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Chapter 13

🎓 Class 8📖 Durva📖 9 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~14 min
Chapter 12Chapter 13 of 19Chapter 14

Chapter 13Study Notes

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अन्याय के खिलाफ़

Explanation

अन्याय के खिलाफ़

यह पाठ 1922 के समय की घटना पर आधारित है जब भारत अंग्रेजों के शासन के अधीन था। उस समय अंग्रेज सरकार ने अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए देश के लोगों को डरा-धमकाकर रखा था। आंध्र प्रदेश के कोया आदिवासी, जो घने जंगलों में रहते थे, अंग्रेजों के अत्याचारों से परेशान थे। अंग्रेजों ने जंगलों और पहाड़ों में सड़क बनाने की योजना बनाई, जिसके लिए मजदूरों की जरूरत थी। तहसीलदार बेस्टीयन को यह काम सौंपा गया था। बेस्टीयन क्रूर और अक्खड़ था, उसने आदिवासियों को धमकाकर काम पर भेजा। आदिवासी अपमानित और दुखी थे। उस समय एक साधु श्रीराम राजू जंगलों में आया, जिसने आदिवासियों को अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ लड़ने की हिम्मत दी। उसने उन्हें बताया कि गांधी जी भी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे हैं और अन्याय सहने से इंकार करना चाहिए। आदिवासियों ने श्रीराम राजू के नेतृत्व में विद्रोह किया, जो दो वर्षों तक चला। वे अंग्रेजों की भारी सेना का सामना करते हुए भी हार नहीं माने। उन्होंने गुप्त संदेशों का जाल फैलाया और अंग्रेजों को परेशान किया। अंत में राजू को गिरफ्तार कर मार दिया गया, पर उनकी शहादत ने आदिवासियों के आंदोलन को अमर बना दिया। इस तरह कोया आदिवासियों ने अन्याय के खिलाफ लड़ाई की मिसाल कायम की।

  • 1922 में अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ कोया आदिवासियों का विद्रोह
  • तहसीलदार बेस्टीयन द्वारा आदिवासियों को जबरदस्ती मजदूरी के लिए मजबूर करना
  • श्रीराम राजू का आदिवासियों को अन्याय के खिलाफ लड़ने का प्रोत्साहन देना
  • दो वर्षों तक अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों का संघर्ष
  • गुप्त संदेशों के माध्यम से विद्रोह की योजना बनाना
  • राजू की शहादत और आदिवासियों के आंदोलन का प्रभाव
  • 📌 गुलाम: किसी के अधीन या पराधीन होना
  • 📌 तहसीलदार: स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी
  • 📌 विद्रोह: अन्याय के खिलाफ बगावत करना

कोया आदिवासियों का संघर्ष और श्रीराम राजू का नेतृत्व

Explanation

कोया आदिवासियों का संघर्ष और श्रीराम राजू का नेतृत्व

कोया आदिवासी अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ़ संगठित होकर लड़ने लगे। श्रीराम राजू ने उन्हें हिम्मत दी और बताया कि अन्य लोग भी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे हैं, जैसे गांधी जी। आदिवासियों ने भद्राचलम से परवथीपुरम तक विद्रोह किया। अंग्रेजों ने भारी सेना भेजी, लेकिन आदिवासियों ने छिपकर और गुप्त संदेशों के माध्यम से लड़ाई जारी रखी। वे भारतीय सैनिकों को नुकसान नहीं पहुँचाते थे, क्योंकि वे जानते थे कि अंग्रेजों की सेना में भी भारतीय थे। अंग्रेजों ने आदिवासियों को भूखा रखने के लिए रास्ते बंद कर दिए, लेकिन आदिवासियों ने हार नहीं मानी। अंत में राजू को गिरफ्तार कर मार दिया गया, पर उनकी शहादत ने आंदोलन को अमर बना दिया। इस संघर्ष ने अंग्रेजों को आदिवासियों के साथ मनमर्जी न करने की सीख दी।

  • श्रीराम राजू ने आदिवासियों को अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया
  • विद्रोह दो वर्षों तक चला और अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी
  • गुप्त संदेशों के माध्यम से अंग्रेजों की चालाकियों को नाकाम किया गया
  • भारतीय सैनिकों को नुकसान न पहुँचाने का आदेश दिया गया
  • अंग्रेजों ने आदिवासियों को भूखा रखने की रणनीति अपनाई
  • राजू की गिरफ्तारी और शहादत ने आंदोलन को मजबूत किया
  • 📌 गुप्तचर: गुप्त संदेश पहुँचाने वाला व्यक्ति
  • 📌 शहादत: अपने लक्ष्य के लिए जान देना
  • 📌 विद्रोह: अन्याय के खिलाफ बगावत करना

अंग्रेजों की प्रतिक्रिया और आंदोलन का अंत

Explanation

अंग्रेजों की प्रतिक्रिया और आंदोलन का अंत

अंग्रेज सरकार ने आदिवासियों के विद्रोह को दबाने के लिए कई उपाय किए। उन्होंने आदिवासियों के राशन के रास्ते बंद कर दिए जिससे वे भूखे रह गए। अंग्रेज सेना ने गाँवों में घुसकर लोगों को मार-पीट किया और फसलें जलाईं। आदिवासियों की हिम्मत कम होने लगी। अंत में

Practice QuestionsChapter 13

Includes NCERT exercise questions with answers

Q1.1. पाठ से (क) आंध्र के घने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के बीच अपना हक जमाने के लिए अंग्रेजों ने क्या किया? (ख) श्री राम राजू कौन था? उसने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण क्यों किया? (ग) अंग्रेजों से लड़ने के लिए कोया आदिवासी क्या-क्या करते थे? (घ) कोया आदिवासियों के विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम क्यों कहना चाहिए?

Answer:

उत्तर: (क) आंध्र के घने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के बीच अपना हक जमाने के लिए अंग्रेजों ने जंगलों में सड़क बनाने का काम शुरू किया और आदिवासियों के अधिकारों का हनन किया। वे उनके जंगलों पर कब्जा करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सख्ती और क्रूरता का सहारा लिया। (ख) श्री राम राजू कोया आदिवासी नेता थे। उन्होंने अपने लोगों के हक के लिए अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई। वह अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण इसलिए किया ताकि वे कचहरी में पेश होकर कानून के हिसाब से अपने हक की लड़ाई लड़ सकें। (ग) अंग्रेजों से लड़ने के लिए कोया आदिवासी जंगलों में छुपकर लड़ाई करते थे, पुलिस चौकियों और सेना पर हमला करते थे, उनके अस्त्र-शस्त्र लूटकर अपनी ताकत बढ़ाते थे। वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते थे। (घ) कोया आदिवासियों के विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम इसलिए कहना चाहिए क्योंकि उन्होंने अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ साहसपूर्वक लड़ाई लड़ी और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण मिसाल है।

Explanation:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार दिया गया है। आदिवासियों के संघर्ष और श्रीराम राजू के नेतृत्व की भूमिका को समझाते हुए बताया गया है कि यह विद्रोह स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा था।

MediumNCERT
Q2.2. गाँधीजी की बात “भारत के लोगों को अंग्रेज सरकार का सहयोग नहीं करना चाहिए और उनका काम बंद कर देना चाहिए। अगर कोई अंग्रेज अन्याय करेगा तो हम अन्याय सहने से इंकार करेंगे।” ऊपर श्रीराम राजू द्वारा आदिवासियों से गाँधी जी की कही हुई बात का उल्लेख हुआ है। गाँधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए बहुत सारी बातें कही थी। यह सब तुम्हें गाँधी जी पर लिखी गई किताबों, फ़िल्मों और अन्य जगहों पर मिल सकता है। तुम उनकी कही हुई बातों में जो बहुत महत्वपूर्ण समझो उसको अपने साथियों को बताओ।

Answer:

उत्तर: इस प्रश्न का उद्देश्य विद्यार्थियों को गाँधी जी के विचारों को समझना और उनके महत्वपूर्ण संदेशों को साझा करना है। विद्यार्थी गाँधी जी के सत्याग्रह, अहिंसा, और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के सिद्धांतों को समझकर अपने साथियों को बता सकते हैं। उदाहरण के लिए, वे कह सकते हैं कि अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ हमें शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना चाहिए और अंग्रेज सरकार का सहयोग बंद कर देना चाहिए।

Explanation:

यह प्रश्न विद्यार्थियों को गाँधी जी के विचारों को समझने और साझा करने के लिए प्रेरित करता है।

EasyNCERT
Q3.3. देशभक्तों के नाम तुमने इस पाठ में भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले दो व्यक्तियों के नामों को जाना। एक गाँधी जी और दूसरा श्रीराम राजू। पता करो कि भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वालों में तुम्हारे प्रदेश से कौन-कौन व्यक्ति थे। उनमें से किसी एक के बारे में कक्षा में चर्चा करो।

Answer:

उत्तर: यह प्रश्न शोध और चर्चा पर आधारित है। विद्यार्थी अपने प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करें और कक्षा में प्रस्तुत करें। उदाहरण के लिए, वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, रानी लक्ष्मीबाई आदि के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

Explanation:

यह प्रश्न विद्यार्थियों को अपने प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानने और चर्चा करने के लिए प्रेरित करता है।

MediumNCERT
Q4.4. क्या ठीक होगा? (i) “दो दिन में जंगल में सड़क बनाने का काम शुरू होगा। तुम सब लोगों को इस काम पर पहुँचना है। अगर नहीं पहुँचे तो ठीक नहीं होगा।” (ii) “काम करेंगे तो बदले में क्या मिलेगा।” ऊपर के कथनों में पहला कथन तहसीलदार बेस्टीयन का है जो आदिवासियों के गाँवों में जाकर चिल्ला-चिल्लाकर बोला था और दूसरा कथन आदिवासियों में से किसी का है जो तहसीलदार से पूछना चाहा था। अब तुम सोचकर बताओ कि— (क) तुम्हारे विचार से बेस्टियन का कथन ठीक होगा? (ख) आदिवासियों में से किसी के द्वारा कहा गया वह कथन कैसा है? तुम्हारे विचार से क्या ठीक होगा? (संकेत:–तुम अपनी पसंद से कथन को अपने ढंग से लिख सकते हो)

Answer:

उत्तर: (क) तहसीलदार बेस्टीयन का कथन ठीक नहीं है क्योंकि वह आदिवासियों की भावनाओं और उनकी सहमति के बिना आदेश दे रहा है। यह तरीका अन्यायपूर्ण और क्रूर है। (ख) आदिवासियों का कथन सही है क्योंकि वे अपने अधिकारों और मेहनत के बदले उचित लाभ चाहते हैं। आदिवासियों को काम करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें सम्मान और उचित लाभ देना चाहिए। सही तरीका यह होगा कि आदिवासियों की सहमति लेकर, उनकी समस्याओं को समझकर और सम्मान के साथ काम शुरू किया जाए।

Explanation:

यह प्रश्न आदिवासियों और तहसीलदार के दृष्टिकोण को समझने और सही व्यवहार पर विचार करने के लिए है।

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Q5.5. पता करो (i) सड़क बनाने में किन-किन सामानों की जरूरत होती है? पता करके लिखो। (ii) इन प्रदेशों में कौन-कौन से आदिवासी रहते हैं? पता करके लिखो? (क) झारखंड (ख) छत्तीसगढ़ (ग) उड़ीसा (घ) मिजोरम (ङ) अंडमान निकोबार द्वीप समूह

Answer:

उत्तर: (i) सड़क बनाने में आवश्यक सामानों में बजरी, पत्थर, रेत, सीमेंट, लोहे की छड़ें, मशीनरी (जैसे बुलडोजर, रोलर), पानी, और मजदूर शामिल होते हैं। (ii) आदिवासी समूह: (क) झारखंड - संथाल, मुंडा, हो, उरांव (ख) छत्तीसगढ़ - गोंड, बस्तर, मुरिया (ग) उड़ीसा - हो, संथाल, मुण्डा (घ) मिजोरम - मिजो, लुशाई (ङ) अंडमान निकोबार द्वीप समूह - ओंग, जारवा, सेंटिनेलिज़ (यह जानकारी विद्यार्थियों को अपने शोध और संदर्भ से प्राप्त करनी चाहिए।)

Explanation:

यह प्रश्न शोध पर आधारित है और विद्यार्थियों को विभिन्न प्रदेशों के आदिवासी समूहों और सड़क निर्माण सामग्री के बारे में जानकारी जुटाने के लिए प्रेरित करता है।

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Q6.6. तुम्हारे विचार से (क) राजू हाई स्कूल तक पढ़ाई करने के बाद जंगलों में रहने क्यों आया होगा? (ख) राजू के शहीद होने का आदिवासियों के आंदोलन पर क्या असर हुआ होगा?

Answer:

उत्तर: (क) राजू हाई स्कूल तक पढ़ाई करने के बाद जंगलों में इसलिए आया होगा क्योंकि वह अपने लोगों के हित के लिए काम करना चाहता था। वह अपने शिक्षित होने के बावजूद अपने आदिवासी समाज की सेवा करना चाहता था और उनके अधिकारों के लिए लड़ना चाहता था। (ख) राजू के शहीद होने से आदिवासियों के आंदोलन को बड़ा धक्का लगा होगा, लेकिन इससे उनकी लड़ाई और मजबूत हुई होगी। राजू की शहादत ने आदिवासियों को और अधिक जागरूक किया और उनके संघर्ष को प्रेरणा दी।

Explanation:

यह प्रश्न विद्यार्थियों से पाठ की समझ और विश्लेषण करने को कहता है।

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Q7.7. खोजबीन “लोगों की बंदूकों के कारतूस खत्म हो गए।” ऊपर का यह वाक्य इसी पाठ का है जिसमें आदिवासियों के द्वारा बंदूकों व कारतूसों के प्रयोग का भी प्रमाण मिलता है। इस पाठ की खोजबीन करो तो पाओगे कि आदिवासी “पुलिस चौकियों या सेना पर हमला कर देते थे और उनके अस्त्र-शस्त्र लूटकर भाग जाते थे।” अब तुम जरूर समझ गए होंगे कि आदिवासियों ने बंदूकों व कारतूसों का प्रयोग कैसे किया। ‘कारतूसों’ ने सन् 1857 में स्वतंत्रता की चिंगारी को फैलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। समूह बनाकर इसके बारे में खोजबीन करो। कक्षा के प्रत्येक समूह में से एक प्रतिनिधि सबको अपनी खोजबीन के बारे में बताएगा।

Answer:

उत्तर: यह प्रश्न समूह कार्य के लिए है। विद्यार्थी समूह बनाकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कारतूसों की भूमिका और आदिवासियों द्वारा बंदूकों के उपयोग के बारे में शोध करेंगे। वे समझेंगे कि कैसे कारतूसों ने विद्रोह को तेज किया और आदिवासियों ने हथियार लूटकर अपनी लड़ाई को मजबूत किया। प्रत्येक समूह अपनी खोजबीन कक्षा में प्रस्तुत करेगा।

Explanation:

यह प्रश्न विद्यार्थियों को इतिहास की गहराई में जाकर शोध करने और समूह में चर्चा करने के लिए प्रेरित करता है।

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Q8.8. मुहावरे नीचे लिखे वाक्यों में मुहावरों का प्रयोग किया गया है। इन्हीं मुहावरों का प्रयोग करते हुए तुम कुछ नए वाक्य बनाओ। (क) एक सिपाही ने उसका काम तमाम कर दिया। (ख) आदिवासियों की हिम्मत जवाब देने लगी। (ग) अंग्रेजों ने अपने दांतों तले उँगली दबा ली। (घ) किसी को कानो-कान खबर न हो। (ङ) अंग्रेज सरकार के छक्के छूट गए। (च) अंग्रेजों के होश उड़ गए। (छ) भारतीय सैनिकों का बालबाँका न होने पाए।

Answer:

उत्तर: (क) एक सिपाही ने उसका काम तमाम कर दिया। - नया वाक्य: परीक्षा में फेल होने के बाद उसका करियर का काम तमाम हो गया। (ख) आदिवासियों की हिम्मत जवाब देने लगी। - नया वाक्य: कठिनाइयों के सामने उसकी हिम्मत जवाब देने लगी। (ग) अंग्रेजों ने अपने दांतों तले उँगली दबा ली। - नया वाक्य: जब उसे सच्चाई पता चली तो उसने अपने दांतों तले उँगली दबा ली। (घ) किसी को कानो-कान खबर न हो। - नया वाक्य: यह राज किसी को कानो-कान खबर न हो। (ङ) अंग्रेज सरकार के छक्के छूट गए। - नया वाक्य: जब उसने परीक्षा में टॉप किया तो उसके माता-पिता के छक्के छूट गए। (च) अंग्रेजों के होश उड़ गए। - नया वाक्य: अचानक आई बारिश से किसानों के होश उड़ गए। (छ) भारतीय सैनिकों का बालबाँका न होने पाए। - नया वाक्य: दुश्मन के सामने भारतीय सैनिकों का बालबाँका न होने पाए।

Explanation:

विद्यार्थियों को मुहावरों का अर्थ समझकर नए वाक्य बनाने का अभ्यास कराया गया है।

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