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Chapter 12

🎓 Class 6📖 Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 14Chapter 13

Chapter 12अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में हमने लोकतंत्र और सुशासन की अवधारणा को समझा है, जो नागरिकों को सशक्त बनाकर उन्हें देश के प्रशासन में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करती है। लोकतंत्र का उद्देश्य है कि हर नागरिक को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी हो और वे अपने क्षेत्र के विकास में भाग लें। पिछली कक्षाओं में हमने ग्रामीण संदर्भ में स्थानीय शासन की मूल बातें जानीं, जैसे ग्राम पंचायतें और उनके कार्य। अब हम नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार की व्यवस्था को समझेंगे, जो अधिक जटिल और विविध होती है क्योंकि नगरों में जनसंख्या अधिक होती है और समस्याएँ भी अधिक होती हैं। नगरीय स्थानीय सरकार नागरिकों के निकट होती है और उनकी समस्याओं का समाधान करती है। यह भाग नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित कराता है तथा स्थानीय प्रशासन की भूमिका को स्पष्ट करता है।

  • लोकतंत्र का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना है।
  • स्थानीय सरकार नागरिकों के निकट होती है।
  • ग्रामीण और नगरीय स्थानीय शासन में अंतर होता है।
  • नगरीय क्षेत्र अधिक जटिल और विविध होते हैं।
  • नगरीय स्थानीय निकाय नागरिकों की समस्याओं का समाधान करते हैं।
  • 📌 लोकतंत्र: शासन की वह व्यवस्था जिसमें जनता के प्रतिनिधि चुने जाते हैं।
  • 📌 सुशासन: ऐसा शासन जिसमें प्रशासन पारदर्शी और जवाबदेह हो।
  • 📌 नगरीय स्थानीय निकाय: नगरों में स्थानीय प्रशासन के लिए गठित संस्थाएँ।

नगरीय स्थानीय निकाय

अवधारणा

नगरीय स्थानीय निकाय

नगरीय स्थानीय निकाय वे संस्थाएँ हैं जो नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन का कार्य करती हैं। ये निकाय अपने क्षेत्रों के प्रबंधन और समस्याओं के समाधान में स्वायत्त होती हैं। नगरों और कस्बों को छोटे-छोटे वार्डों में बांटा जाता है, जिनमें वार्ड समितियाँ स्थानीय समस्याओं जैसे जल रिसाव, नाली जाम, सड़क टूटना आदि की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देती हैं। नगरीय स्थानीय निकायों का उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। ये निकाय आधारभूत ढाँचे की देखभाल, कूड़ा प्रबंधन, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, स्थानीय कर वसूलना आदि कार्य करते हैं। नागरिकों की सहभागिता इन निकायों की सफलता के लिए आवश्यक है। उदाहरण के लिए, कूड़े के पृथक्करण का पालन करने से सफाई व्यवस्था बेहतर होती है।

  • नगरीय स्थानीय निकाय स्थानीय प्रशासन की स्वायत्त इकाइयाँ हैं।
  • नगरों को वार्डों में विभाजित किया जाता है।
  • वार्ड समितियाँ स्थानीय समस्याओं की जानकारी देती हैं।
  • नगरीय निकाय आधारभूत ढाँचे की देखभाल करते हैं।
  • नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
  • 📌 वार्ड: नगर का एक छोटा प्रशासनिक क्षेत्र।
  • 📌 वार्ड समिति: वार्ड के स्थानीय मुद्दों की देखरेख करने वाली समिति।
  • 📌 स्वायत्तता: अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता।

नगरीय स्थानीय निकायों के प्रकार

व्याख्या

नगरीय स्थानीय निकायों के प्रकार

भारत में नगरीय स्थानीय निकायों को उनकी जनसंख्या के अनुसार तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। सबसे बड़े नगरों में जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक होती है, वहाँ नगर निगम होते हैं जिन्हें महानगर निगम भी कहा जाता है। 1 से 10 लाख की जनसंख्या वाले नगरों

अभ्यास प्रश्नChapter 12

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. विद्यालय आते हुए, आप और आपके मित्र पाते हैं कि जल के एक पाइप में रिसाव हो रहा है। इस रिसाव से बहुत सारा जल व्यर्थ हो रहा है। इस स्थिति में आप और आपके मित्र क्या करेंगे?

उत्तर:

यदि जल के पाइप में रिसाव हो रहा है, तो हमें तुरंत स्थानीय निकाय या नगर निगम को इसकी सूचना देनी चाहिए ताकि वे जल रिसाव को रोकने के लिए उचित मरम्मत कर सकें। इसके अलावा, हम अपने विद्यालय में जल संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए जागरूकता अभियान भी चला सकते हैं। हम पाइप के पास पानी का उपयोग कम करने और रिसाव को रोकने के लिए सावधानी बरतने का प्रयास करेंगे।

व्याख्या:

जल की बर्बादी को रोकने के लिए रिसाव की सूचना देना आवश्यक है। स्थानीय निकाय के पास इस प्रकार की समस्याओं को ठीक करने के संसाधन होते हैं। साथ ही, जागरूकता से जल संरक्षण की भावना बढ़ती है।

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Q2.2. आप अपने निकट रहने वाले नगरीय स्थानीय निकाय के किसी सदस्य को अपनी कक्षा में आमंत्रित कीजिए। उनके साथ उनकी भूमिका और उत्तरदायित्वों पर विचार-विमर्श कीजिए। उनसे पूछने के लिए प्रश्नों की एक सूची तैयार कीजिए ताकि यह परिचर्चा उपयोगी हो।

उत्तर:

इस प्रश्न का उत्तर व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित होगा। आप अपने निकट के नगर निगम या नगरपालिका के सदस्य को कक्षा में आमंत्रित कर सकते हैं। उनसे उनके कार्य, जैसे कि नगर की सफाई, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएँ, और नागरिकों की शिकायतों का निवारण आदि पर चर्चा करें। प्रश्नों की सूची में शामिल हो सकते हैं: - आपकी मुख्य जिम्मेदारियाँ क्या हैं? - आप नागरिकों की समस्याओं को कैसे सुनते और हल करते हैं? - नगर निगम की आय के स्रोत क्या हैं? - आप कैसे सुनिश्चित करते हैं कि सेवाएँ सभी तक पहुँचें? - नागरिकों को क्या भूमिका निभानी चाहिए? इस प्रकार की परिचर्चा से स्थानीय सरकार की कार्यप्रणाली समझ में आती है।

व्याख्या:

स्थानीय निकाय के सदस्य से संवाद करने से उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है। प्रश्नों की सूची से परिचर्चा व्यवस्थित और उपयोगी बनती है।

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Q3.3. अपने परिवार एवं पड़ोस के वयस्क लोगों के साथ चर्चा कीजिए और नगरीय स्थानीय निकायों से उनकी अपेक्षाओं की एक सूची बनाइए।

उत्तर:

इस प्रश्न का उत्तर व्यक्तिगत अनुभव और चर्चा पर आधारित होगा। आमतौर पर वयस्क लोग नगरीय स्थानीय निकायों से अपेक्षा करते हैं कि वे साफ-सफाई, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएँ, कूड़ा प्रबंधन, बिजली आपूर्ति, और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करें। इसके अलावा, वे शिकायतों का त्वरित निवारण, पारदर्शिता, और नागरिकों की भागीदारी की भी अपेक्षा करते हैं।

व्याख्या:

परिवार और पड़ोस के लोगों से चर्चा करने पर नगरीय निकायों से जुड़ी उनकी आवश्यकताएँ और अपेक्षाएँ समझ में आती हैं, जो स्थानीय सरकार की कार्यप्रणाली सुधारने में सहायक होती हैं।

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Q4.4. एक अच्छे नगरीय स्थानीय निकाय की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर:

एक अच्छे नगरीय स्थानीय निकाय की विशेषताएँ निम्नलिखित हो सकती हैं: - नागरिकों का प्रतिनिधित्व और भागीदारी - पारदर्शिता और जवाबदेही - समय पर सेवाओं का वितरण - साफ-सफाई और स्वच्छता का ध्यान - जल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता - शिकायतों का त्वरित निवारण - संसाधनों का उचित प्रबंधन - विकास योजनाओं का क्रियान्वयन - सभी वर्गों के लिए समान सेवा - पर्यावरण संरक्षण की पहल

व्याख्या:

अच्छे स्थानीय निकाय की ये विशेषताएँ सुनिश्चित करती हैं कि नगर में नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर हो और शासन प्रभावी ढंग से कार्य करे।

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Q5.5. ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था और नगरीय स्थानीय निकायों के बीच क्या समानताएँ एवं क्या विभिन्नताएँ हैं?

उत्तर:

समानताएँ: - दोनों ही विकेन्द्रीकृत शासन के उदाहरण हैं। - दोनों में स्थानीय नागरिकों का प्रतिनिधित्व होता है। - दोनों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास कार्य करना और नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना है। - दोनों में निर्वाचित सदस्य होते हैं जो जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। विभिन्नताएँ: - पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों के लिए होती है, जबकि नगरीय स्थानीय निकाय शहरों और नगरों के लिए। - पंचायती राज में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद होती है, जबकि नगरीय में नगर पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम होते हैं। - नगरीय निकायों की संरचना और कार्य अधिक जटिल होते हैं क्योंकि शहरों में जनसंख्या अधिक और समस्याएँ भिन्न होती हैं। - नगरीय निकायों में कुछ सेवाएँ भुगतान आधारित भी हो सकती हैं, जबकि ग्रामीण पंचायती राज में ऐसा कम होता है।

व्याख्या:

यह तुलना स्थानीय शासन के दोनों रूपों को समझने में मदद करती है, जिससे उनके कार्य, संरचना और क्षेत्रीय भेद स्पष्ट होते हैं।

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Q6.नगरीय स्थानीय निकाय क्या हैं और इनके मुख्य कार्य क्या हैं?

उत्तर:

नगरीय स्थानीय निकाय वे संस्थाएँ हैं जो नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन का कार्य करती हैं। इनके मुख्य कार्यों में आधारभूत ढाँचे की देखभाल, कूड़ा प्रबंधन, जल आपूर्ति, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, स्थानीय कर वसूलना आदि शामिल हैं। उदाहरण के लिए, वार्ड समितियाँ जल रिसाव और नाली जाम जैसी समस्याओं की सूचना संबंधित अधिकारियों को देती हैं।

व्याख्या:

नगरीय स्थानीय निकाय नागरिकों के निकट होती हैं और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई कार्य करती हैं। ये स्थानीय समस्याओं का समाधान करती हैं और नगर के विकास में योगदान देती हैं। इनके कार्यों में सड़क निर्माण, सफाई, जल आपूर्ति, कूड़ा निपटान, कर वसूलना, और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन शामिल होता है।

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Q7.चित्र 12.2 में दिखाए गए स्थानीय शासन के पिरामिड में नगरीय और ग्रामीण स्थानीय शासन के बीच मुख्य अंतर क्या है? (चित्र में पिरामिड के आधार पर समझाइए)
A.नगरीय स्थानीय शासन अधिक जटिल और विविध होता है जबकि ग्रामीण स्थानीय शासन सरल होता है।
B.ग्रामीण स्थानीय शासन में नागरिकों की भागीदारी नहीं होती जबकि नगरीय में होती है।
C.नगरीय स्थानीय शासन केवल राष्ट्रीय सरकार के अधीन होता है।
D.ग्रामीण स्थानीय शासन में केवल नगर निगम होते हैं।

उत्तर:

नगरीय स्थानीय शासन अधिक जटिल और विविध होता है जबकि ग्रामीण स्थानीय शासन सरल होता है।

व्याख्या:

चित्र 12.2 में दिखाए गए पिरामिड से पता चलता है कि स्थानीय शासन के दो प्रकार हैं: ग्रामीण और नगरीय। ग्रामीण शासन में ग्राम पंचायतें होती हैं जो सरल और कम जटिल होती हैं, जबकि नगरीय शासन में नगर निगम, नगरपालिका आदि होते हैं जो अधिक जटिल और विविध होते हैं क्योंकि नगरों में जनसंख्या और समस्याएँ अधिक होती हैं।

Medium
Q8.निम्नलिखित में से कौन सा नगरीय स्थानीय निकाय का उदाहरण नहीं है?
A.नगर निगम
B.नगरपालिका
C.ग्राम पंचायत
D.नगर पंचायत

उत्तर:

ग्राम पंचायत

व्याख्या:

ग्राम पंचायत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय शासन का रूप है, जबकि नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायत नगरीय स्थानीय निकाय हैं जो शहरों और कस्बों में स्थानीय प्रशासन करते हैं। इसलिए ग्राम पंचायत नगरीय स्थानीय निकाय का उदाहरण नहीं है।

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