधता और उनकी सुरक्षा भी एक चुनौती थी। (ख) वे बाल चित्रकला प्रतियोगिता इसलिए करना चाहते थे ताकि बच्चों में कला के प्रति रुचि बढ़े, उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन मिले और वे अपनी रचनात्मकता को व्यक्त कर सकें। यह प्रतियोगिता बच्चों को एक मंच प्रदान करती थी जहाँ वे अपनी कला दिखा सकें। (ग) केशव शंकर पिल्लै ने विश्वभर की चुनी हुई गुड़ियों का संग्रह इसलिए किया ताकि बच्चे विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को जान सकें, उनकी रुचि बढ़े और वे विश्व के विभिन्न भागों की समझ विकसित कर सकें। यह संग्रह बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक और मनोरंजक था। (घ) वे हर वर्ष छुट्टियों में कैंप लगाकर सारे भारत के बच्चों को एक जगह मिलने का अवसर देकर बच्चों में भाईचारा, मेलजोल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना चाहते थे। इससे बच्चों का सामाजिक विकास होता और वे एक-दूसरे से सीखते।
Explanation:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार विस्तार से दिया गया है। कठिनाइयों में संग्रह की चुनौतियाँ, प्रतियोगिता का उद्देश्य, संग्रह का महत्व और कैंप के सामाजिक लाभ शामिल हैं।
Q2.(क) कार्टून बनाने के लिए उन्हें कौन-कौन से काम करने पड़े होंगे? (ख) बच्चों के लिए बाल चित्रकला प्रतियोगिता कराने के लिए क्या-क्या करना पड़ा होगा? (ग) केशव शंकर पिल्लै की तरह कुछ और भी लोग हुए हैं जिन्होंने तरह-तरह के काम करके काफी नाम कमाया। तुम्हारी पसंद के वो कौन-कौन लोग हो सकते हैं? तुम उनमें से कुछ के नाम लिखो और उन्होंने जो कुछ विशेष काम किए हैं उनके नाम के आगे उसका भी उल्लेख करो।
Answer:
उत्तर: (क) कार्टून बनाने के लिए उन्हें विचार करना, स्केच बनाना, रंग भरना, पात्रों का चयन करना, विषय वस्तु तय करना, और उसे आकर्षक बनाना पड़ता होगा। इसके अलावा, कार्टून को प्रकाशित करने के लिए संपादन और प्रिंटिंग का भी काम करना पड़ता होगा। (ख) बाल चित्रकला प्रतियोगिता कराने के लिए आयोजन स्थल तय करना, प्रतिभागियों को आमंत्रित करना, नियम बनाना, जजों का चयन करना, पुरस्कार व्यवस्था करना, और प्रतियोगिता का प्रचार-प्रसार करना पड़ता होगा। (ग) कुछ अन्य लोग जो तरह-तरह के काम करके नाम कमाते हैं, जैसे: - रवींद्रनाथ टैगोर (कवि, चित्रकार, संगीतकार) - सचिन तेंदुलकर (क्रिकेटर, खेल में नाम) - कल्पना चावला (अंतरिक्ष वैज्ञानिक) - अमिताभ बच्चन (अभिनेता) वे सभी अपने-अपने क्षेत्र में बहुमुखी प्रतिभा के कारण प्रसिद्ध हुए हैं।
Explanation:
प्रत्येक उपप्रश्न के उत्तर में संबंधित कार्यों और उदाहरणों का उल्लेख किया गया है।
Q3.तुमने इस पाठ में गुड़ियाघर के बारे में पढ़ा। पता करो कि ‘चिड़ियाघर’, ‘सिनेमाघर’ और ‘किताबघर’ कौन और क्यों बनवाता है? तुम इनमें से अपनी पसंद के किसी एक घर के बारे में बताओ जहाँ तुम्हें जाना बेहद पसंद हो?
Answer:
उत्तर: ‘चिड़ियाघर’ आमतौर पर सरकार या वन विभाग बनवाता है ताकि लोग जंगली जानवरों और पक्षियों को देख सकें और उनकी सुरक्षा हो सके। ‘सिनेमाघर’ निजी या सरकारी लोग बनवाते हैं ताकि लोग फिल्में देख सकें और मनोरंजन कर सकें। ‘किताबघर’ पुस्तकालय होता है, जो सरकार, शैक्षणिक संस्थान या निजी लोग बनवाते हैं ताकि लोग किताबें पढ़ सकें और ज्ञान प्राप्त कर सकें। मेरी पसंद ‘किताबघर’ है क्योंकि मुझे पढ़ना बहुत पसंद है और वहाँ जाकर मैं नई-नई किताबें पढ़ सकता हूँ।
Explanation:
प्रत्येक प्रकार के घर के निर्माणकर्ता और उद्देश्य का वर्णन किया गया है।
Q4.(क) तुम पता करो यदि उसका भी कोई संग्रह करता है तो क्यों? (ख) उसका संग्रह करने वालों को क्या परेशानियाँ होती होंगी? (इनके उत्तर के लिए तुम बड़ों की सहायता ले सकते हो।)
Answer:
उत्तर: (क) हाँ, कई लोग ऐसी चीज़ों का संग्रह करते हैं जिन्हें अन्य लोग बेकार समझते हैं, जैसे पुराने अखबार, प्लास्टिक की बोतलें, या पुराने खिलौने। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें उन चीज़ों में कुछ खास मूल्य या यादें मिलती हैं, या वे उन्हें पुनः उपयोग में लाना चाहते हैं। (ख) संग्रह करने वालों को जगह की कमी, संग्रह की वस्तुओं की देखभाल, सफाई, और कभी-कभी परिवार या समाज की समझ की कमी जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं। उन्हें संग्रह को व्यवस्थित रखने में भी कठिनाई होती है।
Explanation:
संग्रह के कारण और उससे जुड़ी समस्याओं का वर्णन किया गया है।
Q5.(क) यह कब, किसने, किसमें और क्यों लिखा? (ख) क्या लड़ाई भी खेल जैसी हो सकती है? अगर हो तो कैसे और उस खेल में तुम्हारे विचार से क्या-क्या हो सकता है।
Answer:
उत्तर: (क) यह वाक्य पाठ में कहीं लिखा गया है जहाँ बताया गया है कि अनेक देशों के बच्चों की यह फ़ौज अलग-अलग भाषा, वेशभूषा में होकर भी एक जैसी ही है। इसे किसी लेखक या पाठ के लेखक ने बच्चों के बीच भाईचारे और समानता को दर्शाने के लिए लिखा होगा। (ख) हाँ, लड़ाई भी खेल जैसी हो सकती है यदि वह प्रतिस्पर्धात्मक, नियमबद्ध और बिना किसी द्वेष के हो। जैसे खेल में दो टीमें होती हैं जो जीतने के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं परंतु वे दोस्त बने रहते हैं। इस खेल में सम्मान, अनुशासन, टीम भावना और खेल भावना हो सकती है।
Explanation:
प्रश्न के दोनों भागों में पाठ के भाव और सामाजिक संदेश को समझाया गया है।
Q6.केशव शंकर पिल्लै बच्चों के लिए सुबह से शाम तक काम में लगे रहते थे। तुम सुबह से शाम तक कौन-कौन से काम करना चाहोगे? नीचे उपयुक्त जगह में अपनी पसंद के काम को भी लिखो और सही (✓) का निशान लगाओ। तुम उसका कारण भी बताओ। क्रम सं. काम का नाम ✓ या × कारण (क) खेलना (ख) पढ़ना (ग) चित्रकारी करना (घ) ... (ड) ... (च) ...
Answer:
उत्तर: यह प्रश्न व्यक्तिगत पसंद पर आधारित है। उदाहरण के लिए: (क) खेलना - ✓ - क्योंकि इससे शरीर स्वस्थ रहता है और मन प्रसन्न रहता है। (ख) पढ़ना - ✓ - क्योंकि इससे ज्ञान बढ़ता है और सोचने की क्षमता बढ़ती है। (ग) चित्रकारी करना - ✓ - क्योंकि इससे रचनात्मकता बढ़ती है और मन को शांति मिलती है। (घ) संगीत सुनना - ✓ - क्योंकि इससे मन को आनंद मिलता है। (ड) दोस्तों से मिलना - ✓ - क्योंकि इससे सामाजिकता बढ़ती है। (च) घर के काम में मदद करना - ✓ - क्योंकि इससे जिम्मेदारी का भाव आता है। तुम अपनी पसंद के अनुसार सही (✓) या गलत (×) लगा सकते हो और कारण लिख सकते हो।
Explanation:
यह प्रश्न विद्यार्थियों की अपनी पसंद और कारण बताने पर आधारित है।
Q7.आकांक्षा क्या है और यह हमारे जीवन में क्यों महत्वपूर्ण होती है?
Answer:
आकांक्षा वह इच्छा या लक्ष्य होती है जो व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। यह हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें स्पष्ट उद्देश्य और दृढ़ संकल्प देती है, जिससे हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक छात्र की पढ़ाई में अच्छी सफलता पाने की आकांक्षा।
Explanation:
आकांक्षा का अर्थ है किसी लक्ष्य या इच्छा की प्राप्ति की चाह। यह हमारे जीवन में दिशा और प्रेरणा का स्रोत होती है। जब हमारे पास स्पष्ट आकांक्षा होती है, तो हम कठिनाइयों का सामना धैर्य और संकल्प के साथ कर पाते हैं। यह सफलता की कुंजी होती है। इसलिए, आकांक्षा जीवन में आवश्यक है।
Q8.निम्नलिखित में से कौन-सा आकांक्षा का प्रकार नहीं है?
Answer:
आर्थिक आकांक्षा
Explanation:
आकांक्षा के तीन मुख्य प्रकार होते हैं: व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय। आर्थिक आकांक्षा इस वर्गीकरण में शामिल नहीं है, हालांकि आर्थिक लक्ष्य व्यक्तिगत या सामाजिक आकांक्षा का हिस्सा हो सकते हैं। इसलिए, आर्थिक आकांक्षा मुख्य प्रकारों में से नहीं है।
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