Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
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लीलाधर मंडलोई
व्याख्यालीलाधर मंडलोई
लीलाधर मंडलोई का जन्म 1954 की जन्माष्टमी के दिन छिंदवाड़ा जिले के एक छोटे से गाँव गुड़ी में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा भोपाल और रायपुर में हुई। बाद में उन्होंने प्रसारण की उच्च शिक्षा के लिए 1987 में कॉमनवेल्थ रिलेशंस ट्रस्ट, लंदन से आमंत्रण प्राप्त किया। वर्तमान में वे प्रसार भारती दूरदर्शन के महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। मंडलोई मूलतः कवि हैं और उनकी कविताओं में छत्तीसगढ़ अंचल की बोली की मिठास और जनजीवन का सजीव चित्रण मिलता है। उन्होंने अंदमान निकोबार द्वीपसमूह की जनजातियों पर भी गद्य में लिखा है, जो समाजशास्त्रीय अध्ययन के रूप में महत्वपूर्ण है। उनकी प्रमुख कृतियों में 'घर-घर घूमा', 'रात-बिरात', 'मगर एक आवाज', 'देखा-अनदेखा' और 'काला पानी' शामिल हैं। उनकी रचनाएँ लोककथा, लोकगीत, यात्रा-वृत्तांत, डायरी, मीडिया, रिपोर्टाज और आलोचना लेखन की ओर प्रवृत्त करती हैं।
- लीलाधर मंडलोई का जन्म 1954 में छिंदवाड़ा जिले के गुड़ी गाँव में हुआ।
- शिक्षा-दीक्षा भोपाल और रायपुर में हुई।
- 1987 में लंदन के कॉमनवेल्थ रिलेशंस ट्रस्ट से प्रसारण की उच्च शिक्षा प्राप्त की।
- प्रसार भारती दूरदर्शन के महानिदेशक के पद पर कार्यरत।
- मूलतः कवि, जिनकी कविताओं में छत्तीसगढ़ की बोली और जनजीवन का चित्रण है।
- अंदमान निकोबार द्वीपसमूह की जनजातियों पर गद्य लेखन भी किया।
- 📌 कवि: वह व्यक्ति जो कविता लिखता है।
- 📌 लोककथा: जन-समाज में प्रचलित कथा।
- 📌 समाजशास्त्रीय अध्ययन: समाज के व्यवहार और संरचना का वैज्ञानिक अध्ययन।
पाठ प्रवेश
व्याख्यापाठ प्रवेश
यह खंड पाठ के विषय में परिचय कराता है। सभ्यता जितनी पुरानी होती है, उससे जुड़ी कहानियाँ भी उतनी ही प्राचीन होती हैं। ये कहानियाँ हमेशा वास्तविक घटनाओं के रूप में नहीं होतीं, पर इनमें छिपा संदेश या शिक्षा महत्वपूर्ण होती है। अंदमान निकोबार द्वीपसमूह की लोककथाओं में से एक 'तताँरा-वामीरो कथा' को लीलाधर मंडलोई ने पुनः लिखा है। यह कथा प्रेम, बलिदान और सामाजिक विद्वेष के विषय में है। इस कथा में एक युगल के बलिदान के माध्यम से समाज में प्रेम की शक्ति और घृणा की हानिकारकता को दर्शाया गया है। यह कथा समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है और आज भी द्वीपवासियों द्वारा गर्व और श्रद्धा के साथ याद की जाती है।
- पुरानी सभ्यताओं से जुड़ी कहानियाँ अक्सर संदेशात्मक होती हैं।
- अंदमान निकोबार द्वीपसमूह की लोककथाओं में से 'तताँरा-वामीरो कथा' प्रमुख है।
- यह कथा प्रेम और सामाजिक विद्वेष के बीच संघर्ष को दर्शाती है।
- कथा में बलिदान के माध्यम से समाज में बदलाव की बात कही गई है।
- समाज प्रेम करने वालों को याद रखता है और उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देता।
- 📌 विद्वेष: घृणा या द्वेष।
- 📌 बलिदान: अपने हित के लिए कुछ त्याग देना।
- 📌 युगल: दो व्यक्ति, विशेषकर प्रेमी जोड़े।
तताँरा-वामीरो कथा
सारांशतताँरा-वामीरो कथा
यह कथा अदमान द्वीपसमूह के लिटिल अंदमान और निकोबार द्वीपों के प्राचीन समय की है। लिटिल अंदमान और कार-निकोबार पहले एक द्वीप थे, जो बाद में विभक्त हो गए। तताँरा एक सुंदर, शक्तिशाली और साहसी युवक था, जो अपने गाँव और द्वीपवासियों की सेवा में तत्पर रहता था
अभ्यास प्रश्न — Chapter 10
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.कहानी के लेखक प्रेमचंद का असली नाम क्या था ?
उत्तर:
धनपत राय
Q2.बड़े भाई साहब छोटे भाई से पहला सवाल क्या पूछते थे ?
उत्तर:
कहाँ थे ?
Q3.कथा नायक का मन किस काम में नहीं लगता था ?
उत्तर:
पढ़ने में
Q4.स्वाधीन में कौन सा उपसर्ग है ?
उत्तर:
स्व
Q5.बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे ?
उत्तर:
कागज़ पर तस्वीरें बनाते थे
Q6.’महज इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास’- यह कथन किसने किससे कहा ?
उत्तर:
बड़े भाई ने छोटे भाई से
Q7.‘उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया’ – यह वाक्य किस क्रिया का उदाहरण है ?
उत्तर:
सकर्मक क्रिया का
Q8.छोटे भाई को क्या उड़ाने का नया शौक पैदा हो गया ?
उत्तर:
कनकौए