जल (महासागर)
जल (महासागर) — अध्ययन नोट्स
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महासागरीय जल
व्याख्यामहासागरीय जल
जल पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। पृथ्वी को 'नीला ग्रह' कहा जाता है क्योंकि इसका लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है। जल ही जीवन का आधार है और पृथ्वी के जीवों के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। जल हमारे सौरमंडल में दुर्लभ है, और पृथ्वी पर इसकी प्रचुरता जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है। जल एक चक्रीय संसाधन है, जो निरंतर महासागर, वायुमंडल, भूमि और जीवों के बीच परिसंचरण करता रहता है। इसे जलीय चक्र कहा जाता है। यह चक्र जल के विभिन्न रूपों - गैस, तरल और ठोस - में होता है। पृथ्वी पर जल का वितरण असमान है; कुछ क्षेत्रों में जल प्रचुर मात्रा में है, जबकि अन्य क्षेत्रों में जल संकट है। जल की गुणवत्ता और उपलब्धता का संरक्षण आवश्यक है। **Table on page 3 (6×2)** | घटक | प्रक्रियाएँ | | --- | --- | | महासागरों में संग्रहित जल | वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, ऊर्ध्वपातन | | वायुमंडल में जल | संघनन, वर्षण | | हिम एवं बर्फ में पानी का संग्रहण | हिम पिघलने पर नदी-नालों के रूप में बहना | | धरातलीय जल बहाव | जलधारा के रूप में, ताजा जल संग्रहण व जल रिसाव | | भौम जल संग्रहण | भौम जल का विसर्जन, झरने | **Table on page 7 (4×1)** | उच्चतम लवणता वाले क्षेत्र | | --- | | (i) मृत सागर में (238‰) | | (ii) टर्की की बॉन झील (330‰) | | (iii) ग्रेट साल्ट झील (220‰) |
- पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल से ढका है।
- जल जीवन के लिए अनिवार्य तत्व है।
- जल का वितरण पृथ्वी पर असमान है।
- जल एक चक्रीय संसाधन है जो पुनः प्रयोग योग्य है।
- जल का परिसंचरण महासागर, वायुमंडल, भूमि और जीवों के बीच होता है।
- जल संकट विश्व के कई भागों में बढ़ रहा है।
- 📌 जल चक्र: जल के पृथ्वी पर निरंतर परिसंचरण की प्रक्रिया।
- 📌 नीला ग्रह: पृथ्वी का जल से अधिक भाग होने के कारण दिया गया नाम।
- 📌 जलीय संसाधन: जल जो पृथ्वी पर उपलब्ध है और उपयोगी है।
महासागरीय अधस्तल का उच्चावच
व्याख्यामहासागरीय अधस्तल का उच्चावच
महासागर पृथ्वी की बाहरी परत में विस्तृत रूप से फैले हुए हैं। महासागरीय अधस्तल वह भूमि है जो महासागरों के जल के नीचे स्थित होती है। यह भूमि महाद्वीपों की तुलना में अधिक जटिल और विविध आकृतियों वाली होती है। महासागरीय अधस्तल में विश्व की सबसे बड़ी पर्वत शृंखलाएँ, गहरे गर्त और विशाल मैदान पाए जाते हैं। ये उच्चावच विवर्तनिक, ज्वालामुखीय और निक्षेपण क्रियाओं से बने होते हैं। महासागरीय अधस्तल की भू-आकृति का अध्ययन पृथ्वी के भूगोल और भौतिक प्रक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण है।
- महासागरीय अधस्तल महासागरों के जल के नीचे स्थित भूमि है।
- यह भूमि महाद्वीपों की तुलना में अधिक जटिल और विविध है।
- महासागरीय अधस्तल में पर्वत शृंखलाएँ, गर्त और मैदान होते हैं।
- यह भू-आकृति विवर्तनिक, ज्वालामुखीय और निक्षेपण क्रियाओं से बनी है।
- महासागरों के पांच प्रमुख भाग हैं: प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, दक्षिणी और आर्कटिक।
- 📌 महासागरीय अधस्तल: महासागरों के जल के नीचे स्थित भूमि।
- 📌 उच्चावच: भूमि की ऊँची या विशेष आकृतियाँ।
- 📌 विवर्तनिक क्रिया: पृथ्वी की आंतरिक प्रक्रियाओं से बनने वाली आकृतियाँ।
महासागरीय अधस्तल का विभाजन
व्याख्यामहासागरीय अधस्तल का विभाजन
महासागरीय अधस्तल को चार प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है: महाद्वीपीय शेल्फ़, महाद्वीपीय ढाल, गहरे समुद्री मैदान और महासागरीय गर्त। महाद्वीपीय शेल्फ़ महाद्वीप का विस्तृत सीमांत होता है, जो उथले समुद्रों से घिरा होता है। इसकी औसत चौड़ाई लगभग 80 कि
अभ्यास प्रश्न — जल (महासागर)
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. बहुवैकल्पिक प्रश्न : (i) उस तत्व की पहचान करें जो जलीय चक्र का भाग नहीं है। (क) वाष्पीकरण (ख) वर्षण (ग) जलयोजन (घ) संघनन (ii) महाद्वीपीय ढाल की औसत गहराई निम्नलिखित के बीच होती है। (क) 2-20 मीटर (ख) 20-200 मीटर (ग) 200-2,000 मीटर (घ) 2,000-20,000 मीटर (iii) निम्नलिखित में से कौन सी लघु-उच्चावच आकृति महासागरों में नहीं पाई जाती है? (क) समुद्री टीला (ख) महासागरीय गभीर (ग) प्रवाल द्वीप (घ) निमग्न द्वीप (iv) निम्न में से कौन सा सबसे छोटा महासागर है? (क) हिंद महासागर (ख) अटलांटिक महासागर (ग) आर्कटिक महासागर (घ) प्रशांत महासागर (v) लवणता को प्रति समुद्री जल में घुले हुए नमक (ग्राम) की मात्रा से व्यक्त किया जाता है- (क) 10 ग्राम (ख) 100 ग्राम (ग) 1,000 ग्राम (घ) 10,000 ग्राम
उत्तर:
(i) जलयोजन (Hydration) जलीय चक्र का भाग नहीं है क्योंकि यह जल चक्र की प्रक्रिया नहीं है। वाष्पीकरण, वर्षण और संघनन जल चक्र के मुख्य तत्व हैं। (ii) महाद्वीपीय ढाल की औसत गहराई 200-2,000 मीटर के बीच होती है। यह समुद्र के किनारे महाद्वीप के नीचे स्थित होता है। (iii) महासागरों में निमग्न द्वीप (Submerged islands) नहीं पाए जाते हैं क्योंकि वे पानी के नीचे डूबे होते हैं, जबकि समुद्री टीला, प्रवाल द्वीप और महासागरीय गभीर पाए जाते हैं। (iv) आर्कटिक महासागर सबसे छोटा महासागर है। (v) लवणता समुद्री जल में घुले हुए नमक की मात्रा ग्राम प्रति लीटर में व्यक्त की जाती है, जो लगभग 35 ग्राम प्रति लीटर होती है, इसलिए सही विकल्प 1,000 ग्राम प्रति 1000 ग्राम (1 लीटर) है।
व्याख्या:
प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण: (i) जलयोजन जल चक्र की प्रक्रिया नहीं है, अन्य तीन वाष्पीकरण, वर्षण और संघनन जल चक्र के मुख्य चरण हैं। (ii) महाद्वीपीय ढाल की औसत गहराई 200-2,000 मीटर होती है, जो समुद्र के किनारे महाद्वीप के नीचे होती है। (iii) निमग्न द्वीप महासागरों में नहीं पाए जाते क्योंकि वे पानी के नीचे होते हैं। (iv) आर्कटिक महासागर क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे छोटा महासागर है। (v) समुद्री जल की लवणता लगभग 35 ग्राम प्रति लीटर होती है, इसलिए 1,000 ग्राम प्रति 1000 ग्राम विकल्प सही है।
Q2.2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए : (i) हम पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहते हैं? (ii) महाद्वीपीय सीमांत क्या होता है? (iii) विभिन्न महासागरों के सबसे गहरे गर्तों की सूची बनाइये। (iv) तापप्रवणता क्या है? [Page 10] महासागरीय जल (v) समुद्र में नीचे जाने पर आप ताप की किन परतों का सामना करेंगे? गहराई के साथ तापमान में भिन्नता क्यों आती है? (vi) समुद्री जल की लवणता क्या है?
उत्तर:
(i) पृथ्वी का 70% भाग जल से ढका है, इसलिए इसे नीला ग्रह कहा जाता है क्योंकि महासागर और समुद्र नीले रंग के दिखाई देते हैं। (ii) महाद्वीपीय सीमांत वह क्षेत्र है जो महाद्वीप के किनारे समुद्र के नीचे फैला होता है, इसकी गहराई कम होती है और यह महाद्वीप से समुद्र के गहरे भाग की ओर जाता है। (iii) विभिन्न महासागरों के सबसे गहरे गर्त: - प्रशांत महासागर: मरियाना गर्त - अटलांटिक महासागर: प्यूर्टो रिको गर्त - हिंद महासागर: सोन्डा गर्त - आर्कटिक महासागर: मोलोर्फ गर्त (iv) तापप्रवणता वह गुण है जिसके कारण जल का तापमान गहराई के अनुसार बदलता है। (v) समुद्र में नीचे जाने पर आप तीन तापीय परतों का सामना करेंगे: सतही परत, संक्रमण परत (थर्मोक्लाइन), और गहरी परत। तापमान गहराई के साथ घटता है क्योंकि सूर्य की किरणें सतह तक ही पहुंचती हैं। (vi) समुद्री जल की लवणता लगभग 35 ग्राम प्रति लीटर होती है, जो समुद्री जल में घुले हुए नमक की मात्रा को दर्शाती है।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर: (i) पृथ्वी का जल से अधिक आवरण इसे नीला ग्रह बनाता है। (ii) महाद्वीपीय सीमांत समुद्र के किनारे का कम गहरा क्षेत्र है। (iii) महासागरों के गहरे गर्तों की सूची ज्ञात है। (iv) तापप्रवणता जल के तापमान में गहराई के अनुसार परिवर्तन है। (v) ताप की तीन परतें होती हैं, तापमान सूर्य की किरणों की पहुँच तक घटता है। (vi) लवणता समुद्री जल में नमक की मात्रा है।
Q3.3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए : (i) जलीय चक्र के विभिन्न तत्व किस प्रकार अंतर-संबंधित हैं? (ii) महासागरों के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का परीक्षण कीजिए।
उत्तर:
(i) जलीय चक्र के तत्व जैसे वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण, जलयोजन और संचलन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। वाष्पीकरण के द्वारा जल वाष्प बनता है, जो संघनन के द्वारा बादलों में परिवर्तित होता है। वर्षण के माध्यम से जल पृथ्वी की सतह पर वापस आता है, जो नदियों, झीलों और महासागरों में जमा होता है। जलयोजन और संचलन जल के पृथ्वी पर पुनः वितरण में मदद करते हैं। इस प्रकार ये तत्व मिलकर जल चक्र को निरंतर बनाए रखते हैं। (ii) महासागरों के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारक हैं: - सूर्य की किरणों की तीव्रता और कोण - समुद्र की गहराई - समुद्री धाराएँ - जल की लवणता - मौसम और मौसमी परिवर्तन - भौगोलिक स्थिति जैसे अक्षांश ये सभी कारक महासागरों के तापमान को विभिन्न स्थानों और गहराईयों पर प्रभावित करते हैं।
व्याख्या:
प्रत्येक उत्तर में विस्तार से समझाया गया है कि कैसे जलीय चक्र के तत्व एक-दूसरे से जुड़े हैं और महासागरों के तापमान वितरण पर विभिन्न प्राकृतिक कारकों का प्रभाव पड़ता है।
Q4.परियोजना कार्य (i) विश्व की एटलस की सहायता से महासागरीय नितल के उच्चावचों को विश्व के मानचित्र पर दर्शाइए। (ii) एटलस की सहायता से हिंद महासागर में मध्य महासागरीय कटकों के क्षेत्रों को पहचानिए।
उत्तर:
(i) छात्र विश्व के मानचित्र पर महासागरीय नितल के प्रमुख उच्चावचों जैसे मध्य महासागरीय पर्वतमाला, महासागरीय टीले आदि को एटलस की सहायता से चिन्हित करेंगे। यह अभ्यास उन्हें महासागरीय भू-आकृतियों को समझने में मदद करेगा। (ii) हिंद महासागर में मध्य महासागरीय कटकों के क्षेत्रों को एटलस की सहायता से पहचानना होगा, जैसे मध्य हिंद महासागरीय पर्वतमाला। यह कार्य छात्रों को महासागरों की संरचना और भू-आकृतियों की जानकारी देगा।
व्याख्या:
परियोजना कार्य में छात्रों को एटलस का प्रयोग कर महासागरीय भू-आकृतियों को मानचित्र पर पहचानने और दर्शाने का अभ्यास कराया जाता है, जिससे उनकी भौगोलिक ज्ञान में वृद्धि होती है।
Q5.जल चक्र क्या है? जलीय चक्र के मुख्य घटकों और प्रक्रियाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जलीय चक्र जल के विभिन्न रूपों में महासागर, वायुमंडल, धरातल और जीवों के बीच निरंतर परिसंचरण है। इसमें वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण, हिम पिघलना, जल बहाव और भौम जल विसर्जन जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं। उदाहरण के लिए, महासागरों से वाष्पीकरण होता है और वर्षा के रूप में जल धरातल पर आता है।
व्याख्या:
जलीय चक्र जल का चक्रीय संसाधन है जो महासागर से वायुमंडल, धरातल और जीवों के बीच निरंतर चलता रहता है। इसमें वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण, हिम पिघलना, जल बहाव व भौम जल विसर्जन जैसे मुख्य घटक होते हैं। यह चक्र जीवन के लिए आवश्यक जल की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
Q6.चित्र 12.1 में जलीय चक्र का वर्णन किया गया है जिसमें महासागर, वायुमंडल, हिम एवं बर्फ, धरातलीय जल बहाव और भौम जल संग्रहण के बीच जल के परिसंचरण को दिखाया गया है। इस चित्र में महासागरों में संग्रहित जल के लिए कौन-कौन सी प्रक्रियाएँ उल्लेखित हैं?
उत्तर:
वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, ऊर्ध्वपातन
व्याख्या:
चित्र 12.1 में महासागरों में संग्रहित जल के लिए प्रमुख प्रक्रियाएँ वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन और ऊर्ध्वपातन हैं, जो जल को वायुमंडल में भेजती हैं। संघनन और वर्षण वायुमंडल में जल के लिए हैं, जबकि हिम पिघलना हिम एवं बर्फ के लिए है।
Q7.महासागरीय अधस्तल को कितने प्रमुख भागों में बांटा जाता है और वे कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
महासागरीय अधस्तल को चार प्रमुख भागों में बांटा जाता है: (i) महाद्वीपीय शेल्फ़, (ii) महाद्वीपीय ढाल, (iii) गहरे समुद्री मैदान, और (iv) महासागरीय गर्त। उदाहरण के लिए, महाद्वीपीय शेल्फ़ महाद्वीप का विस्तृत सीमांत होता है।
व्याख्या:
महासागरीय अधस्तल की संरचना में चार मुख्य भाग होते हैं। महाद्वीपीय शेल्फ़ महाद्वीप के किनारे का उथला भाग है। महाद्वीपीय ढाल शेल्फ़ के बाद तीव्र ढाल वाला क्षेत्र है। गहरे समुद्री मैदान सपाट क्षेत्र हैं और महासागरीय गर्त सबसे गहरे संकीर्ण बेसिन होते हैं।
Q8.महाद्वीपीय शेल्फ़ की औसत चौड़ाई लगभग कितनी होती है?
उत्तर:
80 किलोमीटर
व्याख्या:
महाद्वीपीय शेल्फ़ की औसत चौड़ाई लगभग 80 किलोमीटर होती है, हालांकि यह क्षेत्रीय रूप से भिन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए, साइबेरियन शेल्फ़ की चौड़ाई 1,500 किलोमीटर तक होती है।
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