Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
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कार्य का महत्व
व्याख्याकार्य का महत्व
कार्य हमारे जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वह क्रिया है जिसके द्वारा हम न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, बल्कि समाज में अपना योगदान भी देते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि जब हम कोई कार्य करें तो उसे पूजा की तरह करें और उस समय अपना पूरा जीवन उसी कार्य को समर्पित कर दें। इस विचार से हमें यह समझ में आता है कि कार्य केवल एक साधन नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य भी हो सकता है। कार्य के माध्यम से हम अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। कार्य के बिना जीवन की कल्पना असंभव है क्योंकि कार्य से ही हम अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान करते हैं। कार्य के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें शारीरिक और मानसिक कार्य शामिल हैं। कार्य के माध्यम से व्यक्ति न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होता है, बल्कि सामाजिक और मानसिक विकास भी करता है। इस अध्याय में हम कार्य के महत्व, प्रकार, आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियों, मूल्य सृजन, रोजगार, और व्यक्तिगत तथा सामाजिक विकास में कार्य की भूमिका को विस्तार से समझेंगे। **Table on page 3 (8×3)** | कहानी के पात्र | वे कौन-कौन से कार्य करते हैं? | | | --- | --- | --- | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | **Table on page 9 (10×3)** | क्र.सं. | गतिविधि/व्यवसाय | मूल्य सृजन संबंधी धनराशि के उदाहरण | | --- | --- | --- | | 1. | बेकर | | | 2. | दर्जी | | | 3. | किसान द्वारा अपने ट्रैक्टर की मरम्मत | | | 4. | चिकित्सक | | | 5. | परिवार के लिए भोजन बनाने वाले अभिभावक | | | 6. | वैज्ञानिक | | | 7. | बीमार दादा-दादी एवं नाना-नानी की देखभाल करने वाला व्यक्ति | | | 8. | | | | 9. | | |
- कार्य जीवन का अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- कार्य से व्यक्ति आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से विकसित होता है।
- स्वामी विवेकानंद के अनुसार कार्य को पूजा की तरह करना चाहिए।
- कार्य के बिना समाज और राष्ट्र का विकास संभव नहीं है।
- कार्य के विभिन्न प्रकार होते हैं जैसे शारीरिक और मानसिक कार्य।
- 📌 कार्य: वह क्रिया जिससे जीवन संचालित होता है।
- 📌 आर्थिक गतिविधियाँ: वे कार्य जिनमें मुद्रा या धन का लेन-देन होता है।
- 📌 गैर-आर्थिक गतिविधियाँ: वे कार्य जिनमें आर्थिक लाभ नहीं होता, परन्तु सेवा, स्नेह, कृतज्ञता होती है।
आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ
अवधारणाआर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ
कार्य को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है: आर्थिक गतिविधियाँ और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ। आर्थिक गतिविधियाँ वे होती हैं जिनमें मुद्रा या धन का लेन-देन होता है या जिन्हें आय अर्जित करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, किसान अपनी उपज बाजार में बेचता है, व्यापारी वस्तुएं बेचता है, वकील अपने अभियोजन के लिए शुल्क लेते हैं, ट्रक चालक सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है, और श्रमिक कारखाने में काम करता है। इन सभी गतिविधियों में वस्तु या सेवा का नकद मूल्य होता है। बाजार वह स्थान है जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन होता है। वहीं, गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें आय या संपत्ति अर्जित नहीं होती, बल्कि इन्हें सेवा, कृतज्ञता, स्नेह, और आदर के भाव से किया जाता है। जैसे अभिभावक परिवार के लिए भोजन बनाते हैं, बच्चे विद्यालय के कार्य में सहायता करते हैं, परिवार के सदस्य घर के नवीनीकरण में मदद करते हैं, या दादा-दादी की सेवा करते हैं। ये गतिविधियाँ समाज के कल्याण और व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत बनाती हैं। इस प्रकार, आर्थिक गतिविधियाँ मुख्य रूप से धन कमाने से जुड़ी होती हैं, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ सामाजिक और भावनात्मक मूल्यों को बढ़ावा देती हैं।
- आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें मुद्रा का लेन-देन होता है।
- गैर-आर्थिक गतिविधियाँ सेवा, स्नेह और कृतज्ञता से जुड़ी होती हैं।
- बाजार वह स्थान है जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन होता है।
- गैर-आर्थिक गतिविधियाँ समाज और परिवार के कल्याण में योगदान देती हैं।
- दोनों प्रकार की गतिविधियाँ समाज के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक हैं।
- 📌 बाजार: वह स्थान जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन होता है।
- 📌 शुल्क: किसी सेवा के लिए दिया गया भुगतान।
- 📌 वस्तु का नकद मूल्य: किसी वस्तु का मौद्रिक मूल्य।
वेतन, मजदूरी और वस्तु के रूप में भुगतान
अवधारणावेतन, मजदूरी और वस्तु के रूप में भुगतान
आर्थिक गतिविधियों में लोगों को उनके कार्य के अनुसार विभिन्न प्रकार से भुगतान किया जाता है। वेतन वह नियमित भुगतान है जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को प्रतिमाह दिया जाता है। उदाहरण के लिए, गीता मौसी को भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में वेतन मिलता है।
अभ्यास प्रश्न — Chapter 13
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.अवधारणा- पृथक्करण की एक से अधिक विधियों का उपयोग जल वाष्प से उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को निम्न में से क्या कहते हैं?
उत्तर:
संघनन
Q2.अवधारणा- क्या जल किसी पदार्थ की कितनी भी मात्रा को घोल सकता है? जिस विलयन में कोई पदार्थ और अधिक न घुल सके वह उस पदार्थ का निम्न में से क्या होता है?
उत्तर:
संतृप्त विलयन
Q3.अवधारणा- वाष्पन जल को उसके वाष्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को निम्न में से क्या कहते हैं?
उत्तर:
वाष्पन
Q4.अवधारणा- अवसादन, निस्तारण तथा निस्यंदन 'निस्यंदन' प्रक्रम का उपयोग निम्न में से किसके लिए किया जाता है?
उत्तर:
चाय से चाय की पत्तियाँ पृथक करने में
Q5.अवधारणा- अवसादन,निस्तारण तथा निस्यंदन मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रक्रम को क्या कहते हैं?
उत्तर:
अवसादन
Q6.अवधारणा- पृथक्करण की विधियाँ आटे में से चोकर तथा अन्य अशुद्धियों को पृथक करने की विधि क्या कहलाती है?
उत्तर:
चालन
Q7.अवधारणा- पृथक्करण की विधियाँ वायु के झोंकों द्वारा मिश्रण से भारी तथा हल्के अवयवों को पृथक करने में निम्न में से किस विधि का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
निष्पावन
Q8.अवधारणा-पृथक्करण की विधियाँ चावल अथवा दाल में से मिट्टी के कुछ मोटे कणों अथवा भूसे को पृथक करने के लिए निम्न में से किस विधि का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
हस्त चयन
Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage के सभी 14 अध्याय
Social Science · Class 6