Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
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वायुमंडल में जल
व्याख्यावायुमंडल में जल
वायुमंडल में जल का रूप मुख्यतः जलवाष्प के रूप में होता है, जो हवा में गैस के रूप में मौजूद रहता है। जब वायु में जलवाष्प की मात्रा अधिक हो जाती है और तापमान घटकर ओसांक (ड्यू पॉइंट) तक पहुँच जाता है, तब जलवाष्प संघनित होकर जल की बूंदों या बर्फ के कणों के रूप में परिवर्तित हो जाता है। यह प्रक्रिया संघनन कहलाती है। संघनन के लिए आवश्यक है कि हवा का तापमान ओसांक तक गिर जाए या हवा में नमी की मात्रा इतनी बढ़ जाए कि वह संतृप्त हो जाए। संघनन के बाद वायुमंडल में जलवाष्प विभिन्न रूपों में प्रकट होता है जैसे ओस, तुषार, कोहरा, कुहासा और बादल। ओस तब बनता है जब आर्द्र हवा ठंडी सतहों (जैसे घास, पत्थर) पर संघनित होकर जल की बूंदों के रूप में जमा होती है। इसके लिए साफ आकाश, शांत हवा, उच्च आर्द्रता और ठंडी रातें आवश्यक होती हैं। ओसांक का तापमान जमाव बिंदु से ऊपर होता है। तुषार तब बनता है जब संघनन का तापमान जमाव बिंदु (0°से.) से नीचे होता है, जिससे जल की बजाय बर्फ के छोटे-छोटे क्रिस्टल बनते हैं। तुषार की अवस्थाएँ ओस की तरह ही होती हैं, बस तापमान जमाव बिंदु के नीचे होता है। कोहरा और कुहासा तब बनते हैं जब जलवाष्प हवा में संघनित होकर छोटे-छोटे जल की बूंदों या बर्फ के कणों के रूप में सतह के निकट जमा हो जाते हैं। कोहरा सतह के बहुत नजदीक होता है और दूष्यता (दृश्यता) को 1 कि.मी. से भी कम कर देता है, जबकि कुहासा थोड़ा ऊपर होता है और दृश्यता 1-2 कि.मी. तक होती है। धूम कोहरा तब बनता है जब कोहरा और धुआँ मिलकर बनता है, जो औद्योगिक क्षेत्रों में आम है। बादल जल की छोटी बूंदों या बर्फ के कणों का समूह होते हैं जो वायुमंडल की ऊँचाई पर संघनन के कारण बनते हैं। बादलों को उनकी ऊँचाई, आकार, घनत्व और पारदर्शिता के आधार पर चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: पक्षाभ मेघ, कपासी मेघ, स्तरी मेघ और वर्षा मेघ। ये बादल पृथ्वी की सतह से ऊपर विभिन्न ऊँचाइयों पर बनते हैं और विभिन्न मौसमीय परिस्थितियों का संकेत देते हैं।
- वायुमंडल में जल मुख्यतः जलवाष्प के रूप में होता है।
- संघनन तब होता है जब हवा का तापमान ओसांक तक गिरता है या हवा संतृप्त हो जाती है।
- ओस, तुषार, कोहरा, कुहासा और बादल संघनन के विभिन्न रूप हैं।
- ओस तब बनता है जब संघनन जमाव बिंदु से ऊपर होता है, जबकि तुषार तब बनता है जब संघनन जमाव बिंदु से नीचे होता है।
- कोहरा सतह के निकट होता है और दृश्यता को कम कर देता है, कुहासा थोड़ा ऊपर होता है।
- बादल जल की बूंदों या बर्फ के कणों का समूह होते हैं जो ऊँचाई पर बनते हैं।
- 📌 संघनन: जलवाष्प का ठोस या द्रव रूप में परिवर्तित होना।
- 📌 ओसांक: वह तापमान जिस पर हवा संतृप्त होकर संघनन शुरू करती है।
- 📌 ओस: संघनित जल की बूंदें जो ठंडी सतहों पर जमा होती हैं।
बादलों का वर्गीकरण
व्याख्याबादलों का वर्गीकरण
बादल वायुमंडल में जलवाष्प के संघनन से बनने वाली जल की छोटी बूंदों या बर्फ के कणों की संहति होते हैं। बादलों का वर्गीकरण उनकी ऊँचाई, आकार, विस्तार, घनत्व और पारदर्शिता के आधार पर किया जाता है। मुख्य चार प्रकार के बादल हैं: 1. पक्षाभ मेघ: ये बादल 8,000 से 12,000 मीटर की ऊँचाई पर बनते हैं। ये पतले, बिखरे हुए और पंख जैसे दिखते हैं। ये सफेद रंग के होते हैं और आकाश में पंखों के समान दिखाई देते हैं। 2. कपासी मेघ: ये बादल 4,000 से 7,000 मीटर की ऊँचाई पर बनते हैं। ये रूई के समान दिखते हैं, छितरे हुए और चपटे आधार वाले होते हैं। ये बादल गरज और बिजली के साथ मूसलाधार वर्षा का कारण बन सकते हैं। 3. स्तरी मेघ: ये बादल आकाश में परतदार रूप में फैले होते हैं। ये सामान्यतः ऊष्मा के ह्रास या विभिन्न तापमानों वाली हवा के मिश्रण से बनते हैं। ये बादल आकाश के बड़े हिस्से को ढक लेते हैं और हल्की वर्षा या कुहासा उत्पन्न कर सकते हैं। 4. वर्षा मेघ: ये काले या गहरे स्लेटी रंग के होते हैं और पृथ्वी की सतह के काफी नजदीक बनते हैं। ये अत्यंत अपारदर्शी होते हैं और भारी वर्षा, गरज, बिजली के साथ मूसलाधार बारिश करते हैं। कभी-कभी ये बादल इतनी कम ऊँचाई पर होते हैं कि सतह को छूते हुए प्रतीत होते हैं। इन चार मूल प्रकारों के बादल मिलकर ऊँचे, मध्य ऊँचाई और कम ऊँचाई के बादलों के समूह बनाते हैं। जैसे कि पक्षाभ, पक्षाभ स्तरी, पक्षाभ कपासी ऊँचे बादल हैं; स्तरी मध्य, कपासी मध्य मध्य ऊँचाई के बादल हैं; और स्तरी कपासी, स्तरी वर्षा मेघ, कपासी वर्षा मेघ कम ऊँचाई के बादल हैं।
- बादलों का वर्गीकरण उनकी ऊँचाई, आकार और पारदर्शिता पर आधारित है।
- पक्षाभ मेघ सबसे ऊँचे और पतले बादल होते हैं।
- कपासी मेघ रूई जैसे दिखते हैं और मूसलाधार वर्षा ला सकते हैं।
- स्तरी मेघ आकाश पर परतदार रूप में फैले होते हैं।
- वर्षा मेघ भारी वर्षा और तूफान लाते हैं।
- बादल ऊँचाई के अनुसार ऊँचे, मध्य और कम ऊँचाई के समूहों में आते हैं।
- 📌 पक्षाभ मेघ: ऊँचाई पर बनने वाले पतले, सफेद बादल।
- 📌 कपासी मेघ: मध्य ऊँचाई पर बनने वाले रूई जैसे बादल।
- 📌 स्तरी मेघ: परतदार बादल जो आकाश को ढक लेते हैं।
वर्षण
व्याख्यावर्षण
वर्षण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वायुमंडल में संघनित जलवाष्प जल की बूंदों या बर्फ के कणों के रूप में पृथ्वी की सतह पर गिरता है। वर्षण द्रव (जल) या ठोस (हिम) रूप में हो सकता है। जब संघनित जल की बूंदें या बर्फ के कण गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में पृथ्वी
अभ्यास प्रश्न — Chapter 10
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.वायुमंडल के प्रमुख संघटक कौन-से हैं?
उत्तर:
उपर्युक्त सभी
Q2.वायुमंडल की सबसे निचली परत को क्या कहते हैं?
उत्तर:
क्षोभमंडल
Q3.महय मंडल की ऊपरी परत को क्या कहते हैं?
उत्तर:
महय सीमा
Q4.किस वायुमंडल की परत में विधुत आवेशित कण पाये जाते हैं?
उत्तर:
आयनमंडल
Q5.वायुमंडल का सबसे ऊपरी संस्तर को क्या कहते हैं?
उत्तर:
बाह्ममंडल
Q6.ओजोन पृथ्वी की सतह से कितनी ऊँचाई के बीच पाया जाता है?
उत्तर:
0 से 50 किलोमीटर
Q7.कार्बन डाईऑक्साइड और जलवाष्प पृथ्वी की सतह से कितनी ऊँचाई तक पाए जाते हैं?
उत्तर:
90 कि.मी.
Q8.वायु पृथ्वी के द्रव्यमान का अभिन्न भाग है, तथा इसके कुल द्रव्यमान का 99 प्रतिशत भाग पृथ्वी की सतहसे कितनी ऊँचाई तक स्थित हैं?
उत्तर:
32 कि.मी.
Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant के सभी 14 अध्याय
Geography · Class 11