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Chapter 1

🎓 Class 12📖 Vyavasai Adhyan-II📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
अध्याय 1 / 3Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

व्यावसायिक वित्त

अवधारणा

व्यावसायिक वित्त

व्यावसायिक वित्त का अर्थ है व्यावसायिक क्रियाओं के संचालन हेतु धन की आवश्यकता। किसी भी व्यवसाय के स्थापन, संचालन, आधुनिकीकरण, विस्तार या विविधीकरण के लिए धन की आवश्यकता होती है। व्यवसाय के जीवन काल में हर कदम पर वित्त की उपलब्धता आवश्यक होती है, क्योंकि बिना उचित वित्त के व्यवसाय का संचालन और विकास संभव नहीं होता। वित्त की उपलब्धता व्यवसाय के उत्तर जीवन और विकास के लिए निर्णायक भूमिका निभाती है। व्यावसायिक वित्त में धन की व्यवस्था, उसके स्रोत, लागत, और उपयोग की योजना शामिल होती है।

  • व्यावसायिक वित्त का अर्थ है व्यवसाय के संचालन के लिए धन की आवश्यकता।
  • वित्त की आवश्यकता व्यवसाय के स्थापन, संचालन, विस्तार, आधुनिकीकरण आदि के लिए होती है।
  • व्यवसाय के जीवन काल में वित्त की उपलब्धता आवश्यक होती है।
  • वित्त की उपलब्धता व्यवसाय के विकास और उत्तर जीवन के लिए निर्णायक होती है।
  • 📌 व्यावसायिक वित्त: व्यवसाय के संचालन के लिए आवश्यक धन।
  • 📌 स्थापन: व्यवसाय की स्थापना की प्रक्रिया।
  • 📌 आधुनिकीकरण: व्यवसाय को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया।

वित्तीय प्रबंध

अवधारणा

वित्तीय प्रबंध

वित्तीय प्रबंध का अर्थ है वित्त की इष्टतम उपलब्धता और उसके उचित उपयोग का प्रबंधन। व्यवसाय के लिए वित्त की व्यवस्था करने में लागत आती है, इसलिए वित्तीय प्रबंध में विभिन्न स्रोतों की पहचान, उनकी लागत, जोखिम और लाभ का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। वित्तीय प्रबंध का उद्देश्य वित्त की लागत को कम करना, आवश्यकतानुसार पर्याप्त कोष उपलब्ध कराना और अनावश्यक वित्त से बचना होता है। यह व्यवसाय की स्थायी और चालू संपत्तियों के आकार एवं उनके सम्मिश्रण को प्रभावित करता है। स्थायी संपत्तियों में निवेश के निर्णय से उनके आकार में वृद्धि होती है, जबकि चालू संपत्तियों जैसे रोकड़, स्टॉक और प्राप्तियों की मात्रा भी वित्तीय प्रबंध से प्रभावित होती है।

  • वित्तीय प्रबंध का उद्देश्य वित्त की इष्टतम उपलब्धता और उपयोग सुनिश्चित करना है।
  • वित्त की व्यवस्था में लागत और जोखिम का ध्यान रखा जाता है।
  • स्थायी और चालू संपत्तियों के आकार और सम्मिश्रण को वित्तीय प्रबंध प्रभावित करता है।
  • वित्तीय प्रबंध का लक्ष्य कोष प्राप्ति लागत को कम करना और आवश्यकतानुसार कोष उपलब्ध कराना है।
  • 📌 वित्तीय प्रबंध: वित्त की उपलब्धता और उपयोग का प्रबंधन।
  • 📌 स्थायी संपत्ति: दीर्घकालीन संपत्ति जो एक वर्ष से अधिक समय तक उपयोग में रहती है।
  • 📌 चालू संपत्ति: ऐसी संपत्ति जो एक वर्ष के अंदर रोकड़ में परिवर्तित हो जाती है।

वित्तीय प्रबंध के उद्देश्य

अवधारणा

वित्तीय प्रबंध के उद्देश्य

वित्तीय प्रबंध का मुख्य उद्देश्य अंशधारियों की धन संपदा में अधिकतम वृद्धि करना होता है। इसका अर्थ है कि कंपनी के समता अंशों का बाजार मूल्य बढ़ाना। इसके लिए वित्तीय प्रबंध में दीर्घकालीन संपत्तियों में निवेश, कार्यशील पूंजी की व्यवस्था, वित्तीयन आदि क

अभ्यास प्रश्नChapter 1

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. पूंजी संरचना का क्या अर्थ है?

उत्तर:

पूंजी संरचना का अर्थ है किसी कंपनी की पूंजी का वह मिश्रण जिसमें दीर्घकालिक ऋण, इक्विटी शेयर और अन्य दीर्घकालिक वित्तीय साधन शामिल होते हैं। यह कंपनी के वित्तीय ढांचे को दर्शाता है।

व्याख्या:

पूंजी संरचना कंपनी के वित्तीय संसाधनों के स्रोतों का संयोजन होती है, जो कंपनी के संचालन और विकास के लिए आवश्यक पूंजी प्रदान करती है।

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Q2.2. वित्तीय नियोजन के दो उद्देश्यों पर चर्चा करें।

उत्तर:

वित्तीय नियोजन के दो मुख्य उद्देश्य हैं: 1. पूंजी की आवश्यकता का पूर्वानुमान लगाना ताकि व्यवसाय के संचालन में बाधा न आए। 2. धन के उचित आवंटन से लागत कम करना और लाभ अधिकतम करना।

व्याख्या:

वित्तीय नियोजन से कंपनी को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं का सही अनुमान होता है और वह समय पर पूंजी जुटा पाती है, जिससे व्यवसाय सुचारू रूप से चलता है।

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Q3.3. वित्तीय प्रबंधन की अवधारणा का नाम दें, जो निश्चित वित्तीय शुल्कों की उपस्थिति के कारण इक्विटी शेयरधारकों को वापसी में वृद्धि करता है।

उत्तर:

यह अवधारणा 'वित्तीय लीवरेज' कहलाती है। वित्तीय लीवरेज का अर्थ है कंपनी द्वारा ऋण या अन्य निश्चित वित्तीय शुल्कों का उपयोग करना जिससे इक्विटी शेयरधारकों को लाभांश में वृद्धि हो सकती है।

व्याख्या:

जब कंपनी ऋण लेती है, तो वह निश्चित ब्याज का भुगतान करती है। यदि कंपनी का लाभ इससे अधिक होता है, तो शेष लाभ इक्विटी शेयरधारकों को अधिक मिलता है, जिससे उनकी वापसी बढ़ जाती है।

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Q4.4. अमृत एक ‘परिवहन सेवा’ चलाता है और उद्योगों को यह सेवा प्रदान करके अच्छा रिटर्न कमा रहा है। कारण देते हुए बताएँ कि फ्रम की कार्यशील पूंजी आवश्यकता ‘कम’ होगी या ‘अधिक’?

उत्तर:

परिवहन सेवा जैसे व्यवसाय में कार्यशील पूंजी की आवश्यकता कम होती है क्योंकि इसमें भंडारण की आवश्यकता कम होती है और नकदी प्रवाह जल्दी होता है। इसलिए अमृत की कार्यशील पूंजी आवश्यकता कम होगी।

व्याख्या:

परिवहन सेवा में माल का भंडारण कम होता है और नकदी जल्दी प्राप्त होती है, जिससे कार्यशील पूंजी की आवश्यकता कम रहती है।

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Q5.5. रामनाथ टीवी के संयोजन और बिक्री के कारोबार में हैं। हाल ही में उन्होंने तीन महीने के क्रेडिट पर घटकों को खरीदने और नकदी में पूरा उत्पाद बेचने की एक नई नीति अपनाई है। क्या यह कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को प्रभावित करेगी, अपने उत्तर के समर्थन में कारण दें।

उत्तर:

हाँ, यह नीति कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को प्रभावित करेगी। तीन महीने के क्रेडिट पर घटक खरीदने से भुगतान में विलंब होगा, जिससे नकदी प्रवाह में सुधार होगा, जबकि नकदी में उत्पाद बेचने से नकदी जल्दी प्राप्त होगी। इससे कार्यशील पूंजी की आवश्यकता कम हो सकती है।

व्याख्या:

क्रेडिट पर खरीदारी से भुगतान में देरी होती है, जिससे नकदी बचती है, और नकदी में बिक्री से नकदी जल्दी आती है, जिससे कार्यशील पूंजी की जरूरत कम होती है।

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Q6.1. ‘वित्तीय जोखिम’ क्या है? यह क्यों उठता है?

उत्तर:

वित्तीय जोखिम वह जोखिम है जो कंपनी को ऋण या अन्य वित्तीय साधनों के कारण होता है, जब कंपनी अपनी निश्चित वित्तीय देनदारियों को पूरा नहीं कर पाती। यह जोखिम इसलिए उठता है क्योंकि कंपनी ने ऋण लिया होता है और ब्याज तथा मूलधन का भुगतान करना होता है।

व्याख्या:

जब कंपनी ऋण लेती है, तो उसे निश्चित ब्याज और मूलधन चुकाना होता है। यदि कंपनी के लाभ कम होते हैं, तो भुगतान में कठिनाई होती है, जिससे वित्तीय जोखिम उत्पन्न होता है।

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Q7.2. ‘चालू परिसंपत्ति’ परिभाषित करें। ऐसी परिसंपत्तियों के चार उदाहरण दें।

उत्तर:

चालू परिसंपत्ति वे परिसंपत्तियाँ हैं जो एक वर्ष के भीतर नकदी में परिवर्तित हो जाती हैं या उपयोग की जाती हैं। उदाहरण: नकद, बैंक बैलेंस, देय खातों से प्राप्तियां, स्टॉक।

व्याख्या:

चालू परिसंपत्तियाँ व्यवसाय की दैनिक गतिविधियों के लिए आवश्यक होती हैं और जल्दी नकदी में बदली जा सकती हैं।

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Q8.3. वित्तीय प्रबंधन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं? संक्षेप में विवरण दें।

उत्तर:

वित्तीय प्रबंधन के मुख्य उद्देश्य हैं: 1. लाभ अधिकतम करना 2. पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करना 3. जोखिम कम करना 4. धन का सही आवंटन करना 5. व्यवसाय की स्थिरता बनाए रखना।

व्याख्या:

वित्तीय प्रबंधन का लक्ष्य कंपनी के वित्तीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर लाभ और स्थिरता सुनिश्चित करना होता है।

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