Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
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महासागरीय जल संचलन
व्याख्यामहासागरीय जल संचलन
महासागरीय जल संचलन का अर्थ है महासागरों में जल का निरंतर गतिमान रहना। महासागरीय जल स्थिर नहीं रहता, बल्कि उसमें क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की गतियाँ होती हैं। क्षैतिज गति में महासागरीय धाराएँ और तरंगें आती हैं, जबकि ऊर्ध्वाधर गति ज्वार-भाटा से संबंधित होती है। महासागरीय धाराएँ जल के एक निश्चित दिशा में बहाव को दर्शाती हैं, जबकि तरंगें जल कणों की वृत्ताकार गति के कारण ऊर्जा का संचार करती हैं। ज्वार-भाटा सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण महासागरों के जल स्तर में नियमित उतार-चढ़ाव होता है। महासागरीय जल संचलन की भौतिक विशेषताएँ जैसे तापमान, खारापन, घनत्व तथा बाह्य बल जैसे सूर्य, चंद्रमा और वायु इसके प्रवाह को प्रभावित करते हैं।
- महासागरीय जल में क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की गतियाँ होती हैं।
- धाराएँ जल के बहाव को दर्शाती हैं, तरंगें ऊर्जा का संचार करती हैं।
- ज्वार-भाटा सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण होता है।
- महासागरीय जल की भौतिक विशेषताएँ और बाह्य बल इसके संचलन को प्रभावित करते हैं।
- 📌 महासागरीय जल संचलन: महासागरों में जल की निरंतर गतिशीलता।
- 📌 क्षैतिज गति: जल का सतह के समानांतर गति।
- 📌 ऊर्ध्वाधर गति: जल का ऊपर-नीचे की ओर गति।
तरंगें
व्याख्यातरंगें
तरंगें महासागरों की सतह पर उत्पन्न होने वाली ऊर्जा की लहरें हैं, जल नहीं। ये ऊर्जा वायु के प्रवाह से प्राप्त होती हैं। जब हवा महासागर की सतह पर बहती है, तो वह जल कणों को घर्षण के माध्यम से ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे जल कण वृत्ताकार गति करते हैं और तरंगें बनती हैं। तरंगों में जल कण स्थिर रहते हैं, केवल ऊर्जा आगे बढ़ती है। जैसे-जैसे तरंग तट के करीब आती है, उसकी गति कम हो जाती है और वह टूट जाती है, जिससे ऊर्जा तट तक पहुँचती है। तरंगों के शिखर (crest) और गर्त (trough) होते हैं, जिनके बीच की ऊँचाई को तरंग की ऊँचाई कहा जाता है। तरंग की ऊँचाई का आधा तरंग आयाम (amplitude) कहलाता है। तरंगदैर्ध्य (wavelength) दो लगातार शिखरों या गर्तों के बीच की दूरी होती है। तरंग काल (wave period) एक निश्चित बिंदु से दो लगातार शिखरों के गुजरने का समय होता है। तरंग आवृत्ति एक सेकंड में गुजरने वाली तरंगों की संख्या है। तरंगों की गति नॉट में मापी जाती है। तरंगों की उत्पत्ति वायु की तीव्रता, दिशा और अवधि पर निर्भर करती है।
- तरंगें जल नहीं, बल्कि ऊर्जा की लहरें हैं।
- तरंगों में जल कण वृत्ताकार गति करते हैं।
- तरंगों के शिखर और गर्त होते हैं, जिनसे उनकी ऊँचाई मापी जाती है।
- तरंगदैर्ध्य, तरंग काल, तरंग आवृत्ति और तरंग गति तरंगों के महत्वपूर्ण गुण हैं।
- तरंगों की उत्पत्ति वायु की गति और दिशा पर निर्भर करती है।
- 📌 तरंग शिखर (Wave crest): तरंग का उच्चतम बिंदु।
- 📌 तरंग गर्त (Wave trough): तरंग का निम्नतम बिंदु।
- 📌 तरंगदैर्ध्य (Wavelength): दो लगातार शिखरों के बीच की दूरी।
ज्वार-भाटा
व्याख्याज्वार-भाटा
ज्वार-भाटा महासागरों के जल स्तर में नियमित उतार-चढ़ाव है, जो मुख्यतः चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण होता है। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के जल को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिससे उस दिशा में जल का स्तर बढ़ता है, जिसे उच्च ज्वार कहते
अभ्यास प्रश्न — Chapter 13
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.निम्न अक्षाशों से बहने बाली गर्म जल धाराएँ किस प्रभाव के कारण उत्तरी गोलार्थ में अपने बाई तरफऔर दक्षिणी गोलार्ध में अपने दायीं तरफ मुड़ जाती है।
उत्तर:
कोरियोलिस प्रभावे
Q2.उच्च ज्वार व निम्न ज्वार के बीच का समय, जब जलस्तर गिरता है, क्या कहलाता है?
उत्तर:
भाटा
Q3.निम्नलिखित में से कौन सा प्राथमिक बल जो धाराओं को प्रभावित करता है?
उत्तर:
उपर्युक्त सभी
Q4.कोरियालिस बल के कारण उत्तरी गोलार्ध में जल की गति की दिशा के दाहिनी तरफ और दक्षिणी गोलारद्धमें वायी ओर प्रवाहित होता है तथा उनके चारों ओर बहाव को कहा जाता हैं-
उत्तर:
वलय
Q5.महासागरीय जल का कितना प्रतिशत भाग गहरी जलधारा के रूप में हैं?
उत्तर:
90 प्रतिशत
Q6.महासागर के ऊपरी जलधारा कितने मीटर की गहराई तक उपस्थित है?
उत्तर:
500 मीटर
Q7.एक ' निश्चित बिंवु से गुजरने वाले दो लगातार तरंग शिखरों या गर्तों के बीच का सपयान्तराल को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
तरंग काल
Q8.विश्व में सबसे ऊँचे ज्वारभाटा कहाँ आता है?
उत्तर:
फंडी की खाड़ी (कनाडा)
Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant के सभी 14 अध्याय
Geography · Class 11